उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · आश्विन कृष्ण प्रतिपदा
पितृ पक्ष 2027
Pitru Paksha 2027
सोलह दिन, जब घर की थाली पहले उनके लिए परोसी जाती है जो अब नहीं हैं।
पितृ पक्ष 2027 में 16 सितंबर, गुरुवार को है। आश्विन कृष्ण प्रतिपदा तिथि 16 सितंबर, सुबह 4:34 से 17 सितंबर, सुबह 5:52 तक है। श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11:51 से दोपहर 12:41 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
मुँडेर पर एक कौआ आकर टिकता है।
नीचे पत्तल पर थोड़ा भात, थोड़ी दाल, एक पूरी रखी है।
घर के लोग चुप हैं। कोई खाना नहीं छू रहा।
कौआ सिर घुमाता है। एक कौर उठाता है।
तब जाकर माँ थाली परोसती हैं।
कहते हैं कौआ उन तक बात पहुँचाता है, जो आगे चले गए।
बहुत पहले मंदाकिनी के किनारे एक बेटे ने भी अपने पिता के लिए ऐसे ही जंगल का खाना रखा था।
2027 में कब
पितृ पक्ष 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़16 सितंबर, गुरुवार
तिथिआश्विन कृष्ण प्रतिपदा16 सितंबर, सुबह 4:34 से 17 सितंबर, सुबह 5:52 तक
नक्षत्रपूर्वा भाद्रपदसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 6:06
सूर्यास्तशाम 6:26
चंद्रोदयशाम 6:27
- कुतुप मुहूर्त
- सुबह 11:51 से दोपहर 12:41 तकदिन का आठवाँ मुहूर्त, श्राद्ध के लिए सबसे अच्छा माना जाता है।
- रौहिण मुहूर्त
- दोपहर 12:41 से दोपहर 1:30 तकदिन का नौवाँ मुहूर्त।
- अपराह्न
- दोपहर 1:30 से दोपहर 3:58 तकदिन के पाँच हिस्सों में चौथा।
- पितृ पक्ष
- 16 से 29 सितंबरपूरा काल।
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।
पहचान
पितृ पक्ष क्या है
पितृ पक्ष सोलह तिथियों का वह समय है जब पुरखों को याद करके श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। दक्षिण और पश्चिम भारत की अमांत गिनती में यह भादों के कृष्ण पक्ष में आता है, गणेश उत्सव के ठीक बाद। उत्तर भारत और नेपाल की पूर्णिमांत गिनती में वही पखवाड़ा आश्विन का कृष्ण पक्ष कहलाता है। कुछ लोग इसकी शुरुआत भादों की पूर्णिमा से गिनते हैं, कुछ अगले दिन प्रतिपदा से। यह अमावस्या पर ख़त्म होता है, जिसे सर्वपितृ अमावस्या या महालया अमावस्या कहते हैं। हर पुरखे का श्राद्ध उसी तिथि पर होता है जिस तिथि को उनका देहांत हुआ था।
कथा
पितृ पक्ष की कथा
लोक में एक कथा कर्ण से जोड़ी जाती है। महाभारत की लड़ाई के बाद कर्ण स्वर्ग पहुँचे। वहाँ उन्हें बहुत भूख लगी, पर जो खाना उनके आगे आता, वह सोना, चाँदी और रत्न होता। कर्ण ने पूछा, ऐसा क्यों? इंद्र ने कहा: तुमने जीवन भर सोना दान किया, पर अपने पुरखों के नाम कभी अन्न और जल नहीं दिया। कर्ण बोले, मुझे तो बहुत देर से पता चला कि मेरे पुरखे कौन हैं। तब उन्हें पंद्रह दिन के लिए धरती पर लौटने दिया गया, ताकि वे श्राद्ध करें और भूखों को खिलाएँ। कहते हैं वही दिन पितृ पक्ष बने। कुछ कहने वाले इंद्र की जगह यम का नाम लेते हैं।
वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकांड में यह बात कथा नहीं, एक दृश्य है। चित्रकूट में राम को पिता दशरथ के जाने की ख़बर मिलती है। राम भाइयों के साथ मंदाकिनी नदी पर जाते हैं और पिता को जल देते हैं: "एतत्ते राजशार्दूल विमलं तोयमक्षयम्। पितृलोकगतस्याद्य मद्दत्तमुपतिष्ठतु॥" (2.103.27) यानी हे राजाओं में श्रेष्ठ, मेरा दिया यह साफ़ जल पितृलोक में आपके पास पहुँचे। फिर वे दर्भ पर इंगुदी के गूदे और बेर का पिंड रखकर रोते हुए कहते हैं: "इदं भुङ्क्ष्व महाराज प्रीतो यदशना वयम्। यदन्नः पुरुषो भवति तदन्नास्तस्य देवताः॥" (2.103.30) यानी महाराज, प्रेम से यह खाइए, यही हम खाते हैं। आदमी जो खाता है, वही उसके देवता खाते हैं।
और गया में एक कथा सुनाई जाती है, जो वहाँ की अपनी परंपरा है। राम, उनके भाई और सीता दशरथ का पिंडदान करने गया आए। भाई नदी में नहा रहे थे, सीता किनारे रेत से खेल रही थीं। तभी रेत से दशरथ निकले, बोले मुझे भूख लगी है, पिंड दो। सीता ने कहा बेटों के आने तक रुकिए, पर वे नहीं रुके। तब सीता ने रेत का ही पिंड बनाकर दे दिया, और पाँच गवाह रखे: अक्षयवट, फल्गु नदी, एक गाय, तुलसी का पौधा और एक ब्राह्मण। राम लौटे तो दशरथ प्रकट नहीं हुए। सीता ने बताया, पर राम को भरोसा नहीं हुआ कि पिता रेत का पिंड लेंगे। सीता ने गवाहों से सच बोलने को कहा। अकेले अक्षयवट ने सच कहा, बाक़ी चार मुकर गए। कहते हैं तभी सीता ने फल्गु को शाप दिया कि गया में उसमें पानी ऊपर न दिखे, और अक्षयवट को आशीर्वाद दिया कि वहाँ भी पिंडदान होगा।
उनतालीस लंकाएँ
रामकथाओं में पितृ पक्ष
उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।
वाल्मीकि रामायण
संस्कृत · Valmiki Ramayana
मंदाकिनी वाला दृश्य वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकांड, सर्ग एक सौ तीन का है। पर वाल्मीकि में राम यह काम एक बार और करते हैं, और इस बार अपने ख़ून के रिश्ते के लिए नहीं। अरण्यकांड के अड़सठवें सर्ग में वे राक्षस के हाथों मारे गए गिद्धराज जटायु का अपने हाथों दाह करते हैं, जैसे कोई अपने सगे का करता है। वे घास पर पिंड रखते हैं, फिर गोदावरी जाकर दोनों भाई जटायु को जल देते हैं, और राम कहते हैं: मेरे हाथों संस्कार पाकर उत्तम लोकों को जाओ।
कहाँ कैसे
पितृ पक्ष कहाँ कैसे मनाया जाता है
गया, बिहार
पितृ पक्ष में गया में पितृपक्ष मेला लगता है। फल्गु नदी के किनारे श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान होता है, फिर विष्णुपद मंदिर में ख़ास प्रार्थना। हर साल यहाँ लाखों तीर्थयात्री आते हैं।
नदी और तालाब के किनारे
श्राद्ध दोपहर में होता है, ज़्यादातर किसी नदी या तालाब के किनारे, या घर पर। घर का बड़ा बेटा या पिता की ओर का कोई पुरुष संबंधी तीन पीढ़ियों तक के पुरखों के लिए करता है।
घर की छत और आँगन
पुरखों के लिए निकाला खाना कौए के लिए रखा जाता है। कौआ खा ले तो मानते हैं पितर तृप्त हुए। गाय और कुत्ते को भी खिलाया जाता है।
बंगाल
यहाँ इस पखवाड़े का आख़िरी दिन, महालया, घाटों पर तर्पण का दिन है, और उसी के साथ दुर्गा पूजा की आहट शुरू होती है।
रीत
पितृ पक्ष के दिन क्या करते हैं
- हर पुरखे का श्राद्ध उसी तिथि पर होता है जिस तिथि को उनका देहांत हुआ; तिथि याद न हो तो सर्वपितृ अमावस्या को।
