सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में · भारत में
अध्यात्म रामायण किलिप्पाट्टु
Adhyatma Ramayanam Kilippattu
- भाषा मलयालम
- किसकी एषुत्तच्छन, अध्यात्म रामायण का मलयालम रूप
- कब सोलहवीं सदी
- कहाँ तिरूर, केरल
यह कथा
मलयालम की वह कथा जिसे सुनाने वाला कोई आदमी नहीं, एक तोता है। इसका सुंदरकांडम् अकेला कांड है जो कलकांचि छंद में है, और लंका के द्वार पर रोकने वाली का नाम यहाँ लंकालक्ष्मी है, जिसके हिस्से का नाम ही है उसकी मुक्ति।
एक नज़र में
अध्यात्म रामायण किलिप्पाट्टु, अपनी लिपि में
അദ്ധ്യാത്മരാമായണം കിളിപ്പാട്ട്
- लिपि
- मलयालम लिपि
- रूप
- किलिप्पाट्टु, यानी तोते का गीत: एक तोता कवि को कथा सुनाता है
- समय
- सोलहवीं सदी
इस कथा की लंका
- सारे कांडों में बस सुंदरकांडम् ही कलकांचि छंद में है, जिसकी आवाज़ घुँघरू जैसी लगती है।
- लंका के द्वार पर लंकालक्ष्मी हैं; हनुमान जी के प्रहार के बाद वे रास्ता देती हैं, और उनके हिस्से का नाम ही है उनकी मुक्ति।
- हनुमान जी अँगूठी देते हैं और कौए वाली कथा याद दिलाते हैं; सीता जी उनकी पीठ पर चलने से मना करती हैं।
आज: केरल में कर्किडकम महीने भर, जिसे रामायण माह कहते हैं, घर घर और मंदिरों में रोज़ पढ़ा जाता है।
सुंदरकांड के पल, इस कथा में
खेल में लंका की किसी जगह पर पहुँचकर वही पल दूसरी रामकथाओं में भी पढ़ा जा सकता है। यह कथा उन पलों को ऐसे कहती है।
वाटिका के पेड़
पहली रात: खोज
बाग़ में हवा चलती है, और पेड़ों के नाम एक लय में आते जाते हैं।
हर नाम पर एक पेड़ सामने आता है, और फिर पीछे छूट जाता है।
अशोक, चंपा, नागकेसर, और उन्हीं नामों की ताल पर कथा आगे बढ़ती है।
पेड़ों के नीचे फूलों की चादर बिछी है, और उस पर किसी के चलने के निशान हैं।
और उसी लय के बीच वह चुप्पी भी सुनाई देती है।
अध्यात्म रामायण किलिप्पाट्टु, एषुत्तच्छनपहरेदारों की चौकी
पहली रात: खोज
चौकी पर खड़ी रक्षिका उन्हें रोकती है, और एक ही टक्कर में रास्ता खुल जाता है।
भीतर घुसते ही वे छोटे हो जाते हैं, और गली के अँधेरे में मिल जाते हैं।
वह गिरते हुए भी उन्हें रोकने की कोशिश करती है, और फिर हाथ छोड़ देती है।
भीतर की पहली गली में दीये जल रहे हैं, और कोई अपने घर लौट रहा है।
तोते की ज़बान से चलती इस कथा में यह पहरा एक ही पंक्ति में बीत जाता है।
अध्यात्म रामायण किलिप्पाट्टु, सुंदर कांडम्इस कथा के 2 और पल खेल के भीतर पढ़े जा सकते हैं: अशोक वाटिका, पंछियों की डाल।
इस कथा से खेल के पत्ते
खेल में ये पत्ते इसी कथा से खुलते हैं। हर पत्ते में एक ऐसी बात है जो बहुत कम लोगों ने सुनी है।
उपन्यास
यह कथा उनतालीस लंकाओं में से एक है। इन्हीं लंकाओं पर मनु विश्रांति की उपन्यास गाथा बनी है: उनतालीस लंकाएँ।
अध्यात्म रामायण किलिप्पाट्टु इन त्योहारों के पन्नों पर भी आती है, उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 में: रामायण मास, ओणम, संक्रांति। ये दिन, और साल का हर त्योहार और व्रत, एक बार दबाकर अपने फ़ोन के कैलेंडर में: Manu Vishranti Calendar जोड़ें।