पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · चैत्र शुक्ल नवमी

राम नवमी 2027

Ram Navami 2027

दोपहर, जब न ठंड है न धूप। और एक घर में पहली रुलाई।

राम नवमी 2027 में 15 अप्रैल, गुरुवार को है। चैत्र शुक्ल नवमी तिथि 14 अप्रैल, दोपहर 3:24 से 15 अप्रैल, दोपहर 1:21 तक है। मध्याह्न की पूजा का समय सुबह 11:04 से दोपहर 1:39 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

राम नवमी का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

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दोपहर। परछाईं सिमटकर ठीक पैरों के नीचे आ गई है।

मंदिर के आँगन में भीड़ है, पर सबकी नज़र एक छोटे पालने पर।

घंटा अभी नहीं बजा। सब रुके हैं।

कोई बूढ़ा धीमे से गिनता है: नवमी, चैत्र, मध्यदिवस।

फिर घंटा। फिर शंख। फिर सौ गलों से एक साथ: भए प्रगट कृपाला।

वाल्मीकि ने इस घड़ी के ग्रह गिने थे। तुलसी ने इसी दिन अपनी कथा शुरू की थी।

एक जन्म। और उसे कहने वाला हर कवि, अपनी अपनी दोपहर में।

2027 में कब

राम नवमी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़15 अप्रैल, गुरुवार

तिथिचैत्र शुक्ल नवमी14 अप्रैल, दोपहर 3:24 से 15 अप्रैल, दोपहर 1:21 तक

नक्षत्रपुष्यसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:56

सूर्यास्तशाम 6:47

चंद्रोदयदोपहर 1:12

मध्याह्न
सुबह 11:04 से दोपहर 1:39 तकदिन के पाँच हिस्सों में तीसरा, दोपहर का समय।

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शुभकामना

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पहचान

राम नवमी क्या है

राम नवमी राम के जन्म का दिन है। यह चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को आती है। परंपरा कहती है कि राम मध्याह्न में जन्मे, यानी हिंदू दिन के ठीक बीच में, इसलिए इस दिन की पूजा दोपहर के उसी हिस्से में होती है, जिसका ठीक समय पंचांग हर शहर के लिए अलग निकालता है। अयोध्या, जिसे राम की जन्मभूमि माना जाता है, इस दिन की सबसे बड़ी जगह है। तेलंगाना के भद्राचलम में इसी दिन सीता और राम का विवाह उत्सव होता है। और यही वह दिन है जिस दिन, तुलसीदास के अपने शब्दों में, उन्होंने रामचरितमानस शुरू किया।

कथा

राम नवमी की कथा

वाल्मीकि रामायण के बालकांड का अठारहवाँ सर्ग राम के जन्म की घड़ी बड़े ध्यान से गिनता है। दशरथ का यज्ञ पूरा होता है, छह ऋतुएँ बीतती हैं, और फिर: “ततो यज्ञे समाप्ते तु ऋतूनां षट् समत्ययुः। ततश्च द्वादशे मासे चैत्रे नावमिके तिथौ॥ नक्षत्रेऽदितिदैवत्ये स्वोच्चसंस्थेषु पञ्चसु। ग्रहेषु कर्कटे लग्ने वाक्पताविन्दुना सह॥” (बालकांड 18.8 और 18.9) यानी यज्ञ पूरा होने के बाद छह ऋतुएँ बीतीं, और बारहवें महीने में, चैत्र की नवमी तिथि को, उस नक्षत्र में जिसके देवता अदिति हैं, जब पाँच ग्रह अपनी ऊँची जगह पर थे, लग्न कर्क था और बृहस्पति चंद्रमा के साथ थे, तब कौसल्या ने राम को जन्म दिया। अगला श्लोक कहता है कि वे सारे लोकों के नमस्कार के योग्य थे और सब शुभ लक्षणों से भरे।

