पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · वैशाख शुक्ल नवमी

सीता नवमी 2027

Sita Navami 2027

जिसे किसी ने जन्म नहीं दिया। धरती ने लौटाया।

सीता नवमी 2027 में 14 मई, शुक्रवार को है। वैशाख शुक्ल नवमी तिथि 13 मई, रात 9:18 से 14 मई, रात 7:40 तक है। मध्याह्न की पूजा का समय सुबह 10:56 से दोपहर 1:39 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

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उस शाम का चाँद, 65 प्रतिशत रोशन

हल का फाल मिट्टी में धँसता है। पीछे एक लंबी लकीर खिंचती जाती है।

बैल रुकते नहीं। पर हल रुक जाता है।

किसान झुककर देखता है। मिट्टी के नीचे कुछ अटका है।

वह हाथ से मिट्टी हटाता है, धीरे, जैसे किसी को जगा रहा हो।

हथेली पर गीली मिट्टी है। और मिट्टी के बीच एक छोटी उँगली हिलती है।

उस दिन मिट्टी से एक बच्ची निकली थी। और तब से हर कथा उसे थोड़ा अलग जगह से निकालती है।

2027 में कब

सीता नवमी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

तारीख़14 मई, शुक्रवार

तिथिवैशाख शुक्ल नवमी13 मई, रात 9:18 से 14 मई, रात 7:40 तक

नक्षत्रमघासूर्योदय के समय

सूर्योदयसुबह 5:31

सूर्यास्तशाम 7:04

चंद्रोदयदोपहर 1:15

मध्याह्न
सुबह 10:56 से दोपहर 1:39 तकदिन के पाँच हिस्सों में तीसरा, दोपहर का समय।

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शुभकामना

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सीता नवमी का शुभकामना कार्ड: सीता नवमी की शुभकामनाएँ, मनु विश्रांति

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पहचान

सीता नवमी क्या है

सीता नवमी सीता के प्रकट होने का दिन है, और इसे जानकी नवमी या जानकी जयंती भी कहते हैं, क्योंकि सीता राजा जनक की बेटी कहलाईं। यह वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी को आती है, यानी राम नवमी के लगभग एक महीने बाद। इस दिन सुहागिन स्त्रियाँ पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और सीता की पूजा करती हैं। बिहार के सीतामढ़ी ज़िले का पुनौरा धाम वह जगह मानी जाती है जहाँ सीता प्रकट हुईं, और मिथिला की जनकपुरी को आज नेपाल का जनकपुर माना जाता है, जनक की नगरी।

कथा

सीता नवमी की कथा

वाल्मीकि रामायण के बालकांड के छियासठवें सर्ग में यह कथा ख़ुद जनक सुनाते हैं, विश्वामित्र को, जब वे राम और लक्ष्मण को लेकर मिथिला आते हैं। जनक कहते हैं: “अथ मे कृषतः क्षेत्रं लाङ्गलादुत्थिता मया। क्षेत्रं शोधयता लब्धा नाम्ना सीतेति विश्रुता॥” (बालकांड 66.13) यानी एक दिन मैं खेत जोतकर ज़मीन शुद्ध कर रहा था, तब हल की नोक से एक कन्या उठी। वह मुझे मिली, और सीता नाम से जानी गई।

जनक आगे कहते हैं कि धरती से निकली वह बच्ची मेरी बेटी बनकर बड़ी हुई। वह अयोनिजा है, यानी किसी की कोख से नहीं जन्मी, और मैंने तय किया कि इसका ब्याह उसी से होगा जो वीरता दिखाए; इसे वाल्मीकि वीर्यशुल्का कहते हैं, यानी जिसकी क़ीमत बस वीरता है। जब वह बड़ी हुई तो दूर दूर से राजा उसका हाथ माँगने आए। यहीं से धनुष वाली कथा शुरू होती है, जो आगे विवाह पंचमी तक जाती है।

लोक और पंचांगों में यही कथा थोड़ी अलग शक्ल में भी सुनाई जाती है। एक रूप में जनक का हल ज़मीन में अटक जाता है, और खोदने पर मिट्टी के एक घड़े में बच्ची मिलती है। दूसरे रूप में वह सोने की एक पेटी में मिलती है। हल की नोक को सीता कहते हैं, और इसी से नाम पड़ा, यह बात दोनों में एक है। कुछ जगह मान्यता है कि सीता मंगलवार को पुष्य नक्षत्र में प्रकट हुईं, पर नक्षत्र के बारे में स्रोत एक राय नहीं रखते।

और कुछ रामकथाएँ सीता को खेत से नहीं, लंका से जोड़ती हैं। अद्भुत रामायण में सीता मंदोदरी से जन्मी बताई गई हैं। कश्मीरी रामावतारचरित में वे रावण और मंदोदरी की बेटी हैं, जिन्हें जन्म के बाद छोड़ दिया गया। यानी जिस लंका से राम को सीता को छुड़ाना है, कुछ कथाओं में वही सीता का पहला घर है।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में सीता नवमी

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

वाल्मीकि रामायण

संस्कृत · Valmiki Ramayana

वाल्मीकि रामायण के बालकांड, सर्ग छियासठ में जनक विश्वामित्र को बताते हैं कि खेत जोतते समय हल की नोक से एक कन्या उठी, जो सीता नाम से जानी गई। वे उसे अयोनिजा कहते हैं, किसी कोख से न जन्मी, और वीर्यशुल्का, यानी जिसका ब्याह बस वीरता की शर्त पर होगा। सीता नवमी का सबसे पुराना आधार यही श्लोक हैं।

