उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027 · हर महीने का व्रत
प्रदोष व्रत 2027
Pradosh Vrat 2027
दिन जा चुका, रात अभी आई नहीं। उसी घड़ी में शिव।
प्रदोष व्रत 2027 में 25 बार आता है, हर महीने दो बार, दोनों पक्षों की त्रयोदशी को। पहला 5 जनवरी, मंगलवार को है, और आख़िरी 25 दिसंबर, शनिवार को। हर तारीख़ की तिथि, प्रदोष काल और उस दिन की अपनी बात नीचे है। समय नई दिल्ली के हैं।
आसमान का रंग बदल रहा है। नारंगी से राख जैसा।
मंदिर के आँगन में एक औरत नंदी के कान के पास झुकी है। होंठ हिल रहे हैं, आवाज़ नहीं आती।
भीतर पुजारी जी लिंग पर दूध डालते हैं, फिर गंगाजल, फिर एक एक करके बेल के पत्ते।
उसने सुबह से कुछ नहीं खाया। सूरज डूबने से पहले वह दोबारा नहाकर आई है।
दिन ढल चुका है, रात अभी पूरी आई नहीं। इसी बीच की घड़ी को प्रदोष कहते हैं।
कहते हैं, ऐसी ही एक शाम विष पीकर सोए शिव जागे, और नंदी के सींगों के बीच नाचे।
हर पखवाड़े की तेरहवीं शाम यह घड़ी लौटती है। वार बदलता है, और उसके साथ कथा भी।
2027 में कब
प्रदोष व्रत 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
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कोई व्रत, कोई त्योहार अब छूटेगा नहीं
आज से दिसंबर 2027 तक के 334 त्योहार और व्रत, तिथि और मुहूर्त के साथ, सीधे आपके फ़ोन के कैलेंडर में। हर त्योहार के साथ उसका शुभकामना कार्ड भी, अपनों को WhatsApp पर भेजने के लिए। एक बार दबाइए, बस।
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सारे समय नई दिल्ली के हैं, सूर्य और चंद्रमा की असली चाल से निकाले गए। दूसरे शहरों में कुछ मिनट या कभी एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है। शुभ काम का समय अपने पंडित जी से पक्का कर लें।
पहचान
प्रदोष व्रत क्या है
प्रदोष व्रत चाँद की तेरहवीं तिथि, यानी त्रयोदशी, का व्रत है, और हर महीने दो बार आता है: एक बार शुक्ल पक्ष में, एक बार कृष्ण पक्ष में। प्रदोष का मतलब है रात का पहला हिस्सा, सूरज डूबने के बाद की वह घड़ी जब दिन जा चुका है और रात अभी पूरी आई नहीं। शिव की पूजा इसी घड़ी में होती है, इसलिए प्रदोष का दिन सूरज निकलने से नहीं, सूरज डूबने से तय होता है: जिस दिन सूरज डूबने के बाद त्रयोदशी चल रही हो, वही व्रत का दिन है। इसी वजह से कभी कभी व्रत पिछली तिथि, द्वादशी, वाले दिन पड़ जाता है, और दो शहरों में सूरज डूबने का समय अलग होने से दिन भी अलग हो सकता है। दक्षिण भारत में इसे प्रदोषम कहते हैं। प्रदोष जिस वार को पड़े, उसी वार के नाम से पुकारा जाता है: सोमवार को सोम प्रदोष, मंगलवार को भौम प्रदोष, शनिवार को शनि प्रदोष। हर वार का अपना फल है और अपनी कथा। हर प्रदोष काल का समय यह पन्ना नई दिल्ली के सूर्यास्त से गिनकर ऊपर देता है।
