पंचांग 2027

सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में

रावण और शिव, हनुमान जी और रुद्र

सीधा जवाब

रामकथा में शिव कई जगह हैं, पर हर बात एक ग्रंथ से नहीं आती। रावण के शिव का पर्वत हिलाने (जिसे परंपरा कैलाश मानती है) और उसका नाम पड़ने की कथा वाल्मीकि के उत्तर कांड में है। हनुमान जी को रुद्र का अवतार शिव पुराण कहता है, वाल्मीकि नहीं। शिव तांडव स्तोत्र परंपरा से रावण का माना जाता है, पर वह वाल्मीकि रामायण में नहीं है। और रामेश्वरम के दो लिंगों की कथा बाद के पुराणों और मंदिर की अपनी परंपरा से आती है।

उनतालीस लंकाएँ: धनुषकोडी, रामेश्वरम के पास समुद्र का किनारा
उनतालीस लंकाएँ: धनुषकोडी, रामेश्वरम के पास समुद्र का किनारा

एक नज़र में

एक नज़र में: रावण, हनुमान जी और शिव
बातकौन सा ग्रंथ कहता हैकहाँ
रावण का शिव का पर्वत हिलाना, नाम रावण पड़नावाल्मीकि रामायण (पर्वत का नाम परंपरा से कैलाश)उत्तर कांड, सर्ग 16
शिव तांडव स्तोत्र रावण कापरंपरा; स्तोत्र का अपना आख़िरी श्लोकवाल्मीकि रामायण में नहीं
हनुमान जी रुद्र के अवतारशिव पुराणशतरुद्र संहिता, अध्याय 20
शिव का हनुमान जी को वरदानवाल्मीकि रामायणउत्तर कांड, सर्ग 36, श्लोक 18
रामेश्वरम में शिव की कृपावाल्मीकि रामायणयुद्ध कांड, सर्ग 123
रामलिंगम और विश्वलिंगमबाद के पुराण और मंदिर की परंपरारामनाथस्वामी मंदिर

रावण ने कैलाश उठाया, और नाम पाया

वाल्मीकि रामायण के उत्तर कांड, सर्ग 16 में रावण शिव के पर्वत को हिलाता है (श्लोक 20)। वाल्मीकि पहाड़ का नाम नहीं लेते, परंपरा उसे कैलाश मानती है। शिव खेल खेल में अपने पैर के अँगूठे से पहाड़ को दबा देते हैं (श्लोक 21)। रावण की भुजाएँ दब जाती हैं, और उसकी चीख़ तीनों लोकों में भर जाती है (श्लोक 22 और 23)।

तब शिव कहते हैं कि तूने तीनों लोकों को रुलाया, इसलिए तेरा नाम रावण होगा (श्लोक 26 और 27), यानी जो दूसरों को रुलाए (श्लोक 28)। यह कथा सुंदरकांड से बहुत पहले की है, पर रावण की शिव भक्ति यहीं से शुरू होती है।

शिव तांडव स्तोत्र

परंपरा कहती है कि शिव तांडव स्तोत्र रावण ने रचा। स्तोत्र ख़ुद अपने सत्रहवें श्लोक में ख़ुद को "दशवक्त्रगीतं", यानी दस मुँह वाले का गाया हुआ, कहता है, और इसके अंत में "श्रीरावणकृतं" लिखा मिलता है। पर यह स्तोत्र वाल्मीकि रामायण में नहीं है, और यह कब लिखा गया, यह पक्का नहीं पता।

हनुमान जी और रुद्र

शिव पुराण की शतरुद्र संहिता (अध्याय 20) में हनुमान जी को शिव का, रुद्र का अवतार कहा गया है, जो राम के काम के लिए अंजना के गर्भ से जन्मे। स्कंद पुराण के एक पाठ में उन्हें ग्यारहवाँ रुद्र कहा गया है। वाल्मीकि रामायण यह बात नहीं कहती; वहाँ वे वायु के पुत्र हैं।

