पंचांग 2027
मूलाधाररीढ़ का मूलमूलाधाररीढ़ का मूलस्वाधिष्ठानजननेंद्रिय की जड़स्वाधिष्ठानजननेंद्रिय की जड़मणिपूरनाभिमणिपूरनाभिअनाहतहृदयअनाहतहृदयविशुद्धकंठविशुद्धकंठआज्ञाभौंहों के बीचआज्ञाभौंहों के बीचसहस्रारसिर के ऊपरसहस्रारसिर के ऊपर

ध्यान की एक साधना

कुंडलिनी

सुप्ता गुरुप्रसादेन यदा जागर्ति कुण्डलीहठयोगप्रदीपिका 3.2: गुरु की कृपा से जब सोई कुंडली जागती है

वह शक्ति, उसके सात चक्र, बीज मंत्र और जागरण: ग्रंथों से, सीधी भाषा में। और कुंडलिनी पर मनु विश्रांति की तीन किताबें।

किसी भी कमल पर दबाइए, उस चक्र का पन्ना खुलेगा।

कुंडलिनी क्या है?

कुंडलिनी योग और तंत्र की परंपरा में वह शक्ति है जो हर मनुष्य के भीतर, रीढ़ के सबसे निचले चक्र मूलाधार में, साढ़े तीन लपेटे में सोई मानी जाती है। नाम कुंडल से बना है, यानी छल्ला या कुंडली। हठयोगप्रदीपिका (3.1) कहती है कि जैसे नागों का राजा धरती को थामे है, वैसे ही कुंडलिनी सारे योग का आधार है। ग्रंथ बताते हैं कि जागने पर वह सुषुम्ना नाड़ी से ऊपर उठती है, छह चक्रों को पार करती है, और सिर के ऊपर सहस्रार तक पहुँचती है।

कुंडलिनी के सात चक्र, नीचे से ऊपर

हर कमल अपने रंग, अपनी पंखुड़ियों और अपने बीज के साथ, जैसा षट्चक्रनिरूपण उसे बताता है। किसी भी चक्र पर जाइए, उसका अपना पन्ना खुलेगा।

  1. मूलाधार चक्र का कमल, षट्चक्रनिरूपण के वर्णन से: 4 पंखुड़ियाँ, उन पर व, श, ष, स, बीच में चौकोर और बीज लंमूलाधाररीढ़ का मूल
  2. स्वाधिष्ठान चक्र का कमल, षट्चक्रनिरूपण के वर्णन से: 6 पंखुड़ियाँ, उन पर ब, भ, म, य, र, ल, बीच में आधा चाँद और बीज वंस्वाधिष्ठानजननेंद्रिय की जड़
  3. मणिपूर चक्र का कमल, षट्चक्रनिरूपण के वर्णन से: 10 पंखुड़ियाँ, उन पर ड, ढ, ण, त, थ, द, ध, न, प, फ, बीच में त्रिकोण और बीज रंमणिपूरनाभि
  4. अनाहत चक्र का कमल, षट्चक्रनिरूपण के वर्णन से: 12 पंखुड़ियाँ, उन पर क, ख, ग, घ, ङ, च, छ, ज, झ, ञ, ट, ठ, बीच में छह कोनों वाला और बीज यंअनाहतहृदय
  5. विशुद्ध चक्र का कमल, षट्चक्रनिरूपण के वर्णन से: 16 पंखुड़ियाँ, उन पर अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ॠ, ऌ, ॡ, ए, ऐ, ओ, औ, अं, अः, बीच में गोल और बीज हंविशुद्धकंठ
  6. आज्ञा चक्र का कमल, षट्चक्रनिरूपण के वर्णन से: 2 पंखुड़ियाँ, उन पर ह, क्ष, बीच में त्रिकोण (योनि) और बीज ॐआज्ञाभौंहों के बीच
  7. सहस्रार चक्र का कमल, षट्चक्रनिरूपण के वर्णन से: हज़ार उजली पंखुड़ियाँ, और बीच में पूरा चाँदसहस्रारसिर के ऊपर

सातों चक्र एक पन्ने पर: स्थान, तत्व, बीज, पंखुड़ियाँ और अक्षर

कुंडलिनी पर मनु विश्रांति की तीन किताबें

मनु विश्रांति दर्शन चक्रों के उसी चित्र को पढ़ता है, जैसे नक़्शा पढ़ा जाता है। पहले अक्षर, फिर उनसे बने शब्द और नाम, फिर बोली हुई आवाज़ और मंत्र।