पूरी सूची
प्रदोष व्रत 2027: हर तारीख़
प्रदोष व्रत का फल उसके वार से जुड़ा है, इसलिए यहाँ तारीख़ें वार के हिसाब से हैं: हर वार की अपनी बात, और उसके नीचे उस वार पड़ने वाली 2027 की तारीख़ें, तिथि और प्रदोष काल के साथ।
रवि प्रदोष या भानु प्रदोष
रविवार के दिन · 2027 में 3 बार
रविवार के प्रदोष का फल लंबी उम्र और अच्छी सेहत बताया गया है। इसकी कथा में एक ग़रीब ब्राह्मण का बेटा गंगा नहाने निकलता है; डाकू उसे छोड़ देते हैं क्योंकि उसकी पोटली में बस माँ की बाँधी रोटियाँ हैं, पर राजा के सिपाही उसे चोर समझकर क़ैद कर लेते हैं। माँ प्रदोष रखकर शिव को पुकारती है, शिव राजा को सपने में चेताते हैं, और राजा लड़के को छोड़कर परिवार को पाँच गाँव देता है।
- 4 अप्रैलचैत्र कृष्ण त्रयोदशी · तिथि 4 अप्रैल, सुबह 4:27 से 5 अप्रैल, सुबह 5:24 तकप्रदोष काल: शाम 6:41 से रात 9:05 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 18 अप्रैलचैत्र शुक्ल त्रयोदशी · तिथि 18 अप्रैल, सुबह 7:43 से 19 अप्रैल, सुबह 6:09 तकप्रदोष काल: शाम 6:48 से रात 9:12 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 29 अगस्तभाद्रपद कृष्ण त्रयोदशी · तिथि 29 अगस्त, सुबह 9:36 से 30 अगस्त, सुबह 6:13 तकप्रदोष काल: शाम 6:46 से रात 9:10 तक+ यह दिन कैलेंडर में
सोम प्रदोष
सोमवार के दिन · 2027 में 4 बार
सोमवार शिव का अपना दिन माना जाता है, इसलिए सोम प्रदोष बहुत बड़ा गिना जाता है, और इसका फल मन की मुराद पूरी होना कहा गया है। इसकी कथा वही विधवा ब्राह्मणी और विदर्भ के राजकुमार वाली है जो ऊपर पढ़ी, जिसके अंत में राजकुमार ब्राह्मणी के बेटे को प्रधान मंत्री बनाता है। साल का एक सोम प्रदोष बकरीद वाले दिन भी पड़ता है, जिसका अपना पन्ना है।
- 3 मईवैशाख कृष्ण त्रयोदशी · तिथि 3 मई, रात 8:05 से 4 मई, रात 7:31 तकप्रदोष काल: शाम 6:57 से रात 9:21 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 17 मईवैशाख शुक्ल त्रयोदशी · तिथि 17 मई, शाम 4:29 से 18 मई, शाम 4:04 तकप्रदोष काल: शाम 7:06 से रात 9:30 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 13 सितंबरभाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी · तिथि 12 सितंबर, रात 10:13 से 14 सितंबर, रात 12:40 तकप्रदोष काल: शाम 6:29 से रात 8:53 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 27 सितंबरआश्विन कृष्ण त्रयोदशी · तिथि 27 सितंबर, शाम 4:56 से 28 सितंबर, दोपहर 1:55 तकप्रदोष काल: शाम 6:12 से रात 8:36 तक+ यह दिन कैलेंडर में
भौम प्रदोष या मंगल प्रदोष
मंगलवार के दिन · 2027 में 2 बार