अद्भुत रामायण

संस्कृत · Adbhuta Ramayana

अद्भुत रामायण शाक्त परंपरा की सत्ताईस सर्गों की कथा है, जिसमें सीता केंद्र में हैं। यहाँ सीता मंदोदरी से जन्मी बताई गई हैं। और कथा का अंत भी उन्हीं के हाथ है: लंका के बाद पुष्कर द्वीप पर हज़ार सिर वाला एक और रावण खड़ा होता है, राम बेहोश हो जाते हैं, और सीता महाकाली बनकर उसे गिराती हैं। सीता नवमी पर यह कथा याद दिलाती है कि जन्म की तरह सीता की शक्ति भी हर कथा में अलग नापी गई है।

रामावतारचरित

कश्मीरी · Ramavatara Charita (Kashmiri Ramayana)

कश्मीरी की रामकथा रामावतारचरित सीता के जन्म को खेत से बहुत दूर ले जाती है। प्रकाश राम की इस कथा में सीता रावण और मंदोदरी की बेटी हैं, जिन्हें जन्म के बाद छोड़ दिया गया। यानी जिस घर से राम को सीता को छुड़ाना है, इस कथा में वही उनका पहला घर है। सीता नवमी पर यह कथा याद दिलाती है कि एक ही जन्म को अलग अलग धरती ने अपनी तरह कहा।

कहाँ कैसे

सीता नवमी कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • पुनौरा धाम, सीतामढ़ी (बिहार)

    यहाँ की परंपरा कहती है कि सीता इसी जगह प्रकट हुईं, इसलिए जानकी नवमी पर यह सबसे बड़ी जगह है।

  • सीतामढ़ी नगर

    जानकी नवमी पर एक दिन की अंतर्गृही परिक्रमा होती है, जो जानकी स्थान के उर्विजा कुंड से शुरू होकर वहीं ख़त्म होती है। उर्विजा कुंड को सीता का जन्मस्थान माना जाता है।

  • जनकपुर धाम (नेपाल)

    राजा जनक की नगरी मानी जाने वाली इस जगह का जानकी मंदिर उस जगह खड़ा है जहाँ, लोक में कहते हैं, सीता रहीं; मंदिर के बड़े उत्सवों में राम नवमी और विवाह पंचमी हैं।

  • घर और मंदिर

    जहाँ भी यह दिन माना जाता है, सुहागिन स्त्रियाँ व्रत रखती हैं, सीता की पूजा होती है और रामायण का पाठ होता है।

रीत

सीता नवमी के दिन क्या करते हैं

  1. सुहागिन स्त्रियाँ पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं।
  2. सीता और राम की पूजा होती है, और रामायण का पाठ, कई घरों में उसके दूसरे रूपों के साथ।
  3. सीतामढ़ी में उर्विजा कुंड से अंतर्गृही परिक्रमा निकलती है।
  4. पाठ के लिए वाल्मीकि रामायण के बालकांड का सर्ग छियासठ सबसे सीधा है, जहाँ जनक ख़ुद सीता के मिलने की कहानी कहते हैं।

सवाल जवाब

सीता नवमी 2027: पूछे जाने वाले सवाल

सीता नवमी 2027 कब है?

सीता नवमी 2027 में 14 मई, शुक्रवार को है। वैशाख शुक्ल नवमी तिथि 13 मई, रात 9:18 से 14 मई, रात 7:40 तक है। मध्याह्न की पूजा का समय सुबह 10:56 से दोपहर 1:39 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।

सीता नवमी और जानकी जयंती क्या एक ही हैं?

हाँ। सीता जनक की बेटी कहलाईं, इसलिए इस दिन को जानकी नवमी या जानकी जयंती भी कहते हैं। यह वैशाख शुक्ल नवमी को होती है।

सीता का नाम सीता क्यों पड़ा?

हल की नोक को सीता कहते हैं। वाल्मीकि रामायण के बालकांड 66.13 में जनक बताते हैं कि खेत जोतते समय हल की नोक से कन्या उठी, और वह सीता नाम से जानी गई।

सीता का जन्म कहाँ हुआ था?

परंपरा बिहार के सीतामढ़ी ज़िले के पुनौरा धाम को वह जगह मानती है, और सीतामढ़ी के उर्विजा कुंड को भी जन्मस्थान माना जाता है। कथा मिथिला की है, और जनक की नगरी जनकपुरी को आज नेपाल का जनकपुर माना जाता है।

सीता नवमी का व्रत कौन रखता है?

सुहागिन स्त्रियाँ इस दिन पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखती हैं और सीता की पूजा करती हैं।

क्या किसी रामायण में सीता रावण की बेटी हैं?

हाँ। कश्मीरी रामावतारचरित में सीता रावण और मंदोदरी की बेटी हैं, और अद्भुत रामायण उन्हें मंदोदरी से जन्मी बताती है। वाल्मीकि में वे हल की नोक से धरती से मिलती हैं।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Valmiki Ramayana, Bala Kanda 66, valmikiramayan.netहल से सीता का मिलना, अयोनिजा, वीर्यशुल्का, राजाओं का आना
  2. Valmiki Ramayana 1.66.13, Vedapathश्लोक 66.13 देवनागरी में और हिंदी अर्थ
  3. Sita Navami, Wikipediaवैशाख शुक्ल नवमी, मिट्टी का घड़ा, पुनौरा धाम, अंतर्गृही परिक्रमा, उर्विजा कुंड, व्रत
  4. Sita Navami, Drik Panchangतिथि, मंगलवार और पुष्य की मान्यता, सोने की पेटी, सुहागिनों का व्रत
  5. Janaki Mandir, Wikipediaजनकपुर का जानकी मंदिर, राम नवमी और विवाह पंचमी

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।