- तर्पण में काले तिल, कुश और फूल मिला जल हाथ से छोड़ा जाता है, दक्षिण की ओर मुँह करके, क्योंकि उसे पितृलोक की दिशा माना जाता है।
- पिंडदान में चावल और जौ के आटे के गोले, घी और काले तिल मिलाकर, जल के साथ अर्पित होते हैं।
- नवमी को उन सुहागिन औरतों का श्राद्ध होता है जो पति से पहले चल बसीं, और द्वादशी को बच्चों और संन्यासियों का।
- चतुर्दशी उनके लिए है जिनकी मौत हथियार से, लड़ाई में या किसी हादसे में हुई।
- पहले कौए, गाय, कुत्ते और ब्राह्मण को खिलाया जाता है, उसके बाद परिवार खाता है।
- इन दिनों मांस, प्याज़, लहसुन और कुछ दालें नहीं खाई जातीं।
रसोई
पितृ पक्ष का खाना
- पिंड चावल और जौ के आटे का गोला, घी और काले तिल मिलाकर।
- सादा सात्विक भोजन बिना प्याज़ लहसुन का, जो पहले कौए और ब्राह्मण को, फिर घर को परोसा जाता है।
सवाल जवाब
पितृ पक्ष 2027: पूछे जाने वाले सवाल
पितृ पक्ष 2027 कब है?
पितृ पक्ष 2027 में 16 सितंबर, गुरुवार को है। आश्विन कृष्ण प्रतिपदा तिथि 16 सितंबर, सुबह 4:34 से 17 सितंबर, सुबह 5:52 तक है। श्राद्ध के लिए कुतुप मुहूर्त सुबह 11:51 से दोपहर 12:41 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
पितृ पक्ष में श्राद्ध किस दिन करें?
पुरखे का श्राद्ध उसी तिथि पर करते हैं जिस तिथि को उनका देहांत हुआ था। तिथि याद न हो, या छूट जाए, तो सर्वपितृ अमावस्या को सबका श्राद्ध किया जा सकता है।
तर्पण कैसे करते हैं?
दक्षिण की ओर मुँह करके काले तिल, कुश और फूल मिला जल पुरखों के नाम से हाथ से छोड़ा जाता है।
पितृ पक्ष में कौए को खाना क्यों देते हैं?
कौए को यम का दूत या पुरखों का रूप माना जाता है। अगर कौआ खाना खा ले तो माना जाता है कि पितर तृप्त हुए।
गया में पिंडदान क्यों ख़ास है?
गया को पिंडदान के लिए सबसे पवित्र जगहों में गिना जाता है। पितृ पक्ष में फल्गु के किनारे मेला लगता है और विष्णुपद मंदिर में प्रार्थना होती है।
क्या रामायण में राम ने श्राद्ध किया था?
हाँ। वाल्मीकि रामायण के अयोध्याकांड में राम मंदाकिनी पर दशरथ को जल और इंगुदी का पिंड देते हैं, और अरण्यकांड में जटायु का दाह करके गोदावरी पर उन्हें जल देते हैं।
पितृ पक्ष में क्या नहीं खाना चाहिए?
इन दिनों मांस, प्याज़, लहसुन और कुछ दालें नहीं खाई जातीं।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Valmiki Ramayana, Ayodhya Kanda 103 (Sanskrit)राम का दशरथ को जल और इंगुदी का पिंड, श्लोक
- Valmiki Ramayana, Ayodhya Kanda 103 (prose)मंदाकिनी नदी, भाइयों के साथ
- Valmiki Ramayana, Aranya Kanda 68जटायु का दाह, पिंड और गोदावरी पर जल
- Pitru Paksha, Wikipediaअमांत और पूर्णिमांत, सर्वपितृ अमावस्या, ख़ास तिथियाँ, कौआ, कर्ण की कथा
- Pitrapaksha, Bihar Tourismगया का मेला, फल्गु, विष्णुपद, खाने के नियम
- Phalgu River, Wikipediaसीता के रेत के पिंड और फल्गु के शाप की गया की कथा
- Pitru Paksha and the legend of Karna, Shubh Panchangकर्ण को सोना चाँदी, पंद्रह दिन, तिल कुश वाला तर्पण, दक्षिण दिशा
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।