पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · कार्तिक पूर्णिमा

बाली जात्रा 2027

Bali Jatra 2027

महानदी पर एक नन्ही नाव, और उसके पीछे समंदर पार की एक पूरी याद।

इस बरस (2026) बाली जात्रा 24 नवंबर, मंगलवार को है। बाली जात्रा 2026: तारीख़, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड · यह पन्ना 2027 का है।

बाली जात्रा 2027 में 14 नवंबर, रविवार को है। कार्तिक पूर्णिमा तिथि 13 नवंबर, सुबह 9:56 से 14 नवंबर, सुबह 8:56 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

बाली जात्रा का शुभकामना कार्ड, WhatsApp पर भेजिए

पूर्णिमा: उस रात पूरा चाँद

भोर से पहले शंख बजते हैं। एक, फिर कई।

पानी के किनारे औरतें झुकी हैं। हाथों में केले के छिलके की छोटी छोटी नावें।

हर नाव में पान का एक पत्ता, एक सुपारी, थोड़ा सा धान, और एक नन्हा दीया।

नाव पानी पर उतरती है। लौ काँपती है, फिर सँभल जाती है।

होंठों पर चार अक्षर: आ, का, मा, बै।

कभी इसी मौसम में यहाँ से बड़ी नावें, बोइत, समंदर की ओर निकलती थीं। बाली, जावा, सुमात्रा तक।

उन्हीं हवाओं के उस पार, जावा में, नौवीं सदी में राम की एक कथा लिखी गई। जिस समंदर पर सौदा गया, उसी के उस पार कथा भी मिली।

2027 में कब

बाली जात्रा 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़14 नवंबर, रविवार

तिथिकार्तिक पूर्णिमा13 नवंबर, सुबह 9:56 से 14 नवंबर, सुबह 8:56 तक

नक्षत्रभरणीसूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 6:43

सूर्यास्तशाम 5:28

चंद्रोदयशाम 5:24

मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar

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शुभकामना

बाली जात्रा का शुभकामना कार्ड

बाली जात्रा का शुभकामना कार्ड: बाली जात्रा की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

बाली जात्रा क्या है

बाली जात्रा ओड़िशा का पर्व है, और इसके नाम का सीधा मतलब है बाली की यात्रा। यह कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होता है, और कटक में महानदी के किनारे, गड़गड़िया घाट पर, बाराबाटी क़िले के पास, कम से कम एक हफ़्ते का बड़ा मेला लगता है, जिसे एशिया के सबसे बड़े खुले मेलों में गिना जाता है। यह उन साधबों की याद है, यानी ओड़िशा के उन समुद्री सौदागरों की, जो सदियों पहले बोइत नाम की नावों में बाली, जावा, सुमात्रा, बोर्नियो और श्रीलंका तक जाते थे। उसी भोर ओड़िशा भर में लोग पानी में छोटी नावें बहाते हैं; इस रीत को बोइत बंदाण कहते हैं।

कथा

बाली जात्रा की कथा

यह कथा कम, याद ज़्यादा है, और इसके निशान ज़मीन में मिले हैं। पुराने लेख और खुदाई बताते हैं कि मौर्य काल से लेकर चौदहवीं सदी तक कलिंग और दक्षिण पूर्व एशिया के बीच सौदा चलता रहा। बाली के सेम्बिरन में भारत के बने बरतन मिले हैं, और पूर्वी जावा और बाली के शिलालेखों में कलिंग से आए व्यापारियों और उनके संघों का ज़िक्र है। एक स्थानीय परंपरा तो यह भी कहती है कि बहुत पहले कलिंग के लगभग दो हज़ार परिवार बाली जाकर बस गए थे।

साधब कार्तिक पूर्णिमा के आसपास निकलते थे, क्योंकि तब उत्तर पूर्व से हवाएँ चलने लगती थीं, जो पाल भर देतीं और समंदर शांत रहता। लौटते थे पौष से बैसाख के बीच, जब हवा उलटी दिशा में चलती। जाते समय घर की औरतें किनारे पर शंख, घंटी और दीये लेकर उन्हें विदा करतीं, कि सही सलामत लौटें। आज की छोटी नावें उसी विदाई की याद हैं।

नाव छोड़ते हुए लोग 'आ का मा बै' बोलते हैं। इसके अर्थ पर स्रोत एक राय नहीं हैं। एक अर्थ यह बताया जाता है कि ये चार महीनों के पहले अक्षर हैं: आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष और बैसाख, यानी वे महीने जो समंदर की यात्रा के लिए ठीक माने जाते थे। दूसरा अर्थ इन्हें ऐसे तोड़ता है: आ यानी आकाश, का यानी पानी, मा यानी मत, बै यानी डर, यानी आकाश और पानी से मत डरो। एक और समझ यह है कि समंदर को पान सुपारी चढ़ाने से कार्तिक पूजा का फल मिलता है और समंदर पार गए घर वाले सही सलामत लौटते हैं।

