सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत में
मोल्ला रामायणम्
Molla Ramayanam
- भाषा तेलुगु
- किसकी आतुकूरि मोल्ला
- कब सोलहवीं सदी
- कहाँ गोपवरम, आंध्र
यह कथा
तेलुगु की वह रामकथा जिसे सोलहवीं सदी में मोल्ला ने रचा, एक कुम्हार की बेटी ने। उनके पीछे कोई बड़ा घराना नहीं था, और वे अपनी कविता को अपनी कमाई नहीं, देन मानती हैं। यह तेलुगु की पहली संक्षेप रामकथा मानी जाती है।
एक नज़र में
मोल्ला रामायणम्, अपनी लिपि में
మొల్ల రామాయణము
- लिपि
- तेलुगु लिपि
- रूप
- छोटा काव्य, लगभग 870 पद, छह कांड; ज़्यादातर कंद छंद में, सीधी तेलुगु
- समय
- सोलहवीं सदी
इस कथा की लंका
- इसका सुंदरकांड पहले के सारे कांडों जितना लंबा है।
- हनुमान जी की समुद्र वाली छलाँग का वर्णन इसकी सबसे ऊँची जगह माना जाता है: रूप, खड़े होने का ढंग, और छलाँग की ताक़त।
- उत्तरकांड नहीं, और वाल्मीकि के लंबे प्रकृति वर्णन भी कटे हुए; कथा कसी हुई।
आज: तेलुगु में ख़ूब पढ़ी जाती है, स्कूलों में पढ़ाई जाती है, और हरिकथा में सुनाई जाती है।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
इस कथा के 3 और पल खेल के भीतर पढ़े जा सकते हैं: पेड़ की ऊँची डाल, लंका का किनारा, वानरों का घेरा।
इस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
यह कथा उनतालीस लंकाओं में से एक है। इन्हीं लंकाओं पर मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा बनी है: उनतालीस लंकाएँ।