मंगलवार के प्रदोष का फल रोग और कर्ज़ से छुटकारा बताया गया है। इसकी कथा हनुमान की है। कहते हैं, एक बूढ़ी माँ हर मंगलवार हनुमान का व्रत रखती थीं; हनुमान साधु बनकर परीक्षा लेने आए और उनके इकलौते बेटे की पीठ पर आग जलाकर खाना पकाने को कहा। माँ ने वचन निभाया, और जब साधु के कहने पर उन्होंने बेटे को पुकारा, तो बेटा ज़िंदा सामने आ गया, और हनुमान ने अपना रूप दिखाकर उन्हें भक्ति का वर दिया।
- 5 जनवरीपौष कृष्ण त्रयोदशी · तिथि 4 जनवरी, शाम 6:16 से 5 जनवरी, रात 8:40 तकप्रदोष काल: शाम 5:38 से रात 8:02 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 12 अक्टूबरआश्विन शुक्ल त्रयोदशी · तिथि 12 अक्टूबर, शाम 4:14 से 13 अक्टूबर, शाम 5:49 तकप्रदोष काल: शाम 5:55 से रात 8:19 तक+ यह दिन कैलेंडर में
सौम्य प्रदोष या बुध प्रदोष
बुधवार के दिन · 2027 में 5 बार
बुधवार के प्रदोष का फल हर इच्छा का पूरा होना कहा गया है, और इसकी पूजा में हरी चीज़ें और बेल पत्र चढ़ते हैं। कथा में एक नया ब्याहा आदमी ससुराल वालों के मना करने पर भी बुधवार को पत्नी को विदा कराकर ले चलता है; रास्ते में पानी लेकर लौटता है तो पत्नी के पास हू ब हू अपने जैसा एक आदमी पाता है, और जब वह शिव से अपनी भूल की माफ़ी माँगता है, तो वह दूसरा आदमी ग़ायब हो जाता है। साल के बुध प्रदोषों में एक धनतेरस वाले दिन पड़ता है और एक मुहर्रम वाले दिन, और दोनों के अपने पन्ने हैं।
- 20 जनवरीपौष शुक्ल त्रयोदशी · तिथि 20 जनवरी, सुबह 4:42 से 21 जनवरी, रात 1:12 तकप्रदोष काल: शाम 5:50 से रात 8:14 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 3 फ़रवरीमाघ कृष्ण त्रयोदशी · तिथि 3 फ़रवरी, दोपहर 1:51 से 4 फ़रवरी, शाम 4:32 तकप्रदोष काल: शाम 6:02 से रात 8:26 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 2 जूनज्येष्ठ कृष्ण त्रयोदशी · तिथि 2 जून, सुबह 8:29 से 3 जून, सुबह 6:35 तकप्रदोष काल: शाम 7:15 से रात 9:39 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 16 जूनज्येष्ठ शुक्ल त्रयोदशी · तिथि 16 जून, रात 2:31 से 17 जून, रात 3:21 तकप्रदोष काल: शाम 7:21 से रात 9:45 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 27 अक्टूबरकार्तिक कृष्ण त्रयोदशी · तिथि रात 1:04 से रात 10:50 तकप्रदोष काल: शाम 5:40 से रात 8:04 तक+ यह दिन कैलेंडर में
गुरु प्रदोष
गुरुवार के दिन · 2027 में 5 बार
गुरुवार के प्रदोष का फल दुश्मन पर जीत बताया गया है। कथा में इंद्र वृत्रासुर से लड़ रहे थे; देवगुरु बृहस्पति ने बताया कि वृत्र पिछले जन्म में राजा चित्ररथ था, जिसने कैलास पर शिव और पार्वती की हँसी उड़ाई और पार्वती के शाप से राक्षस बना, और उनके कहने पर इंद्र ने यह व्रत रखकर वृत्र को जीता। साल का एक गुरु प्रदोष तुलसी विवाह वाले दिन पड़ता है।
