उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · कन्या संक्रांति
विश्वकर्मा पूजा 2027
Vishwakarma Puja 2027
आज मशीनें चुप हैं, और आसमान पतंगों से भरा है।
विश्वकर्मा पूजा 2027 में 17 सितंबर, शुक्रवार को है। सूर्य दोपहर 2:11 पर कन्या राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।
आसमान में आज बहुत सी पतंगें हैं। लाल, पीली, कटी हुई, उड़ती हुई।
नीचे कारख़ाने का बड़ा पहिया रुका है। उस पर गेंदे की माला है।
खराद, आरी, हथौड़ा, सब धुले हुए, एक कतार में।
आज इनसे कोई काम नहीं लेगा। आज इनकी पूजा है।
एक मिस्त्री छत पर चढ़कर डोर खींचता है। उसकी हथेली में ग्रीस के निशान अब भी हैं।
कहते हैं जिसने देवताओं के महल बनाए, उसी के बेटे ने समुद्र पर पुल बाँधा था।
और लंका भी, किसी कथा में, उसी के हाथ की बनाई थी।
2027 में कब
विश्वकर्मा पूजा 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़17 सितंबर, शुक्रवार
संक्रांतिसूर्य कन्या राशि मेंदोपहर 2:11
नक्षत्रउत्तरा भाद्रपदसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:07
सूर्यास्तशाम 6:24
चंद्रोदयशाम 6:56
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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शुभकामना
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पहचान
विश्वकर्मा पूजा क्या है
विश्वकर्मा पूजा उस दिन होती है जिस दिन सूरज सिंह राशि से निकलकर कन्या राशि में आता है, यानी कन्या संक्रांति को। बांग्ला पंचांग में यह भाद्र महीने का आख़िरी दिन है, इसलिए इसे भाद्र संक्रांति भी कहते हैं। यह सूरज की चाल से तय होती है, चाँद से नहीं, इसलिए अंग्रेज़ी कैलेंडर में इसकी तारीख़ लगभग हर साल एक सी रहती है। विश्वकर्मा देवताओं के शिल्पी हैं, उनके कारीगर और इंजीनियर, और यह दिन उन सबका है जो बनाते और जोड़ते हैं: बढ़ई, कुम्हार, बुनकर, मिस्त्री, इंजीनियर और कारख़ानों के मज़दूर। पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, ओड़िशा, असम और त्रिपुरा में यह सबसे बड़ा है।
कथा
विश्वकर्मा पूजा की कथा
ऋग्वेद में विश्वकर्मा का नाम आता है, जहाँ उन्हें रचने वाली शक्ति के रूप में देखा गया है। बाद की परंपरा उन्हें देवताओं का शिल्पी मानती है। लोक में कहते हैं कि कृष्ण की द्वारका, पांडवों का इंद्रप्रस्थ, पुष्पक विमान, शिव का त्रिशूल और विष्णु का सुदर्शन चक्र, सब उन्हीं के हाथ के बने हैं। वास्तु और यंत्रों की विद्या, स्थापत्य वेद, भी उन्हीं से जोड़ी जाती है।
और लंका? बहुत से लोग कहते हैं विश्वकर्मा ने लंका रावण के लिए बनाई। पर वाल्मीकि रामायण का उत्तरकांड कहानी को और पीछे ले जाता है। वहाँ के पाँचवें सर्ग में सुकेश के बेटे माल्यवान, सुमाली और माली ब्रह्मा से वर पाते हैं, और विश्वकर्मा उनके लिए लंकापुरी बनाते हैं। बाद में यही लंका कुबेर का घर बनती है, जिन्हें वैश्रवण कहते हैं। तीसरे सर्ग में ब्रह्मा उन्हें लोकपाल बनाते हैं, और वे लंका में जा बसते हैं। फिर रावण आता है, और ग्यारहवें सर्ग में कुबेर पिता की सलाह मानकर लंका छोड़ कैलास चले जाते हैं। यानी लंका का बनाने वाला एक, पर उसमें रहने वाले बदलते रहे।
और फिर उसी लंका तक पहुँचने का रास्ता भी विश्वकर्मा के घर से आया। वाल्मीकि रामायण के युद्धकांड के बाईसवें सर्ग में राम समुद्र के किनारे खड़े हैं। समुद्र ख़ुद राम से कहता है: "अयं सौम्य नलो नाम तनयो विश्वकर्मणः।" यानी यह नल है, विश्वकर्मा का बेटा। और नल कहते हैं: "औरसस्तस्य पुत्रोऽहं सदृशो विश्वकर्मणा।" यानी मैं उनका अपना बेटा हूँ, और हुनर में उन्हीं जैसा। फिर वानरों के साथ पुल पाँच दिन में बनता है: पहले दिन चौदह योजन, दूसरे दिन बीस, तीसरे दिन इक्कीस, चौथे दिन बाईस, और पाँचवें दिन तेईस, सुवेल पर्वत तक।
उनतालीस लंकाएँ
रामकथाओं में विश्वकर्मा पूजा
उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।
वाल्मीकि रामायण
संस्कृत · Valmiki Ramayana
