
मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा · तीन खंड
उनतालीस लंकाएँ
Untalis Lankayen · Thirty Nine Lankas
सुंदरकांड की उनतालीस कथाएँ। उनतालीस लंकाएँ। और एक परिवार, जो उनमें उतरता है।
प्रकाशन की तैयारी में
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झलकियाँ · घर · देहरादून, 2026
दो मम्मा
रसोई में अन्नू का गीत, और अदा के कमरे से आती वही आवाज़।
दो मम्माघर · देहरादून, 2026
पाँचवीं ग़लतीआँगन · बनारस, 1987
जहाँ ज़मीन ख़त्म होती हैकिनारा · धनुषकोडि
पाँच चेहरेकिनारा · अदा का दूत
समुद्र के ऊपरसमुद्र · एक सुनहरी सड़क
मैनाकसमुद्र · पर्वत
लंकालंका · सोने का नगर
सोने वाला बाज़ारलंका · बाज़ार
राजाराजा · सन इकतीस से
जलती छतेंआग · छत दर छत
परतेंपरतें · और लंकाएँ
घर
देहरादून, 2026
देहरादून। सर्दी की एक सुबह।
रसोई में अन्नू गा रही हैं, जैसे रोज़।
पर आज रसोई में दो आवाज़ें हैं। दूसरी अदा के कमरे से आ रही है।
अदा ने मम्मा की आवाज़ बना ली है, और एक खेल, जिसमें सुंदरकांड की उनतालीस कथाएँ हैं। अदा से मिलो
आँगन
बनारस, 1987
बनारस। रविवार। 1987।
पूरा मोहल्ला एक टीवी के आगे। टीवी पर रामायण।
बाबूजी हर ग़लती वाल्मीकि से मिलाकर गिनते थे।
पाँचवीं ग़लती पर वे लौटे नहीं।




पीछे रह गया बाबूजी का चश्मा, और उसमें समुद्र की रेत। बाबूजी कौन थे
किनारा
धनुषकोडि, उनतालीस बरस बाद
उनतालीस बरस बाद।
धनुषकोडि। जहाँ ज़मीन ख़त्म होती है।
आगे बस समुद्र। उस पार, कहते हैं, लंका थी।





किनारे पर मिले मथाई जी। अलप्पुझा के, बत्तीस साल जहाज़ों पर चीफ़ कुक। मथाई जी से मिलो

अदा का दूत चेहरे गिनता है।
पाँच। और खेल खुलता है।
समुद्र
एक सुनहरी सड़क
समुद्र पर एक सुनहरी सड़क।
पाँचों उस पर चलते हैं, रात में, समुद्र के बीच।





हनुमान जी की राह में जो आए, वही परिवार की राह में भी: मैनाक, सुरसा, सिंहिका।

समुद्र से एक पर्वत उठता है।
मैनाक, जो हनुमान जी को विश्राम देने उठा था। मैनाक कौन था?
लंका
सोने का नगर
चाँदनी, चट्टान, और सामने अँधेरा।
और फिर, सामने लंका।
लंका सच्ची है।





