पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ · रामकथाएँ

उनतालीस दरवाज़े

लंका की खोज खेल में सुंदरकांड उनतालीस रामकथाओं में कहा गया है, ईसा से पाँच सौ बरस पहले की वाल्मीकि रामायण से 1968 की मरानाओ कथा तक, संस्कृत से थाई तक। हर कथा की लंका अलग है। नीचे चलो, दरवाज़े घूमेंगे, और सामने वाला दरवाज़ा अपनी कथा खोलेगा।

उनतालीस दरवाज़े

हर दरवाज़ा एक रामकथा है, अपनी भाषा, अपने कवि और अपनी लंका के साथ। नीचे चलो, या दरवाज़े पर दबाओ। सुनहरे दरवाज़ों में गाथा उतरती है।

वाल्मीकि रामायण

Valmiki Ramayana

खंड 1 · खंड 3

कवि
वाल्मीकि, जिन्हें आदिकवि कहा जाता है
कब
सबसे पुरानी; पहला रूप ईसा से लगभग पाँच सौ बरस पहले, कुछ हिस्से बाद के
कहाँ
उत्तर भारत, कोसल; आश्रम की कई जगहें मानी जाती हैं, जैसे बिठूर
लिपि
देवनागरी, संस्कृत
रूप
लगभग 24,000 श्लोक, सात कांड; सुंदरकांड 68 सर्गों का (दक्षिणी पाठ में)

इस कथा की लंका

  • पूरा सुंदरकांड हनुमान जी पर टिका है; पूरे ग्रंथ में यही एक कांड है जिसका नायक राम नहीं।
  • रात में पूरे नगर की खोज: महल, सोते हुए लोग, और अशोक वाटिका में पहरे के बीच सीता जी।
  • अँगूठी देना, सीता जी का साथ चलने से मना करना, बाग़ उजाड़ना, पूँछ में आग, और जलती लंका।

सुंदरकांड इस ग्रंथ का सबसे ज़्यादा पढ़ा जाने वाला हिस्सा है।

वाल्मीकि रामायणरामचरितमानसअध्यात्म रामायणकण्णस्स रामायणम्लंका सिप होमापिला रामायणम्रामचरितम्महारादिया लावानातिब्बती रामकथासिद्धि रामायणरामायण कल्पवृक्षम्रामचंद्र चरित पुराणरामावतारहिकायत सेरी राममोल्ला रामायणम्जगमोहन रामायणरामावतारचरितगिरधर रामायणभानुभक्त रामायणकवितावलीयम ज़ातदोफ्रा लक फ्रा लामरीमकेरककविन रामायणरामकियेनकंब रामायणपउमचरियकूर्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराणमहाभारत, रामोपाख्यानअद्भुत रामायणआनंद रामायणकृत्तिवासी रामायणरंगनाथ रामायणभावार्थ रामायणअध्यात्म रामायण किलिप्पाट्टुसप्तकांड रामायणविलंका रामायणतोरवे रामायणहनुमान चालीसाई.पू. 5000500100015002000वाल्मीकि रामायण, सबसे पुरानी; पहला रूप ईसा से लगभग पाँच सौ बरस पहले, कुछ हिस्से बाद केरामचरितमानस, सन 1574 में अयोध्या में शुरू, रामनवमी के दिनअध्यात्म रामायण, तेरहवीं से पंद्रहवीं सदीकण्णस्स रामायणम्, चौदहवीं से पंद्रहवीं सदीलंका सिप हो, पक्का नहीं; एक अध्ययन मुख्य काव्य को चौदहवीं पंद्रहवीं सदी में रखता हैमापिला रामायणम्, बीसवीं सदी की शुरुआत का गीत; 1976 में लिखकर दर्ज हुआरामचरितम्, बारहवीं सदी का अंत या तेरहवीं की शुरुआत; कुछ इसे चौदहवीं सदी तक रखते हैंमहारादिया लावाना, कथा सत्रहवीं से उन्नीसवीं सदी के बीच पहुँची होगी (फ़्रांसिस्को का अनुमान); 1968 में दर्ज, 1969 में छपीतिब्बती रामकथा, पोथियाँ लगभग 750 से 1000 ईस्वी कीसिद्धि रामायण, सन 1913 में रचा; छपा 2010 मेंरामायण कल्पवृक्षम्, 1933 के आसपास शुरू, 1962 तक पूरा; 1970 का ज्ञानपीठरामचंद्र चरित पुराण, लगभग 1100 ईस्वी (उनकी दूसरी रचना 1105 की है)रामावतार, सन 1698 में पूरी हुई (विक्रम संवत 1755)हिकायत सेरी राम, रचना का समय पता नहीं; सबसे पुरानी पोथी 1633 से पहले कीमोल्ला रामायणम्, सोलहवीं सदीजगमोहन रामायण, लगभग 1500 ईस्वीरामावतारचरित, उन्नीसवीं सदी, लगभग 1847; पहली छपाई 1910 मेंगिरधर रामायण, सन 1835 में पूरा हुआभानुभक्त रामायण, 1844 से 1853 के बीच; पूरी छपी 1887 मेंकवितावली, सत्रहवीं सदी की शुरुआत, लगभग 1610 के दशक मेंयम ज़ातदो, परंपरा ग्यारहवीं सदी के राजा अनिरुद्ध तक जाती है; पहला लिखा ज़िक्र 1527; मुख्य रचनाएँ 1775 सेफ्रा लक फ्रा लाम, अठारहवीं सदी तक पूरीरीमकेर, बचा हुआ पहला भाग सोलहवीं सत्रहवीं सदी का, दूसरा अठारहवीं का; राम का ज़िक्र सातवीं सदी के शिलालेख मेंककविन रामायण, नौवीं सदी का अंत, लगभग 856 से 930 ईस्वीरामकियेन, आज का पूरा पाठ 1797 का; पुराने रूप 1767 में अयुत्थया के गिरने पर खो गएकंब रामायण, बारहवीं सदीपउमचरिय, तीसरी सदी से बाद की नहीं; कवि ख़ुद इसे महावीर के 530 बरस बाद का बताते हैंकूर्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण, कूर्म पुराण लगभग 550 से 850 ईस्वी; आज का ब्रह्मवैवर्त शायद पंद्रहवीं सोलहवीं सदी कामहाभारत, रामोपाख्यान, महाभारत के साथ, मोटे तौर पर ईसा से तीसरी सदी पहले से तीसरी सदी बाद तकअद्भुत रामायण, चौदहवीं पंद्रहवीं सदीआनंद रामायण, लगभग पंद्रहवीं सदीकृत्तिवासी रामायण, पंद्रहवीं सदी; पहली छपाई 1802 में श्रीरामपुर सेरंगनाथ रामायण, तेरहवीं सदी, लगभग 1280भावार्थ रामायण, सोलहवीं सदी का अंत, लगभग 1595 से 1599अध्यात्म रामायण किलिप्पाट्टु, सोलहवीं सदीसप्तकांड रामायण, चौदहवीं सदीविलंका रामायण, पंद्रहवीं सदी के बीचतोरवे रामायण, लगभग 1500 ईस्वीहनुमान चालीसा, सोलहवीं सदी के अंत या सत्रहवीं की शुरुआत

नक्शे पर यह कथा कहाँ की है, और समय रेखा पर कब की। बाकी बिंदु बाकी अड़तीस कथाएँ हैं।

