उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · श्रावण शुक्ल सप्तमी
तुलसीदास जयंती 2027
Tulsidas Jayanti 2027
जिसके बारे में हम सबसे कम जानते हैं, उसकी पंक्तियाँ सबसे ज़्यादा लोगों को याद हैं।
तुलसीदास जयंती 2027 में 8 अगस्त, रविवार को है। श्रावण शुक्ल सप्तमी तिथि 7 अगस्त, रात 11:01 से 8 अगस्त, रात 10:25 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
बगल के कमरे से कोई चौपाई पढ़ रहा है। अटक अटक कर।
एक शब्द पर रुकता है। फिर पीछे जाकर पूरी पंक्ति दोबारा।
रसोई में खड़ी माँ बिना देखे अगली पंक्ति बोल देती हैं।
उन्होंने यह कभी किताब से नहीं सीखी। बस सुनते सुनते आ गई।
जिसने यह लिखा, उसके जन्म का बरस भी पक्का नहीं। पर उसकी पंक्तियाँ इस घर की दीवारों तक को याद हैं।
कवि खो गया, कथा रह गई। और हर घर उसे अपनी आवाज़ में आगे कहता गया।
2027 में कब
तुलसीदास जयंती 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़8 अगस्त, रविवार
तिथिश्रावण शुक्ल सप्तमी7 अगस्त, रात 11:01 से 8 अगस्त, रात 10:25 तक
नक्षत्रचित्रासूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:46
सूर्यास्तशाम 7:07
चंद्रोदयसुबह 11:56
मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar
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शुभकामना
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पहचान
तुलसीदास जयंती क्या है
तुलसीदास जयंती रामचरितमानस के कवि गोस्वामी तुलसीदास का जन्मदिन है। परंपरा के अनुसार उनका जन्म श्रावण महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को हुआ, और यही दिन उनकी जयंती है। उनके जीवन के बारे में पक्का बहुत कम पता है। जन्म के बरस पर भी स्रोत एक राय नहीं रखते: एक स्रोत सन 1543 के आसपास और जगह शायद राजापुर बताता है, तो दूसरा परंपरा के हवाले से सन 1511। इतना तय माना जाता है कि उन्होंने अपना ज़्यादातर बड़ा जीवन वाराणसी में बिताया और वहीं सन 1623 में देह छोड़ी। उनका रामचरितमानस अवधी में है, सात कांडों में, और लिखा गया सन 1574 से 1576 या 1577 के बीच।
कथा
तुलसीदास जयंती की कथा
तुलसीदास के बारे में सबसे भरोसे की बात वह है जो उन्होंने ख़ुद लिखी। मानस के बालकांड में वे ख़ुद बताते हैं कि यह कथा विक्रम संवत सोलह सौ इकतीस में, चैत की नवमी, मंगलवार को, अयोध्या में शुरू हुई। यानी उन्होंने अपनी कथा का पहला दिन राम के जन्मदिन पर रखा। अपनी दूसरी रचनाओं, कवितावली और विनयपत्रिका, में वे यह भी बताते हैं कि जन्म के बाद उनके घर वालों ने उन्हें छोड़ दिया था।
बाक़ी कहानी लोक और भक्त जीवनियों की है, और उसे वैसे ही सुनना चाहिए। कहते हैं, वे बारह महीने माँ के पेट में रहे, जन्म के समय उनके मुँह में बत्तीस दाँत थे, और वे रोए नहीं, उनके मुँह से राम निकला। इसी से उनका बचपन का नाम रामबोला पड़ा। फिर एक कथा है कि वे अपनी पत्नी रत्नावली से मिलने रात को सरयू नदी तैरकर पहुँच गए, और रत्नावली ने उन्हें फटकारा कि जितना मोह इस हाड़ माँस के शरीर से है, उसका आधा भी भगवान से होता! कुछ लोग इस प्रसंग को बाद में जोड़ा गया मानते हैं।
हनुमान से मिलने की कथा भी लोक की है। उसके अनुसार एक कोढ़ी के भेस में हनुमान उन्हें मिले, और तुलसी उन्हें पहचानकर उनके पाँवों पर गिर पड़े। यह कथा प्रियादास की भक्तिरसबोधिनी से आती है, जो तुलसी के जाने के लगभग सौ बरस बाद, सन 1712 में लिखी गई। तुलसी के समय के भक्त कवि नाभादास ने अपनी भक्तमाल में उन्हें वाल्मीकि का अवतार कहा। यानी जिस कवि ने राम की कथा फिर से कही, उसकी अपनी कथा भी लोगों ने अपनी अपनी तरह कही।
उनतालीस लंकाएँ
रामकथाओं में तुलसीदास जयंती
उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।
रामचरितमानस
अवधी · Ramcharitmanas
रामचरितमानस तुलसीदास की सबसे बड़ी रचना है, अवधी में, सात कांडों में, और उत्तर भारत में सबसे ज़्यादा पढ़ी और गाई जाने वाली रामकथा। इसके बालकांड में तुलसी ख़ुद लिखते हैं कि उन्होंने इसे संवत सोलह सौ इकतीस में राम नवमी के दिन अयोध्या में शुरू किया। उत्तर भारत की ज़्यादातर रामलीलाएँ इसी पर टिकी हैं, और काशी के रामनगर की इकतीस दिन की रामलीला में पूरा मानस पढ़ा जाता है।
