पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · भाद्रपद शुक्ल पंचमी

ऋषि पंचमी 2027

Rishi Panchami 2027

सात ऋषि, सात सुपारियाँ। और थाली में बस वही, जो बिना हल के उगा।

ऋषि पंचमी 2027 में 4 सितंबर, शनिवार को है। भाद्रपद शुक्ल पंचमी तिथि 4 सितंबर, दोपहर 12:26 से 5 सितंबर, सुबह 11:18 तक है। मध्याह्न की पूजा का समय सुबह 11:04 से दोपहर 1:36 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

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उस शाम का चाँद, 19 प्रतिशत रोशन

नदी किनारे लाल मिट्टी के ढेर लगे हैं।

औरतें घुटनों तक पानी में हैं। मिट्टी कंधे पर, कोहनी पर, पाँव पर। फिर डुबकी।

एक दादी हाथ में दतिवन की पत्तियाँ गिन रही है। फिर डुबकी।

किनारे पर एक बच्ची पूछती है, कितनी बार नहाओगी? दादी कहती है, जितनी बार गिन सकूँ।

घर में चौक लिपा है। उस पर कुमकुम से सात बिंदु।

रसोई में आज गेहूँ और चावल की बोरी बंद है। चूल्हे पर सामा चढ़ा है।

सात सुपारियाँ, और साथ में अरुंधती। आज सात ऋषि हर घर के चौक पर उतरे हैं, और हर घर की अपनी कथा है।

2027 में कब

ऋषि पंचमी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़4 सितंबर, शनिवार

तिथिभाद्रपद शुक्ल पंचमी4 सितंबर, दोपहर 12:26 से 5 सितंबर, सुबह 11:18 तक

नक्षत्रचित्रासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:01

सूर्यास्तशाम 6:40

चंद्रोदयसुबह 9:41

मध्याह्न
सुबह 11:04 से दोपहर 1:36 तकदिन के पाँच हिस्सों में तीसरा, दोपहर का समय।

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शुभकामना

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पहचान

ऋषि पंचमी क्या है

ऋषि पंचमी भादों के शुक्ल पक्ष की पंचमी का व्रत है, सात ऋषियों के नाम, जिन्हें सप्तऋषि कहते हैं, और वसिष्ठ की पत्नी अरुंधती के नाम। इसे त्योहार नहीं, व्रत का दिन माना जाता है, और इसे ज़्यादातर औरतें रखती हैं; कुछ मर्द भी रखते हैं, अनजाने में हुई भूलों के लिए। मान्यता है कि यह व्रत माहवारी के दिनों के नियमों में हुई भूलों का दोष मिटाता है, जिसे रजस्वला दोष कहते हैं। यह मध्याह्न व्यापिनी व्रत है, यानी पूजा दोपहर की होती है, और व्रत उस दिन रखते हैं जिस दिन दोपहर को पंचमी हो। आम तौर पर यह गणेश चतुर्थी के अगले दिन और हरतालिका तीज के दो दिन बाद आती है, और कुछ जगह तीज का तीन दिन का व्रत इसी दिन पूरा होता है। पर जब चतुर्थी वाले दिन ही दोपहर तक पंचमी लग जाए, तो ऋषि पंचमी और गणेश चतुर्थी एक ही दिन पड़ जाती हैं। नेपाल के हिंदुओं में यह बहुत बड़ा दिन है, और गुजरात में इसे सामा पांचम या सामा पंचमी कहते हैं।

कथा

ऋषि पंचमी की कथा

यह कथा ब्रह्मांड पुराण के नाम से सुनाते हैं; कुछ लोग इसे ब्रह्म पुराण की बताते हैं। विदर्भ में उत्तंक नाम के एक धर्मात्मा ब्राह्मण रहते थे। उनकी पत्नी का नाम सुशीला था, और उनके एक बेटा और एक बेटी थी। बेटी का ब्याह अच्छे घर में हुआ, पर कुछ समय बाद वह विधवा हो गई और माँ बाप के पास लौट आई। वे सब गंगा के किनारे रहने लगे, और बेटी मन लगाकर पिता की सेवा करती थी।