पूरा पन्नाखुली प्रति

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एक एक कर

उनतालीस कथाएँ, विस्तार से

कौन सी कथा किस भाषा में है, किसने कब कही, कहाँ, किस रूप में, और उसकी लंका कैसी है। हर बात के साथ उसका स्रोत। नक्शे और समय रेखा पर हर बिंदु एक कथा है; उस पर दबाओ।

वाल्मीकि रामायणरामचरितमानसअध्यात्म रामायणकण्णस्स रामायणम्लंका सिप होमापिला रामायणम्रामचरितम्महारादिया लावानातिब्बती रामकथासिद्धि रामायणरामायण कल्पवृक्षम्रामचंद्र चरित पुराणरामावतारहिकायत सेरी राममोल्ला रामायणम्जगमोहन रामायणरामावतारचरितगिरधर रामायणभानुभक्त रामायणकवितावलीयम ज़ातदोफ्रा लक फ्रा लामरीमकेरककविन रामायणरामकियेनकंब रामायणपउमचरियकूर्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराणमहाभारत, रामोपाख्यानअद्भुत रामायणआनंद रामायणकृत्तिवासी रामायणरंगनाथ रामायणभावार्थ रामायणअध्यात्म रामायण किलिप्पाट्टुसप्तकांड रामायणविलंका रामायणतोरवे रामायणहनुमान चालीसाई.पू. 5000500100015002000वाल्मीकि रामायण, सबसे पुरानी; पहला रूप ईसा से लगभग पाँच सौ बरस पहले, कुछ हिस्से बाद केरामचरितमानस, सन 1574 में अयोध्या में शुरू, रामनवमी के दिनअध्यात्म रामायण, तेरहवीं से पंद्रहवीं सदीकण्णस्स रामायणम्, चौदहवीं से पंद्रहवीं सदीलंका सिप हो, पक्का नहीं; एक अध्ययन मुख्य काव्य को चौदहवीं पंद्रहवीं सदी में रखता हैमापिला रामायणम्, बीसवीं सदी की शुरुआत का गीत; 1976 में लिखकर दर्ज हुआरामचरितम्, बारहवीं सदी का अंत या तेरहवीं की शुरुआत; कुछ इसे चौदहवीं सदी तक रखते हैंमहारादिया लावाना, कथा सत्रहवीं से उन्नीसवीं सदी के बीच पहुँची होगी (फ़्रांसिस्को का अनुमान); 1968 में दर्ज, 1969 में छपीतिब्बती रामकथा, पोथियाँ लगभग 750 से 1000 ईस्वी कीसिद्धि रामायण, सन 1913 में रचा; छपा 2010 मेंरामायण कल्पवृक्षम्, 1933 के आसपास शुरू, 1962 तक पूरा; 1970 का ज्ञानपीठरामचंद्र चरित पुराण, लगभग 1100 ईस्वी (उनकी दूसरी रचना 1105 की है)रामावतार, सन 1698 में पूरी हुई (विक्रम संवत 1755)हिकायत सेरी राम, रचना का समय पता नहीं; सबसे पुरानी पोथी 1633 से पहले कीमोल्ला रामायणम्, सोलहवीं सदीजगमोहन रामायण, लगभग 1500 ईस्वीरामावतारचरित, उन्नीसवीं सदी, लगभग 1847; पहली छपाई 1910 मेंगिरधर रामायण, सन 1835 में पूरा हुआभानुभक्त रामायण, 1844 से 1853 के बीच; पूरी छपी 1887 मेंकवितावली, सत्रहवीं सदी की शुरुआत, लगभग 1610 के दशक मेंयम ज़ातदो, परंपरा ग्यारहवीं सदी के राजा अनिरुद्ध तक जाती है; पहला लिखा ज़िक्र 1527; मुख्य रचनाएँ 1775 सेफ्रा लक फ्रा लाम, अठारहवीं सदी तक पूरीरीमकेर, बचा हुआ पहला भाग सोलहवीं सत्रहवीं सदी का, दूसरा अठारहवीं का; राम का ज़िक्र सातवीं सदी के शिलालेख मेंककविन रामायण, नौवीं सदी का अंत, लगभग 856 से 930 ईस्वीरामकियेन, आज का पूरा पाठ 1797 का; पुराने रूप 1767 में अयुत्थया के गिरने पर खो गएकंब रामायण, बारहवीं सदीपउमचरिय, तीसरी सदी से बाद की नहीं; कवि ख़ुद इसे महावीर के 530 बरस बाद का बताते हैंकूर्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण, कूर्म पुराण लगभग 550 से 850 ईस्वी; आज का ब्रह्मवैवर्त शायद पंद्रहवीं सोलहवीं सदी कामहाभारत, रामोपाख्यान, महाभारत के साथ, मोटे तौर पर ईसा से तीसरी सदी पहले से तीसरी सदी बाद तकअद्भुत रामायण, चौदहवीं पंद्रहवीं सदीआनंद रामायण, लगभग पंद्रहवीं सदीकृत्तिवासी रामायण, पंद्रहवीं सदी; पहली छपाई 1802 में श्रीरामपुर सेरंगनाथ रामायण, तेरहवीं सदी, लगभग 1280भावार्थ रामायण, सोलहवीं सदी का अंत, लगभग 1595 से 1599अध्यात्म रामायण किलिप्पाट्टु, सोलहवीं सदीसप्तकांड रामायण, चौदहवीं सदीविलंका रामायण, पंद्रहवीं सदी के बीचतोरवे रामायण, लगभग 1500 ईस्वीहनुमान चालीसा, सोलहवीं सदी के अंत या सत्रहवीं की शुरुआत

जिन लंकाओं में गाथा उतरती है 12

वाल्मीकि रामायण

Valmiki Ramayana

खंड 1 · खंड 3

  • कवि वाल्मीकि, जिन्हें आदिकवि कहा जाता है
  • कब सबसे पुरानी; पहला रूप ईसा से लगभग पाँच सौ बरस पहले, कुछ हिस्से बाद के
  • कहाँ उत्तर भारत, कोसल; आश्रम की कई जगहें मानी जाती हैं, जैसे बिठूर
  • लिपि देवनागरी, संस्कृत
  • रूप लगभग 24,000 श्लोक, सात कांड; सुंदरकांड 68 सर्गों का (दक्षिणी पाठ में)

इस कथा की लंका

  • पूरा सुंदरकांड हनुमान जी पर टिका है; पूरे ग्रंथ में यही एक कांड है जिसका नायक राम नहीं।
  • रात में पूरे नगर की खोज: महल, सोते हुए लोग, और अशोक वाटिका में पहरे के बीच सीता जी।
  • अँगूठी देना, सीता जी का साथ चलने से मना करना, बाग़ उजाड़ना, पूँछ में आग, और जलती लंका।

सुंदरकांड इस ग्रंथ का सबसे ज़्यादा पढ़ा जाने वाला हिस्सा है।

स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · press.princeton.edu · खुली प्रति

रामचरितमानस

Ramcharitmanas

खंड 1 · खंड 3

  • कवि गोस्वामी तुलसीदास, काशी के संत कवि
  • कब सन 1574 में अयोध्या में शुरू, रामनवमी के दिन
  • कहाँ अयोध्या और काशी
  • लिपि देवनागरी, अवधी
  • रूप सात कांड, चौपाई और दोहे; सुंदरकांड 60 दोहों का

