पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · हर महीने का व्रत

संकष्टी चतुर्थी 2027

Sankashti Chaturthi 2027

हर महीने एक अँधेरी चौथ, हर बार गणेश का एक नया नाम, और आख़िर में देर से उगता चाँद।

संकष्टी चतुर्थी 2027 में 12 बार आती है, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को। पहली 25 जनवरी, सोमवार को है, और आख़िरी 16 दिसंबर, गुरुवार को। इनमें से सकट चौथ, बहुला चतुर्थी और करवा चौथ के अपने पन्ने भी हैं। हर तारीख़ की तिथि, चंद्रोदय और उस दिन की अपनी बात नीचे है। समय नई दिल्ली के हैं।

उस शाम का चाँद, 88 प्रतिशत रोशन

दूर्वा के तिनके एक एक करके गिने जा रहे हैं। हर तिनके की नोक पर पानी की एक बूँद।

थाली में मोदक ढके रखे हैं। उनकी ओर कोई देखता भी नहीं।

सुबह से अन्न का एक दाना नहीं गया। बस थोड़ा फल, और बार बार घड़ी पर नज़र।

शाम ढल गई। आसमान ख़ाली है। आज का चाँद देर से आता है।

छत पर एक लोटा रखा है। पानी में दूध की धार, किनारे पर चंदन।

फिर पेड़ों के ऊपर से एक पीली फाँक उठती है।

लोटे की धार चाँद की ओर गिरती है। तभी पहला कौर उठता है।

अगले महीने फिर यही रात होगी। चाँद वही, पर गणेश का नाम दूसरा, और कथा भी दूसरी।

2027 में कब

संकष्टी चतुर्थी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

जनवरी25

फ़रवरी24

मार्च25

अप्रैल24

मई23

जून22

जुलाई22

अगस्त20

सितंबर19

अक्टूबर18

नवंबर17

दिसंबर16

मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar

कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं

आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।

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पहचान

संकष्टी चतुर्थी क्या है

संकष्टी चतुर्थी हर महीने के कृष्ण पक्ष की चौथी तिथि का व्रत है, यानी पूर्णिमा के बाद वाली चौथ। संकष्टी का मतलब है संकट हरने वाली, और इसे संकटहारा चतुर्थी भी कहते हैं। शुक्ल पक्ष की चौथ विनायक चतुर्थी कहलाती है, और उसका अपना पन्ना है। यह व्रत चाँद से तय होता है: व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन चतुर्थी तिथि में चाँद उगे, इसलिए कभी कभी यह कैलेंडर में तृतीया वाले दिन पड़ जाता है। सूरज निकलने से चाँद निकलने तक उपवास होता है, और रात को चाँद को अर्घ्य देकर, यानी जल चढ़ाकर, व्रत खुलता है। जो संकष्टी मंगलवार को पड़े, उसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं, और वह सबसे शुभ मानी जाती है। हर महीने की संकष्टी पर गणेश का एक अलग रूप पूजा जाता है, और हर महीने की अपनी कथा है। इस पन्ने की सूची में महीनों के नाम उत्तर भारत के पूर्णिमांत पंचांग से हैं, जिसमें महीना पूर्णिमा पर बदलता है; महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण के अमांत पंचांग में यही चौथ पिछले महीने के नाम से आती है। रूपों के नाम पंचांगों की सूची से हैं; पर कथा की पोथियों में कई महीनों के साथ गणेश का अलग नाम लिखा मिलता है, इसलिए हर जगह एक जैसी सूची नहीं मिलेगी। जिस साल अधिक मास जुड़ता है, उसमें एक तेरहवीं संकष्टी भी आती है, विभुवन संकष्टी।

पूरी सूची

संकष्टी चतुर्थी 2027: हर तारीख़

हर तारीख़, उस दिन की तिथि कब से कब तक, चंद्रोदय का समय, और उस दिन की अपनी बात।

  1. 25जनवरी

    सकट चौथ (लंबोदर संकष्टी)