  1. बीजसेतु का कवर: गहरे नीले पर पाँच घेरे, नीचे से ऊपर के पाँच कमल, उन पर पंखुड़ियों के अक्षर, और सुनहरे अक्षरों में पाँच बीज1बीजसेतुअक्षरों का नक़्शाकुंडलिनी, बीज मंत्र और आवाज़ का सच: एक साधक का शोध
  2. अर्थबीज का कवर: गहरे नीले पर एक सुनहरा बीज, धातु पा, और उससे उगते शब्द: पानी, पेय, पात्र, पिपासा, पादप और सूर्यप2अर्थबीजशब्द, अर्थ और नामशब्दों का अर्थ और चीज़ों के नाम कहाँ से आते हैं
  3. नाददूत का कवर: गहरे नीले पर एक सुनहरी लौ, और उससे फैलती आवाज़ की लहरें3नाददूतआवाज़ और मंत्रमंत्र और आवाज़ सच में क्या कर सकते हैं, और क्या नहीं

हर किताब अपने आप में पूरी है। इसी क्रम में पढ़ें, तो हर किताब अगली के लिए ज़मीन तैयार करती है।

मनु प्रयोगशाला: किताबों की बातें, चलाकर देखिए

इन किताबों की गिनती यहाँ पाँच प्रयोग बनकर चलती है, एक ही गहरे आकाश में: आकाशगंगाओं से उतरकर रोशनी की एक आकृति और उसकी रीढ़ के छह कमलों तक।

हर बात पर एक निशान

तीनों किताबों में जो अंदाज़े जाँच में टूटे, वे भी उतनी ही जगह पाते हैं जितने टिके हुए।

किताब में चार छोटे निशान मिलेंगे, ताकि पाठक जान सके कि किस बात को किस तरह तौलना है:

सिद्ध
गणित से साबित। काग़ज़ और पेंसिल लेकर कोई भी दोहरा सकता है।
परखा हुआ
ग्रंथ के छपे पाठ से, किसी छपे शोध से, या शब्दकोश के असली शब्दों से मिलाया हुआ।
खुला प्रश्न
अभी उत्तर अधूरा है।
मनु विश्रांति दर्शन
जहाँ शोध की भाषा रुकती है, और साधक बोलता है।

ये किताबें किसके लिए हैं

  • जो बीज मंत्र जपते हैंऔर जानना चाहते हैं कि लं, वं, रं, यं, हं चक्रों के चित्र में कहाँ लिखे हैं, और मंत्र के अक्षर शरीर में किस रास्ते चलते हैं।
  • जिन्हें शब्दों से प्रेम हैजो पूछते हैं कि पेड़ को पेड़ और पानी को पानी क्यों कहते हैं, और किसी नई चीज़ का नाम संस्कृत ढंग से कैसे रखें।
  • जो दावों को परखते हैंचक्र खोलने वाले कटोरे, ब्रह्मांड की आवृत्ति, मंत्र से उपचार: हर दावा ग्रंथ, कथा और प्रयोग, तीनों तराज़ुओं पर।

कुंडलिनी पर सवाल जवाब

कुंडलिनी क्या है?

कुंडलिनी योग और तंत्र की परंपरा में वह शक्ति है जो हर मनुष्य के भीतर, रीढ़ के सबसे निचले चक्र मूलाधार में, साढ़े तीन लपेटे में सोई मानी जाती है। हठयोगप्रदीपिका (3.1) उसे सारे योग का आधार कहती है, और षट्चक्रनिरूपण (1577) बताता है कि जागने पर वह छह चक्रों को पार करके सिर के ऊपर सहस्रार तक जाती है, और फिर उसी रास्ते मूलाधार में लौट आती है।

कुंडलिनी शब्द का अर्थ क्या है?

कुंडलिनी शब्द कुण्डल से बना है, जिसका अर्थ है छल्ला, कुंडल या रस्सी का लपेटा। उससे बना कुण्डलिन्, यानी छल्लेदार या लिपटा हुआ, और साँप भी। कुंडलिनी उसी का स्त्रीलिंग है: वह जो कुंडली मारे हुए है। मोनियर विलियम्स का संस्कृत कोश कुंडलिनी को एक शक्ति बताता है। हठयोगप्रदीपिका उसे कुंडली भी कहती है।

कुंडलिनी शरीर में कहाँ सोई रहती है?

