पंचांग 2027

सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत में

हनुमान चालीसा

Hanuman Chalisa

  • भाषा अवधी
  • किसकी तुलसीदास से जुड़ी
  • ब्योरा 43 पद: 2 दोहे, 40 चौपाइयाँ, 1 दोहा
  • कहाँ परंपराएँ अलग अलग जगह बताती हैं

यह कथा

चालीस चौपाइयों की वह छोटी रचना जो रोज़ पढ़ी जाती है। उसमें इस पूरी रात की बातें गिनी चुनी पंक्तियों में याद कर ली गई हैं, और बहुत से लोग इस रात को इन्हीं पंक्तियों से जानते हैं।

एक नज़र में

हनुमान चालीसा, अपनी लिपि में

हनुमान चालीसा

लिपि
देवनागरी, अवधी
रूप
43 पद: शुरू में 2 दोहे, 40 चौपाइयाँ, अंत में 1 दोहा
समय
सोलहवीं सदी के अंत या सत्रहवीं की शुरुआत

इस कथा की लंका

  • लंका की यात्रा यहाँ कुछ गिनी चुनी पंक्तियों में याद की गई है, कथा की तरह नहीं।
  • ग्यारहवीं से बीसवीं चौपाई तक हनुमान जी की राम सेवा, लक्ष्मण को जिलाने समेत।

आज: करोड़ों लोग रोज़ पढ़ते हैं, बहुत से ज़ुबानी, ख़ासकर मंगलवार और शनिवार को।

स्रोत:

  1. en.wikipedia.org
  2. en.wikipedia.org, 2
  3. en.wikipedia.org, 3

इस कथा की एक खुली प्रति

सुंदरकांड के पल, इस कथा में

खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।

नाम का सवाल

तीसरा हिस्सा: ख़बर

छोटे रूप में जाना और बड़े रूप में लौटना, दोनों एक ही साँस में कह दिए जाते हैं।

पहले वे बिल्ली जितने छोटे होते हैं, फिर आग लिए पूरे नगर पर फैल जाते हैं।

एक साँस में यह सब कह दिया जाता है, और आगे बढ़ जाया जाता है।

इतने भर के सहारे करोड़ों लोग यह रात याद रखते हैं।

जो कांड अलग से पढ़ा जाता हो, उसकी गूँज ऐसी छोटी रचनाओं में भी मिलती है।

हनुमान चालीसा, चौपाई 9

हज़ार मुँह गिनने की कोशिश

पाँचवीं रात: शक्ति

चालीसा में लंका जलाने का ज़िक्र है, पर वहाँ भी कोई गिनती नहीं दी जाती।

वहाँ बस इतना है कि डरावना रूप धरकर लंका जलाई गई।

चालीसा में यह रात दो रूपों में सिमटती है, एक छोटा और एक डरावना।

छोटा रूप वह है जिसमें वे सीता के सामने जाते हैं, और डरावना वह जिसमें नगर जलता है।

और उसके ठीक बाद वाली चौपाई भीम रूप धरकर असुरों के संहार की बात करने लगती है।

हनुमान चालीसा; तुलना में

आसमान के दर्शक

पहली रात: खोज

दो साँसों में पूरी रात बीत जाती है।

छोटा रूप धरकर उन्हें दिखाना, और डरावना रूप धरकर लंका जलाना, बस इतना।

जो पढ़ता है वह ज़रा रुकता है, फिर आगे बढ़ जाता है।

इतने में ही समुद्र, नगर, बाग़ और आग, सब आ जाते हैं।

बहुत से लोग यह पूरी रात इतने से ही जानते हैं।

हनुमान चालीसा

जलती छतें

दूसरा दिन: आग

जलती छतों से उतरकर वे सीधे किनारे की ओर बढ़ते हैं।

पीछे नगर धधक रहा है, और आगे वही समुद्र है जिसे फिर से लाँघना है।

किनारे पर पहुँचकर वे पीछे मुड़कर देखते हैं, और आग वहीं से दिखती रहती है।

पैरों के नीचे रेत गरम है, और सामने पानी ठंडा।

चालीसा में यह सब सिर्फ़ एक पंक्ति बनकर रह जाता है।

इस कथा से खेल के पत्ते

खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।

  • वह चौपाई किस गिनती में है
  • दस मिनट की चालीसा
  • चालीस नहीं, तैंतालीस
  • कवि पर एक पुराना सवाल
  • पूरी रात, एक चौपाई में

खेल में ढूँढो

उपन्यास

यह कथा उनतालीस लंकाओं में से एक है। इन्हीं लंकाओं पर मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा बनी है: उनतालीस लंकाएँ।

हनुमान चालीसा इन त्योहारों के पन्नों पर भी आती है, उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 में: हनुमान जयंती, तुलसीदास जयंती। ये दिन, और साल का हर त्योहार और व्रत, एक बार दबाकर अपने फ़ोन के कैलेंडर में: Manu Vishranti Calendar जोड़ें।

सवाल जवाब

पूछे जाने वाले सवाल

हनुमान चालीसा किस भाषा में है?

अवधी।

हनुमान चालीसा किसकी रचना है?

तुलसीदास से जुड़ी।

हनुमान चालीसा कहाँ की है?

परंपराएँ अलग अलग जगह बताती हैं।