കണ്ണശ്ശരാമായണം
Kannassa Ramayanam
- कवि निरणम के राम पणिक्कर, कण्णश्श कवि घराने के सबसे छोटे
- कब चौदहवीं से पंद्रहवीं सदी
- कहाँ निरणम, तिरुवल्ला के पास, केरल
- लिपि मलयालम लिपि
- रूप पाट्टु यानी गीत के रूप में, वाल्मीकि के सातों कांड
इस कथा की लंका
- मलयालम में वाल्मीकि की पूरी कथा, गीत के रूप में; सुंदरकांड वाल्मीकि के ही क्रम में चलता है।
- मलयालम साहित्य के इतिहास में यह रामचरितम् और एषुत्तच्छन के बीच की कड़ी माना जाता है।
मध्य काल की मलयालम के क्लासिक के रूप में पढ़ा जाता है; 2013 में भाषा इंस्टिट्यूट ने टीका सहित छापा।
स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · find.library.upenn.edu
മാപ്പിള രാമായണം
Mappila Ramayanam
- कवि पिरांतन हसनकुट्टी, उत्तर मालाबार के घुमंतू गायक
- कब बीसवीं सदी की शुरुआत का गीत; 1976 में लिखकर दर्ज हुआ
- कहाँ वडकरा और कोझिकोड, उत्तर मालाबार, केरल
- लिपि मलयालम लिपि
- रूप मापिलप्पाट्टु, मापिला धुन का गीत; बस एक हिस्सा बचा है
इस कथा की लंका
- बचे हुए हिस्से में सुंदरकांड नहीं है; वह शूर्पणखा के "लामा" (राम) से शादी के प्रस्ताव पर टिका है।
- रावण यहाँ "लवणन" है, सुल्तान जैसा, और एक दृश्य में वह अपनी दसों दाढ़ियाँ एक साथ बनाने की कोशिश करता है।
- सीता "मुत्तु बीवी सीता" हैं, और हनुमान "अनुमान"।
आज भी कभी कभी गाया और खेला जाता है; 2019 में वडकरा की एक मंडली ने इसे बेंगलुरु में मंच पर किया।
स्रोत: edtimes.in · muse.jhu.edu · academia.edu
- कवि चीरामन, जो ख़ुद को चीरामकवि कहते हैं; उनकी पहचान पर विद्वानों में मतभेद
- कब बारहवीं सदी का अंत या तेरहवीं की शुरुआत; कुछ इसे चौदहवीं सदी तक रखते हैं
- कहाँ केरल, शायद उत्तर मालाबार, कासरगोड के पास
- लिपि मलयालम लिपि
- रूप 1,814 पद, गीत के रूप में; मुख्य रूप से युद्धकांड
इस कथा की लंका
- मलयालम की सबसे पुरानी बची हुई काव्य रचना।
- कथा सीधे युद्धकांड से उठती है, इसलिए इसमें सुंदरकांड का अपना हिस्सा नहीं।
- भाषा तमिल और मलयालम का मेल है, यानी एक भाषा के बनने का पल।
स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · britannica.com
- कवि विश्वनाथ सत्यनारायण, "कवि सम्राट", तेलुगु के पहले ज्ञानपीठ विजेता
- कब 1933 के आसपास शुरू, 1962 तक पूरा; 1970 का ज्ञानपीठ
- कहाँ आंध्र प्रदेश
- लिपि तेलुगु लिपि
- रूप छह कांड का महाकाव्य, पुराने तेलुगु छंदों में
इस कथा की लंका
- वाल्मीकि की कथा, पर कवि के अपने ढंग से: किरदारों के मन और कारण बदलते हैं।
- आलोचक कहते हैं कि यहाँ राम आदर्श मनुष्य से ज़्यादा भगवान हैं।
- पूरी रचना में लगभग तीस बरस लगे; बीसवीं सदी में भी रामकथा नई लिखी जा रही थी।
तिरुमला तिरुपति देवस्थानम ने इसे फिर छापा है, और यह आज भी पढ़ी पढ़ाई जाती है।
स्रोत: en.wikipedia.org · wisdomlib.org · en.wikipedia.org, 2 · खुली प्रति
- कवि नागचंद्र, जैन कवि, जिन्हें "अभिनव पंप" कहा गया
