पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · हर महीने का व्रत

स्कंद षष्ठी 2027

Skanda Shashthi 2027

छठा दिन। एक भाला, एक पेड़, और उस पेड़ के दो टुकड़े: एक मोर, एक मुर्ग़ा।

स्कंद षष्ठी 2027 में 12 बार आती है, हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी को। पहली 13 जनवरी, बुधवार को है, और आख़िरी 3 दिसंबर, शुक्रवार को। हर तारीख़ की तिथि, सूर्योदय और उस दिन की अपनी बात नीचे है। समय नई दिल्ली के हैं।

उस शाम का चाँद, 27 प्रतिशत रोशन

लहर आती है, मंदिर की सीढ़ी को छूती है, लौट जाती है।

रेत पर हज़ारों गीले पाँव। सबने अभी अभी समुद्र में डुबकी ली है।

किसी ने छह दिन से बस एक बार खाया है। किसी ने बस फल।

एक बच्चा पिता के कंधे पर है। पूछता है, आम का वह पेड़ कहाँ है?

किनारे पर भाले वाली मूर्ति आगे बढ़ती है। पुरानी लड़ाई फिर खेली जा रही है।

भीड़ एक साथ पुकारती है। फिर समुद्र की आवाज़ लौट आती है।

कथा कहती है, उस दिन पेड़ के दो टुकड़े हुए। एक मोर बना, एक मुर्ग़ा।

यह षष्ठी हर महीने आती है। पर साल में एक बार इसकी कथा समुद्र भी सुनता है।

2027 में कब

स्कंद षष्ठी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

जनवरी13

फ़रवरी12

मार्च13

अप्रैल12

मई11

जून9

जुलाई8

अगस्त7

सितंबर5

अक्टूबर5

नवंबर4

दिसंबर3

मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar

कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं

आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।

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सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।

पहचान

स्कंद षष्ठी क्या है

स्कंद षष्ठी हर महीने के शुक्ल पक्ष की छठी तिथि है, शिव और पार्वती के बेटे स्कंद के नाम। उन्हें कार्तिकेय, मुरुगन और सुब्रह्मण्य भी कहते हैं। इस दिन उनके भक्त व्रत रखते हैं। धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु का नियम है कि पंचमी से जुड़ी षष्ठी व्रत के लिए अच्छी है: जिस दिन सूरज निकलने से डूबने के बीच पंचमी ख़त्म हो और षष्ठी लगे, व्रत उसी दिन रखा जाता है। इसीलिए यह व्रत कभी कभी कैलेंडर की पंचमी वाले दिन पड़ता है, और तिरुचेंदूर जैसे मंदिर भी यही नियम मानते हैं। सब षष्ठियाँ मुरुगन की हैं, पर सबसे बड़ी कार्तिक शुक्ल की षष्ठी है, जो तमिल सौर महीने ऐप्पसि या कार्तिगै में पड़ती है। उसे कंद षष्ठी कहते हैं, और उसका छह दिन का व्रत सूरसंहारम पर पूरा होता है, यानी सूरपद्मन के मारे जाने के दिन। स्कंद तमिल हिंदुओं के ख़ास तौर पर प्यारे देवता हैं। दक्षिण में उन्हें गणेश का छोटा भाई माना जाता है, और उत्तर में बड़ा भाई। इस पन्ने की सूची में साल की बारह स्कंद षष्ठियाँ हैं।

पूरी सूची

स्कंद षष्ठी 2027: हर तारीख़

हर तारीख़, उस दिन की तिथि कब से कब तक, सूर्योदय का समय, और उस दिन की अपनी बात।

  1. 13जनवरी

    पौष स्कंद षष्ठी

    पौष शुक्ल षष्ठी · तिथि 13 जनवरी, दोपहर 1:02 से 14 जनवरी, दोपहर 1:59 तक

    साल की पहली स्कंद षष्ठी। हर महीने वाला यह व्रत एक दिन का है: एक बार का सादा खाना, या बस फल और दूध।