इस कथा की लंका

  • हनुमान जी मच्छर जितना रूप लेकर लंका में जाते हैं, और लंकिनी को एक मुक्का पड़ते ही समझ आ जाता है कि रावण का अंत शुरू हो गया।
  • विभीषण का घर तुलसी के पौधों और राम के आयुधों के निशान से पहचाना जाता है; वाल्मीकि के सुंदरकांड में यह मुलाक़ात नहीं।
  • लंका जलाकर हनुमान जी फिर सीता जी के सामने हाथ जोड़कर खड़े होते हैं, और तभी चूड़ामणि मिलती है।

उत्तर भारत की रामलीला इसी से खेली जाती है (यूनेस्को सूची, 2008), और सुंदरकांड का पाठ घर घर होता है।

स्रोत: en.wikipedia.org · britannica.com · ich.unesco.org · खुली प्रति

तिब्बती रामकथा

Tibetan Ramayana (Dunhuang)

खंड 2 · दोरजे, दुनहुआंग, लगभग 820

  • कवि कवि अज्ञात; दुनहुआंग की छह पोथियाँ
  • कब पोथियाँ लगभग 750 से 1000 ईस्वी की
  • कहाँ दुनहुआंग की मोगाओ गुफाएँ, रेशम मार्ग, चीन
  • लिपि तिब्बती; पोथियों पर कोई शीर्षक नहीं
  • रूप छोटा गद्य पद्य मिला रूप, काग़ज़ के खर्रों पर

इस कथा की लंका

  • राम तीन वानरों को अँगूठी और एक चिट्ठी देकर भेजते हैं; यहाँ चिट्ठियाँ पूरी कथा में चलती हैं।
  • हनुमंत अकेले छलाँग लगाते हैं और सीता को नौ दीवारों वाले, बिना दरवाज़े के क़िले में पाते हैं।
  • पूँछ पर घी में भीगा कपड़ा बाँधकर आग लगाई जाती है, और वे राक्षसों का क़िला जला देते हैं।

स्रोत: jainqq.org · searcharchives.bl.uk · earlytibet.com · खुली प्रति

श्री रामावतारचरित

रामावतारचरित

Ramavatara Charita (Kashmiri Ramayana)

खंड 3 · हाजरा और भवानी, कश्मीर, 1866

  • कवि प्रकाश राम कुर्यग्रामी; ग्रियर्सन के संस्करण में दिवाकर प्रकाश भट्ट
  • कब उन्नीसवीं सदी, लगभग 1847; पहली छपाई 1910 में
  • कहाँ कश्मीर घाटी
  • लिपि देवनागरी (पहली छपाई फ़ारसी लिपि में)
  • रूप सात सर्ग, शिव पार्वती संवाद; फ़ारसी बहर में, बीच बीच में गीत

इस कथा की लंका

  • रावण का जन्म और लंका के बनने की कथा सुंदरकांड के भीतर, हनुमान जी के जाने के समय आती है।
  • सीता यहाँ रावण और मंदोदरी की बेटी हैं, जिन्हें जन्म के बाद छोड़ दिया गया था।
  • लंका का बहुत बड़ा, शानदार वर्णन है; और पूरी कथा में कश्मीर का खाना, कपड़े और रीति रिवाज भरे हैं।

इसके पद आज भी गाए जाते हैं; हिंदी और अंग्रेज़ी में अनुवाद छपे हैं।

स्रोत: searchkashmir.org · ia800200.us.archive.org · melow.in · खुली प्रति

ရာမဇာတ်တော်

यम ज़ातदो

Yama Zatdaw

खंड 2 · ऊ तुन, अमरपुर, 1792

  • कवि बर्मी दरबार और मंच की परंपरा; कई अलग रचनाएँ
  • कब परंपरा ग्यारहवीं सदी के राजा अनिरुद्ध तक जाती है; पहला लिखा ज़िक्र 1527; मुख्य रचनाएँ 1775 से
  • कहाँ म्यांमार, ख़ासकर कोनबौंग दरबार
  • लिपि बर्मी लिपि
  • रूप मुखौटा नृत्य नाटक, कठपुतली, गीत और गद्य कथाएँ

इस कथा की लंका

  • एक शाप से हनुमान जी की आधी शक्ति चली गई है, और जाम्बवान उन्हें भेजने को कहते हैं।
  • लंका में वे अशोक के पेड़ में छिपकर सीता को धीरे से राम की कथा सुनाते हैं, और अँगूठी से पहचान होती है।
  • सबूत के लिए सीता के सात बाल लाते हैं; और पुल पर एक विशाल केकड़े के डंक उखाड़ते हैं।

बर्मा के शास्त्रीय नृत्य नाटक और कठपुतली में आज भी, जहाँ राम बोधिसत्व की तरह खेले जाते हैं।

स्रोत: en.wikipedia.org · ir.library.osaka-u.ac.jp · wepa.unima.org · खुली प्रति

ພຣະລັກພຣະຣາມ

फ्रा लक फ्रा लाम

Phra Lak Phra Lam

खंड 1

  • कवि लाओ बौद्ध परंपरा
  • कब अठारहवीं सदी तक पूरी
  • कहाँ मेकांग किनारे का लाओस; पाठ विएंतियान राज्य की प्रशंसा करता है
  • लिपि लाओ लिपि
  • रूप पद्य जातक, कई शामों में गाकर सुनाई जाने वाली; दरबारी नृत्य नाटक भी

इस कथा की लंका

  • दूत यहाँ फ्रा लाम के अपने बेटे हैं: वानर हनुलमान और थाओ खुआन थाओ फा।
  • हनुलमान जवान लड़के के भेस में नांग सीदा को अँगूठी और संदेश देते हैं।
  • वे आग में भीगे कपड़े से जलती मशाल बनकर लंका जलाते हैं, और आग तब बुझती है जब सीदा के बाग़ के कुएँ का पानी डाला जाता है।

बौद्ध वर्षावास में मठों में सुनाई जाती है, और लाओ नववर्ष पर नृत्य नाटक में खेली जाती है।

स्रोत: luangprabangculture.com · en.wikipedia.org · seasite.niu.edu · खुली प्रति

Kakawin Rāmāyaṇa

ककविन रामायण

Kakawin Ramayana

खंड 1 · राय, बाली, 1931

  • कवि कवि अज्ञात; बाली की परंपरा योगीश्वर नाम लेती है
  • कब नौवीं सदी का अंत, लगभग 856 से 930 ईस्वी
  • कहाँ मध्य जावा, इंडोनेशिया; बाद में बाली में बची
  • लिपि पुरानी जावानी (कावी)
  • रूप ककविन, संस्कृत छंदों में पुरानी जावानी; 26 सर्ग

इस कथा की लंका

  • लगभग सत्रहवें सर्ग तक यह भट्टिकाव्य के पास चलती है, उसके बाद अपने रास्ते।
  • आठवें सर्ग में हनुमान जी की उड़ान में मैनाक पर्वत आता है।
  • पूर्वी जावा के पनातरन मंदिर की नक़्क़ाशी इसी कथा पर है, और उसमें हनुमान जी सबसे आगे हैं।

बाली में आज भी पढ़ी जाती है; हनुमान जी की लंका यात्रा बाली के केचक में खेली जाती है।

स्रोत: en.wikipedia.org · ejournal.perpusnas.go.id · asianstudies.org

รามเกียรติ์

रामकियेन

Ramakien

खंड 1 · खंड 2 · खम, सियाम, 1836

  • कवि राजा राम प्रथम और उनके दरबारी कवि
  • कब आज का पूरा पाठ 1797 का; पुराने रूप 1767 में अयुत्थया के गिरने पर खो गए
  • कहाँ बैंकाक, थाईलैंड
  • लिपि थाई लिपि
  • रूप लंबा पद्य महाकाव्य; खोन मुखौटा नृत्य और छाया नाटक का आधार