तुलसीदास इसी घड़ी को अपनी तरह कहते हैं। बालकांड में: “नौमी तिथि मधु मास पुनीता ... मध्यदिवस अति सीत न घामा” (चौपाई 191) यानी मधु मास, जो चैत्र का पुराना नाम है, उसकी पवित्र नवमी, और दिन का बीच, जब न बहुत ठंड है न धूप। और फिर वह छंद आता है जो आज हर राम नवमी पर गाया जाता है: “भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी। हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥” (छंद 192) यानी दीनों पर दया करने वाले, कौसल्या का भला करने वाले प्रभु प्रकट हुए, और माँ उनका रूप देखकर हर्ष से भर गईं।

पर मानस में यहाँ एक मोड़ है। प्रभु माँ के सामने अपने बड़े रूप में प्रकट होते हैं, जिसे देखकर कौसल्या हैरान हैं, और कौसल्या उनसे कहती हैं: “कीजै सिसुलीला अति प्रियसीला यह सुख परम अनूपा।” यानी यह रूप छोड़कर बच्चे वाली लीला करो, वही सबसे प्यारा सुख है। और तब: “सुनि बचन सुजाना रोदन ठाना होइ बालक सुरभूपा।” माँ की बात सुनकर देवताओं के राजा बच्चा बन गए और रोने लगे। जो कथा वाल्मीकि में ग्रहों की गिनती से शुरू होती है, वह तुलसी के यहाँ एक बच्चे की रुलाई पर ठहरती है।

और इसी दिन तुलसी ने अपनी कथा का पहला दिन रखा। मानस के बालकांड में वे ख़ुद लिखते हैं: “संबत सोरह सै एकतीसा ... नौमी भौम बार मधु मासा। अवधपुरीं यह चरित प्रकासा॥” यानी विक्रम संवत सोलह सौ इकतीस में, चैत्र की नवमी को, मंगलवार के दिन, अयोध्या में यह कथा प्रकट हुई। अंग्रेज़ी कैलेंडर में यह सन 1574 था। और अगली ही पंक्ति कहती है: “जेहि दिन राम जनम श्रुति गावहिं। तीरथ सकल तहाँ चलि आवहिं॥” जिस दिन राम का जन्म होता है, सारे तीर्थ चलकर वहाँ आ जाते हैं।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में राम नवमी

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

वाल्मीकि रामायण

संस्कृत · Valmiki Ramayana

वाल्मीकि रामायण राम के जन्म की तिथि ही नहीं, आकाश का पूरा नक्शा देती है। बालकांड के अठारहवें सर्ग में चैत्र की नवमी, अदिति देवता वाला नक्षत्र, पाँच ग्रह अपनी ऊँची जगह पर, कर्क लग्न और चंद्रमा के साथ बृहस्पति, सब गिनाए गए हैं। राम नवमी की तिथि का सबसे पुराना आधार यही श्लोक हैं।

रामचरितमानस

अवधी · Ramcharitmanas

रामचरितमानस का राम नवमी से दोहरा रिश्ता है। एक, बालकांड के चौपाई 191 और छंद 192 में राम का जन्म है, चैत्र की नवमी और मध्यदिवस के साथ, और वह छंद भए प्रगट कृपाला जो इस दिन गाया जाता है। दूसरा, तुलसीदास ने ख़ुद लिखा है कि उन्होंने यह ग्रंथ संवत सोलह सौ इकतीस में चैत्र की नवमी, मंगलवार को अयोध्या में शुरू किया। यानी यह दिन इस कथा का भी जन्मदिन है।

सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में

अशोक वाटिका कैसी थी, और वहाँ सीता जी से पहली भेंट।

कहाँ कैसे

राम नवमी कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • अयोध्या

    राम की जन्मभूमि मानी जाने वाली इस नगरी में दूर दूर से लोग आते हैं, सरयू में नहाते हैं और फिर राम मंदिर में जन्म का उत्सव देखते हैं।

  • भद्राचलम (तेलंगाना)

    यहाँ राम नवमी पर सीता राम कल्याणम् होता है, यानी सीता और राम का विवाह उत्सव, जिसे हज़ारों लोग मिथिला स्टेडियम में देखते हैं। राज्य सरकार की ओर से भगवान को रेशमी कपड़े, पट्टु वस्त्रालु, और मोतियों वाले मुत्याल तलंब्रालु चढ़ाए जाते हैं, और भक्तों को तलंब्रालु और लड्डू बाँटे जाते हैं।

