पंचांग 2027

सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत में

वाल्मीकि रामायण

Valmiki Ramayana

  • भाषा संस्कृत
  • किसकी वाल्मीकि
  • कब सबसे पुरानी रामकथा
  • कहाँ बिठूर के पास, गंगा किनारे (मान्यता)

यह कथा

सबसे पुरानी रामकथा, और बाकी सबकी नींव। इसका सुंदरकांड अड़सठ सर्गों का है और पूरा का पूरा हनुमान पर टिका है, जो इस ग्रंथ में और कहीं नहीं होता। ब्योरे इसकी पहचान हैं: नगर के भीतर के घर, सोते हुए लोग, राक्षसियों के नाम, और बीच बीच में हनुमान का अपना सोचना।

एक नज़र में

वाल्मीकि रामायण, अपनी लिपि में

वाल्मीकि रामायण

लिपि
देवनागरी, संस्कृत
रूप
लगभग 24,000 श्लोक, सात कांड; सुंदरकांड 68 सर्गों का (दक्षिणी पाठ में)
समय
सबसे पुरानी; पहला रूप ईसा से लगभग पाँच सौ बरस पहले, कुछ हिस्से बाद के

इस कथा की लंका

  • पूरा सुंदरकांड हनुमान जी पर टिका है; पूरे ग्रंथ में यही एक कांड है जिसका नायक राम नहीं।
  • रात में पूरे नगर की खोज: महल, सोते हुए लोग, और अशोक वाटिका में पहरे के बीच सीता जी।
  • अँगूठी देना, सीता जी का साथ चलने से मना करना, बाग़ उजाड़ना, पूँछ में आग, और जलती लंका।

आज: सुंदरकांड इस ग्रंथ का सबसे ज़्यादा पढ़ा जाने वाला हिस्सा है।

स्रोत:

  1. en.wikipedia.org
  2. en.wikipedia.org, 2
  3. press.princeton.edu

इस कथा की एक खुली प्रति

सुंदरकांड के पल, इस कथा में

खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।

पाताल की गलियाँ

चौथी रात: विलंका

वाल्मीकि की लंका ऊपर है, पहाड़ पर, और उसका रास्ता आसमान से जाता है।

यह दूसरी लंका नीचे है, और उसका रास्ता ज़मीन के भीतर से।

ऊपर वाली लंका तक पहुँचने के लिए समुद्र लाँघना पड़ा था।

नीचे वाली तक पहुँचने के लिए पानी के भीतर उतरना पड़ता है, और उतरते हुए रोशनी कम होती जाती है।

दोनों का नक्शा एक जैसा है, बस दिशा उलटी है।

तुलना: वाल्मीकि रामायण, सुंदरकांड, सर्ग 2

बिना बंधन का दरबार

छठी रात: विद्याधरों की लंका

वाल्मीकि में दूत बँधकर ही दरबार तक पहुँचता है, और वहीं से सब कुछ बदलता है।

जब कोई बाँधा ही नहीं जाता, तो अपमान का सवाल भी नहीं उठता।

वाल्मीकि में रस्सियाँ पहले पड़ती हैं, और बात बाद में होती है।

वहाँ बँधने के बाद ही वह पूरा दरबार उसे सुनता है, और वहीं से आग वाली सज़ा तय होती है।

