पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · आश्विन पूर्णिमा

वाल्मीकि जयंती 2027

Valmiki Jayanti 2027

एक पक्षी गिरा। एक कवि के मुँह से दुख निकला। और दुख ने छंद पहन लिया।

वाल्मीकि जयंती 2027 में 15 अक्टूबर, शुक्रवार को है। आश्विन पूर्णिमा तिथि 14 अक्टूबर, शाम 6:50 से 15 अक्टूबर, शाम 7:17 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

वाल्मीकि जयंती का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

पूर्णिमा: उस रात पूरा चाँद

एक चीख़। पेड़ से नहीं, नदी किनारे की घास से।

फिर दूसरी, पतली, टूटती हुई। पहली वाली अब चुप है।

किनारे पर नहाने आया एक आदमी रुक जाता है। उसके हाथ से पानी गिर जाता है।

वह कुछ कहता है। ग़ुस्से में, दुख में। अपने आप।

फिर ख़ुद हैरान होता है: यह क्या था? इसमें तो लय है।

उस दिन तमसा के किनारे पहली बार कोई दुख गिनती में बँधकर निकला।

उसके बाद से वही कथा हज़ार ज़बानों में कही गई।

2027 में कब

वाल्मीकि जयंती 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़15 अक्टूबर, शुक्रवार

तिथिआश्विन पूर्णिमा14 अक्टूबर, शाम 6:50 से 15 अक्टूबर, शाम 7:17 तक

नक्षत्ररेवतीसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:22

सूर्यास्तशाम 5:52

चंद्रोदयशाम 5:29

पूर्णिमा तिथि 14 अक्टूबर की शाम 6:50 से 15 अक्टूबर की शाम 7:17 तक है। वाल्मीकि जयंती सूर्योदय वाली पूर्णिमा को मनाई जाती है, जो 15 अक्टूबर को है। शरद पूर्णिमा की चाँदनी वाली रात, खीर और कोजागरी पूजा एक दिन पहले, 14 अक्टूबर की रात को हैं।

मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar

कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं

आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।

Google कैलेंडर में जोड़ें

  • मुफ़्त
  • कोई साइन अप नहीं
  • नाम, नंबर या ईमेल नहीं
  • जब चाहें हटा दें

दूसरा कैलेंडर: iPhone या Mac · Google · Outlook · फ़ाइल · सिर्फ़ यह दिन

सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।

शुभकामना

वाल्मीकि जयंती का शुभकामना कार्ड

वाल्मीकि जयंती का शुभकामना कार्ड: वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

अपनों को वाल्मीकि जयंती की शुभकामनाएँ भेजिए, इस बरस की तारीख़ और उस दिन की बात के साथ। कार्ड पर QR कोड है, जिससे तारीख़, कथा और मुहूर्त भी साथ पहुँचते हैं।

WhatsApp पर भेजेंकार्ड डाउनलोड करें

फ़ोन पर बटन दबाते ही कार्ड सीधे WhatsApp में चला जाता है, बधाई और लिंक के साथ।

पहचान

वाल्मीकि जयंती क्या है

वाल्मीकि जयंती रामायण के कवि महर्षि वाल्मीकि का जन्मदिन है, जिन्हें आदिकवि, यानी पहला कवि, कहा जाता है। यह आश्विन महीने की पूर्णिमा को आती है, जो सितंबर के आख़िर या अक्टूबर में पड़ती है। वाल्मीकि समाज के लोग इसे प्रगट दिवस कहते हैं, यानी प्रकट होने का दिन, और अपने मोहल्लों में वाल्मीकि जी की तस्वीर के साथ शोभा यात्राएँ निकालते हैं। इस समाज के लोग वाल्मीकि को ईश्वर का संदेश लाने वाला मानते हैं।