    माघ कृष्ण चतुर्थी · तिथि 25 जनवरी, सुबह 8:11 से 26 जनवरी, सुबह 6:01 तक

    माघ की यह संकष्टी लंबोदर गणेश की है, यानी बड़े पेट वाले गणेश की; अमांत पंचांग में यह पौष की संकष्टी है। उत्तर भारत में इसे सकट चौथ और तिलकुटा चौथ कहते हैं, माँएँ इसे बच्चों के लिए रखती हैं, और पंचांगों में इसे साल की सबसे बड़ी संकष्टी कहा गया है। इसकी कथाएँ और विधि इसके अपने पन्ने पर हैं।

    चंद्रोदय: रात 9:12

    + यह दिन कैलेंडर में

  2. 24फ़रवरी

    द्विजप्रिय संकष्टी

    फाल्गुन कृष्ण चतुर्थी · तिथि 23 फ़रवरी, रात 9:49 से 24 फ़रवरी, रात 8:41 तक

    फाल्गुन की संकष्टी द्विजप्रिय गणेश की है। इसकी कथा में बूढ़े ब्राह्मण विष्णु शर्मा अपनी बहुओं से गणेश का व्रत रखने को कहते हैं; बड़ी बहुएँ मना कर देती हैं, पर छोटी बहू व्रत रखती है, रात भर बीमार ससुर की सेवा करती है और चाँद निकलने पर पूजा करके व्रत खोलती है। गणेश की कृपा से ससुर ठीक होते हैं, घर भर जाता है, और बाक़ी बहुएँ भी हर चौथ रखने लगती हैं।

    चंद्रोदय: रात 9:59

    + यह दिन कैलेंडर में

  3. 25मार्च

    भालचंद्र संकष्टी

    चैत्र कृष्ण चतुर्थी · तिथि 25 मार्च, दोपहर 12:38 से 26 मार्च, दोपहर 12:44 तक

    चैत्र की संकष्टी भालचंद्र गणेश की है: भाल यानी माथा, और जिनके माथे पर चाँद है, वे भालचंद्र। कथा में राजा मकरध्वज के मंत्री धर्मपाल की छोटी बहू इस दिन गणेश का व्रत रखती है, और सास उसे पिटवाती है; तब गणेश राजकुमार को उठाकर मंत्री के महल में छिपा देते हैं। राजा मंत्री के कुल को मिटाने की धमकी देता है, सब मिलकर बहू के कहे मुताबिक़ व्रत रखते हैं, और राजकुमार सबके सामने लौट आता है।

    चंद्रोदय: रात 9:45

    + यह दिन कैलेंडर में

  4. 24अप्रैल

    विकट संकष्टी

    वैशाख कृष्ण चतुर्थी · तिथि 24 अप्रैल, सुबह 4:21 से 25 अप्रैल, सुबह 5:42 तक

    वैशाख की संकष्टी विकट गणेश की है; अमांत पंचांग में यह चैत्र की है। इसकी कथा में राजा रंतिदेव के राज में ब्राह्मण धर्मकेतु की दो पत्नियाँ हैं: सुशीला व्रत रखती है, चंचला भरपेट खाती है और उसका मज़ाक़ उड़ाती है। गणेश सुशीला को ज्ञानी बेटा देते हैं और उसकी बेटी के मुँह से मोती झरने लगते हैं; जलन में चंचला उस बेटी को कुएँ में धकेल देती है, पर गणेश उसे बचा लेते हैं, और आख़िर में चंचला भी व्रत रखने लगती है।

    चंद्रोदय: रात 10:27

    + यह दिन कैलेंडर में

  5. 23मई

    एकदंत संकष्टी

    ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्थी · तिथि 23 मई, रात 8:42 से 24 मई, रात 10:59 तक

