पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · वैशाख शुक्ल तृतीया

अक्षय तृतीया 2027

Akshaya Tritiya 2027

जो आज दिया, वह कभी घटता नहीं।

अक्षय तृतीया 2027 में 9 मई, रविवार को है। वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि 8 मई, सुबह 11:43 से 9 मई, सुबह 9:04 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

अक्षय तृतीया का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

उस शाम का चाँद, 13 प्रतिशत रोशन

मंदिर के बाहर गन्ने की चरखी घूम रही है, रुक रुककर।

हरा रस धार बनकर गिलास में गिरता है, ऊपर झाग।

मंदिर के आगे एक लंबी कतार है। इनमें कई लोग आज साल भर का तप खोलेंगे।

पहला घूँट गन्ने के रस का होगा। इक्षु रस, जैसा पहले तीर्थंकर ने लिया था, एक बरस भूखे रहकर।

उसी सुबह, समुद्र किनारे के एक शहर में, तीन लट्ठों को सोने की छोटी कुल्हाड़ियाँ छूती हैं।

आज से बढ़ई तीन रथ बनाना शुरू करेंगे।

पहाड़ों में दो मंदिरों के कपाट खुलते हैं। खेतों में पहला धान ज़मीन में जाता है।

एक ही दिन, और कितनी शुरुआतें। अक्षय, यानी जो कभी ख़त्म न हो।

2027 में कब

अक्षय तृतीया 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़9 मई, रविवार

तिथिवैशाख शुक्ल तृतीया8 मई, सुबह 11:43 से 9 मई, सुबह 9:04 तक

नक्षत्रमृगशिरासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:35

सूर्यास्तशाम 7:01

चंद्रोदयसुबह 7:41

मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar

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शुभकामना

अक्षय तृतीया का शुभकामना कार्ड

अक्षय तृतीया का शुभकामना कार्ड: अक्षय तृतीया की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

अक्षय तृतीया क्या है

अक्षय तृतीया वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तीसरी तिथि है। संस्कृत में अक्षय का मतलब है जो कभी न घटे। इसलिए माना जाता है कि इस दिन किया दान और शुरू किया काम कभी ख़त्म नहीं होता, और बहुत से लोग इसी दिन नया काम, नया घर या सोने की ख़रीद करते हैं। हिंदू इसे परशुराम जयंती भी मानते हैं, क्योंकि मान्यता है कि विष्णु के छठे अवतार परशुराम इसी दिन जन्मे। जैनों के लिए यह पहले तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव के पहले पारणे का दिन है, जब उन्होंने लंबे उपवास के बाद गन्ने का रस लिया। इसी दिन उत्तराखंड में गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट खुलते हैं, पुरी में जगन्नाथ की चंदन यात्रा शुरू होती है और रथ यात्रा के रथ बनने लगते हैं, और ओड़िशा के किसान धान बोना शुरू करते हैं।

कथा

अक्षय तृतीया की कथा

जैन परंपरा में कथा है कि ऋषभदेव, जिन्हें आदिनाथ भी कहते हैं, इस युग के पहले मुनि थे। उनसे पहले कोई मुनि नहीं हुआ था, इसलिए लोग नहीं जानते थे कि मुनि को भिक्षा कैसे दी जाती है। जैन मुनि न कुछ रखते हैं, न ख़ुद पकाते हैं, न माँगते हैं; जो दिया जाए, वही लेते हैं। ऋषभदेव जहाँ जाते, लोग उनके आगे सोना, गहने, रत्न, हाथी, घोड़े, कपड़े, यहाँ तक कि अपनी बेटियाँ भी रख देते। उन्हें बस एक कौर खाना चाहिए था, और वह कोई नहीं देता था।

ऐसे दिन बीतते गए। जैन स्रोतों में यह उपवास लगभग एक बरस का बताया जाता है, कुछ जगह चार सौ दिन का। फिर ऋषभदेव हस्तिनापुर पहुँचे। वहाँ राजकुमार श्रेयांस को अपना पिछला जन्म याद आ गया, पूर्व भव स्मरण, और उस याद से वे समझ गए कि मुनि को क्या चाहिए। उन्होंने ऋषभदेव को गन्ने का रस दिया, और ऋषभदेव ने उसी से अपना उपवास खोला। वह दिन वैशाख शुक्ल तृतीया था। जैन मानते हैं कि मुनियों के आहार की रीत उसी दिन शुरू हुई, और गन्ने का रस तब से सबसे अच्छे दानों में गिना जाता है।