इस कथा की लंका

  • रास्ते में हनुमान एक शापित अप्सरा को छुड़ाते हैं, और वानरों के लिए अपने शरीर से पुल बना देते हैं।
  • सीदा फाँसी लगाने को होती हैं तो हनुमान फंदा काट देते हैं, और अँगूठी तथा रूमाल देते हैं।
  • जलती पूँछ बुझाने का रास्ता उन्हें मुनि नार्त बताते हैं; और पुल बनाते समय वे जलपरी सुवन्नमच्छा से मिलते हैं, जिससे बेटा मच्छानु होता है।

खोन मुखौटा नृत्य में खेली जाती है, और पूरी कथा बैंकाक के वाट फ्रा केव की दीवारों पर बनी है।

स्रोत: en.wikipedia.org · seasite.niu.edu · seasite.niu.edu, 2 · खुली प्रति

கம்பராமாயணம்

कंब रामायण

Kamba Ramayanam

खंड 1 · खंड 2 · अम्मिणी, केरल, 1795

  • कवि कंबन, तमिल दरबारी कवि
  • कब बारहवीं सदी
  • कहाँ कावेरी का डेल्टा, तमिलनाडु
  • लिपि तमिल लिपि
  • रूप लगभग 10,500 पद, छह कांड; सुंदरकांडम् में 14 पडलम् (अध्याय) और 1,329 पद

इस कथा की लंका

  • हर अध्याय एक घटना के नाम पर: समुद्र की छलाँग, नगर की खोज, सीता के दर्शन, रूप दिखाना, चूड़ामणि।
  • नगर की खोज में कंबन लंका को इतने ब्योरे से दिखाते हैं कि वह देखी हुई लगती है।
  • लौटकर हनुमान जी का पहला शब्द है "कण्डेन", यानी देख आया, ताकि राम को एक पल भी इंतज़ार न करना पड़े।

तमिल घरों और मंदिरों में पढ़ी जाती है; केरल का चमड़े की कठपुतलियों वाला छाया नाटक, तोलपावकूत्तु, इसी से खेला जाता है।

स्रोत: en.wikipedia.org · kampanproject.ucdavis.edu · kampanproject.ucdavis.edu, 2 · खुली प्रति

पउमचरियं

पउमचरिय

Paumachariya

खंड 3 · अभय, जैसलमेर, लगभग 1900

  • कवि विमलसूरि, श्वेतांबर जैन मुनि
  • कब तीसरी सदी से बाद की नहीं; कवि ख़ुद इसे महावीर के 530 बरस बाद का बताते हैं
  • कहाँ जगह पक्की नहीं
  • लिपि देवनागरी, जैन महाराष्ट्री प्राकृत
  • रूप प्राकृत का लंबा पुराण शैली का काव्य

इस कथा की लंका

  • हनुमान यहाँ वानर नहीं, विद्याधर वीर हैं; वानर एक विद्याधर कुल है जिसके झंडे पर वानर का निशान है।
  • चमत्कार घटा दिए गए हैं: लंका का जलना वैसा नहीं आता जैसा महाकाव्य में।
  • हनुमान कई विवाह करते हैं, और बाद में जैन मुनि बन जाते हैं।

स्रोत: en.wikipedia.org · jainpedia.org · en.wikipedia.org, 2 · खुली प्रति

কৃত্তিবাসী রামায়ণ

कृत्तिवासी रामायण

Krittivasi Ramayan

खंड 2 · बिनय, नदिया, 1843

  • कवि कृत्तिवास ओझा, नदिया के फुलिया के ब्राह्मण
  • कब पंद्रहवीं सदी; पहली छपाई 1802 में श्रीरामपुर से
  • कहाँ फुलिया, नदिया, पश्चिम बंगाल
  • लिपि बांग्ला लिपि
  • रूप सात कांड, पयार छंद में, गाकर सुनाई जाने वाली पाँचाली

इस कथा की लंका

  • लंका की रक्षक यहाँ लंकिनी नहीं, देवी चामुंडा हैं; हनुमान जी का नाम सुनते ही वे जान जाती हैं कि उनका समय पूरा हुआ, और कैलाश चली जाती हैं। कोई लड़ाई नहीं।
  • सुंदरकांड जाम्बवान के सुनाए हनुमान जी के जन्म की कथा से खुलता है।
  • लंका जलाने के बाद हनुमान जी फिर सीता जी के पास जाते हैं, जैसे तुलसीदास में।

बंगाल की सबसे जानी मानी रामायण; घरों में आज भी पढ़ी और गाई जाती है।

स्रोत: en.wikipedia.org · en.banglapedia.org · bengaliebook.com · खुली प्रति

ବିଲଙ୍କା ରାମାୟଣ

विलंका रामायण

Vilanka Ramayana

खंड 2

  • कवि सारला दास, ओड़िया महाभारत के कवि
  • कब पंद्रहवीं सदी के बीच
  • कहाँ जगतसिंहपुर, ओड़िशा
  • लिपि ओड़िया लिपि
  • रूप दांडी छंद, गाकर सुनाने लायक; शिव पार्वती को सुनाते हैं

इस कथा की लंका

  • इसका अपना सुंदरकांड नहीं; यह लंका के बाद की कथा है।
  • सीता कहती हैं कि राम ने छोटा रावण मारा है, और उन्हें पाताल की विलंका के हज़ार सिर वाले रावण से लड़ने को कहती हैं।
  • हनुमान जी की यात्रा यहाँ नीचे पाताल की ओर है; वहाँ उन्हें निगल लिया जाता है, और राम का नाम सुनकर वे बाहर आते हैं।

स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · en.wikipedia.org, 3

भारत में 16

കണ്ണശ്ശരാമായണം

कण्णस्स रामायणम्

Kannassa Ramayanam

  • कवि निरणम के राम पणिक्कर, कण्णश्श कवि घराने के सबसे छोटे
  • कब चौदहवीं से पंद्रहवीं सदी
  • कहाँ निरणम, तिरुवल्ला के पास, केरल
  • लिपि मलयालम लिपि
  • रूप पाट्टु यानी गीत के रूप में, वाल्मीकि के सातों कांड

इस कथा की लंका

  • मलयालम में वाल्मीकि की पूरी कथा, गीत के रूप में; सुंदरकांड वाल्मीकि के ही क्रम में चलता है।
  • मलयालम साहित्य के इतिहास में यह रामचरितम् और एषुत्तच्छन के बीच की कड़ी माना जाता है।

मध्य काल की मलयालम के क्लासिक के रूप में पढ़ा जाता है; 2013 में भाषा इंस्टिट्यूट ने टीका सहित छापा।

स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · find.library.upenn.edu

മാപ്പിള രാമായണം

मापिला रामायणम्

Mappila Ramayanam

  • कवि पिरांतन हसनकुट्टी, उत्तर मालाबार के घुमंतू गायक
  • कब बीसवीं सदी की शुरुआत का गीत; 1976 में लिखकर दर्ज हुआ
  • कहाँ वडकरा और कोझिकोड, उत्तर मालाबार, केरल
  • लिपि मलयालम लिपि
  • रूप मापिलप्पाट्टु, मापिला धुन का गीत; बस एक हिस्सा बचा है