- कब लगभग 1100 ईस्वी (उनकी दूसरी रचना 1105 की है)
- कहाँ कर्नाटक; कवि ने बीजापुर में एक जैन मंदिर बनवाया
- लिपि कन्नड़ लिपि
- रूप चंपू, यानी गद्य और पद्य मिलाकर, सोलह भाग
इस कथा की लंका
- कन्नड़ की सबसे पुरानी बची हुई रामकथा, जैन परंपरा में।
- यहाँ रावण को लक्ष्मण मारते हैं, राम नहीं, और राम अंत में मुनि बनकर निर्वाण पाते हैं।
- रावण एक दुखी नायक है, जो कमज़ोरी के एक पल में सीता को ले जाता है।
स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2
ਰਾਮ ਅਵਤਾਰ
Ramavatar (Dasam Granth)
- कवि परंपरा गुरु गोबिंद सिंह की रचना मानती है; शुरू में कवि का नाम "स्याम" आता है, जिसे कुछ लोग उन्हीं का उपनाम मानते हैं
- कब सन 1698 में पूरी हुई (विक्रम संवत 1755)
- कहाँ आनंदपुर साहिब के पास, सतलुज के किनारे, नैना देवी पहाड़ी के नीचे
- लिपि गुरमुखी लिपि, ब्रजभाषा
- रूप दसम ग्रंथ के चौबीस अवतार में बीसवाँ अवतार; 864 छंद, कई तरह के छंदों में, वीर रस
इस कथा की लंका
- पूरा सुंदरकांड एक ही छंद में है: छंद 366, गीता मालती छंद की चार पंक्तियाँ।
- वानर सेना चार दिशाओं में बँटती है, और हनुमान जी अँगूठी लेकर समुद्र पार करते हैं, सीता जी तक पहुँचते हैं, नगर जलाते हैं, अक्षय कुमार को मारते हैं और अशोक वाटिका उजाड़ देते हैं।
- लौटकर वे राम जी को रावण की सारी करतूत बताते हैं, और कथा सीधे युद्ध की ओर बढ़ जाती है। वाल्मीकि में जो खोज 68 सर्गों में है, वह यहाँ चार पंक्तियों में है।
इसके आख़िरी सवैया और दोहा, "पाँइ गहे जब ते तुमरे", सिख रोज़ शाम की रहरास साहिब में पढ़ते हैं।
स्रोत: en.wikipedia.org · sikhiwiki.org · en.wikipedia.org, 2 · खुली प्रति
మొల్ల రామాయణము
Molla Ramayanam
- कवि आतुकूरि मोल्ला, एक कुम्हार की बेटी; तेलुगु की सबसे पहली कवयित्रियों में
- कब सोलहवीं सदी
- कहाँ गोपवरम, आंध्र प्रदेश
- लिपि तेलुगु लिपि
- रूप छोटा काव्य, लगभग 870 पद, छह कांड; ज़्यादातर कंद छंद में, सीधी तेलुगु
इस कथा की लंका
- इसका सुंदरकांड पहले के सारे कांडों जितना लंबा है।
- हनुमान जी की समुद्र वाली छलाँग का वर्णन इसकी सबसे ऊँची जगह माना जाता है: रूप, खड़े होने का ढंग, और छलाँग की ताक़त।
- उत्तरकांड नहीं, और वाल्मीकि के लंबे प्रकृति वर्णन भी कटे हुए; कथा कसी हुई।
तेलुगु में ख़ूब पढ़ी जाती है, स्कूलों में पढ़ाई जाती है, और हरिकथा में सुनाई जाती है।
स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · hinduamerican.org · खुली प्रति
ଜଗମୋହନ ରାମାୟଣ
Jagamohana Ramayana
- कवि बलराम दास, ओड़िशा के पंचसखा भक्त कवियों में सबसे बड़े
- कब लगभग 1500 ईस्वी
- कहाँ पुरी, ओड़िशा
- लिपि ओड़िया लिपि
- रूप सात कांड, दांडी छंद में (इसीलिए दांडी रामायण); शिव पार्वती को सुनाते हैं
इस कथा की लंका
- राम यहाँ जगन्नाथ से जोड़े जाते हैं; पूरी कथा जगन्नाथ की संस्कृति में रची है।
