उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · ज्येष्ठ शुक्ल दशमी
गंगा दशहरा 2027
Ganga Dussehra 2027
आसमान से गिरी, जटाओं में खोई, फिर एक रथ के पीछे पीछे चली।
गंगा दशहरा 2027 में 13 जून, रविवार को है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि 13 जून, रात 2:45 से 14 जून, रात 2:13 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
जेठ की धूप में घाट का पत्थर तप रहा है। उस पर गीले पैरों के निशान बनते हैं, और पल भर में सूख जाते हैं।
पानी में उतरते ही एक बूढ़े आदमी के मुँह से लंबी साँस निकलती है। ठंडक।
किनारे पर एक औरत दस दीये गिन रही है। दस फल। मुट्ठी भर तिल।
आज हर चीज़ दस है।
पास में एक दादी पानी में हाथ डुबोती हैं, और ऊपर उस ओर देखती हैं जिधर से धार आती है।
कहते हैं, वहाँ से। आसमान से, शिव की जटाओं से होकर।
और फिर एक राजा के रथ के पीछे पीछे, जो अपने पुरखों की राख तक पानी ले जाना चाहता था।
यही कथा कभी राम ने भी सुनी थी, गंगा के ही किनारे। उनके अपने पुरखों की कथा।
2027 में कब
गंगा दशहरा 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़13 जून, रविवार
तिथिज्येष्ठ शुक्ल दशमी13 जून, रात 2:45 से 14 जून, रात 2:13 तक
नक्षत्रहस्तसूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:23
सूर्यास्तशाम 7:20
चंद्रोदयदोपहर 2:11
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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शुभकामना
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पहचान
गंगा दशहरा क्या है
गंगा दशहरा जेठ महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी को गंगा के धरती पर उतरने की याद में होता है, इसलिए इसे गंगावतरण भी कहते हैं। जिस बरस अधिक मास हो, उस बरस यह अधिक जेठ की शुक्ल दशमी को आता है। दशहरा का मतलब है दस को हरने वाला: दश यानी दस और हरा यानी हर लेना। माना जाता है कि इस दिन गंगा में नहाने से दस पाप धुलते हैं, तीन शरीर के, चार वाणी के और तीन मन के। ब्रह्म पुराण गंगा के उतरने को जेठ शुक्ल दशमी के हस्त नक्षत्र से जोड़ता है। कई लोग जेठ की प्रतिपदा से दशमी तक दस दिन गंगा का दशहरा स्तोत्र पढ़ते हैं। यह गंगा जयंती से अलग दिन है: गंगा जयंती गंगा के फिर से जन्म की याद है, और गंगा दशहरा धरती पर उतरने की।
कथा
गंगा दशहरा की कथा
वाल्मीकि रामायण के बालकांड में यह कथा विश्वामित्र राम को सुनाते हैं, जब मिथिला के रास्ते में सब गंगा के किनारे रात को रुके हैं। राम के पुरखे थे राजा सगर। सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया, और यज्ञ का घोड़ा चोरी हो गया। सगर के साठ हज़ार बेटे घोड़ा ढूँढने निकले। ढूँढते ढूँढते वे कपिल मुनि तक पहुँचे, और कपिल ने उन्हें जलाकर राख कर दिया। फिर सगर ने अपने पोते अंशुमान को भेजा। अंशुमान को राख के ढेर मिले, और पास में चरता हुआ घोड़ा। वह चाचाओं को जल देना चाहता था, पर कहीं पानी नहीं था। तब सगर के उन बेटों के मामा, गरुड़, वहाँ आए और बोले: ये साधारण पानी से नहीं तरेंगे। इनके लिए गंगा का पानी चाहिए।
सगर गंगा को नहीं ला सके। अंशुमान ने हिमालय की चोटी पर तप किया, और गंगा को लाए बिना ही संसार से चले गए। उनके बेटे दिलीप पुरखों की चिंता में घुलते रहे, रास्ता नहीं मिला। फिर दिलीप के बेटे भगीरथ आए। उनकी कोई संतान नहीं थी। वे राज मंत्रियों को सौंपकर गोकर्ण गए, और हज़ार बरस पाँच आगों के बीच खड़े होकर, महीने में एक बार खाकर, तप किया। ब्रह्मा प्रसन्न हुए और वर दिया। पर उन्होंने चेताया: गंगा पूरे ज़ोर से गिरेंगी तो धरती सह नहीं पाएगी। यह बस शिव कर सकते हैं।