    ज्येष्ठ की संकष्टी एकदंत गणेश की है, यानी एक दाँत वाले गणेश की। कथा राजा पृथु के राज की है, जहाँ ब्राह्मण दयादेव की बड़ी बहू को घर वाले संकष्टी रखने से रोकते हैं; उसके बेटे के ब्याह के दिन गणेश उसे उठा ले जाते हैं। दुखी माँ फिर से हर महीने व्रत रखने लगती है, एक दिन दुबले पतले ब्राह्मण के रूप में आए गणेश को खाना और कपड़े देती है, और जो खोया था वह लौट आता है, ब्याह पूरा होता है।

    चंद्रोदय: रात 9:59

    + यह दिन कैलेंडर में

  6. 22जून

    अंगारकी संकष्टी (कृष्णपिंगल)

    आषाढ़ कृष्ण चतुर्थी · तिथि 22 जून, दोपहर 1:08 से 23 जून, दोपहर 3:43 तक

    आषाढ़ की यह संकष्टी कृष्णपिंगल गणेश की है, जिन्हें कुछ पंचांग धूम्रवर्ण गणेश भी कहते हैं। मंगलवार की संकष्टी होने से यह अंगारकी है, साल की सबसे शुभ संकष्टी। कथा द्वापर युग की है: माहिष्मती के राजा महीजित के बेटा नहीं था, तो प्रजा वन में लोमश ऋषि के पास गई, जिन्होंने आषाढ़ की इसी चौथ का व्रत बताया। राजा ने व्रत रखा, और रानी सुदक्षिणा के एक सुंदर बेटा हुआ।

    चंद्रोदय: रात 9:53

    + यह दिन कैलेंडर में

  7. 22जुलाई

    गजानन संकष्टी

    श्रावण कृष्ण चतुर्थी · तिथि 22 जुलाई, सुबह 4:47 से 23 जुलाई, सुबह 6:57 तक

    श्रावण की संकष्टी गजानन गणेश की है, यानी हाथी के मुँह वाले, और पंचांगों में इस दिन षोडशोपचार पूजा बताई गई है, यानी सोलह चीज़ों वाली पूरी पूजा। इसकी कथा स्कंद ऋषियों को सुनाते हैं: तप करती पार्वती के आगे जब शिव नहीं आए, तो उन्होंने गणेश को याद किया, और गणेश ने आकर यह व्रत बताया। उसी कथा की विधि में घी के पंद्रह लड्डू हैं, जिनमें से पाँच ब्राह्मण को जाते हैं और पाँच व्रती ख़ुद खाता है, और व्रत का उद्यापन श्रावण की ही चतुर्थी को होता है।

    चंद्रोदय: रात 9:24

    + यह दिन कैलेंडर में

  8. 20अगस्त

    बहुला चतुर्थी (हेरंब संकष्टी)

    भाद्रपद कृष्ण चतुर्थी · तिथि 20 अगस्त, शाम 6:54 से 21 अगस्त, रात 8:05 तक

    भादों की संकष्टी हेरंब गणेश की है, और उत्तर भारत में इसे बहुला चौथ कहते हैं, गाय बहुला और शेर की कथा वाला दिन; अमांत पंचांग वाले गुजरात में यह श्रावण की बोल चोथ है। उसी दिन कैलेंडर में कजरी तीज भी है। बहुला चतुर्थी और कजरी तीज, दोनों के अपने पन्ने हैं।

    चंद्रोदय: रात 8:23

    + यह दिन कैलेंडर में

  9. 19सितंबर

    विघ्नराज संकष्टी

    आश्विन कृष्ण चतुर्थी · तिथि 19 सितंबर, सुबह 7:10 से 20 सितंबर, सुबह 7:09 तक

    आश्विन की संकष्टी विघ्नराज गणेश की है, विघ्नों के राजा, और पंचांगों में इस दिन हल्दी और दूर्वा से हवन की बात है। कथा में बाणासुर की बेटी उषा सपने में अनिरुद्ध को देखती है, और उसकी सखी चित्रलेखा द्वारका से अनिरुद्ध को उठा लाती है। लोमश ऋषि के कहने पर कृष्ण यह व्रत रखते हैं, और फिर बाणासुर से लड़ाई जीतते हैं; शिव बाणासुर को बचाने आते हैं, फिर भी उसकी हज़ार भुजाएँ कट जाती हैं।

