
उनतालीस लंकाएँ · खंड 2
पानी पर आग
Pani Par Aag · Fire on the Water
प्रकाशन की तैयारी में
इस बार पूरी तैयारी है।
कहानी
पहली रात लंका से चार लौटे। मथाई जी वहीं रेत पर रह गए, और एक राजा ने उनके कंधे पर हाथ रख दिया।
दूसरी रात कोई चूक नहीं होगी। अदा ने अपने दूत को सिखा दिया है कि चेहरे नहीं, लोग गिने। पापा ने तीन पावर बैंक रख लिए हैं, और मथाई जी का टिफ़िन भी। मम्मा ने रामेश्वरम के शास्त्री जी को मना लिया है, ताकि दरवाज़ा उसी लंका में खुले, जहाँ मथाई जी छूटे थे। नाका पाँच बजे बंद होता है, इसलिए इस बार वे नाव से जाते हैं।
पर शास्त्री जी नाके पर ही रोक लिए जाते हैं। दरवाज़ा खुलता है कंब की लंका में, पानी के उस पार।
वहाँ समय तेज़ चलता है। बाहर की एक रात, अंदर के कई हफ़्ते। मथाई जी को बाहर लाना है, पर लंका से कोई यूँ ही नहीं निकलता। सवाल एक ही है: मथाई जी निकलें, तो किसकी जगह से?
इस खंड की लंकाएँ
किन कथाओं की लंका में
हर कथा का अपना पन्ना है, लंका की खोज खेल के हिस्से में: वह किसकी है, कहाँ की है, और सुंदरकांड के पल उसमें कैसे कहे गए।
सदियों के मेहमान
इस खंड में और कौन
- खंड 2 · दुनहुआंग, लगभग 820दोरजेरेशम मार्ग की गुफाओं में मिली तिब्बती रामकथा। याक के मक्खन वाले दीये। उनकी लंका: तिब्बती रामकथा
- खंड 2 · अमरपुर, 1792ऊ तुनबर्मा का दरबार और उसकी यम ज़ातदो। उनकी लंका: यम ज़ातदो
- खंड 2 · नदिया, 1843बिनयबंगाल की कृत्तिवासी रामायण, जो गाँव गाँव गाई जाती थी। उनकी लंका: कृत्तिवासी रामायण
पूरी गाथा: उनतालीस लंकाएँ · खेल: लंका की खोज