सोने का बाज़ार।
रात है, पर नगर जाग रहा है।
राजा
सन इकतीस से
चाँदनी में संगमरमर का आँगन। ऊपर ज़ंजीरों से बँधा एक महल।
सन इकतीस से एक राजा यहाँ इंतज़ार कर रहा है।
हाथ में दस सिरों वाला सुनहरा मुखौटा।
वह चाहता है कि पाँच में से एक यहीं रहे। कौन रुकेगा?
आग
छत दर छत
फिर लंका जलती है।
छत दर छत।
परतें
और लंकाएँ
हवा में एक सिलाई खुलती है।
उसके पार एक और लंका। किसी और कवि की।
हर कथा की अपनी लंका। और हर लंका में, सदियों से, कोई न कोई उतरता रहा है।
केरल, 1795अम्मिणी · तोलपावकूत्तु, यानी चमड़े की कठपुतलियों वाला छाया नाटकउनकी लंका: कंब रामायण →
बाली, 1931राय · केचक का घेरा, जहाँ सब मिलकर "चक, चक" गाते हैंउनकी लंका: ककविन रामायण →
सियाम, 1836खम · खोन के ऊँचे हरे, लाल और काले मुखौटेउनकी लंका: रामकियेन →भोर
दरवाज़ा
भोर का दरवाज़ा।
कौन लौटेगा, और कौन रुकेगा? यह किताब बताएगी।यात्रा यहाँ किताब बनती है
तीन खंड
तीनों खंड लिखे जा चुके हैं, और प्रकाशन की तैयारी में हैं।
कौन कौन
जो लंका में उतरते हैं, और जो वहाँ पहले से हैं
पीले कोने अदा के दूत के हैं: वह इसी तरह चेहरे पहचानता है, और हर एक को खेल की एक भूमिका देता है। हर चेहरे पर दबाओ।
उनतालीस दरवाज़े
हर दरवाज़ा एक रामकथा है, अपनी भाषा, अपने कवि और अपनी लंका के साथ। नीचे चलो, या दरवाज़े पर दबाओ। सुनहरे दरवाज़ों में गाथा उतरती है।
- वाल्मीकि रामायणसंस्कृत
- रामचरितमानसअवधी
- अध्यात्म रामायणसंस्कृत
- കണ്ണശ്ശരാമായണംकण्णस्स रामायणम्मलयालम
- ลังกาสิบโหलंका सिप होताई लू
- മാപ്പിള രാമായണംमापिला रामायणम्मलयालम की मापिला बोली
- രാമചരിതംरामचरितम्पुराना मलयालम
- Maharadia Lawanaमहारादिया लावानामरानाओ
- तिब्बती रामकथातिब्बती
- सिद्धि रामायणनेपाल भाषा
- శ్రీమద్రామాయణ కల్పవృక్షముरामायण कल्पवृक्षम्तेलुगु
- ರಾಮಚಂದ್ರ ಚರಿತ ಪುರಾಣरामचंद्र चरित पुराणकन्नड़
- ਰਾਮ ਅਵਤਾਰरामावतारब्रजभाषा
- حكاية سري رامहिकायत सेरी राममलय
- మొల్ల రామాయణముमोल्ला रामायणम्तेलुगु
- ଜଗମୋହନ ରାମାୟଣजगमोहन रामायणओड़िया
- श्री रामावतारचरितरामावतारचरितकश्मीरी
- ગિરધર રામાયણगिरधर रामायणगुजराती
- भानुभक्तको रामायणभानुभक्त रामायणनेपाली
- कवितावलीब्रजभाषा
- ရာမဇာတ်တော်यम ज़ातदोबर्मी
- ພຣະລັກພຣະຣາມफ्रा लक फ्रा लामलाओ
- រាមកេរ្តិ៍रीमकेरखमेर
- Kakawin Rāmāyaṇaककविन रामायणपुरानी जावानी
- รามเกียรติ์रामकियेनथाई
- கம்பராமாயணம்कंब रामायणतमिल
- पउमचरियंपउमचरियप्राकृत
- कूर्म पुराण · ब्रह्मवैवर्त पुराणकूर्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराणसंस्कृत
- रामोपाख्यानमहाभारत, रामोपाख्यानसंस्कृत
- अद्भुत रामायणसंस्कृत
- आनन्द रामायणआनंद रामायणसंस्कृत
- কৃত্তিবাসী রামায়ণकृत्तिवासी रामायणबांग्ला
- శ్రీ రంగనాథ రామాయణముरंगनाथ रामायणतेलुगु
- भावार्थ रामायणमराठी
- അദ്ധ്യാത്മരാമായണം കിളിപ്പാട്ട്अध्यात्म रामायण किलिप्पाट्टुमलयालम
- সপ্তকাণ্ড ৰামায়ণसप्तकांड रामायणअसमिया
- ବିଲଙ୍କା ରାମାୟଣविलंका रामायणओड़िया
- ತೊರವೆ ರಾಮಾಯಣतोरवे रामायणकन्नड़
- हनुमान चालीसाअवधी
वाल्मीकि रामायण
Valmiki Ramayana
खंड 1 · खंड 3
- कवि
- वाल्मीकि, जिन्हें आदिकवि कहा जाता है
- कब
- सबसे पुरानी; पहला रूप ईसा से लगभग पाँच सौ बरस पहले, कुछ हिस्से बाद के
- कहाँ
- उत्तर भारत, कोसल; आश्रम की कई जगहें मानी जाती हैं, जैसे बिठूर
- लिपि
