सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत में
रंगनाथ रामायण
Ranganatha Ramayanam
- भाषा तेलुगु, द्विपद छंद
- किसकी गोना बुद्धा रेड्डी, काकतीय काल के सामंत
- कब तेरहवीं सदी, लगभग 1280; छह कांड, लगभग 17,290 द्विपद
- कहाँ आंध्र
यह कथा
तेलुगु की पहली पूरी रामायण, द्विपद छंद में, जिसे गाकर सुनाया जाता है। इसीलिए यह दरबार की नहीं, लोगों की कथा लगती है। इसमें कई लोक प्रसंग जुड़े हैं, जैसे पुल बनाने में मदद करने वाली गिलहरी, और आज भी चमड़े की कठपुतलियों वाले नाटक इसके द्विपद गाते हैं।
एक नज़र में
रंगनाथ रामायण, अपनी लिपि में
శ్రీ రంగనాథ రామాయణము
- लिपि
- तेलुगु लिपि
- रूप
- द्विपद छंद, छह कांड, लगभग 17,290 द्विपद
- समय
- तेरहवीं सदी, लगभग 1280
इस कथा की लंका
- तेलुगु की पहली पूरी रामायण, और पहली जो संगीत में बाँधी गई।
- इसमें कई लोक प्रसंग जुड़े हैं जो वाल्मीकि में नहीं, जैसे पुल बनाने में मदद करने वाली गिलहरी।
आज: आंध्र और तेलंगाना की तोलु बोम्मलाटा, चमड़े की कठपुतलियों वाली मंडलियाँ, इसके द्विपद गाकर खेलती हैं।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
पेड़ की ऊँची डाल
पहली रात: खोज
तेलुगु की कथा में यह पल यहीं ख़त्म नहीं होता। ठुकराए जाने के तुरंत बाद एक और आवाज़ आती है।
मंदोदरी सामने आकर रावण को नीति समझाती है: जो बहू बेटी जैसी है, उसे मत छेड़। यह मार्ग ठीक नहीं।
सुंदरकांड में यह बात कम मिलती है, और यहाँ यह ठीक उसी घड़ी आती है जब वह सबसे ज़्यादा चुभती है।
रावण सुनता है, मानता नहीं, और चला जाता है। बग़ीचे में फिर वही चुप्पी लौट आती है।
इस कथा के 3 और पल खेल के भीतर पढ़े जा सकते हैं: अशोक वाटिका, नगर की गलियाँ, विभीषण की नीति।
इस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
यह कथा उनतालीस लंकाओं में से एक है। इन्हीं लंकाओं पर मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा बनी है: उनतालीस लंकाएँ।