    चंद्रोदय: रात 8:04

    + यह दिन कैलेंडर में

  10. 18अक्टूबर

    करवा चौथ (वक्रतुंड संकष्टी)

    कार्तिक कृष्ण चतुर्थी · तिथि 18 अक्टूबर, शाम 5:52 से 19 अक्टूबर, शाम 4:43 तक

    कार्तिक की संकष्टी वक्रतुंड गणेश की है, यानी टेढ़ी सूँड वाले, और यही दिन करवा चौथ है, जिसका अपना पन्ना है; कैलेंडर में उसी दिन असम का काति बिहू भी है। संकष्टी की कथा की पोथी में इस महीने की कहानी अगस्त्य मुनि की है: वृत्रासुर ने देवताओं को स्वर्ग से निकाल दिया, तो विष्णु के कहने पर देवता अगस्त्य के पास गए, जिन्होंने तीन महीने यह व्रत रखा और फिर समुद्र सोख लिया।

    चंद्रोदय: रात 7:30

    + यह दिन कैलेंडर में

  11. 17नवंबर

    गणाधिप संकष्टी

    मार्गशीर्ष कृष्ण चतुर्थी · तिथि 17 नवंबर, रात 3:42 से 18 नवंबर, रात 1:36 तक

    मार्गशीर्ष, यानी अगहन, की संकष्टी गणाधिप गणेश की है, गणों के स्वामी, जिन्हें कुछ पंचांग महोदर भी कहते हैं। इसकी कथा रामकथा से होकर चलती है: सीता की खोज में निकले वानरों को गिद्धराज संपाती बताते हैं कि सीता समुद्र पार राक्षसों की नगरी में अशोक के पेड़ के नीचे हैं, और हनुमान से संकट चौथ का व्रत रखने को कहते हैं। कथा कहती है कि उसी व्रत के बल से हनुमान पल भर में समुद्र लाँघ गए।

    चंद्रोदय: रात 8:22

    + यह दिन कैलेंडर में

  12. 16दिसंबर

    आखुरथ संकष्टी

    पौष कृष्ण चतुर्थी · तिथि 16 दिसंबर, दोपहर 1:22 से 17 दिसंबर, सुबह 10:35 तक

    पौष की संकष्टी आखुरथ गणेश की है; आखु यानी चूहा, और आखुरथ यानी चूहे की सवारी वाले। पंचांगों में इसे दुश्मनों के दिए संकट से छुटकारे से जोड़ा गया है, और इसकी कथा भी वैसी ही है: वाली ने रावण को पकड़कर किष्किंधा में अंगद को खिलौने की तरह दे दिया, और अंगद उसे रस्सी से बाँधकर घुमाने लगे। दुखी रावण ने अपने दादा पुलस्त्य ऋषि को याद किया, उनके कहने पर गणेश का व्रत रखा, और बंधन से छूट गया।

    चंद्रोदय: रात 8:25

    + यह दिन कैलेंडर में

कथा

संकष्टी चतुर्थी की कथा

संकष्टी की हर कथा एक ही ढंग से खुलती है। कैलाश पर पार्वती गणेश से पूछती हैं: इस महीने की कृष्ण चतुर्थी को तुम्हारी पूजा कैसे हो, और इस महीने तुम्हारा नाम क्या है? गणेश महीने का नाम, पूजा की विधि और एक कहानी बताते हैं। फिर बात द्वापर युग में पहुँचती है, जहाँ कृष्ण यही कथा युधिष्ठिर को सुनाते हैं, जब पांडव अपना राज गँवाकर वन में थे। कथाओं के आख़िर में कृष्ण कहते हैं कि इस व्रत से युधिष्ठिर अपना खोया राज फिर पा लेंगे। हर महीने की अपनी कहानी नीचे की सूची में है।

