उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · चैत्र पूर्णिमा
हनुमान जयंती 2027
Hanuman Jayanti 2027
एक भगवान, और पंचांग में चार जन्मदिन। किसी ने ग़लत नहीं गिना।
हनुमान जयंती 2027 में चार बार आती है: उत्तर भारत में 20 अप्रैल, मंगलवार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 31 मई, सोमवार, कर्नाटक में 11 दिसंबर, शनिवार (हनुमद व्रत), और तमिलनाडु में 27 दिसंबर, सोमवार (हनुमत जयंती)। उत्तर भारत की चैत्र पूर्णिमा 20 अप्रैल, सुबह 4:52 से 21 अप्रैल, रात 3:57 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
दीवार पर पुराना पंचांग टँगा है। उस पर किसी ने लाल पेन से गोले बनाए हैं।
एक गोला चैत्र की पूनम पर। एक वैशाख में। एक मार्गशीर्ष में। एक मार्गऴि की अमावस पर।
हर गोले के पास वही नाम लिखा है।
बच्चा पूछता है, हनुमान जी कितनी बार पैदा हुए?
माँ हँसती हैं। एक बार। पर सुनाने वाले बहुत हैं, और हर एक ने अपने आँगन से दिन गिना।
जैसे एक ही छलाँग को कोई समुद्र के इस पार से देखे, कोई उस पार से।
2027 में कब
हनुमान जयंती 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
उत्तर भारत
तारीख़20 अप्रैल, मंगलवार
तिथिचैत्र पूर्णिमा20 अप्रैल, सुबह 4:52 से 21 अप्रैल, रात 3:57 तक
नक्षत्रचित्रासूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:51
सूर्यास्तशाम 6:50
चंद्रोदयशाम 6:27
आंध्र प्रदेश, तेलंगाना
तारीख़31 मई, सोमवार
तिथिज्येष्ठ कृष्ण दशमी30 मई, सुबह 9:35 से 31 मई, सुबह 10:03 तक
नक्षत्रउत्तरा भाद्रपदसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:24
सूर्यास्तशाम 7:14
चंद्रोदयरात 1:49
कर्नाटक
तारीख़11 दिसंबर, शनिवार
तिथिमार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी11 दिसंबर, रात 2:54 से 12 दिसंबर, रात 1:43 तक
नक्षत्रभरणीसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 7:03
सूर्यास्तशाम 5:25
चंद्रोदयदोपहर 3:13
तमिलनाडु
तारीख़27 दिसंबर, सोमवार
तिथिपौष अमावस्या27 दिसंबर, रात 12:23 से 28 दिसंबर, रात 1:42 तक
नक्षत्रमूलसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 7:12
सूर्यास्तशाम 5:32
चंद्रोदयसुबह 6:46
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शुभकामना
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पहचान
हनुमान जयंती क्या है
हनुमान जयंती हनुमान जी के जन्म का दिन है, और भारत में यह एक नहीं, कई दिनों पर आता है। उत्तर भारत में यह चैत्र महीने की पूर्णिमा को सबसे ज़्यादा मनाई जाती है। आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में यह इकतालीस दिन का उत्सव है, जो चैत्र पूर्णिमा से शुरू होकर वैशाख के कृष्ण पक्ष की दशमी को पूरा होता है, और वही दिन वहाँ की हनुमान जयंती है। कर्नाटक में मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी को हनुमद व्रत होता है। तमिलनाडु में इसे हनुमत जयंती कहते हैं, और यह मार्गऴि यानी मार्गशीर्ष की अमावस्या को आती है, जब मूल नक्षत्र हो। उत्तर भारत की कुछ परंपराएँ, जैसे अयोध्या का हनुमानगढ़ी मंदिर, इसे कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को, दीवाली से एक दिन पहले, मनाती हैं।
कथा
हनुमान जयंती की कथा
हनुमान के जन्म की कथा सबसे पुराने रूप में वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड, सर्ग छियासठ में है, और उसे सुनाने वाले जांबवान हैं। जांबवान कहते हैं: पुंजिकस्थला नाम की एक अप्सरा थी, जो एक शाप के कारण धरती पर वानरी बनकर जन्मी। उसका नाम अंजना था, वह अपना रूप जैसा चाहे बदल सकती थी, और वानर केसरी की पत्नी थी। एक दिन पवन देव ने अंजना से कहा: तुम्हारा एक बेटा होगा, बलवान और बुद्धिमान। और अंजना ने एक गुफा में बेटे को जन्म दिया।
बालक बड़ा होने लगा। एक सुबह उसने जंगल में उगता हुआ सूरज देखा, उसे पका फल समझा और उसकी ओर छलाँग लगा दी, तीन सौ योजन ऊपर, सूरज की तपन की परवाह किए बिना। इंद्र को ग़ुस्सा आया और उन्होंने वज्र चलाया। वज्र लगा, और बालक का बायाँ हनु, यानी ठोड़ी की हड्डी, टूट गया। उसी दिन से नाम पड़ा हनुमान। फिर देवताओं ने वर दिए: ब्रह्मा ने कहा कि कोई हथियार उन्हें मार नहीं सकेगा, और इंद्र ने कहा कि मौत उनकी अपनी इच्छा से ही आएगी।