भगीरथ एक बरस पैर के अँगूठे की नोक पर खड़े रहे, बस हवा पीकर। शिव मान गए। गंगा घमंड में यह सोचकर गिरीं कि शिव को भी बहाकर पाताल ले जाऊँगी। वाल्मीकि कहते हैं: 'सा तस्मिन् पतिता पुण्या पुण्ये रुद्रस्य मूर्धनि। हिमवत्प्रतिमे राम जटामण्डलगह्वरे॥' (बालकांड 43.7), यानी हे राम, वह पवित्र गंगा रुद्र के हिमालय जैसे सिर पर, जटाओं की गुफा में गिरीं। और फिर वे बाहर का रास्ता न पा सकीं, बरसों उन्हीं जटाओं में घूमती रहीं। भगीरथ ने फिर तप किया, तो शिव ने उन्हें बिंदु सरोवर की ओर छोड़ा। वहाँ से सात धाराएँ निकलीं: तीन पूरब गईं, तीन पश्चिम, और सातवीं भगीरथ के रथ के पीछे पीछे चली।
रास्ते में ऋषि जह्नु का यज्ञ था। गंगा उसे बहा ले गईं, तो जह्नु ने ग़ुस्से में सारी गंगा पी ली। देवताओं और ऋषियों ने उन्हें मनाया, तो उन्होंने गंगा को अपने कानों से छोड़ दिया: 'तस्माज्जह्नुसुता गङ्गा प्रोच्यते जाह्नवीति च॥' (बालकांड 43.38), यानी इसीलिए जह्नु की बेटी गंगा जाह्नवी कहलाती हैं। फिर गंगा भगीरथ के रथ के पीछे समुद्र तक पहुँचीं, पाताल में उतरीं, और उनका पानी सगर के बेटों की राख पर फैला। साठ हज़ार पुरखे तर गए। ब्रह्मा ने कहा, आज से गंगा भागीरथी भी कहलाएँगी।
उनतालीस लंकाएँ
रामकथाओं में गंगा दशहरा
उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।
वाल्मीकि रामायण
संस्कृत · Valmiki Ramayana
वाल्मीकि रामायण में गंगा के उतरने की कथा राम के बचपन के सफ़र में आती है। बालकांड के सर्ग 35 से 44 तक विश्वामित्र राम को ऋषियों के साथ मिथिला ले जा रहे हैं, और गंगा के किनारे पड़ाव पर यह कथा सुनाते हैं। राम के लिए यह किसी और की कथा नहीं: सगर उनके पुरखे हैं, और भगीरथ भी उसी इक्ष्वाकु वंश के, जिसे आगे बढ़ाने का वर भी ब्रह्मा भगीरथ को देते हैं। वाल्मीकि लिखते हैं कि कथा सुनते सुनते राम इतने खो गए कि रात कब बीत गई, पता नहीं चला। यानी जिस नदी के किनारे आज लोग दस दीये बहाते हैं, उसी के किनारे एक राजकुमार रात भर अपने पुरखों की यह कथा सुनता रहा था।
कहाँ कैसे
गंगा दशहरा कहाँ कैसे मनाया जाता है
हरिद्वार
गंगा दशहरा का सबसे बड़ा स्नान यहीं होता है, और घाटों पर बहुत भारी भीड़ उमड़ती है।
काशी का दशाश्वमेध घाट
शाम को महा आरती होती है, और लोग जलते दीये गंगा में बहाते हैं, जिसे दीप दान कहते हैं।
पटना का गांधी घाट
शाम को गंगा की बड़ी आरती होती है।
ऋषिकेश, गढ़मुक्तेश्वर और प्रयाग
ये भी इस दिन के बड़े स्नान स्थल हैं, जहाँ लोग गंगा में डुबकी लेकर दान करते हैं।
मथुरा, वृंदावन और बटेश्वर
यहाँ इसी दिन लोग यमुना में डुबकी लेते हैं, तरबूज़ और ककड़ी चढ़ाते हैं, और लस्सी, शरबत और शिकंजी बाँटते हैं; यमुना पूजा के साथ पतंगें भी उड़ती हैं।
रीत
गंगा दशहरा के दिन क्या करते हैं
- लोग गंगा में नहाते हैं; जो नदी तक न जा सकें, वे घर पर साफ़ पानी से नहाकर साफ़ कपड़े पहनते हैं।
- गंगा माँ की मूर्ति रखकर या चित्र बनाकर पूजा, हवन और फूलों की भेंट होती है।
- राजा भगीरथ और हिमालय की भी पूजा होती है, जिनके बिना गंगा धरती तक न आतीं।
- दस का दान होता है: दस फल, दस दीये और दस सेर तिल।
- घी और गुड़ मिले सत्तू के लड्डू पानी में बहाए जाते हैं।
- जो कर सकें, वे सोने के कछुए, मछली और मेंढक की छोटी आकृतियाँ भी पानी में चढ़ाते हैं।
- जेठ की प्रतिपदा से दशमी तक गंगा का दशहरा स्तोत्र पढ़ा जाता है, हर दिन पहले से ज़्यादा बार।
- दिन भर पराए धन और पराए जीवनसाथी के लालच से दूर रहने का नियम है।
रसोई
गंगा दशहरा का खाना
- सत्तू के लड्डू घी और गुड़ मिले, जो गंगा में बहाए जाते हैं।
- तरबूज़ और ककड़ी जेठ के फल, जो यमुना को चढ़ते हैं।
- लस्सी, शरबत और शिकंजी जेठ की गर्मी में घाटों पर बँटते हैं।
सवाल जवाब
गंगा दशहरा 2027: पूछे जाने वाले सवाल
गंगा दशहरा 2027 कब है?
