
उनतालीस लंकाएँ · खंड 1
पाँचवाँ चेहरा
Panchvan Chehra · The Fifth Face
प्रकाशन की तैयारी में
पाँच लोग, एक दरवाज़ा, और लंका का एक राजा जो चाहता है कि एक यहीं रहे।
कहानी
बनारस, 1987। रविवार की सुबह पूरा मोहल्ला आँगन में टीवी वाली रामायण देख रहा है। बाबूजी उसकी हर ग़लती वाल्मीकि से मिलाकर उँगलियों पर गिनते हैं। पाँचवीं उँगली उठती है, और बत्ती चली जाती है। बत्ती लौटती है, तो उनकी कुर्सी ख़ाली है। नन्ही अन्नू की मुट्ठी में बस उनका चश्मा है, और चश्मे से गीली रेत झर रही है।
उनतालीस बरस बाद अन्नू की बेटी अदा, सोलह की, एक खेल बनाती है। उसमें सुंदरकांड की उनतालीस कथाएँ हैं, यानी उनतालीस लंकाएँ।
धनुषकोडि में, जहाँ ज़मीन ख़त्म होती है, पाँच लोग उस खेल में उतरते हैं: अदा, उसकी मम्मा अन्नू, पापा कुंदन, दोस्त तेनज़िन, और मथाई जी, जो उन्हें किनारे पर मिले थे।
लंका सच्ची निकलती है। छतों पर आग है, और फ़ोन की बैटरी ही उनका तेल है। वह ख़त्म हुई, तो अंदर उनका दीया बुझ जाएगा।
पूरी यात्रा, पड़ाव दर पड़ाव: गाथा के पन्ने पर
इस खंड की लंकाएँ
किन कथाओं की लंका में
हर कथा का अपना पन्ना है, लंका की खोज खेल के हिस्से में: वह किसकी है, कहाँ की है, और सुंदरकांड के पल उसमें कैसे कहे गए।
सदियों के मेहमान
इस खंड में और कौन
- खंड 1 · केरल, 1795अम्मिणीतोलपावकूत्तु, यानी चमड़े की कठपुतलियों वाला छाया नाटक। उनकी लंका काली छाया की है, हर किनारे पर काँपती सुनहरी रेखा। उनकी लंका: कंब रामायण
- खंड 1 · बाली, 1931रायकेचक का घेरा, जहाँ सब मिलकर "चक, चक" गाते हैं। उनकी लंका का आसमान दीये की लौ जैसा नारंगी है। उनकी लंका: ककविन रामायण
- खंड 1 · सियाम, 1836खमखोन के ऊँचे हरे, लाल और काले मुखौटे। उनकी लंका की छतें सुनहरी और नुकीली हैं। उनकी लंका: रामकियेन
पूरी गाथा: उनतालीस लंकाएँ · खेल: लंका की खोज













