
उनतालीस लंकाएँ · कौन कौन
कौन कौन
देहरादून का एक परिवार, धनुषकोडि के किनारे मिले मथाई जी, 1987 में खोए बाबूजी, और लंका का एक राजा। हर चेहरे पर दबाओ, उसका अपना पन्ना खुलेगा।
बालकअदासोलह साल की, देहरादून की
कथा प्रेमीअन्नूअदा की मम्मा, बनारस की
योद्धाकुंदनअदा के पापा, गढ़वाल के
जिज्ञासुतेनज़िनअदा का दोस्त, देहरादून का
यात्रीमथाई जीअलप्पुझा, केरल के
बाबूजीअन्नू के पिता, बनारस, 1987
राजा भानुप्रतापसन इकतीस से लंका में
और अम्मा, अन्नू की माँ: तीसरे खंड में साथ आती हैं, छड़ी लिए। उन्होंने कभी समुद्र नहीं देखा।
सदियों के मेहमान
दूसरे युगों से आए लोग
इस लंका में अदा का परिवार अकेला नहीं। सदियों से, अलग अलग जगहों से, पाँच पाँच लोगों के समूह इसमें उतरते रहे हैं, हर एक अपनी कथा की लंका में। उपन्यास में हर ऐसा मेहमान पहले हमारे परिवार की आँख से मिलता है, फिर उसका अपना अध्याय आता है।
- खंड 1 · केरल, 1795अम्मिणीतोलपावकूत्तु, यानी चमड़े की कठपुतलियों वाला छाया नाटक। उनकी लंका काली छाया की है, हर किनारे पर काँपती सुनहरी रेखा।
- खंड 1 · बाली, 1931रायकेचक का घेरा, जहाँ सब मिलकर "चक, चक" गाते हैं। उनकी लंका का आसमान दीये की लौ जैसा नारंगी है।
- खंड 1 · सियाम, 1836खमखोन के ऊँचे हरे, लाल और काले मुखौटे। उनकी लंका की छतें सुनहरी और नुकीली हैं।
- खंड 2 · दुनहुआंग, लगभग 820दोरजेरेशम मार्ग की गुफाओं में मिली तिब्बती रामकथा। याक के मक्खन वाले दीये।
- खंड 2 · अमरपुर, 1792ऊ तुनबर्मा का दरबार और उसकी यम ज़ातदो।
- खंड 2 · नदिया, 1843बिनयबंगाल की कृत्तिवासी रामायण, जो गाँव गाँव गाई जाती थी।
- खंड 3 · कश्मीर, 1866हाजरा और भवानीकश्मीरी रामावतारचरित, और बर्फ़ के नीचे जलती एक लंका।
- खंड 3 · जैसलमेर, लगभग 1900अभयजैन परंपरा की कथा, जिसमें लंका के लोग राक्षस नहीं, विद्याधर हैं।