पंचांग 2027

उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · हर महीने का व्रत

मासिक दुर्गाष्टमी 2027

Masik Durgashtami 2027

हर महीने चाँद आधा होता है, और देवी का दिन लौट आता है।

मासिक दुर्गाष्टमी 2027 में 12 बार आती है, हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी को। पहली 16 जनवरी, शनिवार को है, और आख़िरी 6 दिसंबर, सोमवार को। हर तारीख़ की तिथि, सूर्योदय और उस दिन की अपनी बात नीचे है। समय नई दिल्ली के हैं।

उस शाम का चाँद, 57 प्रतिशत रोशन

एक छोटी आवाज़ पूछती है: अभी तो नवरात्रि नहीं है, फिर आज पूजा क्यों?

माँ लाल चुनरी का एक कोना बच्ची को पकड़ा देती है। दूसरा कोना अपने हाथ में।

दोनों मिलकर उसे देवी की तस्वीर पर डाल देती हैं।

थाली में लाल फूल हैं, रोली है, मुट्ठी भर चावल।

माँ दीया जलाती है। कहती है, देवी का दिन हर महीने आता है।

शाम को छत पर आधा चाँद निकलेगा। बढ़ता हुआ आधा।

कथा वही पुरानी है: एक असुर, एक वरदान, और एक देवी, जिसके हाथों में सब देवताओं ने अपने हथियार रख दिए।

बारह महीने, बारह अष्टमियाँ। हर बार वही कथा, और हर बार कोई नया सुनने वाला।

2027 में कब

मासिक दुर्गाष्टमी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त

जनवरी16

फ़रवरी14

मार्च16

अप्रैल14

मई13

जून11

जुलाई11

अगस्त9

सितंबर8

अक्टूबर7

नवंबर6

दिसंबर6

मुफ़्त · Manu Vishranti Calendar

कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं

आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।

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सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।

पहचान

मासिक दुर्गाष्टमी क्या है

मासिक दुर्गाष्टमी हर महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी है, यानी अमावस्या के बाद की आठवीं तिथि। इस दिन देवी दुर्गा की पूजा होती है, और उनके भक्त दिन भर का व्रत रखते हैं। जैसे हर महीने शिव की मासिक शिवरात्रि आती है, वैसे ही यह देवी का महीने वाला दिन है, और इसे मास दुर्गाष्टमी भी कहते हैं। व्रत उस दिन रखा जाता है जिस दिन सूरज निकलते समय अष्टमी हो। साल की सबसे बड़ी दुर्गाष्टमी आश्विन की है, शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी, और चैत्र वाली अष्टमी चैत्र नवरात्रि में आती है। बाक़ी महीनों की अष्टमियों के भी अपने नाम और अपने त्योहार हैं, जैसे पौष की बनदा अष्टमी और भाद्रपद की राधा अष्टमी। नीचे की सूची में हर एक का अपना हाल है।

पूरी सूची

मासिक दुर्गाष्टमी 2027: हर तारीख़

हर तारीख़, उस दिन की तिथि कब से कब तक, सूर्योदय का समय, और उस दिन की अपनी बात।

  1. 16जनवरी

    बनदा अष्टमी

    पौष शुक्ल अष्टमी · तिथि 15 जनवरी, दोपहर 2:14 से 16 जनवरी, दोपहर 1:44 तक

    पौष की यह अष्टमी बनदा अष्टमी या शाकंभरी अष्टमी कहलाती है, और इसी दिन से शाकंभरी नवरात्रि शुरू होती है, जो पौष पूर्णिमा तक चलती है। मान्यता है कि देवी ने अकाल मिटाने को शाकंभरी का रूप लिया, इसलिए उन्हें साग, फल और सब्ज़ियों से घिरा दिखाया जाता है। उसी दिन मट्टू पोंगल भी है।

    सूर्योदय: सुबह 7:15

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  2. 14फ़रवरी

    माघ मासिक दुर्गाष्टमी

    माघ शुक्ल अष्टमी · तिथि 14 फ़रवरी, रात 2:07 से 15 फ़रवरी, रात 12:42 तक

    इसी दिन भीष्म अष्टमी भी है, जिसका अपना पन्ना है। माघ के जाड़े में यह साल की दूसरी दुर्गाष्टमी है।

