सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत में
कंब रामायण
Kamba Ramayanam
- भाषा तमिल
- किसकी कंबन
- कब बारहवीं सदी; सुंदरकांडम् में 14 पडलम्
- कहाँ तेरषुंदूर, तमिलनाडु
यह कथा
तमिल की सबसे बड़ी रामकथा, जिसे कंबन ने रचा। इसमें हर हिस्से का अपना अध्याय है, जैसे नगर ढूँढने का अध्याय और लौटकर चरणों में सिर रखने का अध्याय। कंबन ब्योरे में नहीं, दृश्य में जाते हैं, इसलिए उनकी लंका देखी हुई लगती है।
एक नज़र में
कंब रामायण, अपनी लिपि में
கம்பராமாயணம்
- लिपि
- तमिल लिपि
- रूप
- लगभग 10,500 पद, छह कांड; सुंदरकांडम् में 14 पडलम् (अध्याय) और 1,329 पद
- समय
- बारहवीं सदी
इस कथा की लंका
- हर अध्याय एक घटना के नाम पर: समुद्र की छलाँग, नगर की खोज, सीता के दर्शन, रूप दिखाना, चूड़ामणि।
- नगर की खोज में कंबन लंका को इतने ब्योरे से दिखाते हैं कि वह देखी हुई लगती है।
- लौटकर हनुमान जी का पहला शब्द है "कण्डेन", यानी देख आया, ताकि राम को एक पल भी इंतज़ार न करना पड़े।
आज: तमिल घरों और मंदिरों में पढ़ी जाती है; केरल का चमड़े की कठपुतलियों वाला छाया नाटक, तोलपावकूत्तु, इसी से खेला जाता है।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
आसमान में लौटती टोली
तीसरा हिस्सा: ख़बर
लौटते हुए वे सीधे टोली के बीच नहीं उतरते, पहले राम के चरणों में सिर रखते हैं।
ख़बर बाद में आती है, पहले वह झुकना आता है।
बाकी टोली पीछे खड़ी रहती है, और कोई आगे बढ़कर पहले नहीं बोलता।
झुकते वक़्त उनके हाथ में वही निशानी है, और उसी को पहले आगे बढ़ाया जाता है।
कंबन ने इसी झुकने पर पूरे अध्याय का नाम रखा है।
कंब रामायण, सुंदर कांडम्दधिमुख की फ़रियाद
तीसरा हिस्सा: ख़बर
शिकायत करने वाले सिर झुकाकर बोलते हैं, हाथ जोड़कर, और नाम लेने से पहले पद लेते हैं।
रावण सुनता है, बीच में नहीं टोकता, और जवाब देने से पहले सबको देख लेता है।
शिकायत में वे यह भी कहते हैं कि बाग़ की देखभाल पीढ़ियों से उनके घर के ज़िम्मे थी।
उनकी आवाज़ बीच में काँपती है, और वे चुप होकर सिर और झुका लेते हैं।
कंबन के दरबार में लहजा भी उतना ही मायने रखता है जितनी बात।
कंब रामायण, सुंदर कांडम्सोए हुए बजाने वाले
पहली रात: खोज
कमरे एक के बाद एक खुलते जाते हैं, और हर कमरे में कोई न कोई सोया पड़ा है।
कोई करवट लिए है, कोई हाथ फैलाए, और किसी का सिर दूसरे के कंधे पर टिका है।
कोई वीणा को सीने से लगाए है, किसी के हाथ से मृदंग लुढ़ककर दूर जा पड़ा है।
किसी की चूड़ियाँ बजती हैं जब वह नींद में करवट लेती है, और वह आवाज़ कमरे में गूँजती है।
कंबन के लिए लंका का ठाठ दिखाना कथा का ज़रूरी हिस्सा था, क्योंकि जितना बड़ा नगर, उतना बड़ा वह काम जो एक अकेला वहाँ कर रहा है।
कंब रामायण, सुंदर कांडम्परिखा और प्राकार
पहली रात: खोज
दीवार इतनी लंबी है कि उसका सिरा दोनों तरफ़ नज़र से बाहर चला जाता है।
नीचे खाई है, और उसके पानी में दीवार की परछाईं उलटी खड़ी दिखती है।
पत्थर इतने कसकर जोड़े गए हैं कि बीच में उँगली तक नहीं जाती।
खाई के पानी में उतरती सीढ़ियाँ हैं, और उन पर उतरने वालों के लिए पहरा अलग है।
कंबन के लिए लंका सिर्फ़ दुश्मन का ठिकाना नहीं, एक बड़ा नगर है।
कंब रामायण, सुंदर कांडम्, नगर वाला पडलम्जम्बुमाली का रथ
दूसरा दिन: आग
