सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत में
मापिला रामायणम्
Mappila Ramayanam
- भाषा मलयालम की मापिला बोली
- किसकी पिरांतन हसनकुट्टी, उत्तर मालाबार के गायक
- ब्योरा लोक परंपरा में
- कहाँ मालाबार, केरल
यह कथा
केरल के मापिला मुसलमानों के बीच गाया जाने वाला रामायण गीत, जिसे पिरांतन हसनकुट्टी गाते थे। इसका बस एक हिस्सा बचा है, जिसे 1976 में लिखकर दर्ज किया गया। रावण यहाँ लवणन है, सुल्तान जैसा, और गीत में हँसी भरी है।
एक नज़र में
मापिला रामायणम्, अपनी लिपि में
മാപ്പിള രാമായണം
- लिपि
- मलयालम लिपि
- रूप
- मापिलप्पाट्टु, मापिला धुन का गीत; बस एक हिस्सा बचा है
- समय
- बीसवीं सदी की शुरुआत का गीत; 1976 में लिखकर दर्ज हुआ
इस कथा की लंका
- बचे हुए हिस्से में सुंदरकांड नहीं है; वह शूर्पणखा के "लामा" (राम) से शादी के प्रस्ताव पर टिका है।
- रावण यहाँ "लवणन" है, सुल्तान जैसा, और एक दृश्य में वह अपनी दसों दाढ़ियाँ एक साथ बनाने की कोशिश करता है।
- सीता "मुत्तु बीवी सीता" हैं, और हनुमान "अनुमान"।
आज: आज भी कभी कभी गाया और खेला जाता है; 2019 में वडकरा की एक मंडली ने इसे बेंगलुरु में मंच पर किया।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
नगर की गलियाँ
दूसरा दिन: आग
मालाबार में यही कथा लोगों के बीच गाई जाने वाली शक्ल में मिलती है।
वहाँ की बोली, मुहावरे और चुटकियाँ उसी समाज की हैं, किसी दरबार की नहीं।
गली के मोड़ पर कोई दो लोग आपस में झगड़ रहे हैं, और बात किसी और ही चीज़ की है।
पास से गुज़रते हुए उनकी बात सुनाई देती है, और आगे बढ़ते ही पीछे छूट जाती है।
इसलिए यह पल भी वहाँ भारी नहीं पड़ता, उसमें हँसी की जगह बची रहती है।
मापिला रामायणम्, मालाबार की लोकपरंपराइस कथा के 1 और पल खेल के भीतर पढ़े जा सकते हैं: अशोक वाटिका।
इस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
यह कथा उनतालीस लंकाओं में से एक है। इन्हीं लंकाओं पर मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा बनी है: उनतालीस लंकाएँ।