उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी
विवाह पंचमी 2027
Vivah Panchami 2027
एक धनुष टूटा, और दो नगरों के बीच का रास्ता बारात से भर गया।
इस बरस (2026) विवाह पंचमी 14 दिसंबर, सोमवार को है। विवाह पंचमी 2026: तारीख़, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड · यह पन्ना 2027 का है।
विवाह पंचमी 2027 में 3 दिसंबर, शुक्रवार को है। मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी तिथि 2 दिसंबर, दोपहर 1:44 से 3 दिसंबर, शाम 4:14 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
ढोल पहले पहुँचता है। बारात बाद में।
जनकपुर की गली में औरतें दरवाज़ों पर खड़ी हैं, और हर दरवाज़े से एक नई आवाज़ गीत उठाती है।
बारात अयोध्या से आई है। कथा में भी आई थी, आज भी आती है।
मंदिर के आँगन में एक मंडप है। लोग उसे छूकर माथे से लगाते हैं।
कहते हैं, यहीं हुआ था। कोई कहता है, नहीं, थोड़ा आगे।
एक बूढ़ा हँसता है। कहाँ हुआ, यह हर गाँव अपने ढंग से बताता है। कि हुआ, यह सब मानते हैं।
2027 में कब
विवाह पंचमी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़3 दिसंबर, शुक्रवार
तिथिमार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी2 दिसंबर, दोपहर 1:44 से 3 दिसंबर, शाम 4:14 तक
नक्षत्रश्रवणसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:58
सूर्यास्तशाम 5:24
चंद्रोदयसुबह 10:57
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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शुभकामना
विवाह पंचमी का शुभकामना कार्ड

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पहचान
विवाह पंचमी क्या है
विवाह पंचमी राम और सीता के विवाह का दिन है। यह मार्गशीर्ष महीने, जिसे अगहन भी कहते हैं, के शुक्ल पक्ष की पंचमी को आती है। परंपरा कहती है कि विवाह जनकपुरी में हुआ, जिसे आज नेपाल का जनकपुर माना जाता है, और वहाँ का जानकी मंदिर इस उत्सव की सबसे बड़ी जगह है, जहाँ नेपाल और भारत दोनों से लोग आते हैं। अयोध्या में भी यह दिन बड़े मन से मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन राम की पूजा से पति पत्नी का जीवन सुखी रहता है।
कथा
विवाह पंचमी की कथा
वाल्मीकि रामायण के बालकांड में जनक विश्वामित्र को बताते हैं कि धरती से मिली अपनी बेटी सीता को उन्होंने वीर्यशुल्का रखा है, यानी उसका ब्याह उसी से होगा जो वीरता दिखाए। बहुत से राजा उसका हाथ माँगने आए। रामचरितमानस में यह घड़ी एक भरी सभा में आती है: शिव का धनुष, पिनाक, रखा है, राजा एक एक कर हारते हैं, और फिर राम उठते हैं।
तुलसी उस पल को इतना तेज़ कहते हैं कि आँख झपकने का समय नहीं मिलता: “लेत चढ़ावत खैंचत गाढ़ें। काहुँ न लखा देख सबु ठाढ़ें॥ तेहि छन राम मध्य धनु तोरा।” (बालकांड, चौपाई 261) यानी उठाना, चढ़ाना और ज़ोर से खींचना किसी ने देखा ही नहीं, सब खड़े देखते रह गए, और उसी पल राम ने धनुष बीच से तोड़ दिया। फिर सीता आगे आती हैं: “सियँ जयमाल राम उर मेली” (चौपाई 264), सीता ने जयमाला राम के गले में डाल दी।
पर ब्याह उसी दिन नहीं हुआ। ख़बर अयोध्या गई, बारात चली, और मानस लग्न का दिन गिनकर बताता है: “मंगल मूल लगन दिनु आवा। हिम रितु अगहनु मासु सुहावा॥ ग्रह तिथि नखतु जोगु बर बारू। लगन सोधि बिधि कीन्ह बिचारू॥” यानी सारे मंगल की जड़ वह लग्न का दिन आया, हेमंत ऋतु का सुहावना अगहन महीना, ग्रह, तिथि, नक्षत्र, योग और वार सब अच्छे, और ब्रह्मा ने ख़ुद लग्न शोधकर विचार किया। और लग्न की घड़ी गोधूलि की थी: “धेनुधूरि बेला बिमल सकल सुमंगल मूल” (दोहा 312), गायों के लौटने की धूल उड़ने वाली वह साफ़ बेला, जो सारे मंगल की जड़ है।
और फिर वह पल: “राम सीय सिर सेंदुर देहीं। सोभा कहि न जाति बिधि केहीं॥” (चौपाई 325) राम सीता की माँग में सिंदूर भरते हैं, और वह शोभा किसी तरह कही नहीं जाती। एक मान्यता यह भी है कि तुलसीदास ने रामचरितमानस इसी दिन पूरा किया था, पर यह कहा सुना ही मिलता है, लिखा हुआ प्रमाण नहीं।
उनतालीस लंकाएँ
रामकथाओं में विवाह पंचमी
उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।
रामचरितमानस
अवधी · Ramcharitmanas