- देवनागरी, संस्कृत
- रूप
- लगभग 24,000 श्लोक, सात कांड; सुंदरकांड 68 सर्गों का (दक्षिणी पाठ में)
इस कथा की लंका
- पूरा सुंदरकांड हनुमान जी पर टिका है; पूरे ग्रंथ में यही एक कांड है जिसका नायक राम नहीं।
- रात में पूरे नगर की खोज: महल, सोते हुए लोग, और अशोक वाटिका में पहरे के बीच सीता जी।
- अँगूठी देना, सीता जी का साथ चलने से मना करना, बाग़ उजाड़ना, पूँछ में आग, और जलती लंका।
सुंदरकांड इस ग्रंथ का सबसे ज़्यादा पढ़ा जाने वाला हिस्सा है।
नक्शे पर यह कथा कहाँ की है, और समय रेखा पर कब की। बाकी बिंदु बाकी अड़तीस कथाएँ हैं।
कहानी
बनारस, 1987। बाबूजी टीवी वाली रामायण की हर ग़लती वाल्मीकि से मिलाकर गिनते थे। पाँचवीं ग़लती पर वे लौटे नहीं।
उनतालीस बरस बाद, देहरादून में, उनकी नातिन अदा एक खेल बनाती है, जिसमें सुंदरकांड की उनतालीस कथाएँ हैं। धनुषकोडि में, जहाँ ज़मीन ख़त्म होती है, पाँच लोग उस खेल में उतरते हैं: अदा, उसकी मम्मा अन्नू, पापा कुंदन, दोस्त तेनज़िन, और मथाई जी, जो उन्हें किनारे पर मिले।
लंका सच्ची है। वहाँ सन इकतीस से एक राजा इंतज़ार कर रहा है, और वह चाहता है कि एक यहीं रहे। कौन रुकेगा?
Banaras, 1987. Babuji counts every mistake the TV Ramayan makes against Valmiki. At the fifth, he is gone. Thirty nine years later, in Dehradun, his granddaughter Ada, sixteen, builds a game that holds thirty nine tellings of the Sundar Kand. Where the land ends, at Dhanushkodi, five people step into it: Ada, her mother Annu, her father Kundan, her friend Tenzin, and Mathai ji, a stranger from the beach. Lanka is real. A Raja has been waiting there since 1931, and he wants one of them to stay.
सवाल जवाब
पूछे जाने वाले सवाल
उनतालीस लंकाएँ क्या है?
मनु विश्रांति की हिंदी उपन्यास गाथा, तीन खंडों में: पाँचवाँ चेहरा, पानी पर आग और दो हज़ार अट्ठाईस लकीरें। यह सुंदरकांड पर बनी है, और लंका की खोज खेल की उनतालीस रामकथाओं से निकली है।
इसका नाम उनतालीस लंकाएँ क्यों है?
लंका की खोज खेल में सुंदरकांड उनतालीस रामकथाओं में कहा गया है, और हर कथा की लंका अलग है। उपन्यास में परिवार इन्हीं लंकाओं के बीच चलता है।
कहानी कहाँ से शुरू होती है?
बनारस में, 1987 के एक रविवार से, जब बाबूजी टीवी वाली रामायण की ग़लतियाँ गिनते गिनते लौटे नहीं। फिर उनतालीस बरस बाद देहरादून, और धनुषकोडि, जहाँ ज़मीन ख़त्म होती है।
इसका लंका की खोज खेल से क्या रिश्ता है?
खेल और उपन्यास एक ही लंका के दो दरवाज़े हैं। खेल में तुम ख़ुद लंका में घूमते हो, उपन्यास में एक परिवार। दोनों में वही उनतालीस रामकथाएँ हैं, और खेल की भूमिकाएँ ही परिवार की भूमिकाएँ हैं: बालक, कथा प्रेमी, योद्धा, जिज्ञासु और यात्री।
क्या इसमें हनुमान जी और सीता जी हैं?
सुंदरकांड की कथा इन किताबों में जैसी है वैसी आती है, पूरे आदर के साथ। परिवार हनुमान जी की राह के आसपास चलता है, उसे बदलता नहीं। हर कथा का स्रोत हर खंड के अंत में "टीका और स्रोत" में दिया गया है।
किताबें कब आएँगी?
तीनों खंड लिखे जा चुके हैं, और प्रकाशन की तैयारी में हैं। जैसे ही कोई खंड छपेगा, उसका पन्ना यहीं बताएगा कि वह कहाँ से मिलेगा।














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