मूलाधार में। षट्चक्रनिरूपण (श्लोक 8 से 11) के अनुसार मूलाधार कमल के बीच एक त्रिकोण है, उसमें स्वयंभू लिंग है, और कुंडलिनी उस लिंग पर साढ़े तीन लपेटे में, शंख के घुमाव की तरह, अपने मुँह से ब्रह्मद्वार को ढके हुए सोई रहती है। मूलाधार रीढ़ के सबसे निचले सिरे पर, जननेंद्रिय के नीचे और गुदा के ऊपर है।

कुंडलिनी के कितने चक्र हैं, और उनके नाम क्या हैं?

षट्चक्र यानी छह चक्र: मूलाधार, स्वाधिष्ठान, मणिपूर, अनाहत, विशुद्ध और आज्ञा। इनके ऊपर, सिर के शीर्ष पर, हज़ार पंखुड़ियों वाला सहस्रार है। आम बोलचाल में सहस्रार को मिलाकर सात चक्र कहे जाते हैं, पर षट्चक्रनिरूपण छह चक्र गिनता है और सहस्रार को उन सबके ऊपर का कमल बताता है।

चक्रों के बीज मंत्र कौन से हैं?

पृथ्वी का बीज लं है (मूलाधार), जल का वं (स्वाधिष्ठान), अग्नि का रं (मणिपूर), वायु का यं (अनाहत) और आकाश का हं (विशुद्ध)। आज्ञा पर प्रणव, यानी ॐ है। सहस्रार का कोई बीज नहीं। यह नक़्शा पूर्णानंद के षट्चक्रनिरूपण (1577) में है।

चक्रों की पंखुड़ियों पर कौन से अक्षर लिखे हैं?

संस्कृत की पूरी वर्णमाला, पचास अक्षर: मूलाधार पर 4 (व श ष स), स्वाधिष्ठान पर 6 (ब से ल), मणिपूर पर 10 (ड से फ), अनाहत पर 12 (क से ठ), विशुद्ध पर 16 स्वर, और आज्ञा पर 2 (ह और क्ष)। स्वर गले के कमल पर हैं, व्यंजन नीचे के कमलों पर। सहस्रार की हज़ार पंखुड़ियों पर यही पचास अक्षर बीस बार दोहराए गए हैं।

मनु विश्रांति दर्शन क्या है, और इसकी किताबें किस क्रम में पढ़ें?

मनु विश्रांति दर्शन कुंडलिनी पर मनु विश्रांति की तीन किताबों की कड़ी है, हिंदी में। पढ़ने का क्रम: 1. बीजसेतु, अक्षरों का नक़्शा। 2. अर्थबीज, शब्द, अर्थ और नाम। 3. नाददूत, आवाज़ और मंत्र। हर किताब अपने आप में पूरी है, पर इसी क्रम में पढ़ें तो हर किताब अगली के लिए ज़मीन तैयार करती है।

क्या इन किताबों में अभ्यास भी हैं?

हाँ। हर अध्याय के अंत के पास एक छोटा, सुरक्षित अभ्यास है: अक्षर बोलकर और भीतर सुनकर, धीमी साँस वाला जप, गुनगुनाना, सुनने का अभ्यास। ये अभ्यास जानकारी और अपने अनुभव के लिए हैं, किसी रोग का इलाज नहीं, और गहरी साधना किसी अनुभवी गुरु की देखरेख में ही करें।

Kundalini, in English

Kundalini (कुंडलिनी, from kuṇḍala, "ring, coil") is, in yoga and tantra, the power said to lie asleep in every person, coiled three and a half times round the Svayambhu linga in Muladhara, the lowest chakra at the base of the spine. The Haṭhayogapradīpikā (3.1) calls it the support of all yoga, and says (3.2) that when it wakes by the guru's grace all the lotuses and knots are pierced. Pūrṇānanda's Ṣaṭcakranirūpaṇa (1577) describes six chakras and the thousand-petalled Sahasrara above them: their petals and the fifty letters on them, their elements, seed mantras, deities and Shaktis. These pages give each chakra as that text describes it, verse by verse, the bija mantras, what the texts say about awakening, and Manu Vishranti's three books in Hindi on the chakra picture: Beejsetu, Arthbeej and Naaddoot.