इस कथा की लंका

  • बचे हुए हिस्से में सुंदरकांड नहीं है; वह शूर्पणखा के "लामा" (राम) से शादी के प्रस्ताव पर टिका है।
  • रावण यहाँ "लवणन" है, सुल्तान जैसा, और एक दृश्य में वह अपनी दसों दाढ़ियाँ एक साथ बनाने की कोशिश करता है।
  • सीता "मुत्तु बीवी सीता" हैं, और हनुमान "अनुमान"।

आज भी कभी कभी गाया और खेला जाता है; 2019 में वडकरा की एक मंडली ने इसे बेंगलुरु में मंच पर किया।

स्रोत: edtimes.in · muse.jhu.edu · academia.edu

രാമചരിതം

रामचरितम्

Ramacharitam

  • कवि चीरामन, जो ख़ुद को चीरामकवि कहते हैं; उनकी पहचान पर विद्वानों में मतभेद
  • कब बारहवीं सदी का अंत या तेरहवीं की शुरुआत; कुछ इसे चौदहवीं सदी तक रखते हैं
  • कहाँ केरल, शायद उत्तर मालाबार, कासरगोड के पास
  • लिपि मलयालम लिपि
  • रूप 1,814 पद, गीत के रूप में; मुख्य रूप से युद्धकांड

इस कथा की लंका

  • मलयालम की सबसे पुरानी बची हुई काव्य रचना।
  • कथा सीधे युद्धकांड से उठती है, इसलिए इसमें सुंदरकांड का अपना हिस्सा नहीं।
  • भाषा तमिल और मलयालम का मेल है, यानी एक भाषा के बनने का पल।

स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · britannica.com

శ్రీమద్రామాయణ కల్పవృక్షము

रामायण कल्पवृक्षम्

Ramayana Kalpavrukshamu

  • कवि विश्वनाथ सत्यनारायण, "कवि सम्राट", तेलुगु के पहले ज्ञानपीठ विजेता
  • कब 1933 के आसपास शुरू, 1962 तक पूरा; 1970 का ज्ञानपीठ
  • कहाँ आंध्र प्रदेश
  • लिपि तेलुगु लिपि
  • रूप छह कांड का महाकाव्य, पुराने तेलुगु छंदों में

इस कथा की लंका

  • वाल्मीकि की कथा, पर कवि के अपने ढंग से: किरदारों के मन और कारण बदलते हैं।
  • आलोचक कहते हैं कि यहाँ राम आदर्श मनुष्य से ज़्यादा भगवान हैं।
  • पूरी रचना में लगभग तीस बरस लगे; बीसवीं सदी में भी रामकथा नई लिखी जा रही थी।

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने इसे फिर छापा है, और यह आज भी पढ़ी पढ़ाई जाती है।

स्रोत: en.wikipedia.org · wisdomlib.org · en.wikipedia.org, 2 · खुली प्रति

ರಾಮಚಂದ್ರ ಚರಿತ ಪುರಾಣ

रामचंद्र चरित पुराण

Ramachandra Charita Purana

  • कवि नागचंद्र, जैन कवि, जिन्हें "अभिनव पंप" कहा गया
  • कब लगभग 1100 ईस्वी (उनकी दूसरी रचना 1105 की है)
  • कहाँ कर्नाटक; कवि ने बीजापुर में एक जैन मंदिर बनवाया
  • लिपि कन्नड़ लिपि
  • रूप चंपू, यानी गद्य और पद्य मिलाकर, सोलह भाग

इस कथा की लंका

  • कन्नड़ की सबसे पुरानी बची हुई रामकथा, जैन परंपरा में।
  • यहाँ रावण को लक्ष्मण मारते हैं, राम नहीं, और राम अंत में मुनि बनकर निर्वाण पाते हैं।
  • रावण एक दुखी नायक है, जो कमज़ोरी के एक पल में सीता को ले जाता है।

स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2

ਰਾਮ ਅਵਤਾਰ

रामावतार

Ramavatar (Dasam Granth)

  • कवि परंपरा गुरु गोबिंद सिंह की रचना मानती है; शुरू में कवि का नाम "स्याम" आता है, जिसे कुछ लोग उन्हीं का उपनाम मानते हैं
  • कब सन 1698 में पूरी हुई (विक्रम संवत 1755)
  • कहाँ आनंदपुर साहिब के पास, सतलुज के किनारे, नैना देवी पहाड़ी के नीचे
  • लिपि गुरमुखी लिपि, ब्रजभाषा
  • रूप दसम ग्रंथ के चौबीस अवतार में बीसवाँ अवतार; 864 छंद, कई तरह के छंदों में, वीर रस

इस कथा की लंका

  • पूरा सुंदरकांड एक ही छंद में है: छंद 366, गीता मालती छंद की चार पंक्तियाँ।
  • वानर सेना चार दिशाओं में बँटती है, और हनुमान जी अँगूठी लेकर समुद्र पार करते हैं, सीता जी तक पहुँचते हैं, नगर जलाते हैं, अक्षय कुमार को मारते हैं और अशोक वाटिका उजाड़ देते हैं।
  • लौटकर वे राम जी को रावण की सारी करतूत बताते हैं, और कथा सीधे युद्ध की ओर बढ़ जाती है। वाल्मीकि में जो खोज 68 सर्गों में है, वह यहाँ चार पंक्तियों में है।

इसके आख़िरी सवैया और दोहा, "पाँइ गहे जब ते तुमरे", सिख रोज़ शाम की रहरास साहिब में पढ़ते हैं।

स्रोत: en.wikipedia.org · sikhiwiki.org · en.wikipedia.org, 2 · खुली प्रति

మొల్ల రామాయణము

मोल्ला रामायणम्

Molla Ramayanam

  • कवि आतुकूरि मोल्ला, एक कुम्हार की बेटी; तेलुगु की सबसे पहली कवयित्रियों में
  • कब सोलहवीं सदी
  • कहाँ गोपवरम, आंध्र प्रदेश
  • लिपि तेलुगु लिपि
  • रूप छोटा काव्य, लगभग 870 पद, छह कांड; ज़्यादातर कंद छंद में, सीधी तेलुगु

इस कथा की लंका

  • इसका सुंदरकांड पहले के सारे कांडों जितना लंबा है।
  • हनुमान जी की समुद्र वाली छलाँग का वर्णन इसकी सबसे ऊँची जगह माना जाता है: रूप, खड़े होने का ढंग, और छलाँग की ताक़त।
  • उत्तरकांड नहीं, और वाल्मीकि के लंबे प्रकृति वर्णन भी कटे हुए; कथा कसी हुई।

तेलुगु में ख़ूब पढ़ी जाती है, स्कूलों में पढ़ाई जाती है, और हरिकथा में सुनाई जाती है।

स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · hinduamerican.org · खुली प्रति

ଜଗମୋହନ ରାମାୟଣ

जगमोहन रामायण

Jagamohana Ramayana

  • कवि बलराम दास, ओड़िशा के पंचसखा भक्त कवियों में सबसे बड़े
  • कब लगभग 1500 ईस्वी
  • कहाँ पुरी, ओड़िशा
  • लिपि ओड़िया लिपि
  • रूप सात कांड, दांडी छंद में (इसीलिए दांडी रामायण); शिव पार्वती को सुनाते हैं

इस कथा की लंका

  • राम यहाँ जगन्नाथ से जोड़े जाते हैं; पूरी कथा जगन्नाथ की संस्कृति में रची है।
  • सीता का वनवास नहीं होता; वे अयोध्या में ख़ुशी से रहती हैं।
  • इसके सुंदरकांड के ब्योरे पर कोई छपा अध्ययन नहीं मिला।

