सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत में
विलंका रामायण
Vilanka Ramayana
- भाषा ओड़िया
- किसकी सारला दास, जगतसिंहपुर की सारला चंडी को समर्पित
- कब पंद्रहवीं सदी; दांडी छंद में, गाकर सुनाने लायक
- कहाँ ओड़िशा
यह कथा
ओड़िया की वह कथा जो लंका के बाद शुरू होती है। पाताल में एक दूसरी लंका, विलंका, और वहाँ हज़ार सिर वाला रावण। यह कथा संस्कृत की अद्भुत रामायण से मिलती है, जहाँ भी अंत सीता के हाथ होता है। यही इस खेल की चौथी रात है।
एक नज़र में
विलंका रामायण, अपनी लिपि में
ବିଲଙ୍କା ରାମାୟଣ
- लिपि
- ओड़िया लिपि
- रूप
- दांडी छंद, गाकर सुनाने लायक; शिव पार्वती को सुनाते हैं
- समय
- पंद्रहवीं सदी के बीच
इस कथा की लंका
- इसका अपना सुंदरकांड नहीं; यह लंका के बाद की कथा है।
- सीता कहती हैं कि राम ने छोटा रावण मारा है, और उन्हें पाताल की विलंका के हज़ार सिर वाले रावण से लड़ने को कहती हैं।
- हनुमान जी की यात्रा यहाँ नीचे पाताल की ओर है; वहाँ उन्हें निगल लिया जाता है, और राम का नाम सुनकर वे बाहर आते हैं।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
वह सवाल जो बचा रह गया
तीसरा हिस्सा: ख़बर
सभा में सब मान चुके हैं कि सब ख़त्म हो गया, और तभी कोई हाथ उठाकर खड़ा होता है।
जहाँ बाकी लोग उठकर जाने लगते हैं, वहीं से यह रात शुरू होती है।
पूछने वाला कहता है कि जो मारा गया, क्या उससे बड़ा कोई और भी था।
सभा में सन्नाटा छा जाता है, और फिर उसी सवाल से पाताल का रास्ता खुल जाता है।
यही बताता है कि कथाएँ ख़त्म नहीं होतीं, दूसरी कथाओं में बदल जाती हैं।
विलंका रामायण, सारला दासरावण का दरबार
दूसरा दिन: आग
एक और दरबार ऐसा ही है, पर वह पाताल की दूसरी लंका का है।
वहाँ एक असुरी माया का रूप धरकर हनुमान को निगल लेती है, और हज़ार सिर वाले रावण के सामने उगल देती है। दरबार हँसता है।
छूटते ही वे उसी दरबार में रानियों के नाक कान काट देते हैं, और बात वहीं पलट जाती है।
उस पूरी रात का हिसाब अलग है, और वह इसी खेल में अलग से खुलता है।
इस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
इस कथा की लंका, उपन्यास में
मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा उनतालीस लंकाएँ इस कथा की लंका में उतरती है। तीनों खंड लिखे जा चुके हैं, और प्रकाशन की तैयारी में हैं।
खंड 2, पानी पर आग: इस बार पूरी तैयारी है।
विलंका रामायण इन त्योहारों के पन्नों पर भी आती है, उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 में: बाली जात्रा। ये दिन, और साल का हर त्योहार और व्रत, एक बार दबाकर अपने फ़ोन के कैलेंडर में: Manu Vishranti Calendar जोड़ें।