    सूर्योदय: सुबह 7:01

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  3. 16मार्च

    फाल्गुन मासिक दुर्गाष्टमी

    फाल्गुन शुक्ल अष्टमी · तिथि 15 मार्च, सुबह 10:52 से 16 मार्च, सुबह 8:55 तक

    इसी अष्टमी से होलाष्टक शुरू होता है, होली से पहले के आठ दिन, जिनमें उत्तर भारत में ब्याह, गृह प्रवेश, मुंडन और नामकरण जैसे काम टाले जाते हैं।

    सूर्योदय: सुबह 6:30

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  4. 14अप्रैल

    चैत्र नवरात्रि की अष्टमी

    चैत्र शुक्ल अष्टमी · तिथि 13 अप्रैल, शाम 5:29 से 14 अप्रैल, दोपहर 3:24 तक

    यह वसंत वाली नवरात्रि, यानी चैत्र नवरात्रि, का आठवाँ दिन है, जिसका अपना पन्ना है। उसी दिन बैसाखी और पुथांडु भी हैं।

    सूर्योदय: सुबह 5:57

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  5. 13मई

    वैशाख मासिक दुर्गाष्टमी

    वैशाख शुक्ल अष्टमी · तिथि 12 मई, रात 11:13 से 13 मई, रात 9:18 तक

    गर्मी चढ़ने लगी है। ऐसे दिनों में जो निर्जल व्रत न निभा सकें, वे फलाहार, दूध या चाय लेकर भी यह व्रत रख सकते हैं।

    सूर्योदय: सुबह 5:32

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  6. 11जून

    ज्येष्ठ मासिक दुर्गाष्टमी

    ज्येष्ठ शुक्ल अष्टमी · तिथि 11 जून, सुबह 5:14 से 12 जून, रात 3:45 तक

    इसी दिन कश्मीर में खीर भवानी का मेला है, देवी का ही एक और दिन, जिसका अपना पन्ना है।

    सूर्योदय: सुबह 5:23

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  7. 11जुलाई

    आषाढ़ मासिक दुर्गाष्टमी

    आषाढ़ शुक्ल अष्टमी · तिथि 10 जुलाई, दोपहर 12:38 से 11 जुलाई, सुबह 11:50 तक

    आषाढ़ आते आते बरसात शुरू हो जाती है। इस अष्टमी पर भी भोग में खीर के साथ वही फल रखे जाते हैं जो मौसम दे।

    सूर्योदय: सुबह 5:31

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  8. 9अगस्त

    श्रावण मासिक दुर्गाष्टमी

    श्रावण शुक्ल अष्टमी · तिथि 8 अगस्त, रात 10:25 से 9 अगस्त, रात 10:35 तक

    इसी दिन सावन सोमवार का व्रत भी है, सो एक ही सुबह शिव की पूजा भी होती है और देवी की भी।

    सूर्योदय: सुबह 5:47

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  9. 8सितंबर

    राधा अष्टमी

    भाद्रपद शुक्ल अष्टमी · तिथि 7 सितंबर, सुबह 11:29 से 8 सितंबर, दोपहर 12:45 तक

    भाद्रपद की यह अष्टमी राधा का जन्मदिन मानी जाती है, और दूर्वा अष्टमी भी। इसी दिन से सोलह दिन का महालक्ष्मी व्रत शुरू होता है, जो आश्विन कृष्ण अष्टमी तक चलता है।

    सूर्योदय: सुबह 6:03

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  10. 7अक्टूबर

    महाअष्टमी (दुर्गा अष्टमी)

    आश्विन शुक्ल अष्टमी · तिथि 7 अक्टूबर, सुबह 4:14 से 8 अक्टूबर, सुबह 6:28 तक

    साल की सबसे बड़ी दुर्गाष्टमी, शारदीय नवरात्रि की महाअष्टमी। इसकी संधि पूजा और कन्या पूजन दुर्गा अष्टमी के अपने पन्ने पर हैं।