ओड़िशा में बहुत लोकप्रिय, घर घर की पोथी।

स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · mymssportal.dl.uni-leipzig.de

ગિરધર રામાયણ

गिरधर रामायण

Giridhar Ramayan

  • कवि गिरधर, वडोदरा के मासर गाँव के, पुष्टिमार्गी भक्त
  • कब सन 1835 में पूरा हुआ
  • कहाँ मासर और वडोदरा, गुजरात
  • लिपि गुजराती लिपि
  • रूप आख्यान के ढंग की लंबी रामकथा, लगभग 10,000 पद, कई रागों और छंदों में

इस कथा की लंका

  • कथा मुख्य रूप से वाल्मीकि और हनुमन्नाटक से ली गई।
  • धनाश्री, बिलावल, मारू, सोरठ, आसावरी जैसे रागों में बँधी है, यानी गाने के लिए बनी।
  • इसके सुंदरकांड के ब्योरे पर कोई छपा अध्ययन नहीं मिला।

गुजरात में लोकप्रिय।

स्रोत: en.wikipedia.org · rekhtagujarati.org · hindu-blog.com

कवितावली

Kavitavali

  • कवि गोस्वामी तुलसीदास
  • कब सत्रहवीं सदी की शुरुआत, लगभग 1610 के दशक में
  • कहाँ काशी
  • लिपि देवनागरी, ब्रजभाषा
  • रूप अलग अलग कवित्त और सवैये, सात कांड; लगभग 325 पद

इस कथा की लंका

  • सुंदरकांड पूरा कवित्त छंद में है, और बाग़ उजड़ने से सीधे लंका दहन पर पहुँचता है।
  • मानस में जो आग कुछ पंक्तियों में है, वह यहाँ बहुत फैलकर कही गई है।
  • आग लंका के लोगों की आँख से दिखती है: रानियाँ "पानी! पानी!" पुकारती हैं, और मंदोदरी कहती हैं कि किसी ने उनकी बात नहीं मानी।

आज भी ख़ूब छपती है; इसके हनुमान वाले पद, हनुमान बाहुक, अलग से पढ़े जाते हैं।

स्रोत: uni-sofia.bg · tulsidas.orient.ox.ac.uk · sanskritdocuments.org · खुली प्रति

శ్రీ రంగనాథ రామాయణము

रंगनाथ रामायण

Ranganatha Ramayanam

  • कवि गोना बुद्धा रेड्डी, काकतीय राज्य के सामंत; उत्तरकांड उनके बेटों का
  • कब तेरहवीं सदी, लगभग 1280
  • कहाँ आज का तेलंगाना और आंध्र
  • लिपि तेलुगु लिपि
  • रूप द्विपद छंद, छह कांड, लगभग 17,290 द्विपद

इस कथा की लंका

  • तेलुगु की पहली पूरी रामायण, और पहली जो संगीत में बाँधी गई।
  • इसमें कई लोक प्रसंग जुड़े हैं जो वाल्मीकि में नहीं, जैसे पुल बनाने में मदद करने वाली गिलहरी।

आंध्र और तेलंगाना की तोलु बोम्मलाटा, चमड़े की कठपुतलियों वाली मंडलियाँ, इसके द्विपद गाकर खेलती हैं।

स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · hindu-blog.com · खुली प्रति

भावार्थ रामायण

Bhavartha Ramayana

  • कवि संत एकनाथ, पैठण; बाक़ी हिस्सा उनके शिष्य गावबा ने पूरा किया
  • कब सोलहवीं सदी का अंत, लगभग 1595 से 1599
  • कहाँ पैठण, महाराष्ट्र
  • लिपि देवनागरी, मराठी
  • रूप सात कांड, लगभग 297 अध्याय, लगभग 40,000 ओवी

इस कथा की लंका

  • सुंदरकांड 42 अध्यायों का है, वाल्मीकि से कहीं लंबा।
  • एक अध्याय में गजेंद्र मोक्ष की कथा आती है, यह समझाने के लिए कि जलने से पहले लंका सोने जैसी क्यों चमकती थी।
  • रावण के दरबार में देवता नौकर हैं: इंद्र चँवर डुलाते हैं, चंद्र छत्र पकड़ते हैं; युद्ध देवताओं को छुड़ाने का भी है।

महाराष्ट्र के गाँवों में और वारकरी परंपरा में आज भी पारायण होता है।

स्रोत: mr.wikisource.org · santsahitya.in · mahamtb.com · खुली प्रति

അദ്ധ്യാത്മരാമായണം കിളിപ്പാട്ട്

अध्यात्म रामायण किलिप्पाट्टु

Adhyatma Ramayanam Kilippattu

  • कवि तुंचत्तु रामानुजन एषुत्तच्छन, आधुनिक मलयालम के पिता
  • कब सोलहवीं सदी
  • कहाँ तिरूर, मलप्पुरम, केरल
  • लिपि मलयालम लिपि
  • रूप किलिप्पाट्टु, यानी तोते का गीत: एक तोता कवि को कथा सुनाता है

इस कथा की लंका

  • सारे कांडों में बस सुंदरकांडम् ही कलकांचि छंद में है, जिसकी आवाज़ घुँघरू जैसी लगती है।
  • लंका के द्वार पर लंकालक्ष्मी हैं; हनुमान जी के प्रहार के बाद वे रास्ता देती हैं, और उनके हिस्से का नाम ही है उनकी मुक्ति।
  • हनुमान जी अँगूठी देते हैं और कौए वाली कथा याद दिलाते हैं; सीता जी उनकी पीठ पर चलने से मना करती हैं।

केरल में कर्किडकम महीने भर, जिसे रामायण माह कहते हैं, घर घर और मंदिरों में रोज़ पढ़ा जाता है।

स्रोत: en.wikipedia.org · britannica.com · janmabhumi.in · खुली प्रति

সপ্তকাণ্ড ৰামায়ণ

सप्तकांड रामायण

Saptakanda Ramayana

  • कवि माधव कंदली, राजा महामाणिक्य के दरबारी कवि
  • कब चौदहवीं सदी
  • कहाँ कपिली घाटी, मध्य असम
  • लिपि असमिया लिपि
  • रूप असमिया पद्य, पद छंद में; कंदली के पाँच कांड बचे, आदि कांड माधवदेव का और उत्तर कांड शंकरदेव का

इस कथा की लंका

  • कवि ख़ुद कहते हैं कि उन्होंने शब्द दर शब्द अनुवाद नहीं किया, लंबे वर्णन छोड़ दिए ताकि आम लोग समझ सकें।
  • राम और सीता यहाँ अपनी कमज़ोरियों के साथ इंसान हैं, जो बाद के कुछ कवियों को खटका।
  • भारत की किसी नई भाषा की सबसे पुरानी रामायणों में।

असमिया साहित्य की नींव मानी जाती है।

स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · ojs.mbu.ac.th

ತೊರವೆ ರಾಮಾಯಣ

तोरवे रामायण

Torave Ramayana

  • कवि नरहरि, जिन्हें कुमार वाल्मीकि कहा जाता है
  • कब लगभग 1500 ईस्वी
  • कहाँ तोरवे, विजयपुरा के पास, कर्नाटक
  • लिपि कन्नड़ लिपि
  • रूप भामिनी षट्पदी छंद, लगभग 112 संधि और 5,000 पद; शिव पार्वती को सुनाते हैं