- 18 फ़रवरीमाघ शुक्ल त्रयोदशी · तिथि 18 फ़रवरी, दोपहर 2:28 से 19 फ़रवरी, सुबह 11:15 तकप्रदोष काल: शाम 6:13 से रात 8:37 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 1 जुलाईआषाढ़ कृष्ण त्रयोदशी · तिथि 1 जुलाई, शाम 6:15 से 2 जुलाई, दोपहर 3:24 तकप्रदोष काल: शाम 7:23 से रात 9:47 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 15 जुलाईआषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी · तिथि 15 जुलाई, दोपहर 2:41 से 16 जुलाई, शाम 4:35 तकप्रदोष काल: शाम 7:21 से रात 9:45 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 11 नवंबरकार्तिक शुक्ल त्रयोदशी · तिथि 11 नवंबर, सुबह 10:08 से 12 नवंबर, सुबह 10:22 तकप्रदोष काल: शाम 5:30 से रात 7:54 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 25 नवंबरमार्गशीर्ष कृष्ण त्रयोदशी · तिथि 25 नवंबर, सुबह 10:51 से 26 नवंबर, सुबह 9:48 तकप्रदोष काल: शाम 5:24 से रात 7:48 तक+ यह दिन कैलेंडर में
भृगु प्रदोष या शुक्र प्रदोष
शुक्रवार के दिन · 2027 में 1 बार
शुक्रवार के प्रदोष का फल सौभाग्य का बढ़ना बताया गया है। कथा में एक सेठ का बेटा शुक्र अस्त के दिनों में, सबके मना करने पर भी, पत्नी को ससुराल से ले आता है; रास्ते में बैलगाड़ी टूटती है, लुटेरे लूटते हैं, घर पहुँचते ही साँप डसता है, और तब एक ब्राह्मण मित्र के कहने पर पिता शुक्र प्रदोष रखकर शिव की पूजा करता है और बेटा धीरे धीरे ठीक हो जाता है। साल का एक शुक्र प्रदोष कश्मीर का हेरथ भी है, क्योंकि कश्मीरी पंडित अपनी शिवरात्रि त्रयोदशी को ही रखते हैं।
- 5 मार्चफाल्गुन कृष्ण त्रयोदशी · तिथि 5 मार्च, सुबह 9:54 से 6 मार्च, दोपहर 12:04 तकप्रदोष काल: शाम 6:23 से रात 8:47 तक+ यह दिन कैलेंडर में
शनि प्रदोष
शनिवार के दिन · 2027 में 5 बार
पुरानी सूची में शनिवार के प्रदोष का फल संतान बताया गया है, और आज बहुत से लोग इसे शनि की पीड़ा से राहत के लिए भी रखते हैं; तमिल मंदिरों की परंपरा में शनिवार का प्रदोष महा प्रदोष कहलाता है। उज्जैन के महाकाल की कथा भी शनि प्रदोष की है, जब राजा चंद्रसेन पर हमला हुआ और शिव ने आकर नगर बचाया। साल के शनि प्रदोषों में एक क्रिसमस वाले दिन पड़ता है और एक कर्नाटक के हनुमद व्रत वाले दिन।
- 20 मार्चफाल्गुन शुक्ल त्रयोदशी · तिथि 19 मार्च, रात 11:18 से 20 मार्च, रात 8:46 तकप्रदोष काल: शाम 6:32 से रात 8:56 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 31 जुलाईश्रावण कृष्ण त्रयोदशी · तिथि रात 2:19 से रात 10:58 तकप्रदोष काल: शाम 7:13 से रात 9:37 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 14 अगस्तश्रावण शुक्ल त्रयोदशी · तिथि 14 अगस्त, सुबह 5:22 से 15 अगस्त, सुबह 7:54 तकप्रदोष काल: शाम 7:02 से रात 9:26 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 11 दिसंबरमार्गशीर्ष शुक्ल त्रयोदशी · तिथि 11 दिसंबर, रात 2:54 से 12 दिसंबर, रात 1:43 तकप्रदोष काल: शाम 5:25 से रात 7:49 तक+ यह दिन कैलेंडर में
- 25 दिसंबरपौष कृष्ण त्रयोदशी · तिथि 24 दिसंबर, रात 11:09 से 25 दिसंबर, रात 11:32 तकप्रदोष काल: शाम 5:31 से रात 7:55 तक+ यह दिन कैलेंडर में
कथा
प्रदोष व्रत की कथा
स्कंद पुराण के ब्रह्मोत्तर खंड में प्रदोष की महिमा पर दो अध्याय हैं, और उनमें यह कथा आती है। विदर्भ के राजा सत्यरथ लड़ाई में मारे गए। उनकी रानी के पेट में बच्चा था। वे जान बचाकर जंगल में भाग गईं। एक तालाब के किनारे उन्होंने बेटे को जन्म दिया, और फिर एक मगर ने उन्हें मार डाला। बच्चा अकेला रह गया। उमा नाम की एक ब्राह्मणी, जिनके पति नहीं रहे थे, भीख माँगकर अपने बेटे शुचिव्रत को पाल रही थीं। उन्होंने उस राजकुमार को भी अपना लिया। दोनों लड़के साथ बड़े हुए, और राजकुमार का नाम पड़ा धर्मगुप्त।
एक दिन उमा दोनों लड़कों को लेकर शांडिल्य ऋषि के पास पहुँचीं। ऋषि ने राजकुमार को देखकर बताया कि यह दुख पिछले जन्म का फल है। राजा सत्यरथ ने एक बार प्रदोष की पूजा बीच में छोड़ दी थी, किसी को मौत की सज़ा सुनाने उठ गए थे, और पूजा पूरी किए बिना खाना खा लिया था। तब ऋषि ने ब्राह्मणी को प्रदोष का व्रत बताया, और कहा कि यह धन, अन्न, घर परिवार और अच्छे भाग देता है। उमा और दोनों लड़के हर त्रयोदशी की शाम शिव की पूजा करने लगे।
चार महीने बीते, आठवाँ प्रदोष आया, और शुचिव्रत को अमृत से भरा एक कलश मिला। फिर एक दिन धर्मगुप्त को एक गंधर्व कन्या दिखी, अंशुमती। दोनों एक दूसरे को भा गए। अंशुमती के पिता, गंधर्वों के राजा, ने कहा कि ख़ुद शिव ने उन्हें इस राजकुमार की मदद करने को कहा है। धर्मगुप्त का अंशुमती से ब्याह हुआ। गंधर्व राजा की सेना ने उसके दुश्मनों को मार गिराया, और विदर्भ का राज उसे वापस मिल गया। कथा कहती है कि आगे चलकर वह शिव के लोक को गया। घरों में यही कथा सोम प्रदोष की कथा बनकर भी पढ़ी जाती है: वहाँ ब्राह्मणी राजकुमार को घायल हालत में पाती है, और राज वापस पाकर राजकुमार ब्राह्मणी के बेटे को अपना प्रधान मंत्री बनाता है।
दूसरी कथा यह बताती है कि पूजा शाम को ही क्यों होती है, और यह तमिल शिव मंदिरों की परंपरा में चलती है, जो इसे शांडिल्य ऋषि की कही प्रदोष महिमा से जोड़ती है। देवताओं और असुरों ने समुद्र मथा तो सबसे पहले हलाहल विष निकला। देवता डरकर कैलास भागे, पर द्वार पर नंदी ने उन्हें रोक लिया, और वे विष और नंदी के बीच पहाड़ के चक्कर काटते रहे। तब शिव ने नंदी से विष मँगवाकर पी लिया। पार्वती ने उनका गला थाम लिया, विष गले में रुक गया और गला नीला पड़ गया, इसलिए वे नीलकंठ कहलाए। शिव पार्वती की गोद में सिर रखकर लेटे रहे, और त्रयोदशी की शाम, सूरज डूबने के समय, जागे। फिर उन्होंने नंदी के सिर पर, दोनों सींगों के बीच, नाच किया। तभी से त्रयोदशी की यह शाम प्रदोष की घड़ी मानी जाती है, और मंदिरों में लोग आज भी नंदी के सींगों के बीच से लिंग के दर्शन करते हैं।