    सूर्योदय: सुबह 6:17

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  11. 6नवंबर

    कार्तिक मासिक दुर्गाष्टमी

    कार्तिक शुक्ल अष्टमी · तिथि 6 नवंबर, रात 12:10 से 7 नवंबर, रात 2:51 तक

    इसी दिन गोपाष्टमी है, गायों की पूजा का दिन, जिसका अपना पन्ना है।

    सूर्योदय: सुबह 6:36

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  12. 6दिसंबर

    अगहन दुर्गाष्टमी

    मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी · तिथि 5 दिसंबर, रात 9:37 से 7 दिसंबर, रात 12:00 तक

    मार्गशीर्ष को लोक में अगहन कहते हैं, इसलिए इसकी अष्टमी अगहन दुर्गाष्टमी कहलाती है। जाड़ा आ चुका है, और यह इस सूची की आख़िरी दुर्गाष्टमी है।

    सूर्योदय: सुबह 7:00

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कथा

मासिक दुर्गाष्टमी की कथा

मासिक दुर्गाष्टमी पर जो कथा पढ़ी जाती है, वह महिषासुर की कथा है, और यह श्रीमद् देवी भागवत से आती है। देवी भागवत के पाँचवें स्कंध में कथा है कि रंभ नाम का एक दानव था। रंभ मारा गया तो उसके साथ रहने वाली भैंस उसकी चिता पर चढ़ गई, और उसी आग की लपटों से एक बेटा निकला: महिष।

महिष ने सुमेरु पर्वत पर दस हज़ार बरस तप किया। ब्रह्मा अपने हंस पर आए और बोले, वर माँगो। महिष ने पहले अमर होना माँगा। ब्रह्मा बोले, जो जन्मा है वह मरेगा, यह वर नहीं मिलता। तब महिष ने माँगा: मुझे कोई देवता, कोई दानव, कोई आदमी, कोई भी पुरुष न मार सके। ब्रह्मा ने हाँ कही, पर साथ में कहा, तुम्हारी मौत आएगी ज़रूर, और किसी स्त्री के हाथ से आएगी।

वर के बल पर महिष देवताओं पर भारी पड़ गया, और हारे हुए देवता विष्णु के पास जुटे। तब हर देवता के भीतर से तेज निकला, ब्रह्मा का, शिव का, विष्णु का, इंद्र, कुबेर, यम, अग्नि और वरुण का, और वह सारा उजाला मिलकर एक देवी बन गया। देवी भागवत गिनाता है कि मुँह शिव के तेज से बना, बाल यम के, तीनों आँखें अग्नि के, और अठारह भुजाएँ विष्णु के। फिर सबने अपने हथियार दिए: विष्णु ने चक्र, शिव ने त्रिशूल, इंद्र ने वज्र और अपने हाथी ऐरावत का घंटा, वरुण ने शंख और पाश, वायु ने धनुष और तीरों से भरा तरकश, और ब्रह्मा ने गंगाजल से भरा कमंडल। हिमालय ने सवारी के लिए सुनहरा सिंह दिया।

आख़िरी लड़ाई की कथा देवी माहात्म्य में है, जो मार्कंडेय पुराण का हिस्सा है और जिसे दुर्गा सप्तशती कहते हैं। देवी ने महिष को पाश में बाँधा तो उसने भैंसे का रूप छोड़ा और सिंह बन गया। फिर तलवार और ढाल वाला आदमी बना, फिर एक बड़ा हाथी, जिसने सूँड़ से देवी के सिंह को खींचा; देवी ने तलवार से वह सूँड़ काट दी। महिष फिर भैंसा बना और सींगों से पहाड़ उठा उठाकर फेंकने लगा। देवी ने मधु पिया, हँसीं, और बोलीं: 'गर्ज गर्ज क्षणं मूढ मधु यावत्पिबाम्यहम्। मया त्वयि हतेऽत्रैव गर्जिष्यन्त्याशु देवताः॥' (देवी माहात्म्य 3.38)। मतलब: अरे मूर्ख, जब तक मैं यह मधु पीती हूँ, तब तक गरज ले। मेरे हाथों तेरे मरते ही यहीं देवता गरजेंगे।

फिर देवी उछलकर उस पर चढ़ गईं, उसकी गर्दन पर पाँव रखा और त्रिशूल मारा। महिष अपने ही मुँह से आधा बाहर निकल आया, और उसी हाल में भी लड़ता रहा। तब देवी ने अपनी बड़ी तलवार से उसका सिर काट दिया। ब्रह्मा की बात सच हुई: जिसे कोई पुरुष नहीं मार सकता था, वह एक स्त्री के हाथ से मरा।