बाली जात्रा नाम पर एक और बात भी कही जाती है। ओड़िया में बालि का मतलब रेत भी है, और परंपरा कहती है कि चैतन्य महाप्रभु ने गड़गड़िया घाट पर महानदी की रेत पर संकीर्तन किया था। मेले की शुरुआत पंद्रहवीं सदी या उससे भी पहले की बताई जाती है।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में बाली जात्रा

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

वाल्मीकि रामायण

संस्कृत · Valmiki Ramayana

वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड में सुग्रीव वानरों को सीता की खोज में पूरब की ओर भेजते हैं, और रास्ते के देश गिनाते हुए यवद्वीप का नाम लेते हैं, यानी जावा: 'रत्नवन्तं यवद्वीपं सप्तराज्योपशोभितम्' (किष्किंधा कांड 39.28), यानी रत्नों वाला यवद्वीप, जो सात राज्यों से सजा है। अगले ही श्लोक में सोने और चाँदी वाले एक द्वीप की बात है। जिस पूरब के समंदर पर कलिंग के बोइत चलते थे, वह वाल्मीकि की इस सूची में पहले से है।

ककविन रामायण

पुरानी जावानी · Kakawin Ramayana

जावा की सबसे पुरानी रामकथा, ककविन रामायण, नौवीं सदी के आख़िर में मध्य जावा में पुरानी जावानी भाषा में लिखी गई, छब्बीस सर्गों में। यह वाल्मीकि से नहीं, भट्टिकाव्य नाम की संस्कृत रचना से ली गई है, और पूर्वी जावा के पनातरन मंदिर की दीवारों पर इसके दृश्य खुदे हैं। स्रोत बताते हैं कि इंडोनेशिया के साहित्य और मूर्तियों में राम की कथा जगह जगह दिखती है, और ककविन के कुछ प्रसंग ओड़िया की एक पुरानी रामकथा, बिचित्र रामायण, से मिलते जुलते हैं। कथा किस नाव पर गई, यह कहीं लिखा नहीं; पर जिस समंदर पर कलिंग के साधब जाते थे, उसी के उस पार यह कथा मिली।

विलंका रामायण

ओड़िया · Vilanka Ramayana

बोइत बंदाण की रीत का सबसे पुराना लिखा ज़िक्र पंद्रहवीं सदी के सारला दास के ओड़िया महाभारत में बताया जाता है। यही सारला दास विलंका रामायण के कवि हैं, ओड़िया की वह कथा जो लंका के बाद शुरू होती है: पाताल में एक दूसरी लंका, विलंका, और वहाँ हज़ार सिर वाला रावण, जिसका अंत सीता के हाथ होता है। ओड़िशा के एक ही कवि की क़लम में समंदर पार जाती नावें भी हैं और एक दूसरी लंका भी।

कहाँ कैसे

बाली जात्रा कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • कटक, गड़गड़िया घाट

    महानदी के किनारे कम से कम एक हफ़्ते का खुला मेला लगता है: खिलौनों की दुकानें, बड़े झूले, खेल, ओड़िया खाने के ठेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम। ग़रीब कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों के हाथ के सामान की दुकानें भी लगती हैं, और हर साल लाखों लोग आते हैं।

  • ओड़िशा के गाँव और शहर

    कार्तिक पूर्णिमा की भोर लोग नदी, तालाब या समंदर के किनारे जाकर छोटी नावें बहाते हैं, और औरतें शंख बजाती हैं। पहले गाँवों के आँगन में मुरुजा से, यानी रंगीन चूर्ण से, एक बड़ा बोइत बनाकर उस पर धान और सामान रखा जाता था; यह रीत अब छूट गई है।

  • पारादीप

    कटक के साथ यहाँ भी इस मौक़े पर सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। 1992 में नौसेना की एक पाल वाली नाव पारादीप से बाली तक गई थी, बयासी दिनों में, उसी पुराने रास्ते की याद में।

  • बाली, इंडोनेशिया

    दक्षिण बाली के हिंदुओं में भी एक रीत है जिसमें एक नन्ही नाव नदी में बहाई जाती है। स्रोत इसे थाईलैंड के लोय क्रातोंग जैसी मान्यता से जोड़ते हैं: अच्छे काम गिने जाते हैं और बुरे समंदर में घुल जाते हैं।

