सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत में
वाल्मीकि रामायण
Valmiki Ramayana
- भाषा संस्कृत
- किसकी वाल्मीकि
- कब सबसे पुरानी रामकथा
- कहाँ बिठूर के पास, गंगा किनारे (मान्यता)
यह कथा
सबसे पुरानी रामकथा, और बाकी सबकी नींव। इसका सुंदरकांड अड़सठ सर्गों का है और पूरा का पूरा हनुमान पर टिका है, जो इस ग्रंथ में और कहीं नहीं होता। ब्योरे इसकी पहचान हैं: नगर के भीतर के घर, सोते हुए लोग, राक्षसियों के नाम, और बीच बीच में हनुमान का अपना सोचना।
एक नज़र में
वाल्मीकि रामायण, अपनी लिपि में
वाल्मीकि रामायण
- लिपि
- देवनागरी, संस्कृत
- रूप
- लगभग 24,000 श्लोक, सात कांड; सुंदरकांड 68 सर्गों का (दक्षिणी पाठ में)
- समय
- सबसे पुरानी; पहला रूप ईसा से लगभग पाँच सौ बरस पहले, कुछ हिस्से बाद के
इस कथा की लंका
- पूरा सुंदरकांड हनुमान जी पर टिका है; पूरे ग्रंथ में यही एक कांड है जिसका नायक राम नहीं।
- रात में पूरे नगर की खोज: महल, सोते हुए लोग, और अशोक वाटिका में पहरे के बीच सीता जी।
- अँगूठी देना, सीता जी का साथ चलने से मना करना, बाग़ उजाड़ना, पूँछ में आग, और जलती लंका।
आज: सुंदरकांड इस ग्रंथ का सबसे ज़्यादा पढ़ा जाने वाला हिस्सा है।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
पाताल की गलियाँ
चौथी रात: विलंका
वाल्मीकि की लंका ऊपर है, पहाड़ पर, और उसका रास्ता आसमान से जाता है।
यह दूसरी लंका नीचे है, और उसका रास्ता ज़मीन के भीतर से।
ऊपर वाली लंका तक पहुँचने के लिए समुद्र लाँघना पड़ा था।
नीचे वाली तक पहुँचने के लिए पानी के भीतर उतरना पड़ता है, और उतरते हुए रोशनी कम होती जाती है।
दोनों का नक्शा एक जैसा है, बस दिशा उलटी है।
तुलना: वाल्मीकि रामायण, सुंदरकांड, सर्ग 2बिना बंधन का दरबार
छठी रात: विद्याधरों की लंका
वाल्मीकि में दूत बँधकर ही दरबार तक पहुँचता है, और वहीं से सब कुछ बदलता है।
जब कोई बाँधा ही नहीं जाता, तो अपमान का सवाल भी नहीं उठता।
वाल्मीकि में रस्सियाँ पहले पड़ती हैं, और बात बाद में होती है।
वहाँ बँधने के बाद ही वह पूरा दरबार उसे सुनता है, और वहीं से आग वाली सज़ा तय होती है।
एक ही नियम को मानने के दो ढंग, और दोनों का अंत अलग।
तुलना: वाल्मीकि रामायण, सुंदरकांड, सर्ग 51 और 52हज़ार मुँह कहाँ से आए
पाँचवीं रात: शक्ति
दस सिर वाला सामने खड़ा है, और हर सिर पर अलग मुकुट है।
हज़ार वाला उससे सौ गुना बड़ा है, और उसके सामने यह छोटा पड़ जाता है।
हर सिर का अपना मिज़ाज है: कोई हँस रहा है, कोई ग़ुस्से में।
वहाँ उसके बीस हाथ भी हैं, और हर हाथ में अलग हथियार।
गिनती हर बार बढ़ जाती है, क्योंकि नए को पुराने से बड़ा दिखना होता है।
तुलना: वाल्मीकि रामायण, सुंदरकांडपाताल का पहरा
चौथी रात: विलंका
वाल्मीकि में ऐसा कोई पहरा नहीं है जो अपने आप गिर जाए।
वहाँ हर घेरा तोड़ना पड़ता है, और हर बार कोई न कोई सामने आता है।
वहाँ फाटक पर रोकने वाली सामने आती है, और उसे हराना पड़ता है।
भीतर भी हर मोड़ पर कोई न कोई खड़ा मिलता है, और हर बार हाथ चलाना पड़ता है।
इसलिए यह गिरता हुआ पहरा उसी ओड़िया कथा की अपनी चीज़ है।
तुलना: वाल्मीकि रामायण, सुंदरकांडइस कथा के 1 और पल खेल के भीतर पढ़े जा सकते हैं: रूप के बाद का सन्नाटा।
इस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
इस कथा की लंका, उपन्यास में
मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा उनतालीस लंकाएँ इस कथा की लंका में उतरती है। तीनों खंड लिखे जा चुके हैं, और प्रकाशन की तैयारी में हैं।
खंड 1, पाँचवाँ चेहरा: पाँच लोग, एक दरवाज़ा, और लंका का एक राजा जो चाहता है कि एक यहीं रहे।
खंड 3, दो हज़ार अट्ठाईस लकीरें: जगह छीनी नहीं जाती। दी जाती है।
वाल्मीकि रामायण इन त्योहारों के पन्नों पर भी आती है, उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 में: मकर संक्रांति, शबरी जयंती, चैत्र नवरात्रि, पणा संक्रांति, राम नवमी, हनुमान जयंती, परशुराम जयंती, अक्षय तृतीया, गंगा सप्तमी, सीता नवमी, गंगा दशहरा, ऋषि पंचमी, ओणम, वामन जयंती, पितृ पक्ष, विश्वकर्मा पूजा, वाल्मीकि जयंती, दीपावली, बाली जात्रा, विवाह पंचमी, दत्तात्रेय जयंती, संकष्टी चतुर्थी, स्कंद षष्ठी, अमावस्या। ये दिन, और साल का हर त्योहार और व्रत, एक बार दबाकर अपने फ़ोन के कैलेंडर में: Manu Vishranti Calendar जोड़ें।
सुंदरकांड पर और
यही पल, सारी रामकथाओं में एक साथ:
- हनुमान जी की छलाँग
- सोने की लंका कैसी थी?
- पुष्पक विमान कैसा था?
- अशोक वाटिका कैसी थी, और वहाँ सीता जी से पहली भेंट
- लंका दहन
- समुद्र में हनुमान जी को कौन मिले?
- लंका का पहरेदार कौन था?
- हनुमान जयंती साल में कई बार क्यों?
- हनुमान जी को किसने कौन सा वरदान दिया?
- रावण और शिव, हनुमान जी और रुद्र
- दशहरा और दीवाली का रामकथा से क्या रिश्ता है?