    सूर्योदय: सुबह 7:15

    + यह दिन कैलेंडर में

  2. 12फ़रवरी

    माघ स्कंद षष्ठी

    माघ शुक्ल षष्ठी · तिथि 12 फ़रवरी, रात 3:19 से 13 फ़रवरी, रात 3:00 तक

    देवी भागवत कहता है कि राजा प्रियव्रत के समय से हर महीने की शुक्ल षष्ठी पर षष्ठी देवी की पूजा होने लगी। वही देवसेना हैं, स्कंद की प्यारी पत्नी, और बच्चों की रखवाली करने वाली देवी।

    सूर्योदय: सुबह 7:02

    + यह दिन कैलेंडर में

  3. 13मार्च

    फाल्गुन स्कंद षष्ठी

    फाल्गुन शुक्ल षष्ठी · तिथि 13 मार्च, दोपहर 1:55 से 14 मार्च, दोपहर 12:32 तक

    वाल्मीकि रामायण में इंद्र और मरुत बालक कुमार को दूध पिलाने के लिए कृत्तिकाओं को बुलाते हैं। उन्हीं कृत्तिकाओं से उनका नाम पड़ा, कार्तिकेय।

    सूर्योदय: सुबह 6:34

    + यह दिन कैलेंडर में

  4. 12अप्रैल

    चैत्र स्कंद षष्ठी

    चैत्र शुक्ल षष्ठी · तिथि 11 अप्रैल, रात 9:40 से 12 अप्रैल, रात 7:35 तक

    महाभारत में मार्कंडेय कहते हैं कि स्कंद को पंचमी के दिन नाम मिला और षष्ठी के दिन उनका काम पूरा हुआ।

    सूर्योदय: सुबह 6:00

    + यह दिन कैलेंडर में

  5. 11मई

    वैशाख स्कंद षष्ठी

    वैशाख शुक्ल षष्ठी · तिथि 11 मई, रात 3:49 से 12 मई, रात 1:24 तक

    मुरुगन के छह बड़े धाम, अरुपडै वीडु, षष्ठी के दिन भक्तों से भरे रहते हैं, और उनके साथ मरुदमलै भी।

    सूर्योदय: सुबह 5:33

    + यह दिन कैलेंडर में

  6. 9जून

    ज्येष्ठ स्कंद षष्ठी

    ज्येष्ठ शुक्ल षष्ठी · तिथि 9 जून, सुबह 9:36 से 10 जून, सुबह 7:12 तक

    नेपाल के नेवार लोग जेठ शुक्ल की षष्ठी को सिथि नखः मनाते हैं और उसे कुमार षष्ठी कहते हैं, कुमार का जन्मदिन। बरसात आने पर कुएँ, तालाब और पत्थर के धारे साफ़ किए जाते हैं, और धान रोपने के लिए कुमार से ताक़त माँगी जाती है।

    सूर्योदय: सुबह 5:23

    + यह दिन कैलेंडर में

  7. 8जुलाई

    आषाढ़ स्कंद षष्ठी

    आषाढ़ शुक्ल षष्ठी · तिथि 8 जुलाई, शाम 4:08 से 9 जुलाई, दोपहर 2:04 तक

    इस दिन घरों में कंद षष्ठी कवचम् या तिरुप्पुगऴ् के गीत पढ़े जाते हैं। कवचम् का मतलब है कवच, यानी रक्षा करने वाला गीत।

    सूर्योदय: सुबह 5:30

    + यह दिन कैलेंडर में

  8. 7अगस्त

    श्रावण स्कंद षष्ठी

    श्रावण शुक्ल षष्ठी · तिथि रात 12:23 से रात 11:01 तक

    सावन की इस षष्ठी पर भी पूजा वही सादी है: मुरुगन की वेल और मोर वाली तस्वीर के आगे दीया, फूल और थोड़ा सा भोग।

    सूर्योदय: सुबह 5:46

    + यह दिन कैलेंडर में

  9. 5सितंबर

    भाद्रपद स्कंद षष्ठी

    भाद्रपद शुक्ल षष्ठी · तिथि 5 सितंबर, सुबह 11:18 से 6 सितंबर, सुबह 10:58 तक

    इसी दिन ओड़िशा में नुआखाई है, नए धान को पहली बार खाने का पर्व; उसका अपना पन्ना है।

    सूर्योदय: सुबह 6:01

    + यह दिन कैलेंडर में

  10. 5अक्टूबर

    आश्विन स्कंद षष्ठी

    आश्विन शुक्ल षष्ठी · तिथि 5 अक्टूबर, रात 1:37 से 6 अक्टूबर, रात 2:33 तक

    इसी दिन दुर्गा पूजा की षष्ठी है; उसका अपना पन्ना है। मुरुगन पार्वती के बेटे हैं, सो इस तिथि पर माँ और बेटे, दोनों की पूजा एक साथ होती है।

    सूर्योदय: सुबह 6:16

    + यह दिन कैलेंडर में

  11. 4नवंबर

    कंद षष्ठी (सूरसंहारम)

    कार्तिक शुक्ल षष्ठी · तिथि 3 नवंबर, रात 7:32 से 4 नवंबर, रात 9:38 तक

    साल की सबसे बड़ी स्कंद षष्ठी, तमिल ऐप्पसि की। छह दिन का व्रत इसी दिन सूरसंहारम पर पूरा होता है, तिरुचेंदूर में समुद्र किनारे सूरपद्मन से लड़ाई खेली जाती है, और अगले दिन तिरुकल्याणम् होता है। इसी दिन बिहार और पूरब में छठ पूजा का संध्या अर्घ्य है; उसका अपना पन्ना है।

    सूर्योदय: सुबह 6:35

    + यह दिन कैलेंडर में

  12. 3दिसंबर

    सुब्रह्मण्य षष्ठी

    मार्गशीर्ष शुक्ल षष्ठी · तिथि 3 दिसंबर, शाम 4:14 से 4 दिसंबर, शाम 6:57 तक

    सूरसंहारम के बाद की पहली स्कंद षष्ठी, जो कर्नाटक के कुक्के सुब्रह्मण्य मंदिर में बड़ी होती है और कुक्के सुब्रह्मण्य षष्ठी कहलाती है। पंचमी से जुड़ी षष्ठी के नियम से यह विवाह पंचमी वाले दिन पड़ी है; उसका अपना पन्ना है।

    सूर्योदय: सुबह 6:58

    + यह दिन कैलेंडर में

कथा

स्कंद षष्ठी की कथा

सबसे पुरानी कथा वाल्मीकि रामायण के बालकांड में है, और उसे विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को सुनाते हैं। शिव और उमा बहुत लंबे समय तक साथ रहे, तो देवता डर गए कि उनकी संतान का तेज कोई लोक सह नहीं पाएगा। उनके कहने पर शिव रुक गए, पर उनका कुछ तेज धरती पर गिर चुका था। देवताओं ने अग्नि से कहा कि वह उसे सँभाले, और अग्नि ने उसे सरकंडों के एक वन में रखा, जिसका नाम शरवण था। उमा को बेटा न मिलने का दुख हुआ, और ग़ुस्से में उन्होंने देवताओं को शाप दिया।

आगे के सर्ग में देवता ब्रह्मा के पास जाते हैं, और गंगा के सहारे वह तेज एक बालक बनकर जन्म लेता है। इंद्र और मरुत उस कुमार को दूध पिलाने के लिए कृत्तिकाओं को बुलाते हैं। फिर सब देवता कहते हैं: 'ततस्तु देवताः सर्वाः कार्तिकेय इति ब्रुवन्। पुत्रस्त्रैलोक्यविख्यातो भविष्यति न संशयः॥' (वाल्मीकि रामायण, बालकांड 1.37.25)। मतलब: सब देवता बोले, इसका नाम कार्तिकेय होगा, और यह बेटा तीनों लोकों में जाना जाएगा, इसमें कोई शक नहीं। कृत्तिकाएँ उस बालक को नहलाती हैं जो गर्भ से फिसलकर आया था और आग की तरह चमक रहा था; वाल्मीकि उसे स्कन्न कहते हैं, यानी फिसला हुआ, और स्कंद नाम इसी शब्द से जोड़ा जाता है। कृत्तिकाएँ छह थीं, सो बालक ने छह मुँह बनाए और छहों का दूध पिया।

महाभारत के वन पर्व में मार्कंडेय ऋषि युधिष्ठिर को इसके आगे की बात सुनाते हैं। जन्म के बस छह दिन में स्कंद ने सारे लोकों का मन जीत लिया, और ऋषियों ने कहा कि आप इंद्र बन जाइए। स्कंद ने मना कर दिया: मुझे तुम्हारा राज नहीं चाहिए। तब इंद्र ने उन्हें देवताओं की सेना का सेनापति बनाया, रुद्र ने उनके गले में सोने की माला डाली, और उनके झंडे पर लाल मुर्ग़ा आया। इंद्र देवसेना को लाए, जिसे स्कंद पहले बचा चुके थे, और बृहस्पति ने दोनों का ब्याह कराया। मार्कंडेय बताते हैं कि देवसेना का एक नाम षष्ठी भी है, और यह भी कि स्कंद को पंचमी के दिन नाम मिला, इसलिए वह श्री पंचमी कहलाई, और षष्ठी के दिन उनका काम पूरा हुआ, इसलिए षष्ठी बहुत बड़ी तिथि मानी जाती है।

तमिल घरों में जो कथा सबसे ज़्यादा सुनाई जाती है, वह स्कंद पुराण में है, और तमिल के कंद पुराणम् में, जिसे कच्चियप्प शिवाचार्य ने रचा। सूरपद्मन और उसके भाई सिंहमुख और तारकासुर ने तप करके बड़े वर पा लिए, और देवताओं और तीनों लोकों को सताने लगे। देवताओं ने शिव से विनती की। शिव की तीसरी आँख से छह चिंगारियाँ निकलीं, जो सरवण नाम के तालाब में छह बालक बन गईं, और कृत्तिका माँओं ने उन्हें पाला। पार्वती ने उन्हें गले लगाया तो छहों एक हो गए, छह मुँह वाले षण्मुख, जिन्हें तमिल में आरुमुगम कहते हैं। पार्वती ने उन्हें वेल दिया, यानी एक भाला।

फिर छह दिन लड़ाई चली। पहले तारकासुर गिरा, फिर सिंहमुख, और फिर मुरुगन सूरपद्मन के सामने आए। छठे दिन सूरपद्मन आम का एक बहुत बड़ा पेड़ बन गया। मुरुगन ने वेल से उस पेड़ के दो टुकड़े कर दिए। एक टुकड़ा मुर्ग़ा बना, जो उनके झंडे पर रहता है, और दूसरा मोर, जिस पर वे चलते हैं। कहते हैं, इस तरह राक्षस मारा नहीं गया, बदल दिया गया, और भगवान ने उसे अपना लिया। कंद षष्ठी के छह दिन इसी लड़ाई के छह दिन हैं।

व्रत

स्कंद षष्ठी का व्रत कैसे रखें

  1. सुबह नहाकर मुरुगन के आगे व्रत का संकल्प लिया जाता है, यानी मन में पक्का किया जाता है कि आज व्रत है।
  2. खाने का ढंग अपनी ताक़त से चुना जाता है: कोई दिन में एक बार सादा शाकाहारी खाना खाता है, कोई बस फल और दूध लेता है, और कड़ा व्रत रखने वाले फल, दूध और पानी पर रहते हैं।
  3. मांस, अंडा, शराब, प्याज़ और लहसुन नहीं खाए जाते।
  4. कार्तिक की कंद षष्ठी पर यही व्रत छह दिन चलता है, और कुछ लोग आख़िरी दिन और कड़ा रखते हैं।
  5. बूढ़े, गर्भवती या दूध पिलाती माँएँ, बच्चे, शुगर के मरीज़ और रोज़ दवा लेने वाले पहले डॉक्टर से पूछ लें; हल्का व्रत भी पूरा व्रत माना जाता है।

पारण: व्रत कैसे खोलें

स्कंद षष्ठी के पारण की कोई एक घड़ी सब जगह तय नहीं है; घर की जो रीत है, वही चलती है। जो लोग एक बार खाने वाला व्रत रखते हैं, उनके लिए वही एक सादा भोजन दिन का खाना है। कार्तिक की कंद षष्ठी पर बहुत से लोग छठे दिन सूरसंहारम हो जाने के बाद व्रत खोलते हैं, और कुछ लोग अगली सुबह। व्रत सादे शाकाहारी खाने से खुलता है, बिना प्याज़ और लहसुन के।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में स्कंद षष्ठी

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

वाल्मीकि रामायण

संस्कृत · Valmiki Ramayana

वाल्मीकि रामायण के बालकांड के छत्तीसवें और सैंतीसवें सर्ग में विश्वामित्र राम और लक्ष्मण को कुमार के जन्म की कथा सुनाते हैं: शिव का तेज, अग्नि, शरवण का सरकंडों वाला वन, गंगा, और दूध पिलाने आई कृत्तिकाएँ। यहीं देवता बालक को कार्तिकेय नाम देते हैं, और छह कृत्तिकाओं का दूध पीने के लिए बालक छह मुँह वाला हो जाता है। यानी जिन राम की कथा यह ग्रंथ कहता है, वे ख़ुद, विश्वामित्र के साथ चलते हुए, स्कंद के जन्म की कथा सुनते हैं।

महाभारत, रामोपाख्यान

संस्कृत · Ramopakhyana (Mahabharata)

महाभारत के वन पर्व में मार्कंडेय ऋषि युधिष्ठिर को रामोपाख्यान सुनाते हैं, और उसी वन पर्व में उन्हीं के मुँह से स्कंद की कथा भी आती है: उनका सेनापति बनना, देवसेना से ब्याह, और लाल मुर्ग़े वाला झंडा। वहीं मार्कंडेय यह भी कहते हैं कि स्कंद का काम षष्ठी को पूरा हुआ, इसलिए वह तिथि बड़ी है, और यह कि देवसेना को षष्ठी भी कहते हैं।

कहाँ कैसे

स्कंद षष्ठी कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • तिरुचेंदूर, तमिलनाडु

    थूत्तुकुडि ज़िले का यह मंदिर मुरुगन के छह धामों में से एक है, और सूरपद्मन पर उनकी जीत से जुड़ा है। कंद षष्ठी पर यहाँ समुद्र के किनारे सूरसंहारम खेला जाता है, और यह दुनिया भर में सबसे ज़्यादा जाना जाता है।

  • तमिलनाडु के छह धाम

    मुरुगन के छह बड़े मंदिरों को अरुपडै वीडु कहते हैं, यानी छह पड़ाव। इनके साथ मरुदमलै भी भक्तों का बड़ा ठिकाना है, और षष्ठी को इन मंदिरों में भीड़ रहती है।

  • कुक्के सुब्रह्मण्य, कर्नाटक

    मंगलौर के पास का यह मंदिर छह धामों में नहीं गिना जाता, फिर भी मुरुगन का बहुत बड़ा मंदिर है। सूरसंहारम के बाद वाली, मार्गशीर्ष की स्कंद षष्ठी यहाँ सुब्रह्मण्य षष्ठी कहलाती है।

  • काठमांडू घाटी, नेपाल

    नेवार लोग जेठ शुक्ल की षष्ठी को सिथि नखः मनाते हैं और उसे कुमार षष्ठी कहते हैं, कुमार का जन्मदिन। उस दिन कुएँ, तालाब और पत्थर के धारे साफ़ किए जाते हैं, और घरों में दाल के बड़े, चटामरी और मालपुए बनते हैं।

रीत

स्कंद षष्ठी के दिन क्या करते हैं

  1. पूजा मुरुगन की उस तस्वीर के आगे होती है जिसमें वे वेल और मोर के साथ हैं: दीया, फूल और सादा भोग।
  2. दिन में कंद षष्ठी कवचम् पढ़ा जाता है, जो तमिल का रक्षा वाला गीत है, या तिरुप्पुगऴ् के गीत और स्कंद पुराण।
  3. षष्ठी के दिन मुरुगन के मंदिर का दर्शन किया जाता है, और कंद षष्ठी के छह दिनों में से एक या कई दिन।
  4. कार्तिक की कंद षष्ठी के छठे दिन सूरसंहारम होता है: मंदिरों में, और तिरुचेंदूर में समुद्र किनारे, सूरपद्मन से लड़ाई फिर से खेली जाती है।
  5. सूरसंहारम के अगले दिन बहुत से मुरुगन मंदिरों में तिरुकल्याणम् होता है, यानी मुरुगन का ब्याह।
  6. दक्षिण में मंगलवार भी मुरुगन का दिन है, क्योंकि उन्हें मंगल ग्रह का स्वामी माना जाता है; उस दिन का व्रत चेव्वाय व्रतम् कहलाता है।

सवाल जवाब

स्कंद षष्ठी 2027: पूछे जाने वाले सवाल

स्कंद षष्ठी 2027 में कब कब है?

स्कंद षष्ठी 2027 में 12 बार आती है, हर महीने शुक्ल पक्ष की षष्ठी को। पहली 13 जनवरी, बुधवार को है, और आख़िरी 3 दिसंबर, शुक्रवार को। हर तारीख़ की तिथि, सूर्योदय और उस दिन की अपनी बात नीचे है। समय नई दिल्ली के हैं।

स्कंद षष्ठी के व्रत में क्या खाएँ?

सादा शाकाहारी खाना, दिन में एक बार, या बस फल और दूध। मांस, अंडा, शराब, प्याज़ और लहसुन नहीं खाते।

स्कंद षष्ठी कभी पंचमी के दिन क्यों पड़ जाती है?

धर्मसिंधु और निर्णयसिंधु कहते हैं कि पंचमी से जुड़ी षष्ठी व्रत के लिए अच्छी है। जिस दिन सूरज निकलने से डूबने के बीच पंचमी ख़त्म होकर षष्ठी लगे, व्रत उसी दिन होता है, इसलिए कैलेंडर में वह दिन पंचमी भी दिख सकता है।

कंद षष्ठी का व्रत कितने दिन का होता है?

कार्तिक शुक्ल की कंद षष्ठी का व्रत छह दिन का होता है, और सूरसंहारम पर पूरा होता है। बाक़ी महीनों की स्कंद षष्ठी का व्रत एक दिन का है।

स्कंद षष्ठी साल में कितनी बार आती है?

हर महीने के शुक्ल पक्ष में एक बार, यानी साल में बारह बार। इनमें कार्तिक की कंद षष्ठी सबसे बड़ी है, और उसके बाद मार्गशीर्ष की सुब्रह्मण्य षष्ठी।

क्या स्कंद षष्ठी के व्रत में पानी पी सकते हैं?

हाँ। जो कड़ा व्रत रखते हैं, वे भी फल, दूध और पानी लेते हैं। बूढ़े, बीमार और रोज़ दवा लेने वाले अपनी सेहत देखकर हल्का व्रत रखें।

कार्तिकेय गणेश के बड़े भाई हैं या छोटे?

दोनों बातें चलती हैं। दक्षिण भारत में मुरुगन को गणेश का छोटा भाई माना जाता है, और उत्तर भारत में बड़ा भाई।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Drik Panchang: Skanda Sashti Datesशुक्ल षष्ठी का नियम, पंचमी वाली षष्ठी, कार्तिक की कंद षष्ठी, छह धाम, कुक्के सुब्रह्मण्य षष्ठी
  2. HinduTone: Skanda Sashti, Soora Samharam, Six-Day Vratam, Story and Tiruchendurसूरपद्मन की कथा, छह दिन का व्रत, पारण, तिरुचेंदूर, तिरुकल्याणम्
  3. Drik Panchang: Murugan Mangalavara Vratमंगलवार और मुरुगन, मंगल के स्वामी, चेव्वाय व्रतम्
  4. Valmiki Ramayana, Bala Kanda 1.37.23 to 1.37.28 (Vedapath)कृत्तिकाएँ, कार्तिकेय नाम, स्कन्न, छह मुँह
  5. Valmiki Ramayana, Bala Kanda, Sarga 36 (sanskritdocuments.org)विश्वामित्र की सुनाई शिव, उमा और शरवण वन की कथा
  6. Mahabharata, Vana Parva, Section CCXXVIII (sacred-texts.com)स्कंद का सेनापति बनना, देवसेना से ब्याह, लाल मुर्ग़ा, पंचमी और षष्ठी
  7. Devi Bhagavatam, Book 9, Chapter 46 (sacred-texts.com)षष्ठी देवी यानी देवसेना, प्रियव्रत की कथा, हर शुक्ल षष्ठी की पूजा
  8. The Himalayan Times: Newar community observing Sithi Nakha festival todayनेपाल का सिथि नखः यानी कुमार षष्ठी

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।