एक रात बेटी सो रही थी कि अचानक उसका शरीर कीड़ों से भर गया। सुशीला घबराकर उसे उत्तंक के पास ले गईं। उत्तंक ने आँखें मूँदकर ध्यान लगाया, और उन्हें बेटी का पिछला जन्म दिखा। पिछले जन्म में उसने माहवारी के दिनों में रसोई के बर्तन छू लिए थे, और इस जन्म में उसने ऋषि पंचमी का व्रत नहीं रखा था; एक कथा कहती है कि उसने इस व्रत की हँसी भी उड़ाई थी।

तब उत्तंक ने बेटी को पूरा व्रत सिखाया। एक छोटी सी जगह साफ़ करके सप्तऋषि के प्रतीक रखो, उन्हें पंचामृत से नहलाओ, फूल और सुगंध चढ़ाओ, और आदर से सातों के नाम लो। बेटी ने पिता की बात मानकर व्रत रखा, और उसके सारे पाप धुल गए। कथा कहती है कि अगले जन्म में उसे लंबा सुहाग मिला।

एक दूसरी कथा भी चलती है। सुमित्र नाम के एक ब्राह्मण और उनकी पत्नी जयश्री ने जीते जी पवित्रता के नियमों में भूल की थी। मरने के बाद वे अपने ही बेटे के घर में एक बैल और एक कुतिया बनकर जन्मे। बेटा भला आदमी था। उसे ध्यान में अपने माँ बाप का हाल दिखा, और उसने अपनी पत्नी के साथ पूरी श्रद्धा से ऋषि पंचमी का व्रत रखा, ताकि माँ बाप उस जन्म से छूट जाएँ। दोनों कथाओं की सीख एक है: पिछली भूलें भी अपना फल लाती हैं, और सच्चे मन का व्रत उन्हें हल्का कर देता है।

व्रत

ऋषि पंचमी का व्रत कैसे रखें

  1. सुबह, सूरज निकलने से पहले, नदी, तालाब या घर में नहाते हैं; दाँत अपामार्ग की दातुन से साफ़ करते हैं, और कई घरों में पंचगव्य भी लेते हैं।
  2. स्नान में अपामार्ग की पत्तियाँ, मिट्टी और भस्म लगती हैं, और बहुत से घरों में औरत एक सौ आठ डुबकियाँ लेती है, या जितनी ले सके।
  3. फिर आचमन करके, यानी हथेली से थोड़ा जल पीकर, व्रत का संकल्प लेते हैं: मन में पक्का करते हैं कि आज ऋषि पंचमी का व्रत है।
  4. स्नान सुबह होता है, पर पूजा दोपहर को, जब पंचमी हो।
  5. दिन में एक ही बार खाना, और वह भी बिना हल की उपज: सामा या मोरधन, जंगली साग, कंद, फल और दही।
  6. गेहूँ, चावल, मक्का, बाजरा, दालें, प्याज़, लहसुन और बीजों का तेल नहीं; बहुत से लोग नमक भी छोड़ देते हैं।
  7. जो पूरा व्रत न रख सके, वह हल्का व्रत रख सकता है; हर घर अपनी रीत मानता है।

पारण: व्रत कैसे खोलें

ऋषि पंचमी में अगले दिन वाला पारण नहीं होता। व्रत का ढंग ही यह है कि दिन में एक बार खाया जाए: दोपहर की सप्तऋषि पूजा और कथा हो जाने के बाद वही एक सादा भोजन होता है, सामा या मोरधन, कंद, साग, फल और दही, बिना हल की उपज और कई घरों में बिना नमक। नेपाल में यह एक भोजन करकलो भात है, जिसे घर के मर्द पकाते हैं। आख़िर में ब्राह्मण को खिलाना और दान देना भी इसी व्रत का हिस्सा है।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में ऋषि पंचमी

