उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · श्रावण शुक्ल तृतीया
हरियाली तीज 2027
Hariyali Teej 2027
एक रस्सी, एक डाल, और सावन भर का इंतज़ार।
हरियाली तीज 2027 में 4 अगस्त, बुधवार को है। श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि 4 अगस्त, सुबह 8:20 से 5 अगस्त, सुबह 5:09 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
चूँ। चूँ। डाल पर बँधी रस्सी हर पेंग के साथ बोलती है।
झूले पर दो औरतें हैं, आमने सामने। हरी चूड़ियाँ खनकती हैं।
हथेलियों पर कल रात की मेहंदी अभी गहरी हो रही है।
नीचे कोई एक गीत छेड़ती है। बाक़ी सब उसे पूरा करती हैं।
माँ के घर से सिंधारा आया है: घेवर, मेहंदी, चूड़ियाँ।
झूला ऊपर जाता है, और एक पल के लिए पत्तों के पार काला बादल दिखता है।
कहते हैं, इसी दिन बरसों की तपस्या के बाद पार्वती को शिव मिले थे। हर आँगन का झूला अलग, पर सब पर एक ही कथा झूलती है।
2027 में कब
हरियाली तीज 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़4 अगस्त, बुधवार
तिथिश्रावण शुक्ल तृतीया4 अगस्त, सुबह 8:20 से 5 अगस्त, सुबह 5:09 तक
नक्षत्रमघासूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:44
सूर्यास्तशाम 7:10
चंद्रोदयसुबह 7:40
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शुभकामना
हरियाली तीज का शुभकामना कार्ड

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पहचान
हरियाली तीज क्या है
हरियाली तीज सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है, आम तौर पर नाग पंचमी से दो दिन पहले। इसे सिंधारा तीज, छोटी तीज और श्रावण तीज भी कहते हैं। यह शिव और पार्वती के मिलन का दिन माना जाता है। इसे ज़्यादातर औरतें रखती हैं: सुहागिनें अपने सुहाग के लिए, और कुँवारी लड़कियाँ अच्छे वर के लिए। राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में इसका सबसे ज़्यादा चलन है। सावन और भादों की तीन बड़ी तीजों में यह पहली है; इसके पंद्रह दिन बाद कजरी तीज आती है, जिसे बड़ी तीज कहते हैं, और फिर भादों के शुक्ल पक्ष में हरतालिका तीज।
कथा
हरियाली तीज की कथा
तीज की व्रत कथा में कहते हैं कि यह कथा ख़ुद भोलेनाथ ने पार्वती को सुनाई थी। शिव ने कहा: तुमने मुझे पति रूप में पाने के लिए एक सौ सात बार जन्म लिया, पर हर बार बात अधूरी रह गई। एक सौ आठवें जन्म में तुम हिमालय के घर जन्मीं। तब तुमने कठोर तप किया, और सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया को मैंने तुम्हें अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया। यह लोक की व्रत कथा है, और इसी से यह दिन तीज बना।
उस तप की कथा शिव पुराण में है, रुद्र संहिता के पार्वती खंड के बाईसवें अध्याय में। पार्वती ने पहला साल फल खाकर बिताया, दूसरा साल पत्ते खाकर। फिर उन्होंने पत्ते भी छोड़ दिए और कुछ नहीं खाया। पत्ते तक छोड़ देने के कारण देवताओं ने उन्हें अपर्णा कहा, यानी जिसने पत्ता भी नहीं खाया। गर्मी में वे चारों ओर आग जलाकर उसके बीच मंत्र जपती रहीं। बरसात में खुली शिला पर टिकी रहीं और बारिश उन पर गिरती रही। जाड़े में पानी में खड़ी रहीं, रात भर।
शिव पुराण आगे कहता है कि पार्वती के तप से सारा संसार तपने लगा। तब ब्रह्मा, विष्णु और देवता शिव के पास गए, और शिव विवाह के लिए मान गए। पर पहले उन्होंने परीक्षा ली। सप्तर्षि आए और पार्वती को मनाने लगे कि यह हठ छोड़ दो। वे नहीं मानीं। फिर शिव ख़ुद एक बूढ़े ब्राह्मण के वेश में आए और तरह तरह से उन्हें परखा। जब पार्वती फिर भी नहीं डिगीं, तो शिव अपने असली रूप में सामने आ गए।
व्रत कथा के अंत में शिव कहते हैं कि जो स्त्री इस व्रत को भक्ति और श्रद्धा से रखेगी, उसे मनचाहा फल मिलेगा। इसी मान्यता से सुहागिनें यह व्रत अपने सुहाग के लिए रखती हैं।
कहाँ कैसे
हरियाली तीज कहाँ कैसे मनाया जाता है
जयपुर
यहाँ दो दिन तीज माता की शाही सवारी निकलती है। सिटी पैलेस से चलकर त्रिपोलिया बाज़ार और छोटी चौपड़ होते हुए तालकटोरा तक जाती है, साथ में सजे ऊँट, घोड़े, हाथी, पालकियाँ, रथ, बैलगाड़ियाँ और लोक नाचने गाने वाले।
जोधपुर
यहाँ इस दिन को छोटी तीज कहते हैं, और औरतें तीज की पूजा में नीम को पूजती हैं।
राजस्थान के घर
औरतें बहुरंगी धारियों वाली लहरिया साड़ी पहनती हैं, हाथों पर मेहंदी रचाती हैं और पेड़ों पर फूलों से सजे झूले डालती हैं।
उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड
ब्याही बेटियाँ माँ के घर जाती हैं, नए कपड़े और हरी चूड़ियाँ पहनती हैं, और जोड़ियों में झूले पर झूलते हुए तीज के गीत गाती हैं।
रीत
हरियाली तीज के दिन क्या करते हैं
- तीज से एक दिन पहले सिंधारा होता है: माँ बाप ब्याही बेटी और उसके ससुराल वालों के लिए घर की बनी मिठाई, घेवर, मेहंदी और चूड़ियाँ भेजते हैं।
- औरतें हाथ पैरों पर मेहंदी लगाती हैं, हरी साड़ी और हरी चूड़ियाँ पहनती हैं और सोलह श्रृंगार करती हैं।
- दिन भर व्रत रखा जाता है।
- मिट्टी से शिव, पार्वती और गणेश की मूर्तियाँ बनाई जाती हैं; पार्वती को सुहाग की चीज़ों की थाली और शिव को वस्त्र चढ़ते हैं।
- शाम को शिव पार्वती की पूजा में फल, फूल, मिठाई और बेलपत्र चढ़ाते हैं और घी का बड़ा दीया जलाते हैं।
- पेड़ों पर झूले डाले जाते हैं और औरतें मिलकर झूलती और तीज के गीत गाती हैं।
- पूजा के बाद किसी सुहागिन को सुहाग की चीज़ें दी जाती हैं और उनका आशीर्वाद लिया जाता है।
- कई घरों में व्रत अगली सुबह पारण करके खुलता है; राजस्थान के कई घरों में चाँद की पूजा के बाद।
रसोई
हरियाली तीज का खाना
- घेवर तीज की सबसे पहचानी मिठाई; जयपुर के पुराने शहर की गलियों में बड़ी कड़ाहियों में बनता है, सादा, पनीर वाला और रबड़ी वाला।
- सिंधारे की मिठाई माँ के घर से आई घर की बनी मिठाइयाँ, जो तीज के दिन खाई और बाँटी जाती हैं।
सवाल जवाब
हरियाली तीज 2027: पूछे जाने वाले सवाल
हरियाली तीज 2027 कब है?
हरियाली तीज 2027 में 4 अगस्त, बुधवार को है। श्रावण शुक्ल तृतीया तिथि 4 अगस्त, सुबह 8:20 से 5 अगस्त, सुबह 5:09 तक है। समय नई दिल्ली के हैं।
हरियाली तीज क्यों मनाई जाती है?
मान्यता है कि सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया को पार्वती के कठोर तप के बाद शिव ने उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। इसी मिलन की याद में यह तीज रखी जाती है।
सिंधारा क्या होता है?
तीज से पहले माँ बाप अपनी ब्याही बेटी और उसके ससुराल के लिए जो भेंट भेजते हैं, उसे सिंधारा कहते हैं। इसमें घर की मिठाई, घेवर, मेहंदी और चूड़ियाँ होती हैं, और इसी से इसे सिंधारा तीज भी कहते हैं।
हरियाली तीज पर क्या पहनते हैं?
हरी साड़ी और हरी चूड़ियाँ सबसे अच्छी मानी जाती हैं। राजस्थान में औरतें लहरिया साड़ी पहनती हैं और हाथों पर मेहंदी रचाती हैं।
हरियाली तीज और हरतालिका तीज में क्या फ़र्क़ है?
हरियाली तीज सावन के शुक्ल पक्ष की तृतीया को आती है, और हरतालिका तीज भादों के शुक्ल पक्ष की तृतीया को। बीच में भादों के कृष्ण पक्ष की तृतीया को कजरी तीज आती है।
हरियाली तीज का व्रत कैसे खोलते हैं?
पूजा और सुहागिन को सुहाग की चीज़ें देने के बाद कई घरों में अगली सुबह पारण करके व्रत खोला जाता है। राजस्थान के कई घरों में चाँद की पूजा के बाद व्रत खुलता है।
जयपुर की तीज सवारी कहाँ से निकलती है?
तीज माता की सवारी सिटी पैलेस से निकलती है और त्रिपोलिया बाज़ार और छोटी चौपड़ होते हुए तालकटोरा तक जाती है। यह दो दिन निकलती है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Drik Panchang: Hariyali Teejतिथि का नियम, दूसरे नाम, सिंधारा, हरा रंग, झूले, राज्य, तीनों तीज
- Utsav, Government of India: Teej Festival, Jaipurजयपुर की तीज सवारी: सिटी पैलेस, त्रिपोलिया, छोटी चौपड़, तालकटोरा; लहरिया, मेहंदी, झूले, घेवर
- Incredible India: Jaipur Teej Festivalतीज माता की सवारी, हाथी ऊँट घोड़े, मेहंदी
- eSamskriti: Teej, a delightful and colourful array of eventsसिंजारा, घेवर, जोधपुर में नीम पूजा, चाँद पूजकर व्रत खोलना
- Ganesha Speaks: हरियाली तीज व्रत कथाव्रत कथा: एक सौ आठ जन्म, सावन शुक्ल तृतीया, मिट्टी की मूर्तियाँ
- आज तक: हरियाली तीज पूजन विधिपूजा के क्रम, बेलपत्र, घी का दीया, सुहाग का दान, पारण
- Shiva Purana, Rudra Samhita, Parvati Khanda, chapter 22 (wisdomlib)पार्वती का तप, अपर्णा नाम, तीनों ऋतुओं का तप
- Green Message: Shiva Purana, Parvati Khanda, penance of Devi Parvatiदेवताओं का शिव के पास जाना, सप्तर्षि और बूढ़े ब्राह्मण की परीक्षा
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।