तो फिर इतने जन्मदिन क्यों? तमिलनाडु की मान्यता है कि हनुमान मार्गशीर्ष की अमावस्या को जन्मे, जब मूल नक्षत्र चल रहा था; अगर किसी बरस अमावस और मूल एक दिन न पड़ें, तो अमावस का दिन चुना जाता है। उत्तर भारत की मान्यता है कि उनका जन्म चैत्र पूर्णिमा को, सूर्योदय के समय हुआ, इसलिए वहाँ मंदिरों में प्रवचन सुबह होने से पहले शुरू होते हैं। ओड़िशा में पणा संक्रांति को उनका जन्मदिन माना जाता है। कथा एक है, और सबमें वही सूरज, वही छलाँग। बस हर प्रांत ने अपने पंचांग से वह सुबह पहचानी।
उनतालीस लंकाएँ
रामकथाओं में हनुमान जयंती
उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।
वाल्मीकि रामायण
संस्कृत · Valmiki Ramayana
वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड के छियासठवें सर्ग में जांबवान हनुमान को उनकी अपनी कहानी सुनाते हैं: अंजना, जो शाप से वानरी बनीं; पवन देव का वचन; गुफा में जन्म; उगते सूरज को फल समझकर छलाँग; इंद्र का वज्र और टूटा हुआ बायाँ हनु, जिससे नाम हनुमान पड़ा; और ब्रह्मा तथा इंद्र के वर। यही सर्ग वह बात भी कहता है कि हनुमान केसरी के बेटे कहलाते हैं और पवन देव के अपने बेटे हैं, उड़ान और बल में उन्हीं जैसे। हनुमान जयंती की हर कथा की जड़ यही सर्ग है।
हनुमान चालीसा
अवधी · Hanuman Chalisa
उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा की हनुमान जयंती पर मंदिरों में सुबह होने से पहले से प्रार्थना होती है, और लोग हनुमान चालीसा गाते हैं। चालीस चौपाइयों की यह छोटी रचना, जो तुलसीदास से जोड़ी जाती है, बहुत से लोगों के लिए हनुमान की पूरी कथा का पहला दरवाज़ा है, और इस दिन घर घर और मंदिरों में इसका पाठ होता है।
सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में
हनुमान जी की छलाँग। लंका दहन। समुद्र में हनुमान जी को कौन मिले? सुरसा, सिंहिका, मैनाक और दूसरी कथाओं के जीव।
कहाँ कैसे
हनुमान जयंती कहाँ कैसे मनाया जाता है
उत्तर भारत
चैत्र पूर्णिमा की हनुमान जयंती यहाँ सबसे ज़्यादा मानी जाती है। मंदिरों में सूर्योदय से पहले प्रवचन और प्रार्थना शुरू होती है और सूर्योदय के बाद रुकती है, और लोग हनुमान चालीसा गाते हैं।
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना
भक्त चैत्र पूर्णिमा से इकतालीस दिन की दीक्षा लेते हैं, प्रार्थना, उपवास और नियम के साथ, और उसे वैशाख कृष्ण दशमी को, हनुमान जयंती के दिन, पूरा करते हैं।
कर्नाटक
यहाँ मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी को हनुमद व्रत होता है। लोग उपवास रखते हैं, हनुमान की पूजा करते हैं और उनका गुणगान करते हैं।
तमिलनाडु
हनुमत जयंती मार्गऴि महीने की अमावस्या को होती है, जो दिसंबर या जनवरी में पड़ती है; मान्यता है कि हनुमान इसी अमावस को मूल नक्षत्र में जन्मे। लोग मंदिर जाकर पूजा करते हैं।
हनुमानगढ़ी, अयोध्या
यहाँ हनुमान जन्मोत्सव पूर्णिमांत पंचांग के कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को, दीवाली पूजा से एक दिन पहले, मनाया जाता है। गुजरात में इसी दिन को दीवाली की हनुमान पूजा के नाम से जानते हैं।
ओड़िशा
ओड़िया नए साल, पणा संक्रांति, को हनुमान का जन्मदिन माना जाता है। यह तिथि से नहीं, सूरज के मेष राशि में जाने से तय होता है।
रीत
हनुमान जयंती के दिन क्या करते हैं
- मान्यता है कि हनुमान सूर्योदय के समय जन्मे, इसलिए मंदिरों में प्रवचन और भजन भोर से पहले शुरू हो जाते हैं।
- हनुमान चालीसा का पाठ इस दिन सबसे आम है।
- तेलुगु प्रदेशों में इकतालीस दिन की दीक्षा चैत्र पूर्णिमा से शुरू होकर हनुमान जयंती पर पूरी होती है।
- कर्नाटक के हनुमद व्रत में दिन भर उपवास रखा जाता है।
- माध्व परंपरा के मंदिरों में इस दिन हरि वायु स्तुति का पाठ होता है।
- तमिलनाडु में अमावस और मूल नक्षत्र एक दिन न पड़ें, तो अमावस वाला दिन लिया जाता है।
सवाल जवाब
हनुमान जयंती 2027: पूछे जाने वाले सवाल
हनुमान जयंती 2027 कब है?