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

वाल्मीकि रामायण

संस्कृत · Valmiki Ramayana

जिन सात ऋषियों की पूजा इस दिन होती है, उनमें अत्रि भी हैं, और वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकांड के एक सौ सत्रहवें सर्ग में राम, लक्ष्मण और सीता चित्रकूट छोड़कर अत्रि के आश्रम पहुँचते हैं। अत्रि अपनी पत्नी अनसूया का परिचय कराते हैं और बताते हैं कि जब लंबे समय तक बारिश नहीं हुई थी, तब अनसूया ने अपने तप से फल और कंद मूल उगाए और जाह्नवी, यानी गंगा, को आश्रम तक बहा लाईं। फिर अनसूया सीता को पत्नी धर्म की बातें समझाती हैं। ऋषि पंचमी की थाली में भी वही फल और कंद होते हैं जो बिना हल के उगे हों।

कहाँ कैसे

ऋषि पंचमी कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • काठमांडू घाटी, नेपाल

    तीज के तीन दिन का आख़िरी दिन। औरतें बागमती और विष्णुमती जैसी नदियों पर, संगमों, कुओं और पोखरों पर लंबा स्नान करती हैं: लाल मिट्टी तीन सौ पैंसठ बार सिर, कंधों, कोहनियों, हाथों, घुटनों और पाँवों पर लगाकर, दतिवन की तीन सौ पैंसठ पत्तियों से बाल धोकर, और दतिवन की डंठल से दाँत साफ़ करके। दतिवन वही पौधा है जिसे अपामार्ग कहते हैं। सबसे ज़्यादा भीड़ टेकू के ऋषेश्वर मंदिर में होती है।

  • नेपाल के घर

    इस दिन का अकेला खाना करकलो भात है: अरबी के पत्ते और अरबी की गाँठ, दालों के साथ पकाई हुई, चावल और घी के साथ, ऊपर नींबू निचोड़कर। रीत है कि यह खाना घर के मर्द, पति या बेटे बनाते हैं।

  • गुजरात

    यहाँ यह सामा पांचम या सामा पंचमी कहलाती है, सामा के नाम पर, यानी मोरैयो का वह छोटा दाना जो इस दिन हल वाले अनाज की जगह खाते हैं।

रीत

ऋषि पंचमी के दिन क्या करते हैं

  1. पूजा की जगह साफ़ करके चौकी लगाते हैं; कई घरों में उस पर सर्वतोभद्र मंडल बनाते हैं।
  2. सात सुपारियाँ या चावल की सात ढेरियाँ सप्तऋषि बनाकर रखते हैं, और उनके साथ अरुंधती।
  3. सप्तऋषि ये हैं: कश्यप, अत्रि, भरद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वसिष्ठ; नेपाल की सूची में कश्यप की जगह अगस्त्य आते हैं।
  4. सप्तऋषि के प्रतीकों को पंचामृत से नहलाते हैं, और आदर से सातों के नाम लेते हैं।
  5. षोडशोपचार पूजा होती है, यानी सोलह चीज़ें चढ़ती हैं: जल, चंदन, सूत, फूल, धूप, दीया, नैवेद्य और बाक़ी।
  6. पूजा के बाद ऋषि पंचमी की कथा पढ़ते या सुनते हैं, फिर आरती होती है।
  7. पूजा पूरी होने पर ब्राह्मण को खाना खिलाते हैं और दान देते हैं।

रसोई

ऋषि पंचमी का खाना

  • सामा छोटा दाना जो बिना जोते उगता है, इसी के नाम पर गुजरात में यह दिन सामा पांचम है।
  • मोरधन सामा जैसा ही छोटा दाना, जो इस व्रत के एक बार के खाने में पकता है।
  • करकलो भात नेपाल का इस दिन का अकेला खाना, अरबी के पत्ते, अरबी और दालें, चावल, घी और नींबू के साथ।
  • कंद, जंगली साग, फल और दही बिना हल की वह उपज जिससे एक बार का खाना बनता है।

सवाल जवाब

ऋषि पंचमी 2027: पूछे जाने वाले सवाल

ऋषि पंचमी 2027 कब है?