पर जो कथा लगभग हर संकष्टी पर, घर घर सुनाई जाती है, वह गणेश की परिक्रमा की है। एक बार देवताओं पर बड़ा संकट आया, और वे शिव के पास पहुँचे। वहाँ पार्वती थीं, और दोनों बेटे, कार्तिकेय और गणेश। शिव ने बेटों से पूछा, देवताओं का संकट कौन दूर करेगा? दोनों बोले, मैं। तब शिव ने एक शर्त रखी: जो पहले पूरी धरती का चक्कर लगाकर लौटेगा, वही जाएगा।

कार्तिकेय उसी पल अपने मोर पर उड़ चले। गणेश ने अपने छोटे से चूहे को देखा और सोचा, इस पर धरती का चक्कर कब पूरा होगा? फिर वे उठे, और अपने माता पिता, शिव और पार्वती, के सात चक्कर लगाकर आसन पर लौट आए। शिव ने पूछा, धरती का चक्कर क्यों नहीं लगाया? गणेश बोले, सारा संसार माता पिता के चरणों में है। उनका चक्कर लगा लिया, तो धरती का चक्कर लग गया।

शिव बहुत ख़ुश हुए। उन्होंने देवताओं का संकट दूर करने का काम गणेश को दिया, और वर दिया कि जो चतुर्थी के दिन गणेश की पूजा करेगा और यह कथा सुनेगा, उसके संकट दूर होंगे। कथा के बाद बहुत से घरों में संकटनाशन गणेश स्तोत्र पढ़ा जाता है, जो नारद पुराण का माना जाता है। उसमें गणेश के बारह नाम गिनाए गए हैं: "प्रथमं वक्रतुण्डं च एकदन्तं द्वितीयकम्। तृतीयं कृष्णपिङ्गाक्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम्॥" मतलब, पहला नाम वक्रतुंड, यानी टेढ़ी सूँड वाले, दूसरा एकदंत, यानी एक दाँत वाले, तीसरा कृष्णपिंगाक्ष, और चौथा गजवक्त्र, यानी हाथी के मुँह वाले। आगे लंबोदर, विकट, विघ्नराज, धूम्रवर्ण, भालचंद्र, विनायक, गणपति और गजानन आते हैं। यही नाम, थोड़े हेर फेर के साथ, साल की संकष्टियों के नाम भी हैं।

व्रत

संकष्टी चतुर्थी का व्रत कैसे रखें

  1. सुबह नहाकर गणेश के आगे संकल्प लेते हैं, यानी मन में पक्का करते हैं कि आज चाँद निकलने तक व्रत है।
  2. दिन भर अन्न नहीं खाते; व्रत में फल, कंद मूल और सब्ज़ी से बनी चीज़ें ही चलती हैं, जैसे साबूदाने की खिचड़ी, आलू और मूँगफली।
  3. कहते हैं, नारद पुराण में इस व्रत का नियम है: दिन भर उपवास, और शाम को कथा।
  4. रात को चाँद निकलने की राह देखते हैं; तब तक व्रत चलता रहता है।
  5. चाँद को अर्घ्य देकर और गणेश को प्रणाम करके व्रत खोलते हैं।

पारण: व्रत कैसे खोलें

संकष्टी का पारण उसी रात होता है, अगली सुबह नहीं। नियम सीधा है: चाँद निकले, उसके दर्शन हों, उसे अर्घ्य चढ़े, तभी व्रत खुलता है। अर्घ्य में जल, दूध और चंदन होता है, और उसके बाद गणेश के प्रसाद से पहला कौर लेते हैं। अगर बादलों से चाँद न दिखे, तो पंचांग में लिखे चंद्रोदय के समय को चाँद निकला मानकर पूजा और अर्घ्य कर लेते हैं। हर तारीख़ के लिए चाँद निकलने का समय यह पन्ना ऊपर अपने आप दिखाता है।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में संकष्टी चतुर्थी