वाल्मीकि में शिव का हनुमान जी से रिश्ता एक वरदान का है: बचपन में शंकर उन्हें वर देते हैं कि वे न शिव से मरेंगे, न शिव के हथियारों से (उत्तर कांड, सर्ग 36, श्लोक 18)। बाकी वरदान वरदानों वाले पन्ने पर हैं।

रामेश्वरम के दो लिंग

वाल्मीकि रामायण में रामेश्वरम में लिंग स्थापित करने की कथा नहीं है। युद्ध के बाद पुष्पक विमान से लौटते हुए राम बस इतना कहते हैं कि यहाँ शिव ने उन पर कृपा की थी, और सेतुबंध एक पवित्र तीर्थ है (युद्ध कांड, सर्ग 123, श्लोक 19 से 21)।

दो लिंगों की कथा बाद के पुराणों और रामनाथस्वामी मंदिर की अपनी परंपरा की है। तमिलनाडु पर्यटन विभाग के अनुसार राम शिव की पूजा करना चाहते थे। हनुमान जी लिंग लाने गए और देर हो गई, तो सीता जी ने रेत से एक लिंग बना दिया, जो रामलिंगम कहलाता है। हनुमान जी का लाया लिंग विश्वलिंगम है। मंदिर में माना जाता है कि पहले विश्वलिंगम की पूजा हो।

यह पूजा युद्ध से पहले हुई या बाद में, इस पर भी कथाएँ अलग हैं: कुछ पुराण इसे जीत के लिए, युद्ध से पहले रखते हैं, और मंदिर की कथा कहती है युद्ध के बाद, प्रायश्चित के लिए। रामेश्वरम के पास का समुद्र तट, धनुषकोडी, उनतालीस लंकाएँ की कथा में भी आता है।

इस पर और

हर कथा का अपना पन्ना है, और हर पात्र का भी।

सवाल जवाब

पूछे जाने वाले सवाल

रावण का नाम रावण क्यों पड़ा?

शिव के पर्वत के नीचे दबने पर उसकी चीख़ तीनों लोकों में भर गई, तो शिव ने कहा कि तूने लोकों को रुलाया, इसलिए तेरा नाम रावण होगा (वाल्मीकि रामायण, उत्तर कांड, सर्ग 16, श्लोक 26 और 27)।

क्या शिव तांडव स्तोत्र रावण ने लिखा?

परंपरा यही मानती है, और स्तोत्र ख़ुद को दस मुँह वाले का गाया कहता है। पर यह वाल्मीकि रामायण में नहीं है, और इसका समय पक्का नहीं।

क्या हनुमान जी शिव के अवतार हैं?

शिव पुराण की शतरुद्र संहिता (अध्याय 20) उन्हें रुद्र का अवतार कहती है। वाल्मीकि रामायण में वे वायु के पुत्र हैं, और यह बात वहाँ नहीं है।

रामेश्वरम में कितने लिंग हैं?

मंदिर की परंपरा में दो: सीता जी का रेत से बनाया रामलिंगम, और हनुमान जी का लाया विश्वलिंगम।

क्या वाल्मीकि रामायण में रामेश्वरम में शिवलिंग स्थापना है?

नहीं। वहाँ राम बस इतना कहते हैं कि यहाँ शिव ने उन पर कृपा की थी (युद्ध कांड, सर्ग 123)।

In English

Shiva runs through the Rama story, but not all from one text. Ravana shaking Shiva's mountain (unnamed in Valmiki, Kailash by tradition), Shiva pressing it down with his toe, and Shiva naming him "Ravana" for the cry that made the worlds weep are in Valmiki's Uttara Kanda (sarga 16). The Shiva Tandava Stotram is traditionally Ravana's and calls itself the song of the ten-faced one, but it is not in Valmiki and its date is unknown. Hanuman as an avatar of Rudra comes from the Shiva Purana (Shatarudra Samhita 20), not Valmiki, where he is the son of Vayu and receives a boon from Shiva (Uttara Kanda 36.18). Valmiki mentions only Shiva's grace at Setubandha (Yuddha Kanda 123); the two lingas of Rameshwaram, Sita's sand Ramalingam and Hanuman's Vishvalingam, come from later Puranas and the temple's own tradition.

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