हनुमान जयंती 2027 में चार बार आती है: उत्तर भारत में 20 अप्रैल, मंगलवार, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में 31 मई, सोमवार, कर्नाटक में 11 दिसंबर, शनिवार (हनुमद व्रत), और तमिलनाडु में 27 दिसंबर, सोमवार (हनुमत जयंती)। उत्तर भारत की चैत्र पूर्णिमा 20 अप्रैल, सुबह 4:52 से 21 अप्रैल, रात 3:57 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
हनुमान जयंती साल में कितनी बार आती है?
अलग अलग प्रांतों में अलग दिन: उत्तर भारत में चैत्र पूर्णिमा, तेलुगु प्रदेशों में वैशाख कृष्ण दशमी, कर्नाटक में मार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी, और तमिलनाडु में मार्गशीर्ष अमावस्या। अयोध्या के हनुमानगढ़ी में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी और ओड़िशा में पणा संक्रांति भी।
तेलुगु हनुमान जयंती कब होती है?
आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में वैशाख कृष्ण दशमी को। यह चैत्र पूर्णिमा से शुरू होने वाली इकतालीस दिन की दीक्षा का आख़िरी दिन है।
तमिलनाडु में हनुमत जयंती मार्गऴि में क्यों होती है?
वहाँ मान्यता है कि हनुमान मार्गशीर्ष, यानी मार्गऴि, की अमावस्या को मूल नक्षत्र में जन्मे थे। दोनों एक दिन न पड़ें तो अमावस का दिन लिया जाता है।
हनुमान नाम कैसे पड़ा?
वाल्मीकि रामायण के किष्किंधा कांड, सर्ग छियासठ के अनुसार बचपन में सूरज की ओर छलाँग लगाने पर इंद्र के वज्र से उनका बायाँ हनु, यानी ठोड़ी की हड्डी, टूट गया, और तभी से वे हनुमान कहलाए।
हनुमान जयंती पर पूजा किस समय होती है?
मान्यता है कि हनुमान सूर्योदय के समय जन्मे, इसलिए मंदिरों में पाठ और प्रवचन भोर से पहले शुरू होते हैं। ठीक समय पंचांग से देखें।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Hanuman Jayanti, Drik Panchangचैत्र पूर्णिमा, इकतालीस दिन की दीक्षा, कर्नाटक का हनुमद व्रत, तमिल तिथि, सूर्योदय पर जन्म
- Hanuman Jayanti, Drik Panchang (Hanumangarhi)हनुमानगढ़ी में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी, गुजरात की दीवाली हनुमान पूजा
- Tamil Hanumath Jayanthi, Drik Panchangमार्गशीर्ष अमावस्या, मूल नक्षत्र, अमावस को वरीयता
- Hanumath Jayanthi, Madhwa Sakhaहनुमान चालीसा, दीक्षा में उपवास, हनुमद व्रत, हरि वायु स्तुति
- Hanuman Jayanti, Wikipediaतेलुगु वैशाख दशमी, ओड़िशा में पणा संक्रांति, तारीख़ें परंपरा से बदलती हैं
- Valmiki Ramayana, Kishkindha Kanda 66, sanskritdocumentsअंजना, पवन देव, गुफा में जन्म, सूरज की छलाँग, हनु, वर
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।