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

वाल्मीकि रामायण

संस्कृत · Valmiki Ramayana

पौष की संकष्टी की कथा में रावण वाली से हारकर बँध जाता है। यह हार वाल्मीकि रामायण में भी है, उत्तरकांड के चौंतीसवें सर्ग में, पर वहाँ की कहानी अपनी है। रावण वाली को ललकारने किष्किंधा पहुँचता है, तो तारा बताती हैं कि वाली दक्षिण के समुद्र पर संध्या कर रहे हैं। रावण पीछे से पकड़ने जाता है, और वाली उसे ही अपनी बगल में दबा लेते हैं। फिर रावण को बगल में दबाए दबाए वे दक्षिण, पश्चिम, उत्तर और पूरब के समुद्रों पर संध्या करते हैं, और किष्किंधा लौटकर उसे छोड़ते हैं। वहाँ गणेश का व्रत नहीं है: अंत में दोनों आग को साक्षी मानकर गले मिलते हैं और भाई जैसे दोस्त बन जाते हैं।

कहाँ कैसे

संकष्टी चतुर्थी कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • महाराष्ट्र

    संकष्टी सबसे ज़्यादा पश्चिम और दक्षिण भारत में रखी जाती है, और उनमें भी सबसे बढ़कर महाराष्ट्र और तमिलनाडु में। महाराष्ट्र के अमांत पंचांग में महीना अमावस्या पर बदलता है, इसलिए उत्तर की माघ वाली सकट चौथ यहाँ पौष की लंबोदर संकष्टी कहलाती है।

  • तमिलनाडु

    तमिल घरों में इसे गणेश संकटहारा या संकटहारा चतुर्थी कहते हैं, यानी संकट हरने वाली चौथ।

  • उत्तर भारत

    यहाँ तीन चौथ सबसे बड़ी मानी जाती हैं: माघ की सकट चौथ, जो माँएँ बच्चों के लिए रखती हैं, भादों की बहुला चौथ, जिसमें गाय और बछड़े पूजे जाते हैं, और कार्तिक का करवा चौथ। तीनों के अपने पन्ने हैं।

  • गुजरात

    गुजरात भी अमांत पंचांग पर चलता है, इसलिए उत्तर की भादों वाली बहुला चौथ यहाँ श्रावण की बोल चोथ है, जिसमें गाय और बछड़े की पूजा होती है और गाय का दूध नहीं लिया जाता।

रीत

संकष्टी चतुर्थी के दिन क्या करते हैं

  1. शाम को पूजा की जगह साफ़ करके गणेश की मूर्ति या तस्वीर रखते हैं, और कई जगह उनके साथ दुर्गा की तस्वीर भी।
  2. गणेश को दूर्वा, यानी दूब घास, गुड़हल का लाल फूल, मोदक और लड्डू चढ़ाते हैं; बहुत से घरों में तिल या गुड़ के मोदक बनते हैं।
  3. दीया और धूप जलाकर केला और नारियल भोग में रखते हैं।
  4. पूजा के बाद उस महीने की व्रत कथा सुनते हैं, और फिर आरती होती है।
  5. चाँद निकलने से पहले बहुत से लोग गणपति अथर्वशीर्ष या संकटनाशन गणेश स्तोत्र पढ़ते हैं।
  6. चाँद निकलने पर उसे जल, दूध और चंदन से अर्घ्य देते हैं, फूल और अक्षत, यानी साबुत चावल, के साथ।
  7. प्रसाद बाँटते हैं और ग़रीबों को दान देते हैं।

सवाल जवाब

संकष्टी चतुर्थी 2027: पूछे जाने वाले सवाल

संकष्टी चतुर्थी 2027 में कब कब है?

संकष्टी चतुर्थी 2027 में 12 बार आती है, हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को। पहली 25 जनवरी, सोमवार को है, और आख़िरी 16 दिसंबर, गुरुवार को। इनमें से सकट चौथ, बहुला चतुर्थी और करवा चौथ के अपने पन्ने भी हैं। हर तारीख़ की तिथि, चंद्रोदय और उस दिन की अपनी बात नीचे है। समय नई दिल्ली के हैं।

संकष्टी चतुर्थी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

अन्न नहीं खाते। व्रत में फल, कंद मूल और सब्ज़ी से बनी चीज़ें चलती हैं, जैसे साबूदाने की खिचड़ी, आलू और मूँगफली। व्रत चाँद को अर्घ्य देने के बाद खुलता है।

संकष्टी और विनायक चतुर्थी में क्या फ़र्क़ है?

संकष्टी कृष्ण पक्ष की चौथ है, पूर्णिमा के बाद वाली, और यह चाँद को अर्घ्य देकर खुलती है। विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष की चौथ है, अमावस्या के बाद वाली, जिसकी पूजा दोपहर में होती है।

अंगारकी चतुर्थी क्या है?

जो संकष्टी मंगलवार को पड़े, वह अंगारकी कहलाती है। अंगारक मंगल ग्रह का नाम है, जिसके नाम पर मंगलवार है, और यह चौथ साल की सबसे शुभ संकष्टी मानी जाती है।

चाँद बादलों में छिप जाए तो व्रत कैसे खोलें?

पंचांग में लिखे चंद्रोदय के समय को ही चाँद निकला मान लेते हैं, और उसी समय पूजा और अर्घ्य करके व्रत खोलते हैं।

संकष्टी कैलेंडर में तृतीया वाले दिन क्यों दिखती है?

क्योंकि यह व्रत चाँद से तय होता है। जिस दिन चतुर्थी तिथि में चाँद उगे, व्रत उसी दिन रखा जाता है, और कई बार चतुर्थी उस शाम शुरू हो जाती है जो कैलेंडर में तृतीया की तारीख़ है।

संकष्टी व्रत का उद्यापन कब और कैसे करें?

श्रावण की संकष्टी की कथा में कहा गया है कि यह व्रत जीवन भर, इक्कीस बरस, एक बरस या एक महीने के लिए लिया जा सकता है, और इसका उद्यापन श्रावण की चतुर्थी को होता है। उसी कथा में घी के लड्डू चढ़ाने और मूर्ति को विसर्जित करके गुरु को देने की बात है।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Drik Panchang: Sankashti Chaturthi Vrat Katha Listहर महीने का गणेश रूप, पूर्णिमांत और अमांत महीनों के साथ, और हर रूप का फल
  2. Drik Panchang: Vikata Sankashti Vrat Kathaवैशाख की कथा, पार्वती गणेश और कृष्ण युधिष्ठिर वाला ढाँचा
  3. Drik Panchang: Sankashti Chaturthi dates (explanatory text)चंद्रोदय से दिन तय होना, तृतीया वाली बात, व्रत में क्या खाते हैं, अंगारकी, महाराष्ट्र और तमिलनाडु
  4. BhaktiBharat: संकष्टी चतुर्थीपूजा की विधि, बादल में चंद्रोदय के समय पूजा, नारद पुराण वाली बात, महीनों के नाम
  5. BhaktiBharat: चैत्र संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत कथा (और इसी शृंखला के बाक़ी महीनों की कथाएँ)हर महीने की अलग कथा: मकरध्वज, धर्मकेतु, दयादेव, महीजित, पार्वती का तप, उषा अनिरुद्ध, अगस्त्य, संपाती, रावण और वाली, विष्णु शर्मा
  6. Navbharat Live: भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी व्रत कथागणेश की माता पिता की परिक्रमा वाली कथा
  7. Green Message: Sankata Nashak Ganesh Stotra (Narada Purana)संकटनाशन गणेश स्तोत्र के श्लोक और गणेश के बारह नाम
  8. Valmiki Ramayana, Uttarakanda, Sarga 34 (sanskritdocuments.org)वाली का रावण को बगल में दबाकर चारों समुद्रों पर संध्या करना और दोस्ती

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।