तमिल कथा में इस मुक़ाबले को अलग तरह से तौला गया है।
वहाँ लड़ाई से ज़्यादा यह देखा जाता है कि सामने वाला किस घराने से है।
सामने आने से पहले वह अपना नाम और अपने पिता का नाम बताता है।
जवाब में उसे भी वही आदर मिलता है, और उसके बाद ही हाथ उठता है।
कंबन के लिए वंश और मर्यादा हर दृश्य में साथ चलते हैं।
कंब रामायण, सुंदर कांडम्नगर की गलियाँ
पहली रात: खोज
वे दूर से नगर देखते हैं और ठिठक जाते हैं।
सोने के परकोटे, मणियों के द्वार और ऊँचे महल देखकर उन्हें शक होता है कि कहीं यह देवताओं का नगर तो नहीं।
फिर वे गली गली, छत छत, बाग़ बाग़ छानते हैं, और हर मोड़ पर कुछ नया मिलता है।
रात बीतती जाती है और नगर ख़त्म नहीं होता। हर गली के बाद एक और गली निकल आती है।
नशे का घर
पहली रात: खोज
तमिल कथा में महल के भीतर की खोज अपने अध्याय में आती है, और वहाँ कवि ठहरकर देखते हैं।
सोते हुए लोग, बुझते दीये, बिखरी मालाएँ, सब एक एक करके दिखते हैं।
किसी कमरे में इत्र की गंध है, किसी में जली हुई बत्ती की।
फ़र्श पर गिरे हुए हार और खाली प्याले पड़े हैं, और कोई उन्हें उठाने वाला नहीं।
और हर कमरे के बाद वही एक बात लौटती है कि जिसे ढूँढ रहे हैं वे यहाँ नहीं हैं।
कंब रामायण, सुंदर कांडम्, महल के भीतर वाला हिस्सानगर की गलियाँ
दूसरा दिन: आग
तमिल कथा में नगर की गलियाँ अलग से देखी जाती हैं, और उस अध्याय का नाम ही नगर ढूँढने पर है।
कंबन दीवार, फाटक, बाज़ार और छतों को एक एक करके दिखाते हैं, जैसे कोई सचमुच चलकर देख रहा हो।
बाज़ार में तराज़ू झूल रहे हैं, और दुकानों के आगे बोरियाँ रखी हैं।
ऊपर छतों पर कपड़े सूख रहे हैं, और उनके बीच से रोशनी छनकर गली में गिरती है।
इसीलिए उनकी लंका पढ़ी हुई कम, देखी हुई ज़्यादा लगती है।
कंब रामायण, सुंदर कांडम्, नगर ढूँढने वाला हिस्साराम का शिबिर
तीसरा हिस्सा: ख़बर
तमिल की कथा में यह पल लौटकर चरणों में सिर रखने का है, और उसी नाम से वह आख़िरी अध्याय भी है।
पहले दूर से आता शोर, फिर वानरों की उछल कूद, फिर सामने खड़ा वह जो लौटकर आया है।
वे आगे बढ़कर कंधे पकड़ते हैं, और कुछ कहने से पहले ही आवाज़ रुक जाती है।
आसपास खड़े सब पीछे हट जाते हैं, ताकि बीच में जगह बन सके।
यहाँ कहने वाला राम के चेहरे पर सबसे ज़्यादा ठहरता है, उस पल पर जब वे सुनते हैं कि सीता जीवित हैं।
इस कथा के 3 और पल खेल के भीतर पढ़े जा सकते हैं: उस पार का किनारा, कांड का आख़िरी श्लोक, वानरों का घेरा।
इस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
इस कथा की लंका, उपन्यास में
मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा उनतालीस लंकाएँ इस कथा की लंका में उतरती है। तीनों खंड लिखे जा चुके हैं, और प्रकाशन की तैयारी में हैं।
खंड 1, पाँचवाँ चेहरा: पाँच लोग, एक दरवाज़ा, और लंका का एक राजा जो चाहता है कि एक यहीं रहे।
खंड 2, पानी पर आग: इस बार पूरी तैयारी है।- सदियों का एक मेहमान: अम्मिणी, केरल, 1795। खंड 1, पाँचवाँ चेहरा
कंब रामायण इन त्योहारों के पन्नों पर भी आती है, उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 में: नरसिंह जयंती। ये दिन, और साल का हर त्योहार और व्रत, एक बार दबाकर अपने फ़ोन के कैलेंडर में: Manu Vishranti Calendar जोड़ें।
सुंदरकांड पर और
यही पल, सारी रामकथाओं में एक साथ: