लंका का पहरेदार कौन था?
लंका के द्वार पर हनुमान जी को एक रखवाली करने वाली रोकती है, पर वह कौन है, यह हर रामकथा में अलग है। वाल्मीकि में वह ख़ुद लंका नगरी है, स्त्री के रूप में। तुलसीदास में वह लंकिनी है। तमिल में लंका की देवी, बंगाल में देवी चामुंडा, और जैन कथा में वज्रमुख नाम का योद्धा, जिसकी बेटी आगे चलकर हनुमान जी से विवाह करती है।

एक नज़र में
| कथा | रक्षक | क्या होता है | कहाँ लिखा है |
|---|---|---|---|
| वाल्मीकि रामायण | ख़ुद लंका नगरी, स्त्री के रूप में | एक मुक्के से हारती है, ब्रह्मा की बात बताती है | सुंदरकांड, सर्ग 3 |
| रामचरितमानस | लंकिनी | एक मुक्के से गिरती है, सत्संग की बड़ाई करती है | सुंदरकांड, दोहा 4 |
| कंब रामायण | लंका की रक्षक देवी | हारती है, बचा ली जाती है: धर्म जीतेगा | सुंदर कांडम् 5.3.94 और 95 |
| कृत्तिवासी रामायण | देवी चामुंडा | बात करके जान जाती हैं, बिना लड़े कैलाश चली जाती हैं | कृत्तिवासी रामायण, सुंदरकांड |
| जैन रामकथा | वज्रमुख, और बेटी लंकासुंदरी | वज्रमुख मारा जाता है, लंकासुंदरी विवाह करती है | त्रिषष्टि, पर्व 7, सर्ग 6 |
वाल्मीकि और तुलसीदास
वाल्मीकि रामायण में (सर्ग 3) लंका ख़ुद एक डरावनी स्त्री बनकर सामने आती है और कहती है कि वह रावण के कहने पर नगर की रखवाली करती है। हनुमान जी उसे बाएँ हाथ के मुक्के से गिराते हैं, ग़ुस्सा रोककर, क्योंकि वह स्त्री है। तब वह बताती है कि ब्रह्मा ने उससे कहा था: जिस दिन कोई वानर तुम्हें अपने बल से हरा दे, जान लेना कि राक्षसों पर संकट आ गया (श्लोक 46 से 48)।
रामचरितमानस में उसका नाम लंकिनी है। एक मुक्के में वह गिर पड़ती है, और फिर हाथ जोड़कर कहती है कि स्वर्ग और मोक्ष का सारा सुख भी पल भर के सत्संग के बराबर नहीं (दोहा 4)। पूरी कथा लंकिनी के पन्ने पर है।
कंब रामायण में: हारी, पर मारी नहीं गई
कंब रामायण में लंका की रक्षक देवी हनुमान जी से लड़ती है और हार जाती है, पर हनुमान जी उसे मारते नहीं। वह बताती है कि बहुत पहले उसे बताया गया था कि जब एक ताक़तवर वानर उसे हाथ से मारे, उसके बाद नगर ज़रूर नष्ट होगा (5.3.94)। फिर वह कहती है कि धर्म जीतेगा, पाप हारेगा (அறம் வெல்லும் பாவம் தோற்கும், 5.3.95), हनुमान जी की बड़ाई करती है, सिर झुकाती है और चली जाती है।
बंगाल की कृत्तिवासी रामायण में: देवी चामुंडा
कृत्तिवासी रामायण में लंका की रक्षक लंकिनी नहीं, देवी चामुंडा हैं। हनुमान जी से बात करके, कि वे कौन हैं और क्यों आए हैं, वे जान जाती हैं कि उनका समय पूरा हुआ, और बिना लड़े कैलाश चली जाती हैं।
जैन रामकथा में: वज्रमुख और लंकासुंदरी
हेमचंद्र की जैन रामकथा में हनुमान जी लंका की दीवार तोड़ते हैं और उसके रक्षक वज्रमुख को मार देते हैं। तब वज्रमुख की बेटी लंकासुंदरी उनसे लड़ने आती है, लड़ते लड़ते उन्हें चाहने लगती है, और बताती है कि एक मुनि ने कहा था, जो उसके पिता को मारेगा वही उसका पति होगा। दोनों गंधर्व विवाह कर लेते हैं (त्रिषष्टि, पर्व 7, सर्ग 6)। जैन कथा में हनुमान जी वानर नहीं, विद्याधर कुल के वीर हैं, इसलिए वहाँ विवाह की बात अलग नहीं लगती।
इस पर और
हर कथा का अपना पन्ना है, और हर पात्र का भी।










