पंचांग 2027

सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · जगह पक्की नहीं

अध्यात्म रामायण

Adhyatma Ramayana

  • भाषा संस्कृत
  • किसकी ब्रह्मांड पुराण के उत्तर भाग में; परंपरा इसे रामानंद से भी जोड़ती है
  • कब तेरहवीं से पंद्रहवीं सदी; सुंदरकांड पाँच सर्गों का, शिव और पार्वती के संवाद में
  • कहाँ जगह पक्की नहीं, उत्तर भारत की परंपरा

यह कथा

दर्शन की तरफ़ झुकी हुई कथा, जो शिव पार्वती के संवाद के रूप में चलती है। यहाँ राम ब्रह्म हैं और सीता माया, इसलिए द्वार पर रोकने वाली भी पहले से जानती है कि जनक के घर जन्मी योगमाया हैं। इसका सुंदरकांड पाँच सर्गों का है।

एक नज़र में

अध्यात्म रामायण, अपनी लिपि में

अध्यात्म रामायण

लिपि
देवनागरी, संस्कृत
रूप
सात कांड, लगभग 4,500 श्लोक, शिव पार्वती संवाद; सुंदरकांड पाँच सर्गों का
समय
तेरहवीं से पंद्रहवीं सदी

इस कथा की लंका

  • लंका की रक्षक हनुमान जी से कहती है कि ब्रह्मा ने यही पल बताया था, और सीता जनक के घर जन्मी योगमाया हैं।
  • त्रिजटा का सपना रावण के अंत और विभीषण के राज की बात कहता है।
  • पूरी लंका जलती है, बस विभीषण का घर बचता है; सीता जी अग्नि से प्रार्थना करती हैं, इसलिए आग हनुमान जी को नहीं जलाती।

आज: इसी का मलयालम रूप, एषुत्तच्छन का किलिप्पाट्टु, केरल में कर्किडकम महीने भर पढ़ा जाता है।

स्रोत:

  1. en.wikipedia.org
  2. sanskritdocuments.org
  3. lists.advaita-vedanta.org

इस कथा की एक खुली प्रति

सुंदरकांड के पल, इस कथा में

खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।

राजा का पहला सवाल

तीसरा हिस्सा: ख़बर

राम पहले उन्हें गले लगाते हैं, फिर कुछ पूछते हैं।

पूछने से पहले ही उन्होंने पहचान लिया कि काम हो चुका है।

गले लगाते हुए वे कुछ देर कुछ नहीं कहते, बस पीठ पर हाथ रखे रहते हैं।

आसपास खड़े सब भी चुप हो जाते हैं, और वह चुप्पी ही सबसे बड़ा इनाम लगती है।

अध्यात्म वाली कथा यहाँ नीति नहीं, मिलन कहती है।

अध्यात्म रामायण, सुंदरकांड

सात मंत्रिपुत्र

दूसरा दिन: आग

सात रथ अलग अलग दिशाओं से आते हैं, और बीच में खड़ा अकेला हिलता तक नहीं।

हर भिड़ंत वही एक बात दोहराती है, कि जो सामने है वह टिकेगा नहीं।

पहला पहिया टूटता है, फिर दूसरा, और घेरा अपने आप बिखर जाता है।

थोड़ी ही देर में मैदान ख़ाली है, और धूल अब भी हवा में है।

अध्यात्म वाली यह कथा ब्योरा कम रखती है और अर्थ ज़्यादा।

अध्यात्म रामायण, सुंदरकांड

अशोक वाटिका

पहली रात: खोज

बग़ीचा वही है, पर यहाँ उसका मतलब दूसरा है।

हारकर गिरी हुई लंका देवी कहती हैं कि ब्रह्मा ने बहुत पहले बता दिया था: जनक के घर जो जन्म लेंगी, वे योगमाया हैं।

हार मानने के बाद वही देवी उन्हें सीधे उस बाग़ और उस पेड़ का पता देती हैं जहाँ जानकी हैं। जाकर देख लो और जल्दी राम को बताओ।