एक ही नियम को मानने के दो ढंग, और दोनों का अंत अलग।

तुलना: वाल्मीकि रामायण, सुंदरकांड, सर्ग 51 और 52

हज़ार मुँह कहाँ से आए

पाँचवीं रात: शक्ति

दस सिर वाला सामने खड़ा है, और हर सिर पर अलग मुकुट है।

हज़ार वाला उससे सौ गुना बड़ा है, और उसके सामने यह छोटा पड़ जाता है।

हर सिर का अपना मिज़ाज है: कोई हँस रहा है, कोई ग़ुस्से में।

वहाँ उसके बीस हाथ भी हैं, और हर हाथ में अलग हथियार।

गिनती हर बार बढ़ जाती है, क्योंकि नए को पुराने से बड़ा दिखना होता है।

तुलना: वाल्मीकि रामायण, सुंदरकांड

पाताल का पहरा

चौथी रात: विलंका

वाल्मीकि में ऐसा कोई पहरा नहीं है जो अपने आप गिर जाए।

वहाँ हर घेरा तोड़ना पड़ता है, और हर बार कोई न कोई सामने आता है।

वहाँ फाटक पर रोकने वाली सामने आती है, और उसे हराना पड़ता है।

भीतर भी हर मोड़ पर कोई न कोई खड़ा मिलता है, और हर बार हाथ चलाना पड़ता है।

इसलिए यह गिरता हुआ पहरा उसी ओड़िया कथा की अपनी चीज़ है।

तुलना: वाल्मीकि रामायण, सुंदरकांड

इस कथा के 1 और पल खेल के भीतर पढ़े जा सकते हैं: रूप के बाद का सन्नाटा।

इस कथा से खेल के पत्ते

खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।

  • देखने वाले का रोना
  • सीधे बात नहीं, कथा सुनाई
  • दुश्मन को देखकर पहला ख़याल
  • बँधे हुए का भाषण
  • लौटते ही पहली आवाज़
  • रावण की पेशकश
  • ले चलने के लिए बड़ा होना
  • बाईं आँख का फड़कना
  • सीता का जवाब
  • कहीं यह रावण ही तो नहीं
  • अपना परिचय देकर भरोसा जीतना
  • विदाई के शब्द
  • भीतर का महल
  • आते हुए को देखकर
  • घेरे के बीच दिया गया जवाब
  • सबके सामने कही गई बात
  • लौटती उड़ान का मूल
  • आख़िरी क़दम अकेले के
  • आसमान से देखने वालों का अचरज
  • आख़िरी ठहराव
  • भीतर से देखा हुआ विमान
  • फाटक पर रुककर सोचना
  • सबसे शांत कोना
  • जीतना नहीं, निकलना
  • धमकी में आया एक नाम
  • रुकने से मना करना
  • तीन परखें, तीन तरह की
  • सभा में सब एक राय नहीं थे
  • विभीषण ने नियम याद दिलाया
  • नियम मानने से जो हुआ
  • मैं भेजा हुआ हूँ
  • विनती नहीं, शर्त
  • उलटा अर्थ निकालना
  • सज़ा की जगह समझाना
  • जवाब में निशानी
  • न मिलना भी एक ख़बर है
  • गिनी हुई नाकामी
  • दो खुले रास्ते
  • रास्ता ढूँढने वाले ने चुना
  • जवाब दूसरी रातों में
  • अधूरेपन से बनी नई कथाएँ
  • वह सर्ग जो यहाँ नहीं है
  • क्या छोड़ा गया, यह भी पाठ है
  • यह कांड सुंदर क्यों
  • अलग से पढ़ा जाने वाला कांड
  • जहाँ कवि सीधे बात करता है
  • घरों तक पहुँचा हुआ कांड
  • ख़ुद से पूछा गया सवाल
  • और उसी का जवाब
  • बिना काम के विश्राम नहीं
  • कथा से पाठ तक
  • कुछ न करना भी काम है
  • सही वक़्त की परख
  • पल भर की ग़लतफ़हमी
  • अपने ही तर्क से टूटी भूल
  • साज़ों पर सोए हुए लोग
  • दुश्मन के नगर को ऐसे देखना
  • तेल, गधा और दक्षिण दिशा
  • सपने से रुकी हुई भीड़
  • परछाईं देखकर भागती मछलियाँ
  • हवा से फटता हुआ पानी
  • पहाड़ जितना, फिर बिल्ली जितना
  • यहाँ छोटा होना जीत है
  • पंछी पहले बता देते हैं
  • डाल पर छिपकर देखना
  • बाग़ में ऊधम
  • पूरी कथा में सबसे हल्की जगह
  • खाई में कमल और पहरा
  • दीवार के ऊपर के बुर्ज
  • चौड़ी सड़कें, सटी हुई दुकानें
  • आधी रात की रौनक़
  • छतों वाला रास्ता
  • ऊपर से दिखता पूरा नक्शा
  • पेड़ों की क़तारें
  • किसी का शौक़, किसी की क़ैद
  • बंधन से ही सब बदला था
  • घेरकर लड़ने का जवाब
  • तोरण का लोहे का डंडा
  • पहली बार सामने धनुष
  • नाम लेकर भेजा गया पहला
  • मंत्रियों के सात बेटे
  • दरबार का डर पहली बार
  • पाँच सेनापति, अपनी अपनी सेना
  • इसके बाद अपने बेटे
  • शरीर नहीं, परछाईं
  • एक एक घर, नाम लेकर
  • तेज ऐसा कि छिपना पड़ा
  • तब उन्होंने ऊपर देखा
  • वही शब्द, दोबारा
  • अस्सी हज़ार और एक लोहे का डंडा
  • जंबुमाली, पहला नाम वाला योद्धा
  • मंत्री के सात बेटे
  • पाँच सेनापतियों के नाम
  • बादलों के बीच से
  • अकेली दिखती उड़ान
  • उस रात का चाँद
  • भोर से पहले की हवा
  • ऊपर से दिखती जलती लंका
  • मैनाक का पुराना क़र्ज़
  • वरदान तोड़े बिना निकलना
  • सुग्रीव की बताई हुई बात
  • दस और तीस योजन
  • जब जो रूप ज़रूरी हो
  • उस पार का इंतज़ार
  • वह पहरेदार नहीं, नगर ही है
  • बीच नगर में किसी और का विमान
  • पहचान कैसे हुई
  • ठिठकना और फिर आगे बढ़ना
  • नशे का घर
  • हार का मन
  • अंगद और सुग्रीव के बीच की गाँठ
  • दसवाँ महीना चल रहा है
  • सपने का पूरा ब्योरा
  • कौन सी बोली बोलें
  • कहानी पहले, अँगूठी बाद में
  • एक आँख के बदले जान
  • मना करने की दो वजहें
  • उजाड़ना, सोचा हुआ काम
  • एक के बाद एक भेजना
  • सबसे छोटा बेटा
  • पहरेदारों ने अस्त्र बेकार कर दिया
  • मारने की जगह अपमान
  • सज़ा, जो टोह बन गई
  • आग ने उसे क्यों नहीं जलाया
  • जलाने के बाद का डर
  • डर और राहत
  • मना किया हुआ बाग़
  • पहला वाक्य, बाकी सब बाद में
  • जाते और लौटते का फ़र्क़
  • जिसने याद दिलाया, वही अब पूछता है
  • पूरी कथा एक साँस में
  • जोश और रोक
  • शिकायत में छिपी ख़बर
  • नुक़सान छोड़ना
  • गाल पर लगाया हुआ रंग
  • मणि का अपना इतिहास
  • संदेश की तीन परतें
  • दोबारा सुनने की माँग
  • समुद्र ने मदद क्यों की
  • बाजों को गले लगाकर सोना
  • जिस पेड़ पर वे छिपे थे
  • नगरी, सजी हुई स्त्री जैसी
  • यहाँ से आगे नहीं जा सकते
  • नगर किससे मिलता जुलता था
  • किसने कितनी छलाँग बताई
  • लौटूँ ही नहीं, ऐसा भी सोचा
  • आधा ही ज़ोर लगाया
  • साँप और गरुड़ की पुरानी दुश्मनी
  • नीचे से दिखती उड़ान
  • आसमान के दर्शक
  • आम घरों की रात
  • पहरे की चौकी
  • लंका की पहली आग
  • एक अकेली आवाज़