रामचरितमानस के बालकांड में विवाह की पूरी कथा है, और यही विवाह पंचमी का सबसे गाया जाने वाला पाठ है: चौपाई 261 में धनुष टूटता है, 264 में सीता जयमाला डालती हैं, दोहा 312 के आसपास अगहन के लग्न और गोधूलि की बेला का वर्णन है, और 325 में राम सीता की माँग में सिंदूर भरते हैं। अगहन में विवाह की बात सीधे इसी ग्रंथ से आती है, और लोक मान्यता यह भी कहती है कि तुलसी ने यह ग्रंथ इसी दिन पूरा किया।
वाल्मीकि रामायण
संस्कृत · Valmiki Ramayana
वाल्मीकि रामायण के बालकांड के छियासठवें सर्ग में जनक बताते हैं कि हल की नोक से मिली सीता अयोनिजा हैं, यानी किसी कोख से नहीं जन्मीं, और उन्होंने उसे वीर्यशुल्का रखा है: उसका ब्याह बस वीरता की शर्त पर होगा। दूर दूर से राजा उसका हाथ माँगने आए। धनुष वाली कथा की जड़ यहीं है।
कहाँ कैसे
विवाह पंचमी कहाँ कैसे मनाया जाता है
जनकपुर धाम (नेपाल)
धनुषा ज़िले का यह नगर विवाह पंचमी का सबसे बड़ा केंद्र है। जानकी मंदिर इसकी मुख्य जगह है, जिसके परिसर के विवाह मंडप को परंपरा राम और सीता के विवाह की जगह मानती है। अयोध्या से बारात जनकपुर आती है, ब्याह पूरी रीत से होता है, और नेपाल और भारत दोनों से लोग आते हैं।
अयोध्या
राम की नगरी के मंदिरों में भी आज राम सीता का ब्याह रचता है, पूजा और भजन के साथ।
मिथिलांचल
मिथिला का पूरा इलाक़ा इस दिन को अपना मानता है, क्योंकि सीता यहीं की बेटी कहलाती हैं।
रीत
विवाह पंचमी के दिन क्या करते हैं
- भोर में नहाकर व्रत का संकल्प लेते हैं।
- राम और सीता की पूजा होती है, और पंचामृत से अभिषेक होता है।
- वाल्मीकि रामायण या रामचरितमानस से सीता स्वयंवर और विवाह के प्रसंग पढ़े या सुने जाते हैं।
- शाम को विवाह की झाँकियाँ सजती हैं, भजन कीर्तन और मंगल गीत होते हैं।
- कुछ लोग यह दिन तो मनाते हैं, पर इस दिन अपने बच्चों की शादी नहीं करते, क्योंकि राम और सीता के विवाह की तिथि पर शादी करना अशुभ माना जाता है।
सवाल जवाब
विवाह पंचमी 2027: पूछे जाने वाले सवाल
विवाह पंचमी 2026 में कब है?
विवाह पंचमी 2026 में 14 दिसंबर, सोमवार को है। इस बरस की तिथि, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड विवाह पंचमी 2026 के पन्ने पर हैं। यह पन्ना 2027 का है।
विवाह पंचमी 2027 कब है?
विवाह पंचमी 2027 में 3 दिसंबर, शुक्रवार को है। मार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी तिथि 2 दिसंबर, दोपहर 1:44 से 3 दिसंबर, शाम 4:14 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
विवाह पंचमी क्यों मनाई जाती है?
यह राम और सीता के विवाह का दिन माना जाता है, जो मार्गशीर्ष, यानी अगहन, के शुक्ल पक्ष की पंचमी को आता है।
राम और सीता का विवाह कहाँ हुआ था?
कथा के अनुसार जनकपुरी में, जिसे आज नेपाल का जनकपुर माना जाता है। वहाँ के जानकी मंदिर के विवाह मंडप को परंपरा विवाह की जगह मानती है।
क्या रामचरितमानस में विवाह का महीना लिखा है?
हाँ। बालकांड में तुलसी लिखते हैं, हिम रितु अगहनु मासु सुहावा, यानी हेमंत ऋतु का सुहावना अगहन महीना, और लग्न गोधूलि की बेला का था।
क्या विवाह पंचमी पर शादी करनी चाहिए?
मान्यता बँटी हुई है। कुछ लोग इस दिन बच्चों की शादी नहीं करते, क्योंकि राम सीता के विवाह की तिथि पर शादी अशुभ मानी जाती है, हालाँकि यह मान्यता भी है कि आज राम की पूजा से ब्याह का सुख मिलता है।
क्या तुलसीदास ने रामचरितमानस विवाह पंचमी को पूरी की?
ऐसा कहा जाता है, पर यह लोक मान्यता है, इसका पक्का लिखा प्रमाण नहीं मिलता। मानस के शुरू होने का दिन, राम नवमी, ज़रूर ख़ुद तुलसी ने लिखा है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Vivah Panchami, Drik Panchangमार्गशीर्ष शुक्ल पंचमी, जनकपुर और अयोध्या, पूजा विधि, झाँकियाँ, वैवाहिक सुख की मान्यता
- Preparations for Vivaha Panchami in Janakpurdham, The Himalayan Timesबारात जनकपुर तक, धनुषा, नेपाल और भारत के लोग
- Janaki Mandir, Wikipediaजानकी मंदिर विवाह पंचमी की मुख्य जगह, विवाह मंडप
- Vivah Panchami, Bhakti Bharatतुलसी के मानस पूरा करने की मान्यता, इस दिन शादी न करने की मान्यता, मिथिलांचल
- Ramcharitmanas, Bala Kanda prakarana 27, Vedapathचौपाई 261 धनुष टूटना, 264 जयमाला
- Ramcharitmanas, Bala Kanda prakarana 32, Vedapathअगहन का लग्न, धेनुधूरि बेला, दोहा 312
- Ramcharitmanas, Bala Kanda prakarana 33, Vedapathचौपाई 325, सिंदूर दान
- Valmiki Ramayana, Bala Kanda 66, valmikiramayan.netवीर्यशुल्का, अयोनिजा, राजाओं का आना
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।