इस कथा की लंका

  • कन्नड़ की पहली वैष्णव रामायण; उससे पुरानी नागचंद्र की जैन रामायण है।
  • कथा मोटे तौर पर वाल्मीकि की, अध्यात्म रामायण की छाया के साथ।
  • रावण में दुखी नायक के कुछ रंग बचे हैं।

स्रोत: shastriyakannada.org · en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2

हनुमान चालीसा

Hanuman Chalisa

  • कवि तुलसीदास के नाम से
  • कब सोलहवीं सदी के अंत या सत्रहवीं की शुरुआत
  • कहाँ परंपराएँ अलग अलग जगह बताती हैं; तुलसीदास ज़्यादातर काशी में रहे
  • लिपि देवनागरी, अवधी
  • रूप 43 पद: शुरू में 2 दोहे, 40 चौपाइयाँ, अंत में 1 दोहा

इस कथा की लंका

  • लंका की यात्रा यहाँ कुछ गिनी चुनी पंक्तियों में याद की गई है, कथा की तरह नहीं।
  • ग्यारहवीं से बीसवीं चौपाई तक हनुमान जी की राम सेवा, लक्ष्मण को जिलाने समेत।

करोड़ों लोग रोज़ पढ़ते हैं, बहुत से ज़ुबानी, ख़ासकर मंगलवार और शनिवार को।

स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · en.wikipedia.org, 3 · खुली प्रति

भारत के बाहर 6

ลังกาสิบโห

लंका सिप हो

Lanka Sip Ho (Tai Lue Ramayana)

  • कवि ताई लू परंपरा, कई रूप
  • कब पक्का नहीं; एक अध्ययन मुख्य काव्य को चौदहवीं पंद्रहवीं सदी में रखता है
  • कहाँ शिशुआंगबन्ना, दक्षिणी युन्नान, चीन; और युन्नान के दूसरे ताई इलाक़े
  • लिपि थाई लिपि में (थाई विद्वानों का लिखा रूप); चीनी में 兰嘎西贺
  • रूप लंबा गीत काव्य, लोक गायकों और ताड़पत्र की पोथियों में

इस कथा की लंका

  • नाम का मतलब है लंका के दस सिर, यानी दस सिरों वाला राजा फुम्मा जक।
  • अनुमान (हनुमान) लंका में सिला (सीता) को लाम मा (राम) की अँगूठी देते हैं, और सबूत के लिए उनके सात बाल लेकर लौटते हैं।
  • पुल पर एक विशाल केकड़ा रास्ता रोकता है, और अनुमान उसके डंक उखाड़ देते हैं।

स्रोत: so02.tci-thaijo.org · ir.library.osaka-u.ac.jp · atlantis-press.com

Maharadia Lawana

महारादिया लावाना

Maharadia Lawana

  • कवि मरानाओ लोक परंपरा; बाई पामोकी ने सुनाई, फ़्रांसिस्को ने छापी
  • कब कथा सत्रहवीं से उन्नीसवीं सदी के बीच पहुँची होगी (फ़्रांसिस्को का अनुमान); 1968 में दर्ज, 1969 में छपी
  • कहाँ लानाओ झील, मिंदानाओ, फ़िलीपींस
  • लिपि मरानाओ (रोमन में)
  • रूप गद्य की लोक कथा, गाई नहीं जाती

इस कथा की लंका

  • यहाँ न लंका की खोज है, न लंका का जलना।
  • हनुमान वाला काम लक्षमाना करते हैं, जो एक वानर हैं और राम जैसे राजा के बेटे।
  • लंका यहाँ पुलु बंदियारमासिर नाम का द्वीप है, और रावण महारादिया लावाना, जिसके सात या आठ सिर बताए गए हैं।

1969 में इसे लानाओ की घरेलू महफ़िलों में सुनाई जाने वाली कथा बताया गया था।

स्रोत: asj.upd.edu.ph · en.wikipedia.org · aswangproject.com · खुली प्रति

सिद्धि रामायण

Siddhi Ramayan

  • कवि सिद्धिदास महाजु, नेपाल भाषा के जागरण के चार स्तंभों में से एक
  • कब सन 1913 में रचा; छपा 2010 में
  • कहाँ काठमांडू घाटी, नेपाल
  • लिपि देवनागरी, नेपाल भाषा (नेवारी)
  • रूप नेपाल भाषा में पद्य रामायण

इस कथा की लंका

  • नेपाल भाषा के जागरण की एक बड़ी रचना; कवि को "महाकवि" कहा जाता है और 1980 में उन पर डाक टिकट भी निकला।
  • लिखी 1913 में गई, पर छपने में लगभग सौ बरस लगे।

स्रोत: en.wikipedia.org · razenmanandhar.blogspot.com · en.wikipedia.org, 2

حكاية سري رام

हिकायत सेरी राम

Hikayat Seri Rama

  • कवि कवि अज्ञात; कई रूप
  • कब रचना का समय पता नहीं; सबसे पुरानी पोथी 1633 से पहले की
  • कहाँ मलय दुनिया: सबसे पुरानी पोथी आचे, सुमात्रा की; छाया नाटक में केलंतान, मलेशिया
  • लिपि जावी (अरबी लिपि), मलय
  • रूप मलय गद्य की हिकायत, यानी सुनाई जाने वाली कहानी

इस कथा की लंका

  • हनुमान यहाँ सेरी राम के अपने बेटे हैं।
  • वे ब्राह्मण के भेस में पानी का घड़ा लेकर लंकापुरी में जाते हैं, और अँगूठी उसी घड़े में छिपी होती है।
  • लंका जलाने के बाद सिति देवी उनसे सेरेन्दिब पर्वत की उस चट्टान को प्रणाम करने को कहती हैं जहाँ आदम उतरे थे।

केलंतान के छाया नाटक (वायांग कुलित) में इसके प्रसंग आज भी खेले जाते हैं।

स्रोत: mcp.anu.edu.au · writersworkshopindia.com · boloji.com · खुली प्रति

भानुभक्तको रामायण

भानुभक्त रामायण

Bhanubhakta Ramayana

  • कवि भानुभक्त आचार्य, नेपाल के आदिकवि
  • कब 1844 से 1853 के बीच; पूरी छपी 1887 में
  • कहाँ तनहुँ, नेपाल
  • लिपि देवनागरी, नेपाली
  • रूप सात कांड, संस्कृत छंदों में; अध्यात्म रामायण पर आधारित

इस कथा की लंका

  • नेपाली में पहली पूरी रामकथा; इसी से कथा संस्कृत से निकलकर लोगों की ज़बान में आई।
  • सुंदरकांड हनुमान जी के खारे समुद्र को पार करने के निश्चय से खुलता है, मन राम के चरणों में।
  • एक जीवनी कहती है कि चार कांड कवि ने जेल के लगभग पाँच महीनों में लिखे।

हर साल भानु जयंती पर याद किया जाता है; नेपाल के स्कूलों में पढ़ाया जाता है।

स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · ir.nbu.ac.in

រាមកេរ្តិ៍

रीमकेर

Reamker

  • कवि कवि अज्ञात; कई सदियों में कम से कम तीन हाथ
  • कब बचा हुआ पहला भाग सोलहवीं सत्रहवीं सदी का, दूसरा अठारहवीं का; राम का ज़िक्र सातवीं सदी के शिलालेख में
  • कहाँ कंबोडिया
  • लिपि खमेर लिपि
  • रूप दो भागों का पद्य महाकाव्य; शास्त्रीय नृत्य, मुखौटा नाटक और बड़े छाया नाटक में

