पंचांग 2027

सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में

समुद्र में हनुमान जी को कौन मिले?

सीधा जवाब

लंका तक के रास्ते में हनुमान जी को समुद्र में तीन बड़े जीव मिलते हैं: आराम देने को उठता मैनाक पर्वत, परीक्षा लेने वाली नागमाता सुरसा, और परछाईं पकड़कर खींचने वाली सिंहिका। दूसरी रामकथाओं के अपने समुद्री जीव हैं: तमिल में अंगारतारा, जैन में आशालिका, और थाई कथा में समुद्र की रखवाली करने वाली राक्षसी।

उनतालीस लंकाएँ: समुद्र से उठता विशाल जीव, और नीचे सुनहरा रास्ता
उनतालीस लंकाएँ: समुद्र से उठता विशाल जीव, और नीचे सुनहरा रास्ता

एक नज़र में

एक नज़र में: समुद्र के जीव
कथाजीवक्या करता हैहनुमान जी क्या करते हैं
वाल्मीकि रामायणमैनाकआराम करने को कहता हैछूकर आगे बढ़ जाते हैं
वाल्मीकि रामायणसुरसापरीक्षा लेती हैं, मुँह फैलाती हैंछोटे होकर मुँह में जाते और निकलते हैं
वाल्मीकि रामायणसिंहिकापरछाईं पकड़कर खींचती हैभीतर जाकर मारते हैं
कंब रामायणअंगारतारापरछाईं पकड़ती हैभीतर से चीरकर निकलते हैं
जैन रामकथाआशालिकानिगलना चाहती हैचीरकर निकलते हैं, फिर दीवार तोड़ते हैं
रामकियेनसमुद्र और आकाश की राक्षसियाँलंका की रखवालीदोनों को मारते हैं

वाल्मीकि रामायण में: तीन जीव, तीन परीक्षाएँ

मैनाक सोने का पर्वत है, जो समुद्र से ऊपर उठकर हनुमान जी से कुछ देर आराम करने को कहता है। हनुमान जी उसे बस हाथ से छूकर आगे बढ़ जाते हैं, क्योंकि रुकना नहीं है।

सुरसा नागों की माता हैं, जिन्हें देवता हनुमान जी की परीक्षा लेने भेजते हैं। वे मुँह फैलाती जाती हैं और हनुमान जी अपना शरीर बढ़ाते जाते हैं। फिर हनुमान जी अचानक अँगूठे जितने छोटे होकर उनके मुँह में जाते हैं और बाहर निकल आते हैं।

सिंहिका समुद्र में रहने वाली राक्षसी है, जो ऊपर उड़ते जीवों को उनकी परछाईं पकड़कर खींच लेती है। हनुमान जी उसके मुँह में जाकर भीतर से उसे मारते हैं और बाहर निकल आते हैं (सर्ग 1)।

कंब रामायण में: अंगारतारा

तमिल कंब रामायण में समुद्र की राक्षसी का नाम अंगारतारा है। वह भी हनुमान जी को उनकी परछाईं पकड़कर रोकती है, और हनुमान जी उससे कहते हैं कि तूने परछाईं पकड़ने के अपने वरदान का इस्तेमाल किया। फिर वे उसके मुँह में जाकर उसे भीतर से चीरते हुए बाहर निकलते हैं और आगे उड़ जाते हैं (सुंदर कांडम्, कडल् ताऊ पडलम्, पद 76 से 84, कंबन प्रोजेक्ट की गिनती में)। यह वाल्मीकि की सिंहिका जैसी है, पर नाम और कहने का ढंग कंबन का अपना है।

जैन रामकथा में: आशालिका

हेमचंद्र की जैन रामकथा में लंका के पास आशालिका है, एक विद्या, यानी माया की शक्ति, जिसने लंका की दीवार बनाई थी। वह हनुमान जी को निगलना चाहती है। हनुमान जी उसके मुँह में जाते हैं, उसे चीरकर बाहर आते हैं, और फिर लंका की दीवार तोड़ते हैं (त्रिषष्टि, पर्व 7, सर्ग 6)।

थाई रामकियेन में: समुद्र और आकाश की रखवाली

बैंकॉक के वाट फ्रा केव मंदिर की दीवारों पर पूरी रामकियेन बनी है। कमरा 32 के चित्र में हनुमान जी लंका के चारों ओर के समुद्र की रखवाली करने वाली राक्षसी को मारते हैं, और कमरा 33 में आकाश में लंका की रक्षा करने वाली एक और राक्षसी को।

इस पर और

हर कथा का अपना पन्ना है, और हर पात्र का भी।

सवाल जवाब

पूछे जाने वाले सवाल

समुद्र पार करते हुए हनुमान जी को कौन कौन मिले?

वाल्मीकि रामायण के अनुसार मैनाक पर्वत, नागमाता सुरसा और राक्षसी सिंहिका (सुंदरकांड, सर्ग 1)।

परछाईं पकड़ने वाली राक्षसी कौन थी?

वाल्मीकि में सिंहिका, और कंब रामायण में अंगारतारा। दोनों हनुमान जी की परछाईं पकड़कर उन्हें रोकती हैं।

सुरसा कौन थीं?

नागों की माता, जिन्हें देवताओं ने हनुमान जी की परीक्षा लेने भेजा था।

अंगारतारा किस रामायण में है?

तमिल कवि कंबन की कंब रामायण में, सुंदर कांडम् के पहले अध्याय, कडल् ताऊ पडलम् में।

जैन रामायण में हनुमान जी को लंका के पास कौन रोकता है?

हेमचंद्र की कथा में आशालिका, जो उन्हें निगलना चाहती है। हनुमान जी उसे चीरकर बाहर आते हैं।

In English

On the way to Lanka, Valmiki's Hanuman meets Mainaka (a golden mountain that rises to offer rest), Surasa (mother of serpents, sent by the gods to test him) and Simhika (a sea demoness who seizes flying creatures by their shadow). Kamban's Tamil telling has its own shadow-catcher, Angaratarai, whom Hanuman tears apart from inside (Kadal Tavu Padalam, verses 76 to 84). In Hemachandra's Jain telling Ashalika, the magic power that built Lanka's wall, tries to swallow him. The Ramakien murals at Wat Phra Kaew show him killing the ogresses who guard Langka's sea and sky.

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