पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · भाद्रपद शुक्ल द्वादशी

ओणम 2027

Onam 2027

एक राजा, जो हर साल अपनी प्रजा को देखने लौटता है।

ओणम 2027 में 12 सितंबर, रविवार को है। भाद्रपद शुक्ल द्वादशी तिथि 11 सितंबर, रात 7:37 से 12 सितंबर, रात 10:13 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

ओणम का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

उस शाम का चाँद, 90 प्रतिशत रोशन

भोर में एक छोटा हाथ आँगन की ज़मीन पर पीली पंखुड़ियाँ रखता है।

एक गोल घेरा। बस इतना ही, आज पहला दिन है।

कल इसमें एक और रंग जुड़ेगा, परसों एक और।

दस दिन में यह घेरा फूलों का पूरा कालीन बन जाएगा।

माँ कहती हैं, यह उस राजा के लिए है जो आने वाला है।

कौन राजा? जो पाताल गया, और जिसे साल में एक बार लौटने की छूट मिली।

हर कथा में वह थोड़ा अलग है। पर हर आँगन में उसके लिए रास्ता फूलों से बनता है।

2027 में कब

ओणम 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़12 सितंबर, रविवार

तिथिभाद्रपद शुक्ल द्वादशी11 सितंबर, रात 7:37 से 12 सितंबर, रात 10:13 तक

नक्षत्रश्रवणसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:04

सूर्यास्तशाम 6:30

चंद्रोदयशाम 4:30

मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar

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शुभकामना

ओणम का शुभकामना कार्ड

ओणम का शुभकामना कार्ड: ओणम की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

ओणम क्या है

ओणम केरल का सबसे बड़ा त्योहार है। यह मलयालम पंचांग के पहले महीने चिंगम में आता है, जो अगस्त सितंबर के आसपास पड़ता है। उत्सव दस दिन का है: अत्तम के दिन शुरू होता है, और दसवाँ दिन तिरुवोणम सबसे बड़ा दिन है। इसके हर दिन का अपना नाम और अपना काम है, जैसे चित्तिरा, चोती, मूलम, अनिषम और तिरुवोणम। इसके केंद्र में राजा महाबली की याद है, और इसे मेल और उम्मीद का त्योहार कहा जाता है।

कथा

ओणम की कथा

केरल में कहते हैं कि बहुत पहले यहाँ महाबली नाम के राजा थे। ऐसे दानी और भले कि प्रजा उन्हें बहुत चाहती थी। उनकी यही बढ़ती चाह देवताओं को खटकने लगी। तब विष्णु एक बौने, वामन, का रूप लेकर उनके पास आए और बस तीन पग ज़मीन माँगी। महाबली ने हाँ कह दी। वामन बढ़ने लगे, इतने बढ़े कि दो पग में धरती और आकाश नाप लिए। तीसरे पग के लिए जगह नहीं बची, तो महाबली ने अपना सिर आगे कर दिया। केरल की परंपरा कहती है कि विष्णु ने उन्हें साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने आने का वर दिया, और ओणम उसी लौटने का दिन है।

भागवत पुराण के आठवें स्कंध में यही कथा अपने ढंग से है। वहाँ वामन अदिति और कश्यप के बेटे बनकर जन्म लेते हैं, और नर्मदा के उत्तरी किनारे भृगुकच्छ में बलि के यज्ञ में पहुँचते हैं। वे तीन पग ज़मीन माँगते हैं। गुरु शुक्राचार्य पहचान लेते हैं कि यह विष्णु हैं, और बलि को रोकते हैं, पर बलि अपना वचन नहीं तोड़ते। वामन विराट रूप लेकर दो पग में सब नाप लेते हैं, और गरुड़ बलि को वरुण के पाश से बाँध देते हैं। तब बलि तीसरे पग के लिए अपना सिर देते हैं। भगवान उन्हें सुतल लोक देते हैं, जो स्वर्ग से भी अच्छा बताया गया है, और ख़ुद उनके द्वारपाल बनना मान लेते हैं। हर साल लौटने की बात भागवत में नहीं, केरल की अपनी परंपरा में है।

और इसी कथा का एक सिरा वाल्मीकि रामायण में भी मिलता है। बालकांड के उनतीसवें सर्ग में विश्वामित्र किशोर राम को एक आश्रम दिखाते हैं और कहते हैं: "एष पूर्वाश्रमो राम वामनस्य महात्मनः। सिद्धाश्रम इति ख्यातः।" यानी राम, यह महात्मा वामन का पुराना आश्रम है, जिसे सिद्धाश्रम कहते हैं। फिर वे बताते हैं: "त्रीन् क्रमानथ भिक्षित्वा प्रतिगृह्य च मानदः। आक्रम्य लोकान् लोकात्मा सर्वभूतहिते रतः॥" यानी सबका भला चाहने वाले उस प्रभु ने तीन पग माँगे, पाए, और उन्हीं पगों से सारे लोक नाप लिए।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में ओणम

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

वाल्मीकि रामायण

संस्कृत · Valmiki Ramayana

वाल्मीकि रामायण के बालकांड, सर्ग उनतीस में विश्वामित्र राम को सिद्धाश्रम दिखाते हैं और वामन की कथा सुनाते हैं: विष्णु अदिति के घर वामन बनकर जन्मे, विरोचन के बेटे बलि के पास गए, तीन पग माँगे, उन्हीं से लोक नाप लिए और त्रिलोक फिर इंद्र को सौंप दिया। यानी ओणम का राजा राम की कथा में भी आता है, उस आश्रम की कहानी बनकर जिसे राम ने अपनी आँखों से देखा। यहाँ बलि के लौटने की बात नहीं है, बस उस दान की याद है।