गंगा दशहरा 2027 में 13 जून, रविवार को है। ज्येष्ठ शुक्ल दशमी तिथि 13 जून, रात 2:45 से 14 जून, रात 2:13 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
गंगा दशहरा को दशहरा क्यों कहते हैं?
दश का मतलब दस और हरा का मतलब हर लेना। माना जाता है कि इस दिन गंगा में नहाने से दस पाप धुल जाते हैं, इसलिए इसे दशहरा कहते हैं।
गंगा दशहरा पर कौन से दस पाप धुलते हैं?
परंपरा दस पापों को तीन हिस्सों में बाँटती है: तीन शरीर से किए पाप, चार वाणी से, और तीन मन से।
गंगा दशहरा और गंगा जयंती में क्या फ़र्क़ है?
गंगा दशहरा गंगा के धरती पर उतरने की याद है, जेठ शुक्ल दशमी को। गंगा जयंती गंगा के फिर से जन्म का दिन है। दोनों को एक नहीं मानना चाहिए।
गंगा नहाने न जा सकें तो क्या करें?
घर पर साफ़ पानी से नहाकर, साफ़ कपड़े पहनकर गंगा की पूजा की जा सकती है, और दस फल, दस दीये और तिल का दान किया जा सकता है।
गंगा को जाह्नवी और भागीरथी क्यों कहते हैं?
वाल्मीकि रामायण के अनुसार ऋषि जह्नु ने गंगा को पीकर अपने कानों से छोड़ा, इसलिए वे जाह्नवी कहलाईं। और भगीरथ उन्हें धरती पर लाए, इसलिए ब्रह्मा ने उन्हें भागीरथी नाम दिया।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Ganga Dussehra date and time (Drik Panchang)जेठ शुक्ल दशमी, अधिक मास, तीन चार तीन पाप, हस्त नक्षत्र, ब्रह्म पुराण, पूजा विधि, दस का दान, सत्तू, स्तोत्र, गंगा जयंती से फ़र्क़, घाट
- Ganga Dussehra (Wikipedia)दस दिन, हरिद्वार, दशाश्वमेध पर दीप दान और महा आरती, यमुना के घाट, तरबूज़ ककड़ी, लस्सी, पतंगें
- Valmiki Ramayana, Bala Kanda Sarga 43, Sanskrit text (valmikiramayan.net)बालकांड 43.7 और 43.38 के श्लोक, भगीरथ के रथ के पीछे गंगा
- Valmiki Ramayana, Bala Kanda Sarga 43, prose (valmikiramayan.net)अँगूठे पर तप, जटाओं में बरसों, बिंदु सरोवर, सात धाराएँ, जह्नु, सगर के बेटों की राख
- The Ramayana of Valmiki, Bala-kanda, Chapter 41 (Wisdom Library)अंशुमान, राख और घोड़ा, गरुड़ की बात, कपिल, गंगा का पानी
- The Ramayana of Valmiki, Bala-kanda, Chapter 42 (Wisdom Library)अंशुमान और दिलीप, भगीरथ का गोकर्ण में तप, ब्रह्मा का वर और चेतावनी
- The Ramayana of Valmiki, Bala-kanda, contents (Wisdom Library)सर्ग 38 से 44 के विषय: सगर, घोड़े की चोरी, बेटों की खोज
- Valmiki Ramayana, Ganga descent story (Green Message)सर्ग 35 का पड़ाव, विश्वामित्र का सुनाना, राम का रात भर सुनना, सर्ग 44 में भागीरथी नाम
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।