सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत में
रामचरितम्
Ramacharitam
- भाषा पुराना मलयालम
- किसकी चीरामन
- कब लगभग बारहवीं सदी
- कहाँ केरल
यह कथा
मलयालम की सबसे पुरानी बची हुई काव्य रचना, जिसे चीरामन ने लगभग बारहवीं सदी में रचा। इसमें कथा शुरू से नहीं चलती, सीधे लड़ाई वाले हिस्से से उठती है। यानी उस भाषा की शुरुआत ही लड़ाई वाले कांड से हुई, और भाषा भी ऐसी है जिसमें मलयालम और तमिल दोनों की छाया दिखती है।
एक नज़र में
रामचरितम्, अपनी लिपि में
രാമചരിതം
- लिपि
- मलयालम लिपि
- रूप
- 1,814 पद, गीत के रूप में; मुख्य रूप से युद्धकांड
- समय
- बारहवीं सदी का अंत या तेरहवीं की शुरुआत; कुछ इसे चौदहवीं सदी तक रखते हैं
इस कथा की लंका
- मलयालम की सबसे पुरानी बची हुई काव्य रचना।
- कथा सीधे युद्धकांड से उठती है, इसलिए इसमें सुंदरकांड का अपना हिस्सा नहीं।
- भाषा तमिल और मलयालम का मेल है, यानी एक भाषा के बनने का पल।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
वानरों का घेरा
तीसरा हिस्सा: ख़बर
वहाँ यह घड़ी आती ही नहीं, सीधे लड़ाई का मैदान खुलता है।
न लौटना, न सुनाना, बस सामने खड़ी सेना।
पहला पन्ना ही हथियारों की गिनती से शुरू होता है।
यानी उस भाषा ने कथा को बीच से उठाया, शुरू से नहीं।
रामचरितम्, चीरामनराम का शिबिर
तीसरा हिस्सा: ख़बर
यहाँ शिविर का इंतज़ार नहीं दिखता, सीधे अगली सुबह की तैयारी दिखती है।
हथियार गिने जा रहे हैं, और टोलियाँ बाँटी जा रही हैं।
धनुष की डोरियाँ कसी जा रही हैं, और पत्थर एक ओर ढेर किए जा रहे हैं।
कोई नक्शा ज़मीन पर खींचता है, और बाकी उसके चारों ओर झुक जाते हैं।
उसकी भाषा में मलयालम और तमिल दोनों की छाया है।
रामचरितम्, चीरामन, लगभग बारहवीं सदीइस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
यह कथा उनतालीस लंकाओं में से एक है। इन्हीं लंकाओं पर मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा बनी है: उनतालीस लंकाएँ।