सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत में
तोरवे रामायण
Torave Ramayana
- भाषा कन्नड़
- किसकी नरहरि, जिन्हें कुमार वाल्मीकि कहा जाता है
- कब लगभग 1500 ईस्वी; भामिनी षट्पदी छंद, नडुगन्नड़ भाषा
- कहाँ तोरवे, कर्नाटक
यह कथा
कन्नड़ की पहली वैष्णव रामकथा, भामिनी षट्पदी छंद में, जिसे गाकर पढ़ा जाता है। इसके कवि नरहरि को कुमार वाल्मीकि कहा जाता है। कथा शिव पार्वती को सुनाते हैं, और यह मोटे तौर पर वाल्मीकि के साथ चलती है।
एक नज़र में
तोरवे रामायण, अपनी लिपि में
ತೊರವೆ ರಾಮಾಯಣ
- लिपि
- कन्नड़ लिपि
- रूप
- भामिनी षट्पदी छंद, लगभग 112 संधि और 5,000 पद; शिव पार्वती को सुनाते हैं
- समय
- लगभग 1500 ईस्वी
इस कथा की लंका
- कन्नड़ की पहली वैष्णव रामायण; उससे पुरानी नागचंद्र की जैन रामायण है।
- कथा मोटे तौर पर वाल्मीकि की, अध्यात्म रामायण की छाया के साथ।
- रावण में दुखी नायक के कुछ रंग बचे हैं।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
किंकरों की टोली
दूसरा दिन: आग
किंकर चारों ओर से घेर लेते हैं, और बीच में खड़ा अकेला वानर हिलता तक नहीं।
पहला हमला होता है, वे एक ही हाथ से उसे रोक देते हैं, और भीड़ पीछे हट जाती है।
घेरा टूटते ही कुछ भागते हैं, और कुछ वहीं खड़े रह जाते हैं।
उनमें से एक दौड़कर दरबार की ओर जाता है, यही ख़बर लेकर कि अब बड़ी सेना चाहिए।
तोरवे यहाँ गिनती पर नहीं रुकते, उस ठहरी हुई हिम्मत पर रुकते हैं।
तोरवे रामायण, सुंदरकांडनगर का चौक
दूसरा दिन: आग
चौक से आग चारों ओर फैलती है, और लोग बीच में फँसकर भागते हैं।
छतें एक एक कर गिरती हैं, और ऊपर आसमान लाल हो जाता है।
गिरती दीवारों के बीच से लोग सामान लेकर निकलते हैं, और कुछ वहीं छोड़ आते हैं।
आग चौक के बीच वाले पेड़ तक पहुँचती है, और वह एक साँस में भड़क उठता है।
वहीं वह दावा भी आता है कि यह जलाना त्रिपुर जलाने वाले से पाँच गुना कहा जाए।
तोरवे रामायण, आठवीं संधि, लंका दहनजलती छतें
दूसरा दिन: आग
छत दर छत लपटें उठती हैं, और नीचे नगर भाग रहा है।
कन्नड़ की कथा यहाँ रुककर एक बड़ी बात कह देती है: यह जलाना त्रिपुर जलाने वाले तीन आँखों वाले से पाँच गुना कहा जाए।
यह पल वहाँ गाने की लय में चलता है, इसलिए आग भी लय में फैलती है, एक छत, फिर दूसरी, फिर तीसरी।
ऊपर से देखने वाले के लिए यह जीत नहीं, एक हिसाब है जो पूरा हो रहा है।
इस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
यह कथा उनतालीस लंकाओं में से एक है। इन्हीं लंकाओं पर मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा बनी है: उनतालीस लंकाएँ।