हिंदू परंपरा में यह दिन परशुराम का है। मान्यता है कि विष्णु के छठे अवतार परशुराम इसी तिथि को जन्मे, इसलिए जो उन्हें मानते हैं वे इसे परशुराम जयंती कहते हैं। इस दिन से और भी कई कथाएँ जुड़ी हैं: एक कथा कहती है कि इसी दिन व्यास ने गणेश को महाभारत लिखवानी शुरू की; एक कहती है कि कुबेर इसी दिन धन के देवता बनाए गए; और एक यह कि सुदामा इसी दिन द्वारका में कृष्ण से मिले और उन्हें अपार धन का वर मिला। ये सब मान्यताएँ हैं, जो अलग अलग जगह अलग ढंग से सुनाई जाती हैं।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में अक्षय तृतीया

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

वाल्मीकि रामायण

संस्कृत · Valmiki Ramayana

जिन परशुराम का यह जन्मदिन माना जाता है, वे वाल्मीकि रामायण में राम के सामने आते हैं। बालकांड के आख़िरी सर्गों में, राम और सीता के ब्याह की रस्में पूरी होने के बाद, परशुराम अपशकुनों के बीच प्रकट होते हैं (सर्ग 74), राम को लड़ने की चुनौती देते हैं (सर्ग 75), और फिर हारकर अपना तेज और बल खो देते हैं (सर्ग 76)। उसके बाद ही दशरथ अयोध्या लौटते हैं (सर्ग 77)। यानी वाल्मीकि की कथा में परशुराम और राम एक ही रास्ते पर आमने सामने होते हैं, और परशुराम का तेज राम के आगे उतर जाता है।

कहाँ कैसे

अक्षय तृतीया कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • पुरी, ओड़िशा

    जगन्नाथ के प्रतिनिधि मदनमोहन, भूदेवी, श्रीदेवी, बाल रूप के बलभद्र और कृष्ण, और पाँच शिवलिंग, जिन्हें पंच पांडव कहते हैं, पालकियों में नरेंद्र सरोवर ले जाए जाते हैं और दो नावों, नंदा और भद्रा, में पानी पर घुमाए जाते हैं। यह बाहर वाली चंदन यात्रा इक्कीस दिन चलती है, और पूरी चंदन यात्रा दो हिस्सों में बयालीस दिन की होती है।

  • पुरी का रथ खला

    मंदिर के बाहर बड़ी सड़क पर रथ बनाने के आँगन में तीनों रथों के लट्ठों के लिए मंदिर से आज्ञा माला, यानी भगवान की अनुमति की माला, आती है। पुजारी तीनों लट्ठों को सोने की तीन छोटी कुल्हाड़ियों से छूते हैं, और उसके बाद ही विश्वकर्मा सेवक, यानी मंदिर के बढ़ई, काम शुरू करते हैं।

  • ओड़िशा के खेत

    किसान इस दिन बारिश से पहले धान बोना शुरू करते हैं। इस रीत को अखि मुठि अनुकूल कहते हैं।

  • हस्तिनापुर

    जैनों का मेला लगता है, और देश भर से जैन यहाँ आकर अपना उपवास गन्ने के रस से खोलते हैं, उसी जगह जहाँ ऋषभदेव ने पारणा किया था।