- सीता का वनवास नहीं होता; वे अयोध्या में ख़ुशी से रहती हैं।
- इसके सुंदरकांड के ब्योरे पर कोई छपा अध्ययन नहीं मिला।
ओड़िशा में बहुत लोकप्रिय, घर घर की पोथी।
स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · mymssportal.dl.uni-leipzig.de
ગિરધર રામાયણ
Giridhar Ramayan
- कवि गिरधर, वडोदरा के मासर गाँव के, पुष्टिमार्गी भक्त
- कब सन 1835 में पूरा हुआ
- कहाँ मासर और वडोदरा, गुजरात
- लिपि गुजराती लिपि
- रूप आख्यान के ढंग की लंबी रामकथा, लगभग 10,000 पद, कई रागों और छंदों में
इस कथा की लंका
- कथा मुख्य रूप से वाल्मीकि और हनुमन्नाटक से ली गई।
- धनाश्री, बिलावल, मारू, सोरठ, आसावरी जैसे रागों में बँधी है, यानी गाने के लिए बनी।
- इसके सुंदरकांड के ब्योरे पर कोई छपा अध्ययन नहीं मिला।
गुजरात में लोकप्रिय।
स्रोत: en.wikipedia.org · rekhtagujarati.org · hindu-blog.com
- कवि गोस्वामी तुलसीदास
- कब सत्रहवीं सदी की शुरुआत, लगभग 1610 के दशक में
- कहाँ काशी
- लिपि देवनागरी, ब्रजभाषा
- रूप अलग अलग कवित्त और सवैये, सात कांड; लगभग 325 पद
इस कथा की लंका
- सुंदरकांड पूरा कवित्त छंद में है, और बाग़ उजड़ने से सीधे लंका दहन पर पहुँचता है।
- मानस में जो आग कुछ पंक्तियों में है, वह यहाँ बहुत फैलकर कही गई है।
- आग लंका के लोगों की आँख से दिखती है: रानियाँ "पानी! पानी!" पुकारती हैं, और मंदोदरी कहती हैं कि किसी ने उनकी बात नहीं मानी।
आज भी ख़ूब छपती है; इसके हनुमान वाले पद, हनुमान बाहुक, अलग से पढ़े जाते हैं।
स्रोत: uni-sofia.bg · tulsidas.orient.ox.ac.uk · sanskritdocuments.org · खुली प्रति
శ్రీ రంగనాథ రామాయణము
Ranganatha Ramayanam
- कवि गोना बुद्धा रेड्डी, काकतीय राज्य के सामंत; उत्तरकांड उनके बेटों का
- कब तेरहवीं सदी, लगभग 1280
- कहाँ आज का तेलंगाना और आंध्र
- लिपि तेलुगु लिपि
- रूप द्विपद छंद, छह कांड, लगभग 17,290 द्विपद
इस कथा की लंका
- तेलुगु की पहली पूरी रामायण, और पहली जो संगीत में बाँधी गई।
- इसमें कई लोक प्रसंग जुड़े हैं जो वाल्मीकि में नहीं, जैसे पुल बनाने में मदद करने वाली गिलहरी।
आंध्र और तेलंगाना की तोलु बोम्मलाटा, चमड़े की कठपुतलियों वाली मंडलियाँ, इसके द्विपद गाकर खेलती हैं।
स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · hindu-blog.com · खुली प्रति
- कवि संत एकनाथ, पैठण; बाक़ी हिस्सा उनके शिष्य गावबा ने पूरा किया
- कब सोलहवीं सदी का अंत, लगभग 1595 से 1599
- कहाँ पैठण, महाराष्ट्र
- लिपि देवनागरी, मराठी
- रूप सात कांड, लगभग 297 अध्याय, लगभग 40,000 ओवी
इस कथा की लंका
- सुंदरकांड 42 अध्यायों का है, वाल्मीकि से कहीं लंबा।
- एक अध्याय में गजेंद्र मोक्ष की कथा आती है, यह समझाने के लिए कि जलने से पहले लंका सोने जैसी क्यों चमकती थी।
- रावण के दरबार में देवता नौकर हैं: इंद्र चँवर डुलाते हैं, चंद्र छत्र पकड़ते हैं; युद्ध देवताओं को छुड़ाने का भी है।
