सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत में
रामावतारचरित
Ramavatara Charita (Kashmiri Ramayana)
- भाषा कश्मीरी
- किसकी प्रकाश राम, कुछ सूचियों में दिवाकर प्रकाश भट्ट
- कब उन्नीसवीं सदी के आसपास
- कहाँ कश्मीर घाटी
यह कथा
कश्मीरी की रामकथा, रामावतारचरित, जिसे प्रकाश राम ने उन्नीसवीं सदी में रचा। यहाँ सीता रावण और मंदोदरी की बेटी हैं, जिन्हें जन्म के बाद छोड़ दिया गया। रावण और लंका के बनने की कथा सुंदरकांड के भीतर आती है, और पूरी कथा में कश्मीर का खाना, कपड़े और रीति रिवाज भरे हैं।
एक नज़र में
रामावतारचरित, अपनी लिपि में
श्री रामावतारचरित
- लिपि
- देवनागरी (पहली छपाई फ़ारसी लिपि में)
- रूप
- सात सर्ग, शिव पार्वती संवाद; फ़ारसी बहर में, बीच बीच में गीत
- समय
- उन्नीसवीं सदी, लगभग 1847; पहली छपाई 1910 में
इस कथा की लंका
- रावण का जन्म और लंका के बनने की कथा सुंदरकांड के भीतर, हनुमान जी के जाने के समय आती है।
- सीता यहाँ रावण और मंदोदरी की बेटी हैं, जिन्हें जन्म के बाद छोड़ दिया गया था।
- लंका का बहुत बड़ा, शानदार वर्णन है; और पूरी कथा में कश्मीर का खाना, कपड़े और रीति रिवाज भरे हैं।
आज: इसके पद आज भी गाए जाते हैं; हिंदी और अंग्रेज़ी में अनुवाद छपे हैं।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
पहरेदारों की चौकी
पहली रात: खोज
पहरे वाले ऊनी लबादे पहने हैं, और उनके बोलने का ढंग घाटी वाला है।
चौकी के पीछे लकड़ी के घर हैं, ढलवाँ छतों वाले, और उन पर बर्फ़ पड़ी है।
उनके हाथों में गरम रखने वाली अँगीठी है, और वे उसे लबादे के भीतर छिपाए हुए हैं।
बातें भी वही होती हैं जो सर्दी की रात में होती हैं: कब बर्फ़ रुकेगी और कब सुबह होगी।
प्रकाश राम ने सब कुछ अपने आसपास से उठाया, इसलिए यह रात घाटी में बीतती लगती है।
रामावतारचरित, कश्मीरीइस कथा के 1 और पल खेल के भीतर पढ़े जा सकते हैं: उस पार का किनारा।
इस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
इस कथा की लंका, उपन्यास में
मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा उनतालीस लंकाएँ इस कथा की लंका में उतरती है। तीनों खंड लिखे जा चुके हैं, और प्रकाशन की तैयारी में हैं।
खंड 3, दो हज़ार अट्ठाईस लकीरें: जगह छीनी नहीं जाती। दी जाती है।- सदियों का एक मेहमान: हाजरा और भवानी, कश्मीर, 1866। खंड 3, दो हज़ार अट्ठाईस लकीरें
रामावतारचरित इन त्योहारों के पन्नों पर भी आती है, उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 में: सीता नवमी। ये दिन, और साल का हर त्योहार और व्रत, एक बार दबाकर अपने फ़ोन के कैलेंडर में: Manu Vishranti Calendar जोड़ें।