कवितावली
ब्रजभाषा · Kavitavali
कवितावली तुलसीदास की दूसरी रामकथा है, मानस से बिल्कुल अलग। यह ब्रजभाषा में है, कवित्त और सवैयों में, और पूरी कथा क्रम से नहीं चलती, चुने हुए दृश्य ज़ोर से कहे जाते हैं। इसका सुंदरकांड लंका दहन को लंका के लोगों की आँख से कहता है। तुलसी के जीवन के लिए भी यह ज़रूरी है, क्योंकि इसी में वे बताते हैं कि जन्म के बाद उन्हें छोड़ दिया गया था।
हनुमान चालीसा
अवधी · Hanuman Chalisa
हनुमान चालीसा चालीस चौपाइयों की वह छोटी रचना है जो रोज़ पढ़ी जाती है। आम मान्यता इसे तुलसीदास की रचना मानती है, हालाँकि कुछ विद्वान इससे सहमत नहीं। तुलसीदास जयंती पर यह सवाल भी कथा का हिस्सा है: एक कवि के नाम से जुड़ी पंक्तियाँ इतनी फैल गईं कि अब वे सबकी हैं।
सुंदरकांड, 39 रामकथाओं में
लंका दहन। लंका का पहरेदार कौन था? लंकिनी, लंका देवी, चामुंडा और वज्रमुख।
कहाँ कैसे
तुलसीदास जयंती कहाँ कैसे मनाया जाता है
वाराणसी
तुलसी ने ज़्यादातर बड़ा जीवन यहीं बिताया। गंगा पर तुलसी घाट उन्हीं के नाम पर है, और परंपरा कहती है कि उन्होंने अस्सी घाट पर देह छोड़ी।
रामनगर, काशी
यहाँ की रामलीला इकतीस दिन चलती है और उसमें पूरा रामचरितमानस पढ़ा जाता है।
अयोध्या
मानस में तुलसी ख़ुद लिखते हैं कि यह कथा अवधपुरी में शुरू हुई।
राजापुर
एक स्रोत इसे उनका संभावित जन्मस्थान बताता है, हालाँकि जन्म की जगह और बरस दोनों पर राय बँटी हुई है।
रीत
तुलसीदास जयंती के दिन क्या करते हैं
- दिन श्रावण शुक्ल सप्तमी का है, जिसे परंपरा तुलसी का जन्मदिन मानती है।
- इस दिन रामचरितमानस का कोई एक कांड, या बस कुछ दोहे, पढ़े जा सकते हैं।
- मानस के बालकांड की वे पंक्तियाँ पढ़ी जा सकती हैं जिनमें तुलसी ख़ुद बताते हैं कि कथा कब और कहाँ शुरू हुई।
- हनुमान चालीसा, जो आम मान्यता में तुलसी की रचना है, इस दिन पढ़ने की सबसे छोटी और सबसे जानी हुई चीज़ है।
- कवितावली या विनयपत्रिका का एक पद पढ़ना तुलसी की दूसरी आवाज़ को सुनना है।
सवाल जवाब
तुलसीदास जयंती 2027: पूछे जाने वाले सवाल
तुलसीदास जयंती 2027 कब है?
तुलसीदास जयंती 2027 में 8 अगस्त, रविवार को है। श्रावण शुक्ल सप्तमी तिथि 7 अगस्त, रात 11:01 से 8 अगस्त, रात 10:25 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
तुलसीदास जयंती किस तिथि को होती है?
परंपरा के अनुसार श्रावण शुक्ल सप्तमी को, जिसे तुलसीदास का जन्मदिन माना जाता है।
तुलसीदास का जन्म कब और कहाँ हुआ?
पक्का पता नहीं। एक स्रोत सन 1543 के आसपास और शायद राजापुर बताता है, तो दूसरा परंपरा के हवाले से सन 1511। उनकी मृत्यु सन 1623 में वाराणसी में मानी जाती है।
रामचरितमानस कब लिखी गई?
सन 1574 से 1576 या 1577 के बीच। तुलसी ख़ुद लिखते हैं कि उन्होंने संवत सोलह सौ इकतीस में राम नवमी, मंगलवार को, अयोध्या में इसे शुरू किया।
क्या हनुमान चालीसा तुलसीदास ने लिखी?
आम मान्यता यही है कि हनुमान चालीसा तुलसीदास की रचना है, पर कुछ विद्वान इसे उनकी रचना नहीं मानते।
क्या रत्नावली की कहानी सच है?
यह लोक कथा है। कुछ लोग पत्नी वाले इस प्रसंग को बाद में जोड़ा गया मानते हैं।
तुलसीदास की दूसरी रचनाएँ कौन सी हैं?
कवितावली, विनयपत्रिका, दोहावली, कृष्ण गीतावली और वैराग्य संदीपनी उनमें हैं, और बजरंग बाण भी उनसे जोड़ा जाता है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Tulsidas, Encyclopaedia Britannicaजीवन के बारे में कम जानकारी, 1543 और राजापुर, 1623 वाराणसी, मानस 1574 से 1577, अवधी, कवितावली
- Tulsidas, Wikipediaश्रावण शुक्ल सप्तमी, जन्म की लोक कथाएँ, रत्नावली, हनुमान की कथा, प्रियादास, नाभादास, तुलसी घाट, चालीसा पर मतभेद
- Shri Ramcharitmanas, Balakanda, sanskritdocumentsसंवत सोलह सौ इकतीस, नवमी भौमवार, अवधपुरी
- Ramlila, Wikipediaरामलीलाएँ मानस पर, रामनगर की इकतीस दिन की लीला
- All Hindi texts, sanskritdocumentsकवितावली, विनयपत्रिका, दोहावली, वैराग्य संदीपनी, बजरंग बाण
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।