महाराष्ट्र के गाँवों में और वारकरी परंपरा में आज भी पारायण होता है।
स्रोत: mr.wikisource.org · santsahitya.in · mahamtb.com · खुली प्रति
- कवि तुंचत्तु रामानुजन एषुत्तच्छन, आधुनिक मलयालम के पिता
- कब सोलहवीं सदी
- कहाँ तिरूर, मलप्पुरम, केरल
- लिपि मलयालम लिपि
- रूप किलिप्पाट्टु, यानी तोते का गीत: एक तोता कवि को कथा सुनाता है
इस कथा की लंका
- सारे कांडों में बस सुंदरकांडम् ही कलकांचि छंद में है, जिसकी आवाज़ घुँघरू जैसी लगती है।
- लंका के द्वार पर लंकालक्ष्मी हैं; हनुमान जी के प्रहार के बाद वे रास्ता देती हैं, और उनके हिस्से का नाम ही है उनकी मुक्ति।
- हनुमान जी अँगूठी देते हैं और कौए वाली कथा याद दिलाते हैं; सीता जी उनकी पीठ पर चलने से मना करती हैं।
केरल में कर्किडकम महीने भर, जिसे रामायण माह कहते हैं, घर घर और मंदिरों में रोज़ पढ़ा जाता है।
स्रोत: en.wikipedia.org · britannica.com · janmabhumi.in · खुली प्रति
সপ্তকাণ্ড ৰামায়ণ
Saptakanda Ramayana
- कवि माधव कंदली, राजा महामाणिक्य के दरबारी कवि
- कब चौदहवीं सदी
- कहाँ कपिली घाटी, मध्य असम
- लिपि असमिया लिपि
- रूप असमिया पद्य, पद छंद में; कंदली के पाँच कांड बचे, आदि कांड माधवदेव का और उत्तर कांड शंकरदेव का
इस कथा की लंका
- कवि ख़ुद कहते हैं कि उन्होंने शब्द दर शब्द अनुवाद नहीं किया, लंबे वर्णन छोड़ दिए ताकि आम लोग समझ सकें।
- राम और सीता यहाँ अपनी कमज़ोरियों के साथ इंसान हैं, जो बाद के कुछ कवियों को खटका।
- भारत की किसी नई भाषा की सबसे पुरानी रामायणों में।
असमिया साहित्य की नींव मानी जाती है।
स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · ojs.mbu.ac.th
ತೊರವೆ ರಾಮಾಯಣ
Torave Ramayana
- कवि नरहरि, जिन्हें कुमार वाल्मीकि कहा जाता है
- कब लगभग 1500 ईस्वी
- कहाँ तोरवे, विजयपुरा के पास, कर्नाटक
- लिपि कन्नड़ लिपि
- रूप भामिनी षट्पदी छंद, लगभग 112 संधि और 5,000 पद; शिव पार्वती को सुनाते हैं
इस कथा की लंका
- कन्नड़ की पहली वैष्णव रामायण; उससे पुरानी नागचंद्र की जैन रामायण है।
- कथा मोटे तौर पर वाल्मीकि की, अध्यात्म रामायण की छाया के साथ।
- रावण में दुखी नायक के कुछ रंग बचे हैं।
स्रोत: shastriyakannada.org · en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2
- कवि तुलसीदास के नाम से
- कब सोलहवीं सदी के अंत या सत्रहवीं की शुरुआत
- कहाँ परंपराएँ अलग अलग जगह बताती हैं; तुलसीदास ज़्यादातर काशी में रहे
- लिपि देवनागरी, अवधी
- रूप 43 पद: शुरू में 2 दोहे, 40 चौपाइयाँ, अंत में 1 दोहा
इस कथा की लंका
- लंका की यात्रा यहाँ कुछ गिनी चुनी पंक्तियों में याद की गई है, कथा की तरह नहीं।
- ग्यारहवीं से बीसवीं चौपाई तक हनुमान जी की राम सेवा, लक्ष्मण को जिलाने समेत।
करोड़ों लोग रोज़ पढ़ते हैं, बहुत से ज़ुबानी, ख़ासकर मंगलवार और शनिवार को।
स्रोत: en.wikipedia.org · en.wikipedia.org, 2 · en.wikipedia.org, 3 · खुली प्रति