  • गंगोत्री और यमुनोत्री

    छोटी चार धाम यात्रा में इन दोनों मंदिरों के कपाट अक्षय तृतीया के दिन खुलते हैं।

  • महाराष्ट्र

    औरतें इस दिन सोना ख़रीदती हैं, और लोग नया धंधा शुरू करते हैं या घर लेते हैं।

रीत

अक्षय तृतीया के दिन क्या करते हैं

  1. इस दिन का दान अक्षय, यानी कभी न घटने वाला, माना जाता है, इसलिए लोग कुछ न कुछ दान ज़रूर करते हैं।
  2. नई शुरुआतें इसी दिन की जाती हैं: दुकान, घर, खेत की बुवाई।
  3. बहुत से घरों में, ख़ासकर महाराष्ट्र में, इस दिन सोना ख़रीदा जाता है।
  4. जो परशुराम को मानते हैं, वे यह दिन परशुराम जयंती की तरह रखते हैं।
  5. जैन उपवास रखते हैं और उसे गन्ने के रस से खोलते हैं; उपवास के इस खोलने को पारणा कहते हैं।
  6. जिन्होंने वर्षी तप किया हो, यानी एक दिन छोड़कर खाने वाला लगभग साल भर का तप, वे इसी दिन पारणा करके उसे पूरा करते हैं।
  7. मंदिरों और घरों में खेती की बढ़त और नए कामों की सफलता के लिए पूजा होती है।

रसोई

अक्षय तृतीया का खाना

  • इक्षु रस गन्ने का रस, जैन पारणा का पहला घूँट।

सवाल जवाब

अक्षय तृतीया 2027: पूछे जाने वाले सवाल

अक्षय तृतीया 2027 कब है?

अक्षय तृतीया 2027 में 9 मई, रविवार को है। वैशाख शुक्ल तृतीया तिथि 8 मई, सुबह 11:43 से 9 मई, सुबह 9:04 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

अक्षय तृतीया पर सोना क्यों ख़रीदते हैं?

अक्षय का मतलब है जो कभी न घटे। माना जाता है कि इस दिन जो पाया या दिया जाए वह कभी कम नहीं होता, इसलिए बहुत से लोग, ख़ासकर महाराष्ट्र में, इस दिन सोना ख़रीदते हैं।

जैन धर्म में अक्षय तृतीया क्यों ख़ास है?

इसी दिन पहले तीर्थंकर ऋषभदेव ने लंबे उपवास के बाद हस्तिनापुर में राजकुमार श्रेयांस के दिए गन्ने के रस से पारणा किया था। जैन आज भी इस दिन उपवास गन्ने के रस से खोलते हैं, और वर्षी तप का पारणा करते हैं।

क्या अक्षय तृतीया को परशुराम जयंती होती है?

हाँ, हिंदू मान्यता में विष्णु के छठे अवतार परशुराम का जन्म इसी दिन माना जाता है, इसलिए उन्हें मानने वाले इसे परशुराम जयंती भी कहते हैं।

अक्षय तृतीया पर पुरी में क्या होता है?

इसी दिन जगन्नाथ की चंदन यात्रा शुरू होती है, जिसमें देवताओं के प्रतिनिधि नरेंद्र सरोवर में नावों पर घूमते हैं, और रथ खला में रथ यात्रा के तीनों रथ बनने शुरू होते हैं।

क्या अक्षय तृतीया पर चार धाम के कपाट खुलते हैं?

छोटी चार धाम यात्रा में गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट अक्षय तृतीया के दिन खुलते हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Akshaya Tritiya (Wikipedia)तिथि, अक्षय का अर्थ, परशुराम, व्यास, कुबेर, सुदामा, महाराष्ट्र में सोना, जैन चार सौ दिन, गंगोत्री यमुनोत्री, अखि मुठि अनुकूल
  2. Akshaya Tritiya in Jain tradition (Ahimsa Times, HereNow4U)ऋषभदेव का उपवास, भिक्षा की अनजान रीत, श्रेयांस का पूर्व भव स्मरण, गन्ने का रस, पारणा, वर्षी तप, हस्तिनापुर का मेला
  3. Akshaya Tritiya celebrated in Odisha: Chandan Yatra and Rath construction (Odia Samaj)चंदन यात्रा के देवता, नरेंद्र सरोवर, नंदा और भद्रा नाव, बयालीस दिन, आज्ञा माला, सोने की कुल्हाड़ियाँ, धान की बुवाई
  4. Akshaya Tritiya in Odisha: Chandan Yatra, chariot construction (OdishaBytes)मदनमोहन, पंच पांडव, पालकियाँ, इक्कीस दिन की यात्रा, रथ खला
  5. The Ramayana of Valmiki, Bala-kanda contents (Wisdom Library)बालकांड सर्ग 73 से 77: परशुराम का आना, चुनौती और हार
  6. Chandan Yatra (Wikipedia)नरेंद्र सरोवर जाने वाले देवता, नंदा और भद्रा नाव, इक्कीस और बयालीस दिन

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।