
उनतालीस लंकाएँ · कौन कौन
बाबूजी
अन्नू के पिता, बनारस, 1987
बाबूजी बनारस में संस्कृत पढ़ाते थे। मोटे काले फ़्रेम का गोल चश्मा, सफ़ेद कुर्ता धोती।
रविवार की सुबह पूरा मोहल्ला एक टीवी के आगे जुटता था। बाबूजी हर ग़लती वाल्मीकि से मिलाकर गिनते थे।
पाँचवीं ग़लती पर वे लौटे नहीं। पीछे रह गया उनका चश्मा, और उसमें समुद्र की रेत।
उनकी दुनिया
बाबूजी, दृश्यों में