कथा

वाल्मीकि जयंती की कथा

वाल्मीकि रामायण के बालकांड के दूसरे सर्ग में यह कथा है, और इसे वाल्मीकि की अपनी कथा ही सुनाती है। वाल्मीकि गंगा से थोड़ी दूर तमसा नदी के किनारे जाते हैं। वहाँ क्रौंच पक्षियों का एक जोड़ा साथ साथ घूम रहा है, बोल रहा है। तभी एक निषाद शिकारी, बुरी नीयत से, वाल्मीकि की आँखों के सामने नर पक्षी को मार गिराता है। मादा अपने साथी को ख़ून में लथपथ ज़मीन पर पड़ा देखती है और रो रोकर पुकारती है।

वाल्मीकि का मन करुणा से भर जाता है। उन्हें यह मारना अधर्म लगता है, और उनके मुँह से अपने आप एक शाप निकलता है: “मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः। यत्क्रौञ्चमिथुनादेकमवधीः काममोहितम्॥” (बालकांड 2.15) यानी हे निषाद, तुमने प्रेम में डूबे क्रौंच के जोड़े में से एक को मार डाला, इसलिए तुम्हें आने वाले अनगिनत बरसों तक कहीं ठौर, कहीं चैन नहीं मिलेगा।

फिर वाल्मीकि सोच में पड़ जाते हैं: पक्षी के दुख में मेरे मुँह से यह क्या निकल गया? सोचकर वे अपने शिष्य से कहते हैं कि यह बात दुख से निकली है, इसके पद बराबर नपे हुए हैं, इसे तार वाले बाजे के साथ गाया जा सकता है, और यह श्लोक कहलाएगी। शोक से निकली, इसलिए श्लोक। और श्लोक का एक अर्थ यश भी है।

और वह कथा जो सबसे ज़्यादा सुनाई जाती है, कि वाल्मीकि पहले एक डाकू थे? वह वाल्मीकि रामायण में नहीं है। वह बाद के ग्रंथों और लोक की कथा है। स्कंद पुराण के नागर खंड में एक चोर की कथा है, जिसका नाम वहाँ लोहजंघ है, जो बारह बरस के अकाल में लूटपाट करने लगा और फिर सप्तर्षियों की कृपा से बदल गया। रत्नाकर डाकू वाली जानी पहचानी कहानी भी इसी तरह बाद की परंपरा की है, रामायण की नहीं। यानी जिसने राम की कथा पहली बार कही, उसकी अपनी कथा लोगों ने बाद में अपनी तरह गढ़ी।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में वाल्मीकि जयंती

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

वाल्मीकि रामायण

संस्कृत · Valmiki Ramayana

वाल्मीकि रामायण सबसे पुरानी रामकथा है और बाक़ी सबकी नींव। इसके बालकांड के दूसरे सर्ग में ख़ुद इसके जन्म की कहानी है: तमसा के किनारे क्रौंच का जोड़ा, निषाद का तीर, मादा का रोना, और वाल्मीकि के मुँह से निकला पहला श्लोक, मा निषाद। वाल्मीकि अपने शिष्य से कहते हैं कि यह शोक से निकला है, इसलिए श्लोक कहलाएगा। वाल्मीकि जयंती इसी पहले श्लोक के कवि का दिन है, और डाकू वाली कथा इस ग्रंथ में कहीं नहीं आती।

सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में

सोने की लंका कैसी थी? वाल्मीकि और कंबन की आँखों से। पुष्पक विमान कैसा था? वाल्मीकि रामायण के सुंदरकांड में। अशोक वाटिका कैसी थी, और वहाँ सीता जी से पहली भेंट।

कहाँ कैसे

वाल्मीकि जयंती कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • वाल्मीकि समाज के मोहल्ले

    प्रगट दिवस पर वाल्मीकि जी की तस्वीर, आमतौर पर भगवा वस्त्र में, हाथ में क़लम और काग़ज़ लिए, शोभा यात्रा में मुख्य सड़कों से निकाली जाती है, और साथ में गली गली भक्ति गीत गाए जाते हैं।