व्रत

मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत कैसे रखें

  1. सुबह नहाकर, साफ़ कपड़े पहनकर, देवी के आगे व्रत का संकल्प लेते हैं, यानी मन में पक्का करते हैं कि आज व्रत है।
  2. व्रत पूरे दिन का है; जो निर्जल रह सकें वे बिना पानी के रहते हैं।
  3. जो निर्जल न रह सकें, वे फलाहार, दूध या चाय ले सकते हैं।
  4. जो भी खाएँ, वह सात्विक हो: लहसुन, प्याज़, मांस और शराब नहीं।
  5. दिन भर मन साफ़ रखते हैं, ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं और बुरे ख़यालों से बचते हैं।

पारण: व्रत कैसे खोलें

पंचांग इसे पूरे दिन का व्रत बताते हैं, अष्टमी के दिन का, पर एकादशी की तरह इसके पारण की कोई अलग घड़ी नहीं लिखते। इसलिए व्रत उसी दिन पूजा, पाठ और आरती के बाद, घर की अपनी रीत से खोलते हैं। व्रत खोलने का खाना भी सात्विक ही रहता है: लहसुन, प्याज़, मांस और शराब नहीं।

उनतालीस लंकाएँ

रामकथाओं में मासिक दुर्गाष्टमी

उनतालीस लंकाएँ जिन रामकथाओं से बनी है, उनमें से ये इस दिन को छूती हैं। हर कथा के नाम पर उसका अपना पन्ना है।

अद्भुत रामायण

संस्कृत · Adbhuta Ramayana

अद्भुत रामायण शाक्त परंपरा की रामकथा है, सत्ताईस सर्गों की, और इसमें सीता केंद्र में हैं। यहाँ लंका के बाद कथा ख़त्म नहीं होती: पुष्कर द्वीप पर हज़ार सिर वाला एक और रावण खड़ा होता है, जिसके आगे राम बेहोश हो जाते हैं। तब सीता महाकाली का रूप लेती हैं और उस रावण को गिराती हैं। महिषासुर की कथा की तरह यहाँ भी जिसे कोई नहीं हरा पाता, उसे आख़िर में देवी ही हराती हैं।

कहाँ कैसे

मासिक दुर्गाष्टमी कहाँ कैसे मनाया जाता है

  • उत्तर भारत के घर

    यहाँ के घरों में इस दिन दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ होता है, और जहाँ हो सके, छोटी बच्चियों को खिलाते हैं।

  • राजस्थान और उत्तर प्रदेश

    पौष की अष्टमी से शाकंभरी नवरात्रि शुरू होती है, जो पौष पूर्णिमा तक चलती है। इसलिए पौष वाली मासिक दुर्गाष्टमी यहाँ एक और नवरात्रि का पहला दिन भी है।

  • कर्नाटक

    शाकंभरी देवी यहाँ बनशंकरी कहलाती हैं। पौष की बनदा अष्टमी उनकी नवरात्रि का बड़ा दिन है।

  • मथुरा और उत्तर भारत के गाँव

    फाल्गुन की अष्टमी से होलाष्टक लगता है। मथुरा और वृंदावन के मंदिरों में होली के कार्यक्रम शुरू हो जाते हैं, और गाँवों में होलिका की जगह पर सूखी लकड़ियाँ जुटने लगती हैं।

रीत

मासिक दुर्गाष्टमी के दिन क्या करते हैं

  1. सुबह पूजा की जगह साफ़ करके चौकी पर माँ दुर्गा की तस्वीर रखते हैं।
  2. देवी को लाल चुनरी ओढ़ाते हैं, और लाल फूल, रोली, अक्षत और सिंदूर चढ़ाते हैं।
  3. घी का दीया और धूप जलाते हैं, और भोग में खीर और मौसम के फल रखते हैं।
  4. दुर्गा चालीसा, दुर्गा सप्तशती या देवी कवच का पाठ करते हैं।
  5. महिषासुर वाली कथा पढ़ते या सुनते हैं, और फिर आरती करके देवी को प्रणाम करते हैं।
  6. जहाँ हो सके, छोटी बच्चियों को खिलाते हैं, और अपनी ताक़त के हिसाब से किसी ज़रूरतमंद को दान देते हैं।

रसोई

मासिक दुर्गाष्टमी का खाना

  • खीर देवी के भोग की थाली में।
  • मौसम के फल भोग में भी, और फलाहार वालों के लिए भी।

सवाल जवाब

मासिक दुर्गाष्टमी 2027: पूछे जाने वाले सवाल

मासिक दुर्गाष्टमी 2027 में कब कब है?

