पंचांग 2027

सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत के बाहर

रीमकेर

Reamker

  • भाषा खमेर
  • किसकी खमेर परंपरा, कई हाथ
  • कब बचा हुआ पाठ सोलहवीं सदी का
  • कहाँ अंकोर और नोम पेन्ह, कंबोडिया

यह कथा

कंबोडिया की राष्ट्रीय रामकथा, जिसका नाम ही है राम की कीर्ति। नाम बदल जाते हैं: राम वहाँ प्रेअह रीम, सीता नेअंग सेदा, और रावण क्रोंग रीप। यह कथा किताब से ज़्यादा मंच पर मिलती है, नाच और छाया नाटक में, और इसके दृश्य अंकोर वात तथा राजमहल की दीवारों पर बने हैं।

एक नज़र में

रीमकेर, अपनी लिपि में

រាមកេរ្តិ៍

लिपि
खमेर लिपि
रूप
दो भागों का पद्य महाकाव्य; शास्त्रीय नृत्य, मुखौटा नाटक और बड़े छाया नाटक में
समय
बचा हुआ पहला भाग सोलहवीं सत्रहवीं सदी का, दूसरा अठारहवीं का; राम का ज़िक्र सातवीं सदी के शिलालेख में

इस कथा की लंका

  • हनुमान उड़कर पता लगाते हैं कि क्रोंग रीप (रावण) ने नेअंग सेदा को लंका द्वीप पर क़ैद कर रखा है।
  • पुल बनते समय जलपरियाँ पत्थर चुराती हैं; हनुमान उनकी रानी सोवन मच्छा से प्रेम करते हैं, और उनका बेटा मच्छानु होता है।
  • इसके दृश्य अंकोर वात पर खुदे हैं और नोम पेन्ह के राजमहल की दीवारों पर बने हैं।

आज: कंबोडिया का शाही बैले, मुखौटा नाटक ल्खोन खोल (यूनेस्को सूची, 2018) और बड़ा छाया नाटक इसे आज भी खेलते हैं।

स्रोत:

  1. en.wikipedia.org
  2. asiasociety.org
  3. ich.unesco.org

सुंदरकांड के पल, इस कथा में

खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।

अशोक वाटिका

पहली रात: खोज

परदे के पीछे रोशनी जलती है, और दृश्य छाया बनकर सामने आता है।

चमड़े के पुतले उठते हैं, और उन्हें उठाने वाले ख़ुद भी नाचते हैं।

बाग़ की डालें परदे पर काँपती हैं, जैसे उन पर हवा चल रही हो।

बीच बीच में ढोल रुकता है, और उसी चुप्पी में बात कही जाती है।

इसीलिए उसके वाक्य छोटे हैं और उनमें ठहराव मंच के हिसाब से आते हैं।

रीमकेर; खमेर नाच और छाया नाटक की परंपरा

मधुवन

तीसरा हिस्सा: ख़बर

खमेर मंच पर यह हिस्सा हल्का रखा जाता है।

वहाँ मंच पर नाचने वाले बीच में रुककर दर्शकों से आँख मिलाते हैं, और हँसी फूट पड़ती है।

मंच पर फलों की टोकरी उलट दी जाती है, और नाचने वाले उन्हें लपकते हैं।

ढोल बीच में रुकता है, और उसी चुप्पी में कोई चुटकी सुनाई देती है।

भारी दृश्यों के बीच यह ठहराव जान बूझकर रखा जाता है।

रीमकेर; खमेर नाच की परंपरा

इस कथा के 1 और पल खेल के भीतर पढ़े जा सकते हैं: वानरों का घेरा।

इस कथा से खेल के पत्ते

खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।

  • सोने की पूँछ वाली जलपरी
  • छह सौ बयालीस मीटर लंबी कथा
  • सातवीं सदी का शिलालेख
  • भारी दृश्यों के बीच हल्की जगह
  • मंच के लिए लिखी गई कथा
  • नाम और रंग, दोनों बदले हुए

खेल में ढूँढो

उपन्यास

यह कथा उनतालीस लंकाओं में से एक है। इन्हीं लंकाओं पर मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा बनी है: उनतालीस लंकाएँ।

सवाल जवाब

पूछे जाने वाले सवाल

रीमकेर किस भाषा में है?

खमेर।

रीमकेर किसकी रचना है?

खमेर परंपरा, कई हाथ।

रीमकेर कहाँ की है?

अंकोर और नोम पेन्ह, कंबोडिया।

रीमकेर कब की है?

बचा हुआ पाठ सोलहवीं सदी का।