वाल्मीकि रामायण में विश्वकर्मा लंका के दोनों सिरों पर हैं। उत्तरकांड के पाँचवें सर्ग में वे सुकेश के बेटों माल्यवान, सुमाली और माली के लिए लंकापुरी बनाते हैं, जो आगे चलकर कुबेर की और फिर रावण की नगरी बनती है। और युद्धकांड के बाईसवें सर्ग में उनका बेटा नल समुद्र पर पुल बाँधता है। समुद्र ख़ुद राम को बताता है कि नल विश्वकर्मा का पुत्र है, और नल कहते हैं कि वे हुनर में पिता जैसे हैं। सौ योजन का पुल पाँच दिन में पूरा होता है। एक ही घर ने लंका भी बनाई, और लंका तक जाने का रास्ता भी।
कहाँ कैसे
विश्वकर्मा पूजा कहाँ कैसे मनाया जाता है
पश्चिम बंगाल
कारख़ानों, दुकानों और पाड़ाओं, यानी मोहल्लों, में पंडाल लगते हैं, और दिन भर छतों से पतंगें उड़ती हैं, पेंच लड़ते हैं।
बिहार और झारखंड
कारख़ानों और कार्यशालाओं में विश्वकर्मा की मूर्ति लगती है, मशीनें धोकर सजाई जाती हैं, और पतंगबाज़ी होती है।
ओड़िशा, असम और त्रिपुरा
कारख़ानों के मज़दूर अपने औज़ारों की पूजा करते हैं और रोज़ी बनी रहने की मन्नत माँगते हैं।
गैराज, गाड़ियों के अड्डे और कार्यशालाएँ
देश भर में जहाँ भी मशीन चलती है, वहाँ इस दिन गाड़ियाँ और मशीनें धोकर गेंदे की मालाएँ पहनाई जाती हैं। आज के दफ़्तरों में कंप्यूटर भी पूजा में रखे जाते हैं।
गुजरात और राजस्थान
यहाँ बढ़ई और पत्थर का काम करने वाले सुथार और गज्जर समाज विश्वकर्मा को अपना कुल देवता मानते हैं।
रीत
विश्वकर्मा पूजा के दिन क्या करते हैं
- सुबह काम की जगह साफ़ की जाती है, और औज़ार और मशीनें धोकर सजाई जाती हैं।
- पूजा के समय मशीनें बंद रखी जाती हैं, और पूरे दिन उनसे काम नहीं लिया जाता।
- कलश के साथ विश्वकर्मा की मूर्ति या तस्वीर रखी जाती है।
- रोली, अक्षत, फूल, धूप, दीया, मिठाई और फल चढ़ाकर आरती होती है।
- मशीनों पर गेंदे की मालाएँ डाली जाती हैं।
- प्रसाद काम करने वाले सब लोगों में बँटता है।
- पूर्वी भारत में दिन भर पतंगें उड़ाई जाती हैं।
सवाल जवाब
विश्वकर्मा पूजा 2027: पूछे जाने वाले सवाल
विश्वकर्मा पूजा 2027 कब है?
विश्वकर्मा पूजा 2027 में 17 सितंबर, शुक्रवार को है। सूर्य दोपहर 2:11 पर कन्या राशि में जाता है। समय नई दिल्ली के हैं।
विश्वकर्मा पूजा किस दिन होती है?
कन्या संक्रांति को, जब सूरज सिंह से कन्या राशि में आता है। बांग्ला पंचांग में यह भाद्र महीने का आख़िरी दिन है।
विश्वकर्मा पूजा की तारीख़ हर साल लगभग एक सी क्यों रहती है?
क्योंकि यह सूरज की चाल से तय होती है, चाँद की तिथि से नहीं। सूरज लगभग एक ही समय पर हर साल कन्या राशि में आता है।
विश्वकर्मा पूजा में मशीनें क्यों बंद रखते हैं?
औज़ारों और मशीनों को सम्मान देने के लिए। उस दिन उनकी पूजा होती है और उनसे काम नहीं लिया जाता।
क्या विश्वकर्मा ने लंका बनाई थी?
वाल्मीकि रामायण के उत्तरकांड में विश्वकर्मा सुकेश के बेटों माल्यवान, सुमाली और माली के लिए लंकापुरी बनाते हैं। बाद में वहाँ कुबेर रहे, और फिर रावण ने उसे ले लिया।
राम सेतु बनाने वाले नल कौन थे?
वाल्मीकि रामायण के युद्धकांड के बाईसवें सर्ग में नल विश्वकर्मा के बेटे हैं। उन्होंने वानरों के साथ पाँच दिन में सौ योजन का पुल बनाया।
विश्वकर्मा पूजा पर पतंग क्यों उड़ाते हैं?
यह पूर्वी भारत की रीत है, और किताबों में इसकी कोई एक तय वजह नहीं मिलती। बंगाल, बिहार, ओड़िशा और झारखंड में लोग इस दिन छतों से पतंगें उड़ाते हैं और पेंच लड़ाते हैं।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Vishwakarma Puja, PanchangBodhकन्या संक्रांति, पूजा की विधि, देव शिल्पी, राज्य और पतंगें
- Vishwakarma Puja significance, EastMojoभाद्र संक्रांति, असम और त्रिपुरा, औज़ारों की पूजा, द्वारका
- Vishwakarma Jayanti significance, Shubh Panchangऋग्वेद, इंद्रप्रस्थ, पुष्पक, गेंदे की माला, सुथार और गज्जर
- Essence of Valmiki Uttara Ramayana, Kamakotiउत्तरकांड सर्ग तीन, पाँच और ग्यारह: लंका, कुबेर
- Lanka, Wikipediaसुकेश के बेटों के लिए लंका, कुबेर और रावण
- Valmiki Ramayana, Yuddha Kanda 22, Vedapathनल विश्वकर्मा के पुत्र, पाँच दिन में पुल
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।