सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत के बाहर
हिकायत सेरी राम
Hikayat Seri Rama
- भाषा मलय
- किसकी मलय परंपरा, कई हाथ
- कब रचना का समय पता नहीं; सबसे पुरानी पोथी 1633 से पहले की
- कहाँ आचे, सुमात्रा (सबसे पुरानी पोथी); केलंतान, मलेशिया (छाया नाटक)
यह कथा
मलय में लिखी रामकथा, हिकायत सेरी राम। हिकायत यानी सुनाई जाने वाली कहानी, इसलिए यह गद्य में है। यहाँ हनुमान सेरी राम के अपने बेटे हैं, और सीता सिति देवी। इसकी सबसे पुरानी पोथी 1633 से पहले की है, और केलंतान के छाया नाटक में इसके प्रसंग आज भी खेले जाते हैं।
एक नज़र में
हिकायत सेरी राम, अपनी लिपि में
حكاية سري رام
- लिपि
- जावी (अरबी लिपि), मलय
- रूप
- मलय गद्य की हिकायत, यानी सुनाई जाने वाली कहानी
- समय
- रचना का समय पता नहीं; सबसे पुरानी पोथी 1633 से पहले की
इस कथा की लंका
- हनुमान यहाँ सेरी राम के अपने बेटे हैं।
- वे ब्राह्मण के भेस में पानी का घड़ा लेकर लंकापुरी में जाते हैं, और अँगूठी उसी घड़े में छिपी होती है।
- लंका जलाने के बाद सिति देवी उनसे सेरेन्दिब पर्वत की उस चट्टान को प्रणाम करने को कहती हैं जहाँ आदम उतरे थे।
आज: केलंतान के छाया नाटक (वायांग कुलित) में इसके प्रसंग आज भी खेले जाते हैं।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
अशोक वाटिका
पहली रात: खोज
मलय कथा में उन्हें अशोक के बाग़ में नहीं, कमल वाले बाग़ में रखा गया है।
वहाँ पहरे पर जो लड़की है, वह विभीषण की अपनी बेटी है, कोई बूढ़ी राक्षसी नहीं।
वह लड़की पहरे पर तो है, पर उनसे बात भी करती है, और खाने को कुछ लाकर रखती है।
कमल वाले उस बाग़ में पानी की आवाज़ लगातार आती रहती है, इसलिए धीमी बातें दब जाती हैं।
एक ही पहरेदार, और उसका घर बदलते ही पूरी रात का मिज़ाज बदल जाता है।
हिकायत सेरी राम, मलय गद्य कथाउस पार का किनारा
तीसरा हिस्सा: ख़बर
मलय कथा में इस मौक़े पर छोटे भाई का नाम बार बार आता है।
वहाँ कई जगह वही आगे रहता है, तेज़ फ़ैसले लेता है, और लोग उसी की हिम्मत की बात करते हैं।
किनारे पर खड़े लोग पहले उसी का नाम पुकारते हैं।
वह आगे बढ़कर हाथ थामता है, और तभी बाकी सब पास आते हैं।
बड़ा भाई सही तो है, पर कई प्रसंगों में वह पीछे रह जाता है।
हिकायत सेरी राम, मलयइस कथा के 1 और पल खेल के भीतर पढ़े जा सकते हैं: आसमान के दर्शक।
इस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
यह कथा उनतालीस लंकाओं में से एक है। इन्हीं लंकाओं पर मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा बनी है: उनतालीस लंकाएँ।