सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत में
जगमोहन रामायण
Jagamohana Ramayana
- भाषा ओड़िया
- किसकी बलराम दास
- कब लगभग 1500 ईस्वी
- कहाँ पुरी, ओड़िशा
यह कथा
ओड़िया की रामकथा जिसे बलराम दास ने लगभग 1500 ईस्वी में रचा, और जिसे दांडी रामायण भी कहते हैं, उस छंद के नाम पर जिसमें यह लिखी है। ओड़िशा में यह घर घर की पोथी है, और इसमें राम जगन्नाथ से जोड़े जाते हैं। विलंका रामायण से यह अलग है: वह लंका के बाद की कथा है, यह पूरी रामकथा।
एक नज़र में
जगमोहन रामायण, अपनी लिपि में
ଜଗମୋହନ ରାମାୟଣ
- लिपि
- ओड़िया लिपि
- रूप
- सात कांड, दांडी छंद में (इसीलिए दांडी रामायण); शिव पार्वती को सुनाते हैं
- समय
- लगभग 1500 ईस्वी
इस कथा की लंका
- राम यहाँ जगन्नाथ से जोड़े जाते हैं; पूरी कथा जगन्नाथ की संस्कृति में रची है।
- सीता का वनवास नहीं होता; वे अयोध्या में ख़ुशी से रहती हैं।
- इसके सुंदरकांड के ब्योरे पर कोई छपा अध्ययन नहीं मिला।
आज: ओड़िशा में बहुत लोकप्रिय, घर घर की पोथी।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
इस कथा के 2 और पल खेल के भीतर पढ़े जा सकते हैं: अशोक वाटिका, वाटिका का सरोवर।
इस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
यह कथा उनतालीस लंकाओं में से एक है। इन्हीं लंकाओं पर मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा बनी है: उनतालीस लंकाएँ।
जगमोहन रामायण इन त्योहारों के पन्नों पर भी आती है, उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 में: रथ यात्रा। ये दिन, और साल का हर त्योहार और व्रत, एक बार दबाकर अपने फ़ोन के कैलेंडर में: Manu Vishranti Calendar जोड़ें।