दशहरा और दीवाली का रामकथा से क्या रिश्ता है?
ज़्यादातर भारत में विजयादशमी, यानी दशहरा, रावण पर राम की जीत का दिन है, और दीवाली राम के अयोध्या लौटने का। पर वाल्मीकि रामायण न रावण के अंत की तिथि बताती है, न दीवाली का नाम लेती है। ये दोनों रिश्ते बाद की परंपरा के हैं, और हर इलाक़े का दशहरा अपना है: बंगाल में यह दुर्गा की विदाई है, कुल्लू में दशहरा इसी दिन शुरू होता है और लंका दहन पर ख़त्म होता है, और बस्तर का दशहरा रावण से जुड़ा ही नहीं।

एक नज़र में
| कहाँ | दशहरा क्या है | रावण का पुतला |
|---|---|---|
| ज़्यादातर उत्तर भारत | रावण पर राम की जीत | हाँ |
| बंगाल | बिजोया दशमी, दुर्गा की विदाई | आम तौर पर नहीं |
| मैसूरु | दसरा, बड़ा राजकीय उत्सव | आम तौर पर नहीं |
| कुल्लू | इसी दिन शुरू, एक हफ़्ता, अंत में लंका दहन | नहीं |
| बस्तर | माँ दंतेश्वरी का, लगभग 75 दिन | नहीं; रावण से रिश्ता नहीं |
दशहरा: हर इलाक़े का अपना
ज़्यादातर उत्तर भारत में विजयादशमी पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं (दशहरा 2027)। रामनगर की रामलीला में रावण का पुतला आख़िरी लड़ाई की रात जलता है; पूरी बात आज की लंका वाले पन्ने पर है।
बंगाल में यही दिन बिजोया दशमी है, जब दुर्गा की प्रतिमाएँ विदा की जाती हैं। मैसूरु का दसरा अपने आप में एक बड़ा उत्सव है। कुल्लू का दशहरा विजयादशमी को शुरू होता है, एक हफ़्ता चलता है, उसमें न रामलीला होती है न रावण के पुतले, और वह लंका दहन पर ख़त्म होता है।
छत्तीसगढ़ का बस्तर दशहरा लगभग पचहत्तर दिन चलता है और माँ दंतेश्वरी का उत्सव है। भारत सरकार के पर्यटन विभाग के अनुसार उसका रावण के वध से कोई रिश्ता नहीं, और वहाँ कोई पुतला नहीं जलाया जाता।
रावण का अंत किस दिन हुआ?
वाल्मीकि रामायण में रावण के अंत की कोई तिथि नहीं मिलती। देवी भागवत (स्कंध 3, अध्याय 27) कहता है कि जीत से पहले राम ने किष्किंधा में नवरात्र का व्रत रखा। और बंगाल के महाभागवत की दुर्गा पूजा वाली कथा में रावण नवमी को मरता है, दशमी को नहीं।
दीवाली और राम की वापसी
वाल्मीकि रामायण में दीवाली का नाम नहीं है। दीयों के इस उत्सव के पुराने हवाले सातवीं सदी में राजा हर्ष के नाटक नागानंद (दीपप्रतिपदुत्सव), नवीं सदी में राजशेखर (दीपमालिका) और दसवीं सदी के शिलालेखों (दीपोत्सव) में मिलते हैं। दीवाली को राम के लौटने से जोड़ना एक परंपरा है, जो वाल्मीकि में नहीं मिलती। उत्तर भारत में यही मानी जाती है, पर दक्षिण में दीपावली नरकासुर की कथा से जुड़ी है, और बंगाल में इस रात काली पूजा होती है (दीपावली 2027)।
दीवाली से पहले की रात, कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी, अयोध्या की हनुमानगढ़ी में हनुमान जयंती है, और गुजरात में काली चौदस, जब हनुमान जी की पूजा होती है। हनुमान जयंती के बाकी दिन इस पन्ने पर हैं।
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हर कथा का अपना पन्ना है, और हर पात्र का भी।