रीत

बाली जात्रा के दिन क्या करते हैं

  1. कार्तिक पूर्णिमा की भोर, सूरज निकलने से पहले, लोग नदी, तालाब या समंदर के किनारे पहुँचते हैं।
  2. केले के छिलके, सोला, काग़ज़ या कॉर्क की छोटी नावें बनती हैं।
  3. नाव में पान, सुपारी, थोड़ा धान, फूल और एक छोटा दीया रखते हैं।
  4. औरतें शंख बजाती हैं, और नाव पानी पर छोड़ते हुए सब 'आ का मा बै' बोलते हैं।
  5. जो औरतें कार्तिक भर का व्रत रखती हैं, वे इसी दिन व्रत खोलती हैं।
  6. कटक में गड़गड़िया घाट पर हफ़्ते भर का मेला लगता है, जहाँ परिवार घूमने और खाने जाते हैं।

रसोई

बाली जात्रा का खाना

  • ठुंका पूरी गरम गरम तली फूली पूरियाँ, बाली जात्रा के मेले की पुरानी पहचान।
  • छेना तरकारी छेने की गरम सब्ज़ी, जो ठुंका पूरी के साथ खाई जाती है।
  • बड़े रसगुल्ले और गुलाब जामुन कहते हैं, पहले मेले में ये टेनिस की गेंद जितने बड़े बिकते थे।

सवाल जवाब

बाली जात्रा 2027: पूछे जाने वाले सवाल

बाली जात्रा 2026 में कब है?

बाली जात्रा 2026 में 24 नवंबर, मंगलवार को है। इस बरस की तिथि, मुहूर्त और शुभकामना कार्ड बाली जात्रा 2026 के पन्ने पर हैं। यह पन्ना 2027 का है।

बाली जात्रा 2027 कब है?

बाली जात्रा 2027 में 14 नवंबर, रविवार को है। कार्तिक पूर्णिमा तिथि 13 नवंबर, सुबह 9:56 से 14 नवंबर, सुबह 8:56 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

बाली जात्रा क्यों मनाई जाती है?

यह ओड़िशा के साधबों की याद है, जो कार्तिक पूर्णिमा के आसपास हवा के रुख़ के साथ बाली, जावा, सुमात्रा, बोर्नियो और श्रीलंका की ओर समुद्री सौदे के लिए निकलते थे।

बोइत बंदाण क्या है?

कार्तिक पूर्णिमा की भोर पानी में छोटी नावें बहाने की रीत। नावें केले के छिलके, सोला, काग़ज़ या कॉर्क की होती हैं, और उनमें पान, सुपारी, धान और दीया रखा जाता है।

'आ का मा बै' का क्या मतलब है?

स्रोत अलग अलग अर्थ बताते हैं। एक के अनुसार ये आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष और बैसाख, यानी यात्रा के महीनों के पहले अक्षर हैं; दूसरे के अनुसार इसका अर्थ है आकाश और पानी से मत डरो।

बाली जात्रा का मेला कहाँ लगता है?

कटक में महानदी के किनारे गड़गड़िया घाट पर, बाराबाटी क़िले के पास। यह कार्तिक पूर्णिमा से शुरू होकर कम से कम एक हफ़्ता चलता है।

क्या रामायण जावा और बाली तक गई थी?

वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड में सुग्रीव यवद्वीप, यानी जावा, का नाम लेते हैं। जावा में नौवीं सदी की ककविन रामायण है, और स्रोत बताते हैं कि इंडोनेशिया के साहित्य और मूर्तियों में राम की कथा जगह जगह दिखती है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Bali Yatra: Odisha's voyage to a glorious past (Live History India)मौर्य काल से सौदा, सेम्बिरन, शिलालेख, उत्तर पूर्व की हवाएँ, नावों का सामान, आ का मा बै के अर्थ, सारला दास, किष्किंधा कांड में यवद्वीप, ककविन, बाली की नाव वाली रीत, 1992 की यात्रा
  2. Boita Bandana Utshava and Bali Yatra in Odisha (eSamskriti)केले के छिलके और सोला की नावें, कार्तिक व्रत खोलना, चार महीनों वाला अर्थ, जाने और लौटने के महीने, विदाई, मुरुजा का बोइत, चैतन्य और रेत, ठुंका पूरी और छेना तरकारी
  3. Baliyatra, Cuttack (Cuttack district, Government of Odisha)गड़गड़िया घाट, बाराबाटी क़िला, बाली की यात्रा वाला अर्थ, जावा, सुमात्रा, बोर्नियो, श्रीलंका, एशिया का बड़ा मेला, कारीगरों की दुकानें
  4. Valmiki Ramayana, Kishkindha Kanda, Sarga 39 (sanskritdocuments.org)यवद्वीप वाला श्लोक और पूरब की दिशा

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।