सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · जगह पक्की नहीं
आनंद रामायण
Ananda Ramayana
- भाषा संस्कृत
- किसकी कवि अज्ञात; गुरु रामदास अपने शिष्य विष्णुदास को सुनाते हैं, और भीतर शिव पार्वती को
- कब नौ कांड, 109 सर्ग, लगभग 12,300 श्लोक; अध्यात्म रामायण के बाद की
- कहाँ जगह पक्की नहीं
यह कथा
नौ कांडों का ग्रंथ, जिसमें पूरी वाल्मीकि कथा पहले ही कांड में सिमट जाती है, और बाक़ी आठ कांड नई कथाओं के हैं। इसमें ऐसे कई प्रसंग जुड़े हैं जो पुराने पाठों में नहीं मिलते। इसका रामरक्षा स्तोत्र आज भी रोज़ पढ़ा जाता है।
एक नज़र में
आनंद रामायण, अपनी लिपि में
आनन्द रामायण
- लिपि
- देवनागरी, संस्कृत
- रूप
- नौ कांड, 109 सर्ग, लगभग 12,300 श्लोक
- समय
- लगभग पंद्रहवीं सदी
इस कथा की लंका
- पहला कांड, सार कांड, पूरी वाल्मीकि कथा को तेरह सर्गों में समेट लेता है; बाक़ी आठ कांड नई कथाओं के हैं।
- रामेश्वरम के लिंग वाली कथा: हनुमान जी लिंग लाने जाते हैं, राम पहले रेत का लिंग स्थापित कर देते हैं।
- इसमें ऐसे प्रसंग हैं जो वाल्मीकि में नहीं, जैसे दशरथ से विवाह से पहले कौशल्या का अपहरण।
आज: इसका रामरक्षा स्तोत्र आज भी रोज़ पढ़ा जाता है।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
त्रिजटा का सपना
पहली रात: खोज
वे नींद में देखती हैं कि एक वानर आया और कुछ कहकर चला गया।
जागने पर उन्हें याद रहता है सिर्फ़ इतना कि कोई ख़बर पास तक आई थी।
पूरा सपना वाल्मीकि में खुलता है, और जिज्ञासु की यात्रा में वह पूरा मिलता है।
इस कथा के सुनाने वाले शिव माने जाते हैं, इसलिए यहाँ ब्योरे की जगह सार रहता है।
आनंद रामायण, सारकांड · त्रिजटाचैत्य महल
दूसरा दिन: आग
यहाँ ऊँचे महल वाली लड़ाई अलग से नहीं आती, सीधे आग आ जाती है।
जाना, ढूँढना और जला देना, तीनों एक साथ कह दिए जाते हैं।
वहाँ ऊँचे महल का नाम तक नहीं आता, सीधे आग की बात आ जाती है।
रुकने की जगह यहाँ किसी के पास नहीं है।
सुनाने वाले शिव हैं और सुनने वाली पार्वती, और उन्हें ब्योरा नहीं, सार चाहिए।
आनंद रामायण, सारकांड, पहला कांडइस कथा के 1 और पल खेल के भीतर पढ़े जा सकते हैं: वानरों का घेरा।
इस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
यह कथा उनतालीस लंकाओं में से एक है। इन्हीं लंकाओं पर मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा बनी है: उनतालीस लंकाएँ।