  • अमृतसर (पंजाब)

    वाल्मीकि मिलाप सभा शोभा यात्रा निकालती है, और ख़ज़ाना गेट पर संगत में लंगर बँटता है। राम तीर्थ पर पंजाब का बड़ा सरकारी कार्यक्रम भी होता रहा है।

  • देश भर में

    वाल्मीकि जयंती देश के कई हिस्सों में मनाई जाती है, और नेपाल में भी।

रीत

वाल्मीकि जयंती के दिन क्या करते हैं

  1. वाल्मीकि समाज के मोहल्लों में वाल्मीकि जी की तस्वीर के साथ शोभा यात्रा निकलती है।
  2. यात्रा के साथ गलियों में भक्ति गीत गाए जाते हैं।
  3. कई जगह लंगर लगता है, जिसमें सबको साथ खाना बाँटा जाता है।
  4. घर में पढ़ना हो तो वाल्मीकि रामायण के बालकांड का दूसरा सर्ग, जहाँ पहला श्लोक जन्म लेता है, इस दिन के लिए सबसे सीधा पाठ है।

सवाल जवाब

वाल्मीकि जयंती 2027: पूछे जाने वाले सवाल

वाल्मीकि जयंती 2027 कब है?

वाल्मीकि जयंती 2027 में 15 अक्टूबर, शुक्रवार को है। आश्विन पूर्णिमा तिथि 14 अक्टूबर, शाम 6:50 से 15 अक्टूबर, शाम 7:17 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

वाल्मीकि जयंती किस तिथि को होती है?

आश्विन महीने की पूर्णिमा को, जो सितंबर के आख़िर या अक्टूबर में पड़ती है।

प्रगट दिवस क्या है?

वाल्मीकि समाज वाल्मीकि जयंती को प्रगट दिवस कहता है, यानी प्रकट होने का दिन, और इस दिन शोभा यात्राएँ निकालता है।

संस्कृत का पहला श्लोक कौन सा है?

मा निषाद प्रतिष्ठां त्वमगमः शाश्वतीः समाः। यत्क्रौञ्चमिथुनादेकमवधीः काममोहितम्॥ (बालकांड 2.15)। क्रौंच पक्षी के मारे जाने पर यह वाल्मीकि के मुँह से निकला।

मा निषाद श्लोक का अर्थ क्या है?

हे निषाद, तुमने प्रेम में डूबे क्रौंच के जोड़े में से एक को मारा, इसलिए तुम्हें अनगिनत बरसों तक चैन नहीं मिलेगा।

क्या वाल्मीकि पहले डाकू रत्नाकर थे?

यह कथा वाल्मीकि रामायण में नहीं है, बाद की परंपरा और लोक की है। स्कंद पुराण में ऐसे ही एक चोर की कथा मिलती है, जिसका नाम वहाँ लोहजंघ है।

वाल्मीकि को आदिकवि क्यों कहते हैं?

क्योंकि उनका मा निषाद वाला श्लोक संस्कृत साहित्य का पहला श्लोक माना जाता है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Valmiki Ramayana, Bala Kanda 2, valmikiramayan.netतमसा, क्रौंच का जोड़ा, निषाद, श्लोक 2.15 और अर्थ, शोक से श्लोक, श्लोक का अर्थ यश
  2. Valmiki, Wikipediaआश्विन पूर्णिमा, आदिकवि, पहला श्लोक, स्कंद पुराण का लोहजंघ
  3. Pargat Diwas, Wikipediaप्रगट दिवस, वाल्मीकि समाज, शोभा यात्रा, तस्वीर, भक्ति गीत, नेपाल
  4. Valmiki Jayanti celebrated across the country, News on AIRदेश भर में, शोभा यात्रा, ईश्वर का संदेश लाने वाले
  5. Shobha yatra on Valmiki Jayanti, The Tribuneअमृतसर की शोभा यात्रा, ख़ज़ाना गेट का लंगर, राम तीर्थ

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।