सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत के बाहर
तिब्बती रामकथा
Tibetan Ramayana (Dunhuang)
- भाषा तिब्बती
- किसकी कवि का नाम नहीं मिलता, दुनहुआंग की पोथियों से
- ब्योरा दुनहुआंग की पोथियों में
- कहाँ दुनहुआंग की गुफाएँ
यह कथा
तिब्बती में मिली रामकथा, जिसके पन्ने दुनहुआंग की उन गुफाओं से मिले जहाँ सदियों तक पुरानी पोथियाँ बंद पड़ी रहीं। यानी यह कथा रेशम वाले रास्ते पर चलते चलते हिमालय के उस पार तक जा पहुँची।
एक नज़र में
तिब्बती रामकथा, अपनी लिपि में
तिब्बती रामकथा
- लिपि
- तिब्बती; पोथियों पर कोई शीर्षक नहीं
- रूप
- छोटा गद्य पद्य मिला रूप, काग़ज़ के खर्रों पर
- समय
- पोथियाँ लगभग 750 से 1000 ईस्वी की
इस कथा की लंका
- राम तीन वानरों को अँगूठी और एक चिट्ठी देकर भेजते हैं; यहाँ चिट्ठियाँ पूरी कथा में चलती हैं।
- हनुमंत अकेले छलाँग लगाते हैं और सीता को नौ दीवारों वाले, बिना दरवाज़े के क़िले में पाते हैं।
- पूँछ पर घी में भीगा कपड़ा बाँधकर आग लगाई जाती है, और वे राक्षसों का क़िला जला देते हैं।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
आसमान के दर्शक
पहली रात: खोज
ऊपर देवता देखते रहते हैं, और नीचे यह अकेला वानर समुद्र पार करता है।
वे न रोकते हैं, न मदद करते हैं, सिर्फ़ देखते हैं कि यह कहाँ तक जाता है।
उनमें से कोई कहता है कि यह गिर जाएगा, और कोई कहता है कि नहीं गिरेगा।
वे बादलों के किनारे पर खड़े हैं, और नीचे की हवा उनके कपड़े हिला रही है।
यह कथा टुकड़ों में बची है, और उन्हीं टुकड़ों से पता चलता है कि यह रात हिमालय के पार तक पहुँची थी।
दुनहुआंग से मिली तिब्बती पांडुलिपियाँपेड़ की ऊँची डाल
पहली रात: खोज
यहाँ अँगूठी के साथ एक चिट्ठी भी आती है, जो राम ने ख़ुद लिखी है।
और लौटते वक़्त वे भी एक चिट्ठी देती हैं, जो उसी तरह हाथ से लिखी हुई है।
चिट्ठी खोलकर वे उसे दो बार पढ़ती हैं, फिर मोड़कर आँचल में रख लेती हैं।
लिखते वक़्त उनके हाथ काँपते हैं, और अक्षर टेढ़े पड़ते जाते हैं।
बाकी कथाएँ निशानी भेजती हैं, यह कथा शब्द भेजती है।
तिब्बती रामकथा, दुनहुआंग की पोथियाँइस कथा के 1 और पल खेल के भीतर पढ़े जा सकते हैं: त्रिकूट की चोटी।
इस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
इस कथा की लंका, उपन्यास में
मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा उनतालीस लंकाएँ इस कथा की लंका में उतरती है। तीनों खंड लिखे जा चुके हैं, और प्रकाशन की तैयारी में हैं।
खंड 2, पानी पर आग: इस बार पूरी तैयारी है।- सदियों का एक मेहमान: दोरजे, दुनहुआंग, लगभग 820। खंड 2, पानी पर आग