सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत में
रामावतार
Ramavatar (Dasam Granth)
- भाषा ब्रजभाषा
- किसकी गुरु गोबिंद सिंह (परंपरा से); कवि का नाम "स्याम" आता है
- कब सन 1698 (विक्रम संवत 1755)
- कहाँ आनंदपुर साहिब के पास, सतलुज के किनारे
यह कथा
दसम ग्रंथ के चौबीस अवतार में बीसवाँ, राम अवतार। ब्रजभाषा में है और गुरमुखी लिपि में लिखा है, और परंपरा इसे गुरु गोबिंद सिंह की रचना मानती है। यह 1698 में सतलुज के किनारे, नैना देवी पहाड़ी के नीचे पूरा हुआ। इसमें पूरा सुंदरकांड एक ही छंद में है: हनुमान जी अँगूठी लेकर जाते हैं, नगर जलाते हैं, अक्षय कुमार को मारते हैं और लौट आते हैं। इसके आख़िरी सवैया और दोहा आज भी रोज़ रहरास साहिब में पढ़े जाते हैं।
एक नज़र में
रामावतार, अपनी लिपि में
ਰਾਮ ਅਵਤਾਰ
- लिपि
- गुरमुखी लिपि, ब्रजभाषा
- रूप
- दसम ग्रंथ के चौबीस अवतार में बीसवाँ अवतार; 864 छंद, कई तरह के छंदों में, वीर रस
- समय
- सन 1698 में पूरी हुई (विक्रम संवत 1755)
इस कथा की लंका
- पूरा सुंदरकांड एक ही छंद में है: छंद 366, गीता मालती छंद की चार पंक्तियाँ।
- वानर सेना चार दिशाओं में बँटती है, और हनुमान जी अँगूठी लेकर समुद्र पार करते हैं, सीता जी तक पहुँचते हैं, नगर जलाते हैं, अक्षय कुमार को मारते हैं और अशोक वाटिका उजाड़ देते हैं।
- लौटकर वे राम जी को रावण की सारी करतूत बताते हैं, और कथा सीधे युद्ध की ओर बढ़ जाती है। वाल्मीकि में जो खोज 68 सर्गों में है, वह यहाँ चार पंक्तियों में है।
आज: इसके आख़िरी सवैया और दोहा, "पाँइ गहे जब ते तुमरे", सिख रोज़ शाम की रहरास साहिब में पढ़ते हैं।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
उत्तर का फाटक
पहली रात: खोज
रामावतार में यह फाटक आता ही नहीं।
वहाँ पूरी खोज एक ही छंद में है: अँगूठी ली, समुद्र पार किया, और सीता तक पहुँचे।
बीच का कोई पड़ाव, कोई रोकने वाली, वहाँ गिनी ही नहीं जाती।
कवि को आगे की लड़ाई कहनी है, इसलिए यह रात चार पंक्तियों में बीत जाती है।
हिम्मत सिखाने वाली कथा में रुकने का हिस्सा भी छोटा रखा जाता है।
दसम ग्रंथ, रामावतार, छंद 366वाटिका का तोरण
दूसरा दिन: आग
रामावतार में यह पूरी कड़ी उसी एक छंद की एक पंक्ति है।
वे नगर जलाते हैं, अक्षय कुमार को मारते हैं, और अशोक वाटिका उजाड़ देते हैं।
न डर की बात आती है, न विनती की, सिर्फ़ काम होता है।
लड़ाई का पूरा ब्योरा कवि आगे युद्ध के छंदों के लिए बचाकर रखते हैं।
छंद तेज़ हैं और शब्द ऐसे चुने गए हैं जो सुनते ही खड़ा कर दें।
दसम ग्रंथ, रामावतार, छंद 366 · अक्षय कुमारइस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
यह कथा उनतालीस लंकाओं में से एक है। इन्हीं लंकाओं पर मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा बनी है: उनतालीस लंकाएँ।
रामावतार इन त्योहारों के पन्नों पर भी आती है, उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 में: गुरु गोबिंद सिंह जयंती, बैसाखी। ये दिन, और साल का हर त्योहार और व्रत, एक बार दबाकर अपने फ़ोन के कैलेंडर में: Manu Vishranti Calendar जोड़ें।