खेल में ढूँढो

उपन्यास

इस कथा की लंका, उपन्यास में

मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा उनतालीस लंकाएँ इस कथा की लंका में उतरती है। तीनों खंड लिखे जा चुके हैं, और प्रकाशन की तैयारी में हैं।

वाल्मीकि रामायण इन त्योहारों के पन्नों पर भी आती है, उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 में: मकर संक्रांति, शबरी जयंती, चैत्र नवरात्रि, पणा संक्रांति, राम नवमी, हनुमान जयंती, परशुराम जयंती, अक्षय तृतीया, गंगा सप्तमी, सीता नवमी, गंगा दशहरा, ऋषि पंचमी, ओणम, वामन जयंती, पितृ पक्ष, विश्वकर्मा पूजा, वाल्मीकि जयंती, दीपावली, बाली जात्रा, विवाह पंचमी, दत्तात्रेय जयंती, संकष्टी चतुर्थी, स्कंद षष्ठी, अमावस्या। ये दिन, और साल का हर त्योहार और व्रत, एक बार दबाकर अपने फ़ोन के कैलेंडर में: Manu Vishranti Calendar जोड़ें।

गाथा देखो

सवाल जवाब

पूछे जाने वाले सवाल

वाल्मीकि रामायण किस भाषा में है?

संस्कृत।

वाल्मीकि रामायण किसकी रचना है?

वाल्मीकि।

वाल्मीकि रामायण कहाँ की है?

बिठूर के पास, गंगा किनारे (मान्यता)।

वाल्मीकि रामायण कब की है?

सबसे पुरानी रामकथा।