इस कथा की लंका

  • हनुमान उड़कर पता लगाते हैं कि क्रोंग रीप (रावण) ने नेअंग सेदा को लंका द्वीप पर क़ैद कर रखा है।
  • पुल बनते समय जलपरियाँ पत्थर चुराती हैं; हनुमान उनकी रानी सोवन मच्छा से प्रेम करते हैं, और उनका बेटा मच्छानु होता है।
  • इसके दृश्य अंकोर वात पर खुदे हैं और नोम पेन्ह के राजमहल की दीवारों पर बने हैं।

कंबोडिया का शाही बैले, मुखौटा नाटक ल्खोन खोल (यूनेस्को सूची, 2018) और बड़ा छाया नाटक इसे आज भी खेलते हैं।

स्रोत: en.wikipedia.org · asiasociety.org · ich.unesco.org

जगह पक्की नहीं 5

अध्यात्म रामायण

Adhyatma Ramayana

  • कवि कवि अज्ञात; ब्रह्मांड पुराण का हिस्सा माना जाता है
  • कब तेरहवीं से पंद्रहवीं सदी
  • कहाँ उत्तर भारत, जगह पक्की नहीं
  • लिपि देवनागरी, संस्कृत
  • रूप सात कांड, लगभग 4,500 श्लोक, शिव पार्वती संवाद; सुंदरकांड पाँच सर्गों का

इस कथा की लंका

  • लंका की रक्षक हनुमान जी से कहती है कि ब्रह्मा ने यही पल बताया था, और सीता जनक के घर जन्मी योगमाया हैं।
  • त्रिजटा का सपना रावण के अंत और विभीषण के राज की बात कहता है।
  • पूरी लंका जलती है, बस विभीषण का घर बचता है; सीता जी अग्नि से प्रार्थना करती हैं, इसलिए आग हनुमान जी को नहीं जलाती।

इसी का मलयालम रूप, एषुत्तच्छन का किलिप्पाट्टु, केरल में कर्किडकम महीने भर पढ़ा जाता है।

स्रोत: en.wikipedia.org · sanskritdocuments.org · lists.advaita-vedanta.org · खुली प्रति

कूर्म पुराण · ब्रह्मवैवर्त पुराण

कूर्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण

Kurma Purana and Brahmavaivarta Purana

  • कवि पुराण परंपरा
  • कब कूर्म पुराण लगभग 550 से 850 ईस्वी; आज का ब्रह्मवैवर्त शायद पंद्रहवीं सोलहवीं सदी का
  • कहाँ कूर्म: पता नहीं; ब्रह्मवैवर्त: शायद बंगाल
  • लिपि देवनागरी, संस्कृत
  • रूप कूर्म पुराण लगभग 6,000 श्लोक; ब्रह्मवैवर्त लगभग 18,000

इस कथा की लंका

  • यहाँ हनुमान जी की लंका यात्रा का कोई अलग वर्णन नहीं; इनकी देन छाया सीता का विचार है।
  • रावण के आने पर अग्नि असली सीता को अपने पास रख लेते हैं, और रावण उनकी छाया ले जाता है।
  • यानी लंका में जिन सीता को हनुमान जी पाते हैं, वे छाया हैं; असली सीता अग्नि परीक्षा पर लौटती हैं।

यह विचार चैतन्य चरितामृत और रामचरितमानस तक पहुँचा।

स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · en.wikipedia.org, 3 · खुली प्रति

रामोपाख्यान

महाभारत, रामोपाख्यान

Ramopakhyana (Mahabharata)

  • कवि महाभारत के आरण्यक पर्व में, मार्कंडेय युधिष्ठिर को सुनाते हैं
  • कब महाभारत के साथ, मोटे तौर पर ईसा से तीसरी सदी पहले से तीसरी सदी बाद तक
  • कहाँ उत्तर भारत, जगह पक्की नहीं
  • लिपि देवनागरी, संस्कृत
  • रूप 704 श्लोक, आरण्यक पर्व के अध्याय 258 से 275

इस कथा की लंका

  • हनुमान जी की यात्रा होते हुए नहीं दिखती; वे लौटकर राम को ख़ुद सुनाते हैं।
  • वे कहते हैं कि सौ योजन का समुद्र पिता पवन की मदद से पार किया, और सीता जी रावण के महल में व्रत करती मिलीं।
  • यहाँ एक राक्षस अविंध्य रावण को सीता को मारने से रोकता है, जो वाल्मीकि में नहीं।

स्रोत: en.wikipedia.org · sanskritlibrary.org · mahabharataonline.com · खुली प्रति

अद्भुत रामायण

Adbhuta Ramayana

  • कवि कवि अज्ञात; वाल्मीकि के नाम से, शाक्त परंपरा
  • कब चौदहवीं पंद्रहवीं सदी
  • कहाँ पता नहीं
  • लिपि देवनागरी, संस्कृत
  • रूप 27 सर्ग, लगभग 1,355 श्लोक, कांडों में बँटा नहीं

इस कथा की लंका

  • हनुमान जी की लंका यात्रा केंद्र में नहीं; पुरानी लड़ाई बस एक सर्ग में सिमट जाती है।
  • हनुमान जी राम से पूछते हैं, "आप कौन हैं?", और राम उन्हें योग और सांख्य सिखाते हैं।
  • रावण के बाद पुष्कर द्वीप का हज़ार सिर वाला रावण आता है; राम बेहोश होते हैं, और सीता महाकाली बनकर उसे मारती हैं।

स्रोत: en.wikipedia.org · hindupedia.com · asianethnology.org

आनन्द रामायण

आनंद रामायण

Ananda Ramayana

  • कवि कवि अज्ञात; पोथियों में वाल्मीकि का नाम
  • कब लगभग पंद्रहवीं सदी
  • कहाँ पता नहीं
  • लिपि देवनागरी, संस्कृत
  • रूप नौ कांड, 109 सर्ग, लगभग 12,300 श्लोक

इस कथा की लंका

  • पहला कांड, सार कांड, पूरी वाल्मीकि कथा को तेरह सर्गों में समेट लेता है; बाक़ी आठ कांड नई कथाओं के हैं।
  • रामेश्वरम के लिंग वाली कथा: हनुमान जी लिंग लाने जाते हैं, राम पहले रेत का लिंग स्थापित कर देते हैं।
  • इसमें ऐसे प्रसंग हैं जो वाल्मीकि में नहीं, जैसे दशरथ से विवाह से पहले कौशल्या का अपहरण।

इसका रामरक्षा स्तोत्र आज भी रोज़ पढ़ा जाता है।

स्रोत: en.wikipedia.org · ramanuja.org · exoticindiaart.com

यही उनतालीस कथाएँ खेल के हिस्से में भी हैं: सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में। खेल शुरू करो

सवाल जवाब

पूछे जाने वाले सवाल

उनतालीस लंकाएँ किन रामकथाओं से बनी है?

लंका की खोज खेल की उनतालीस रामकथाओं से। तीनों खंड इनमें से 12 की लंका में उतरते हैं: वाल्मीकि रामायण, रामचरितमानस, तिब्बती रामकथा, रामावतारचरित, यम ज़ातदो, फ्रा लक फ्रा लाम, ककविन रामायण, रामकियेन, कंब रामायण, पउमचरिय, कृत्तिवासी रामायण, विलंका रामायण।

हर लंका अलग क्यों है?

हर कवि ने सुंदरकांड अपनी भाषा और अपने समय में कहा। किसी की लंका पूरी सोने की है, किसी की छाया की, और जैन परंपरा की लंका में आग लगती ही नहीं।