सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत के बाहर
महारादिया लावाना
Maharadia Lawana
- भाषा मरानाओ
- किसकी मरानाओ लोक परंपरा, बाई पामोकी की सुनाई हुई
- कब फ़्रांसिस्को के अनुमान से सत्रहवीं से उन्नीसवीं सदी के बीच पहुँची; 1969 में छपी
- कहाँ लानाओ झील, मिंदानाओ
यह कथा
फ़िलीपींस के मरानाओ लोगों की रामकथा, महारादिया लावाना। यह गद्य की लोक कथा है, गाई नहीं जाती। हनुमान वाला काम यहाँ लक्षमाना करते हैं, जो एक वानर हैं और राम जैसे राजा के बेटे। लंका एक द्वीप बन जाती है, और उसका जलना इस कथा में नहीं आता।
एक नज़र में
महारादिया लावाना, अपनी लिपि में
Maharadia Lawana
- लिपि
- मरानाओ (रोमन में)
- रूप
- गद्य की लोक कथा, गाई नहीं जाती
- समय
- कथा सत्रहवीं से उन्नीसवीं सदी के बीच पहुँची होगी (फ़्रांसिस्को का अनुमान); 1968 में दर्ज, 1969 में छपी
इस कथा की लंका
- यहाँ न लंका की खोज है, न लंका का जलना।
- हनुमान वाला काम लक्षमाना करते हैं, जो एक वानर हैं और राम जैसे राजा के बेटे।
- लंका यहाँ पुलु बंदियारमासिर नाम का द्वीप है, और रावण महारादिया लावाना, जिसके सात या आठ सिर बताए गए हैं।
आज: 1969 में इसे लानाओ की घरेलू महफ़िलों में सुनाई जाने वाली कथा बताया गया था।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
उस पार का किनारा
दूसरा दिन: आग
झील के किनारे वही किनारा है, वही लहरें, और नाम सब बदले हुए।
वहाँ यह काम लक्षमाना के नाम से आता है, और जगहें उसी झील के किनारे की हो जाती हैं।
किनारे पर नावें बँधी हैं, और उनकी रस्सियाँ पानी में हिलती रहती हैं।
दूर से गाने की आवाज़ आती है, और उसी के साथ लहरें किनारे तक आती हैं।
मरानाओ लोगों की इस बड़ी गीत माला में यह एक कड़ी है।
महारादिया लावाना, मरानाओ परंपरानगर का चौक
दूसरा दिन: आग
चौक में भीड़ इस तरह हिलती है जैसे पानी में लहर उठती हो।
शोर भी वहाँ ताल में सुनाई देता है, क्योंकि यह हिस्सा गाकर कहा जाता है।
कोई बच्चा भीड़ में छूट जाता है, और उसे कंधे पर उठा लिया जाता है।
पानी की मटकियाँ हाथों हाथ आगे बढ़ती हैं, पर आग उनसे आगे निकल चुकी है।
भागते लोग, गिरती छतें, और बीच में एक अकेली परछाईं।
महारादिया लावाना, मरानाओ परंपराइस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
यह कथा उनतालीस लंकाओं में से एक है। इन्हीं लंकाओं पर मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा बनी है: उनतालीस लंकाएँ।