पत्तों के बीच छिपकर वे पहले पूरी बात सुनाते हैं, फिर अँगूठी नीचे डालते हैं। शक होता है कि कहीं यह माया तो नहीं, और तब वे मेरु जैसा विशाल रूप दिखाते हैं।

आगे आग पूँछ को छूती तक नहीं, क्योंकि उन्होंने अग्नि से प्रार्थना कर दी थी, और जलती लंका में विभीषण का घर बचा रह जाता है।

जलती छतें

दूसरा दिन: आग

यहाँ आग की वजह अलग बताई गई है।

पूँछ में तेल में डूबे कपड़े बाँधकर आग लगाई जाती है, पर वह आग हनुमान को जलाती ही नहीं। कहा गया है कि सीता ने अग्नि से प्रार्थना कर दी थी, और पवन से पुरानी मित्रता के कारण अग्नि ठंडी हो गई।

वे छोटे होकर बंधन से निकलते हैं, फिर पहाड़ जैसे बड़े होकर छत दर छत कूदते हुए पूरी लंका जला देते हैं।

पर एक घर बचा रह जाता है। विभीषण का घर छोड़कर बाकी सारा नगर राख हो जाता है।

लौटती उड़ान

दूसरा दिन: आग

लौटते हुए उनके चेहरे पर जीत नहीं, काम पूरा होने का चैन है।

जो काम पहचान कराने का था, वह हो चुका, और बाकी अब किसी और के हाथ है।

वे बिना रुके उड़ते हैं, और पीछे लंका धीरे धीरे छोटी होती जाती है।

हाथ में वही निशानी है, और उसे वे बार बार देख लेते हैं।

इसीलिए लौटते वक़्त का ब्योरा छोटा है, और ज़ोर इस पर है कि अब जो होना है वह राम के हाथ है।

अध्यात्म रामायण, सुंदरकांड

राम का शिबिर

तीसरा हिस्सा: ख़बर

यही शिबिर, अध्यात्म रामायण में।

हनुमान लौटकर पहले प्रणाम करते हैं, फिर कहते हैं कि सीता देखी गईं, और पूरी बात क्रम से सुनाते हैं, कैसे उन्हें शिंशपा के नीचे देखा, कैसे मुद्रिका दी, और क्या क्या लौटकर कहा।

सुनकर राम उन्हें खींचकर गले लगा लेते हैं और कहते हैं कि यह काम देवताओं के लिए भी कठिन था, इसका बदला मेरे पास नहीं है, इसलिए अपना सब कुछ तुम्हें देता हूँ।

और वे यह भी कहते हैं कि मेरा आलिंगन संसार में दुर्लभ है, इसलिए तुम मुझे प्रिय हो।

इस कथा के 4 और पल खेल के भीतर पढ़े जा सकते हैं: छोड़ा हुआ पन्ना, पेड़ की ऊँची डाल, रावण का दरबार।

इस कथा से खेल के पत्ते

खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।

  • दुश्मन की तरफ़ से पहला इशारा
  • दरबार में दर्शन की बात
  • आग देखकर जलाती है
  • राम का गले लगाना
  • वाटिका, दर्शन की नज़र से

खेल में ढूँढो

उपन्यास

यह कथा उनतालीस लंकाओं में से एक है। इन्हीं लंकाओं पर मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा बनी है: उनतालीस लंकाएँ।

अध्यात्म रामायण इन त्योहारों के पन्नों पर भी आती है, उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 में: रामायण मास। ये दिन, और साल का हर त्योहार और व्रत, एक बार दबाकर अपने फ़ोन के कैलेंडर में: Manu Vishranti Calendar जोड़ें।

सवाल जवाब

पूछे जाने वाले सवाल

अध्यात्म रामायण किस भाषा में है?

संस्कृत।

अध्यात्म रामायण किसकी रचना है?

ब्रह्मांड पुराण के उत्तर भाग में; परंपरा इसे रामानंद से भी जोड़ती है।

अध्यात्म रामायण कहाँ की है?

जगह पक्की नहीं, उत्तर भारत की परंपरा।

अध्यात्म रामायण कब की है?

तेरहवीं से पंद्रहवीं सदी; सुंदरकांड पाँच सर्गों का, शिव और पार्वती के संवाद में।