अध्यात्म रामायण किलिप्पाट्टु

मलयालम · Adhyatma Ramayanam Kilippattu

ओणम से ठीक पहले का महीना कर्किडकम केरल में रामायण मास कहलाता है। यह मलयालम पंचांग का आख़िरी महीना है, और इसमें घर घर शाम को पीतल का दीया, निलविलक्कु, जलाकर एषुत्तच्छन की अध्यात्म रामायणम् किलिप्पाट्टु रोज़ थोड़ी थोड़ी पढ़ी जाती है, ताकि महीना ख़त्म होते होते पूरी हो जाए। फिर नया साल चिंगम आता है, और उसी चिंगम में ओणम। तो केरल का घर रामकथा पूरी करके महाबली के स्वागत में लगता है।

कहाँ कैसे

ओणम कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • केरल के घरों के आँगन

    अत्तम के दिन से घर के आगे पूक्कलम बनता है, यानी फूलों का घेरा। पहले दिन पीले फूल, फिर हर दिन एक परत और, ताकि महाबली का स्वागत हो।

  • पंपा नदी

    अनिषम के दिन पंपा नदी पर वल्लम कली होती है, यानी नावों की दौड़, लंबी साँप जैसी नावों में सैकड़ों खेने वाले एक साथ चप्पू चलाते हैं।

  • केरल के क़स्बे और गलियाँ

    मूलम के दिन से पुलिकली और कैकोट्टिकली जैसे लोक नाच होते हैं, जो पूरे केरल में खेले जाते हैं।

  • बाज़ार

    चोती के दिन लोग अपनों के लिए नए कपड़े और गहने ख़रीदते हैं।

  • घर की रसोई

    तिरुवोणम के दिन केले के पत्ते पर ओणसद्या परोसी जाती है, और लोग ज़मीन पर चटाई डालकर पालथी मारकर खाते हैं।

रीत

ओणम के दिन क्या करते हैं

  1. अत्तम के दिन से रोज़ पूक्कलम में नए फूलों की एक परत जोड़ी जाती है।
  2. चोती के दिन परिवार के लिए नए कपड़े लिए जाते हैं।
  3. मूलम से गली गली में पुलिकली और कैकोट्टिकली के नाच शुरू होते हैं।
  4. अनिषम को पंपा नदी पर नावों की दौड़ होती है।
  5. तिरुवोणम को घर सजता है और पूरा परिवार साथ ओणसद्या खाता है।
  6. पूरा उत्सव महाबली के स्वागत का है, जो मान्यता के अनुसार इसी समय अपनी प्रजा को देखने आते हैं।

रसोई

ओणम का खाना

  • ओणसद्या केले के पत्ते पर नौ बारी में परोसा जाने वाला भोज, जिसमें ग्यारह से तेरह तरह के व्यंजन होते हैं।
  • पायसम मीठी खीर जैसी चीज़, जिससे ओणसद्या ख़त्म होती है।

सवाल जवाब

ओणम 2027: पूछे जाने वाले सवाल

ओणम 2027 कब है?

ओणम 2027 में 12 सितंबर, रविवार को है। भाद्रपद शुक्ल द्वादशी तिथि 11 सितंबर, रात 7:37 से 12 सितंबर, रात 10:13 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

ओणम क्यों मनाया जाता है?

केरल की परंपरा में ओणम राजा महाबली के लौटने का दिन है। वामन को तीन पग दान देने के बाद उन्हें साल में एक बार अपनी प्रजा से मिलने आने का वर मिला था।

ओणम कितने दिन का होता है?

दस दिन का। यह अत्तम से शुरू होता है और दसवें दिन तिरुवोणम पर सबसे बड़ा होता है।

पूक्कलम क्या है?

पूक्कलम फूलों से ज़मीन पर बना घेरा है। अत्तम को पीले फूलों से शुरू होता है और हर दिन बड़ा होता जाता है।

ओणसद्या में कितने व्यंजन होते हैं?

ओणसद्या केले के पत्ते पर नौ बारी में परोसी जाती है, जिसमें ग्यारह से तेरह व्यंजन होते हैं, और आख़िर में पायसम आता है।

क्या वामन और बलि की कथा रामायण में भी है?

हाँ। वाल्मीकि रामायण के बालकांड के उनतीसवें सर्ग में विश्वामित्र राम को सिद्धाश्रम दिखाते हुए यह कथा सुनाते हैं।

ओणम से पहले का महीना रामायण मास क्यों कहलाता है?

कर्किडकम में केरल के घरों में एषुत्तच्छन की अध्यात्म रामायणम् रोज़ शाम पढ़ी जाती है और महीने के आख़िर तक पूरी की जाती है। उसके बाद चिंगम आता है, जिसमें ओणम होता है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Thiruvonam (Onam festival), Kerala Tourismअत्तम से तिरुवोणम, महाबली की कथा, पूक्कलम, वल्लम कली, पुलिकली, ओणसद्या
  2. What is Onam, Palakkad Tourismचिंगम, साल में एक बार लौटने का वर, ओणसद्या के व्यंजन
  3. Valmiki Ramayana, Bala Kanda 29, Vedapathसिद्धाश्रम और वामन के श्लोक
  4. Lord Vamanadeva (Srimad Bhagavatam canto 8), ISKCON Desire Treeभागवत में वामन की कथा, सुतल लोक, द्वारपाल
  5. Srimad Bhagavatam 8.21, VedaBaseगरुड़ का बलि को वरुण पाश से बाँधना
  6. Why Kerala reads the Ramayanam in Karkidakam, Deccan Chronicleकर्किडकम में किलिप्पाट्टु का पाठ, निलविलक्कु
  7. Karkidakam begins in Kerala, Free Press Journalकर्किडकम आख़िरी महीना, उसके बाद चिंगम

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।