  • उत्तर भारत के मंदिर और घर

    मानस का राम जन्म वाला छंद, भए प्रगट कृपाला, राम के जन्मदिन पर गाई जाने वाली सबसे जानी हुई स्तुति है।

रीत

राम नवमी के दिन क्या करते हैं

  1. पूजा मध्याह्न में होती है, क्योंकि मान्यता है कि राम इसी घड़ी जन्मे; ठीक समय पंचांग से देखा जाता है।
  2. व्रत आठ प्रहर का माना गया है, यानी एक सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक।
  3. पंचांग इस व्रत के तीन रूप बताते हैं: नैमित्तिक, जो बिना किसी ख़ास कारण रखा जाए; नित्य, जो जीवन भर बिना किसी इच्छा के रखा जाए; और काम्य, जो किसी मनोकामना के लिए रखा जाए।
  4. अयोध्या में लोग पहले सरयू में नहाते हैं, फिर राम मंदिर जाते हैं।
  5. जन्म की घड़ी पर भए प्रगट कृपाला गाया जाता है।
  6. भद्राचलम में इसी दिन सीता राम का कल्याणम्, यानी विवाह, होता है।

सवाल जवाब

राम नवमी 2027: पूछे जाने वाले सवाल

राम नवमी 2027 कब है?

राम नवमी 2027 में 15 अप्रैल, गुरुवार को है। चैत्र शुक्ल नवमी तिथि 14 अप्रैल, दोपहर 3:24 से 15 अप्रैल, दोपहर 1:21 तक है। मध्याह्न की पूजा का समय सुबह 11:04 से दोपहर 1:39 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

राम का जन्म किस समय हुआ था?

परंपरा कहती है कि राम मध्याह्न में जन्मे, यानी हिंदू दिन के बीच वाले हिस्से में। मानस भी कहता है, मध्यदिवस अति सीत न घामा, दोपहर जब न ठंड थी न धूप।

वाल्मीकि रामायण में राम के जन्म के समय कौन से ग्रह बताए गए हैं?

बालकांड 18.8 और 18.9 के अनुसार चैत्र की नवमी, अदिति देवता वाला नक्षत्र, पाँच ग्रह अपनी ऊँची जगह पर, कर्क लग्न, और बृहस्पति चंद्रमा के साथ।

तुलसीदास ने रामचरितमानस कब लिखना शुरू किया?

मानस के बालकांड में तुलसी ख़ुद लिखते हैं कि संवत सोलह सौ इकतीस में चैत्र की नवमी, मंगलवार को, अयोध्या में यह कथा शुरू हुई। यानी राम नवमी के दिन, सन 1574 में।

भए प्रगट कृपाला किस ग्रंथ से है?

यह तुलसीदास के रामचरितमानस के बालकांड का छंद 192 है, राम जन्म के प्रसंग में।

राम नवमी का व्रत कैसे रखा जाता है?

आठ प्रहर का व्रत बताया गया है, सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक, और पूजा मध्याह्न में होती है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Valmiki Ramayana, Bala Kanda 18, sanskritdocumentsराम जन्म के श्लोक 18.8 से 18.11
  2. Ramcharitmanas, Bala Kanda prakarana 20, Vedapathचौपाई 191, छंद 192, सिसुलीला और बालक बनना
  3. Shri Ramcharitmanas, Balakanda, sanskritdocumentsसंवत सोलह सौ इकतीस, नवमी भौमवार, अवधपुरी, तीर्थ आते हैं
  4. Ramcharitmanas, Wikipediaसन 1574, राम जन्म स्तुति राम नवमी पर गाई जाती है
  5. Bhaye Pragat Kripala, Bhakti Bharatछंद मानस बालकांड 192 से
  6. Rama Navami, Drik Panchangचैत्र शुक्ल नवमी, मध्याह्न, आठ प्रहर व्रत, तीन तरह का व्रत, अयोध्या और सरयू
  7. Celestial wedding at Bhadrachalam temple, Siasatभद्राचलम का कल्याणम्, मिथिला स्टेडियम, पट्टु वस्त्रालु, मुत्याल तलंब्रालु

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।