ऋषि पंचमी 2027 में 4 सितंबर, शनिवार को है। भाद्रपद शुक्ल पंचमी तिथि 4 सितंबर, दोपहर 12:26 से 5 सितंबर, सुबह 11:18 तक है। मध्याह्न की पूजा का समय सुबह 11:04 से दोपहर 1:36 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

ऋषि पंचमी के व्रत में क्या खाएँ?

बस वही जो बिना हल के उगा हो: सामा या मोरधन, कंद, जंगली साग, फल और दही, दिन में एक बार। गेहूँ, चावल, दालें, प्याज़ और लहसुन नहीं, और बहुत से लोग नमक भी नहीं खाते।

ऋषि पंचमी कभी गणेश चतुर्थी के दिन ही क्यों पड़ती है?

क्योंकि इसकी पूजा दोपहर की है, और व्रत उस दिन रखते हैं जिस दिन दोपहर को पंचमी हो। जब कैलेंडर की चतुर्थी वाले दिन ही दोपहर तक पंचमी लग जाए, तो दोनों एक ही दिन आ जाती हैं।

क्या मर्द भी ऋषि पंचमी का व्रत रख सकते हैं?

यह व्रत ज़्यादातर औरतें रखती हैं, पर कुछ मर्द भी इसे रखते हैं, अनजाने में हुई भूलों के प्रायश्चित के लिए। दूसरी कथा में तो एक बेटा अपनी पत्नी के साथ यह व्रत अपने माँ बाप के लिए रखता है।

ऋषि पंचमी पर अपामार्ग से क्यों नहाते हैं?

अपामार्ग, जिसे नेपाल में दतिवन कहते हैं, इस दिन के शुद्धि वाले स्नान का हिस्सा है: इसकी डंठल से दाँत साफ़ होते हैं और पत्तियों से नहाया जाता है। नेपाल में तीन सौ पैंसठ पत्तियों से बाल धोने की रीत है।

सप्तऋषि कौन हैं, और अरुंधती कौन?

कश्यप, अत्रि, भरद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वसिष्ठ; नेपाल की सूची में कश्यप की जगह अगस्त्य हैं। अरुंधती वसिष्ठ की पत्नी हैं, और सातों के साथ उनकी भी पूजा होती है।

अगर पूरा व्रत न रख सकें तो?

हल्का व्रत भी रख सकते हैं; हर घर अपनी रीत से चलता है। पूजा और कथा दोपहर में ज़रूर करते हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Drik Panchang: Rishi Panchamiव्रत का दिन, रजस्वला दोष, गणेश चतुर्थी और हरतालिका तीज से रिश्ता, नेपाल
  2. PanchangBodh: Rishi Panchamiमध्याह्न व्यापिनी नियम, एक बार का खाना, नमक, अपामार्ग का स्नान, सप्तऋषि और अरुंधती
  3. Shubh Panchang: Rishi Panchami, Significance, Rituals and Vrat Kathaसुमित्र और जयश्री की कथा, अपामार्ग और पंचगव्य, सर्वतोभद्र, षोडशोपचार, क्या खाएँ
  4. Shubh Panchang: Sama Pancham, Rishi Panchamउत्तंक और सुशीला की कथा, ब्रह्म पुराण का नाम, सूरज से पहले स्नान, ब्राह्मण भोजन और दान
  5. Astroyogi: Rishi Panchamiब्रह्मांड पुराण वाली कथा, बेटी के शरीर पर कीड़े, पंचामृत से सप्तऋषि की पूजा
  6. GaneshaSpeaks: Rishi Panchami Vrat Katha, Puja Vidhiचौक लीपना, सात बिंदु, मोरधन और सामा, मर्दों का व्रत, सामा पांचम
  7. Ask Me About Nepal: Rishi Panchamiतीन सौ पैंसठ बार का स्नान, दतिवन, बागमती और विष्णुमती, टेकू, करकलो भात
  8. Valmiki Ramayana, Ayodhya Kanda, Sarga 117 (prose)अत्रि का आश्रम, अनसूया के उगाए फल और कंद, गंगा को लाना

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।