मासिक दुर्गाष्टमी 2027 में 12 बार आती है, हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी को। पहली 16 जनवरी, शनिवार को है, और आख़िरी 6 दिसंबर, सोमवार को। हर तारीख़ की तिथि, सूर्योदय और उस दिन की अपनी बात नीचे है। समय नई दिल्ली के हैं।

मासिक दुर्गाष्टमी के व्रत में क्या खा सकते हैं?

जो निर्जल न रह सकें वे फलाहार, दूध या चाय ले सकते हैं। जो भी खाएँ वह सात्विक हो: लहसुन, प्याज़, मांस और शराब नहीं।

मासिक दुर्गाष्टमी साल में कितनी बार आती है?

हर महीने एक बार, शुक्ल पक्ष की अष्टमी को, यानी साल में बारह बार। जिस साल अधिक मास जुड़ता है, उसमें एक और आ जाती है।

मासिक दुर्गाष्टमी और दुर्गा अष्टमी में क्या फ़र्क़ है?

मासिक दुर्गाष्टमी हर महीने आती है। दुर्गा अष्टमी, जिसे महाअष्टमी कहते हैं, उनमें से आश्विन वाली है, शारदीय नवरात्रि का आठवाँ दिन, और वही साल की सबसे बड़ी दुर्गाष्टमी है।

मासिक दुर्गाष्टमी पर कौन सी कथा पढ़ें?

महिषासुर की कथा, जो श्रीमद् देवी भागवत से आती है। बहुत से लोग दुर्गा सप्तशती का पाठ भी करते हैं, जिसमें महिषासुर के अंत की लड़ाई है।

क्या मासिक दुर्गाष्टमी पर कन्या पूजन करते हैं?

कर सकते हैं। पूजा के विधान में कहा गया है कि हो सके तो छोटी बच्चियों को खिलाएँ और उन्हें कुछ दान दें।

स्रोत

यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया

  1. Drik Panchang: Masik Durgashtamiहर महीने की शुक्ल अष्टमी, दिन भर का व्रत, देवी भागवत की महिषासुर कथा, आश्विन की महाअष्टमी
  2. Navbharat Live: Ashadh Masik Durgashtami puja vidhiपूजा की विधि, लाल चुनरी और भोग, सप्तशती का पाठ, फलाहार, सात्विक नियम, कन्याओं को खिलाना
  3. The Devi Bhagavatam, Book 5, Chapter 2: On the birth of Danava Mahisa (sacred-texts mirror)महिष का जन्म, सुमेरु पर तप, ब्रह्मा का वर
  4. The Devi Bhagavatam, Book 5, Chapter 9: On the worship by the gods to the Devi (sacred-texts mirror)देवताओं के दिए हथियार, हिमालय का सिंह; अध्याय आठ से देवी के अंग किस तेज से बने
  5. Devi Mahatmyam, Chapter III: Slaying of Mahishasura (Aurobharati)महिष के बदलते रूप, गर्ज गर्ज वाला श्लोक, महिष का अंत
  6. Drik Panchang: Banada Ashtami and Shakambhari Navratriपौष की बनदा अष्टमी, शाकंभरी नवरात्रि, कर्नाटक की बनशंकरी
  7. Drik Panchang: Holashtakफाल्गुन शुक्ल अष्टमी से होलाष्टक, टाले जाने वाले काम, लकड़ियाँ जुटाना, मथुरा वृंदावन
  8. Drik Panchang: Sixteen days Mahalakshmi Vratभाद्रपद शुक्ल अष्टमी पर राधा अष्टमी, दूर्वा अष्टमी, सोलह दिन का महालक्ष्मी व्रत

तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।