पंचांग 2027

सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में

अशोक वाटिका कैसी थी, और वहाँ सीता जी से पहली भेंट

सीधा जवाब

अशोक वाटिका रावण का बाग़ है, जहाँ सीता जी को राक्षसियों के पहरे में रखा गया है। वाल्मीकि के अनुसार वहाँ सोने और चाँदी जैसे पेड़ हैं, एक सुनहरा शिंशपा का पेड़ है जिस पर सैकड़ों घंटियाँ बजती हैं, और हज़ार खंभों वाला एक सफ़ेद चैत्य। हनुमान जी इसी शिंशपा में छिपकर सीता जी को पहली बार देखते हैं।

उनतालीस लंकाएँ: अशोक वाटिका, बीच में सफ़ेद चैत्य
उनतालीस लंकाएँ: अशोक वाटिका, बीच में सफ़ेद चैत्य

एक नज़र में

एक नज़र में: अशोक वाटिका
कथासीता जी तक क्या पहुँचाकैसेकहाँ लिखा है
वाल्मीकि रामायणराम की अँगूठीहनुमान जी पहले राम की कथा सुनाते हैं, फिर अँगूठी देते हैंसुंदरकांड, सर्ग 36
रामचरितमानसराम की अँगूठीपेड़ पर से नीचे डालीसुंदरकांड, दोहा 12
रामकियेनअँगूठी और कपड़ाफाँसी से बचाने के बादभाग 14
जैन रामकथाअँगूठीअदृश्य होकर गोद में डालीत्रिषष्टि, पर्व 7, सर्ग 6
ककविन रामायणलौटते समय चूड़ामणि और चिट्ठीसीता जी ने हनुमान जी को दीसर्ग 11
तिब्बती रामकथाचिट्ठियाँ, दोनों ओर सेहनुमान जी ले गए और लाएदुनहुआंग की पोथियाँ

वाल्मीकि रामायण में: बाग़ जो चमकता है

वाटिका में ऐसे पेड़ हैं जो चाँदी और सोने के बने लगते हैं, और कुछ उगते सूरज जैसे (सर्ग 14, श्लोक 5 से 8)। हज़ारों अशोक के पेड़ हैं: कुछ सोने जैसे, कुछ आग जैसे, कुछ नीलम और काजल जैसे गहरे (सर्ग 15, श्लोक 10)।

पंछियों के पंखों की हवा से पेड़ों से रंग बिरंगे फूल झड़ते हैं, और फूलों से ढके हनुमान जी फूलों के पहाड़ जैसे दिखते हैं (सर्ग 14, श्लोक 10 और 11)। वहाँ कोयल, मोर, हंस, सारस और चकवे हैं।

बीच में शिंशपा का एक सुनहरा पेड़ है, जिसके चारों ओर सोने के चबूतरे हैं, और हवा चलने पर उस पर सैकड़ों छोटी घंटियाँ बजती हैं (सर्ग 14, श्लोक 36 से 40)। हनुमान जी इसी के पत्तों में छिप जाते हैं (श्लोक 52)।

पास ही एक चैत्य है, हज़ार खंभों पर खड़ा, कैलाश जैसा सफ़ेद, मूँगे की सीढ़ियों और सोने के चबूतरों वाला (सर्ग 15, श्लोक 16 और 17)। वहाँ सीता जी पीले, मैले कपड़े में, उपवास से दुबली, राक्षसियों से घिरी हुई हैं, शुक्ल पक्ष के पहले दिन के पतले चाँद जैसी (सर्ग 15, श्लोक 18 से 21)।

हर कथा में सीता जी तक पहुँची निशानी

रामचरितमानस में हनुमान जी पेड़ पर से अँगूठी नीचे डालते हैं, और सीता जी को वह ऐसी लगती है जैसे अशोक ने अंगारा दे दिया हो (सुंदरकांड, दोहा 12)।

रामकियेन में सीता जी पेड़ की डाल से अपना कपड़ा बाँधकर फाँसी लगाने कूद पड़ती हैं, और हनुमान जी गाँठ खोलकर उन्हें नीचे उतारते हैं। उसके बाद ही वे राम की अँगूठी और कपड़ा दिखाते हैं (राजा राम प्रथम का पाठ, भाग 14)।

हेमचंद्र की जैन रामकथा में हनुमान जी अदृश्य होकर अँगूठी सीता जी की गोद में डालते हैं। राम की ख़बर की ख़ुशी में, और हनुमान जी के कहने पर, सीता जी इक्कीसवें दिन और रात के बाद पहली बार खाना खाती हैं (त्रिषष्टि, पर्व 7, सर्ग 6)।

जावा की ककविन रामायण में सीता जी लौटते हनुमान जी को चूड़ामणि के साथ राम के नाम एक लिखी हुई चिट्ठी भी देती हैं, और राम उसे पढ़ते हैं (सर्ग 11)। तिब्बती रामकथा में तो राम और सीता हनुमान जी के हाथों एक दूसरे को चिट्ठियाँ भेजते हैं, और राम उन्हें इस बात पर टोकते भी हैं कि वे ख़ुद चिट्ठी लिखकर हाल क्यों नहीं पूछते रहे।

सवाल जवाब

पूछे जाने वाले सवाल

अशोक वाटिका में सीता जी किस पेड़ के नीचे थीं?

वाल्मीकि रामायण में हनुमान जी शिंशपा के एक सुनहरे पेड़ में छिपकर उन्हें देखते हैं, जिस पर सैकड़ों घंटियाँ बजती थीं (सुंदरकांड, सर्ग 14)।

अशोक वाटिका कैसी थी?

सोने और चाँदी जैसे पेड़, हज़ारों अशोक, कोयल, मोर और हंस, और हज़ार खंभों वाला कैलाश जैसा सफ़ेद चैत्य (सर्ग 14 और 15)।

हनुमान जी ने सीता जी को अँगूठी कैसे दी?

कथा कथा में अलग: मानस में पेड़ पर से नीचे डाली, जैन कथा में अदृश्य होकर गोद में डाली, और रामकियेन में फाँसी से बचाने के बाद दी।

क्या किसी रामायण में सीता जी ने चिट्ठी लिखी?

हाँ। जावा की ककविन रामायण (सर्ग 11) में सीता जी चूड़ामणि के साथ राम के नाम चिट्ठी भेजती हैं, और तिब्बती रामकथा में दोनों एक दूसरे को चिट्ठियाँ लिखते हैं।

सीता जी ने कितने दिन बाद खाना खाया?

हेमचंद्र की जैन रामकथा में राम की ख़बर मिलने पर, इक्कीसवें दिन और रात के बाद।

In English

Valmiki (Sundara Kanda, sargas 14 and 15) fills the Ashoka grove with trees that look made of gold and silver, a golden shimshapa tree ringing with hundreds of little bells, and a white chaitya on a thousand pillars with coral stairs. How the first sign reaches Sita differs by telling: Tulsidas has Hanuman drop the ring from the tree; in the Thai Ramakien he first saves her from hanging herself; in Hemachandra's Jain telling an invisible Hanuman drops the ring into her lap and she eats for the first time after twenty-one days; in the Old Javanese Kakawin she sends Rama a written letter with her crest jewel; and in the Old Tibetan telling Rama and Sita exchange letters through Hanuman.

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