व्रत
प्रदोष व्रत का व्रत कैसे रखें
- सुबह सूरज निकलने से पहले उठकर नहाते हैं, शिव का ध्यान करते हैं और दिन भर के व्रत का संकल्प लेते हैं, यानी मन में पक्का करते हैं कि आज व्रत है।
- जो कर सके वह निर्जल रहता है, यानी पानी भी नहीं; जो न कर सके वह फलाहार पर रहता है।
- व्रत में अन्न, दालें, प्याज़, लहसुन और मांस नहीं चलते, और नमक बस सेंधा।
- रवि प्रदोष की विधि में दिन में बस एक बार खाने और रात को ज़मीन पर सोने की बात भी आती है।
- सूरज डूबने से कोई घंटा भर पहले दोबारा नहाते हैं, या कम से कम हाथ मुँह धोते हैं।
- प्रदोष काल में पूजा होती है, और उसी वार की प्रदोष कथा पढ़ी या सुनी जाती है जिस वार व्रत पड़ा है।
- पूजा और आरती के बाद शिव का प्रसाद लेकर व्रत खोलते हैं; कुछ लोग उसके बाद रात भर जागरण भी करते हैं।
पारण: व्रत कैसे खोलें
प्रदोष का व्रत ज़्यादातर उसी शाम खुल जाता है। प्रदोष काल में शिव की पूजा पूरी हो, भोग लगे और कपूर से आरती हो जाए, तब वही प्रसाद लेकर व्रत खोला जाता है। यानी यहाँ पारण सूरज डूबने के बाद की पूजा से जुड़ा है, अगली सुबह से नहीं। कुछ विधियों में व्रत खुलने के बाद रात भर जागरण की बात भी है। जिसकी सेहत पूरा व्रत न सहे, वह बिना प्याज़ लहसुन का सादा खाना खाकर भी प्रदोष काल में पूजा कर सकता है।
कहाँ कैसे
प्रदोष व्रत कहाँ कैसे मनाया जाता है
तमिलनाडु और दक्षिण के शिव मंदिर
प्रदोष काल में नंदी का दूध, चंदन और पानी से अभिषेक होता है, और लोग अपनी मन्नत धीरे से नंदी के कान में कहते हैं, क्योंकि माना जाता है कि इस घड़ी नंदी शिव के सबसे पास हैं। फिर सोमसूत्र प्रदक्षिणा होती है: नंदी, चंडिकेश्वर और गोमुखी, यानी अभिषेक का पानी बहने वाली नाली, के बीच आगे पीछे चलते हुए तीन चक्कर, जिनमें गोमुखी कभी लाँघी नहीं जाती। रास्ता आधे चाँद जैसा बनता है, इसलिए नाम सोमसूत्र है।
दक्षिण भारत के शिवालय
प्रदोष की शाम नंदी पर खड़े शिव और पार्वती की छोटी मूर्ति, जिसे प्रदोष नायक कहते हैं, मंदिर के भीतर घुमाई जाती है, और भक्त उसके पीछे पीछे चलते हैं।
उज्जैन, मध्य प्रदेश
उज्जैन की कथा है कि राजा चंद्रसेन पर पड़ोसी राजाओं ने शनि प्रदोष के दिन हमला किया। श्रीखर नाम के एक बच्चे और वृद्धि नाम के पुजारी ने क्षिप्रा के किनारे शिव को पुकारा, और शिव ने आकर हमलावरों को हराया और वहीं स्वयंभू लिंग बनकर रह गए।
उत्तर भारत के घर
यहाँ लोग अक्सर किसी एक वार का प्रदोष पकड़ लेते हैं। जिस वार का व्रत लिया, बस उसी वार पड़ने वाली त्रयोदशी रखते हैं।
रीत
प्रदोष व्रत के दिन क्या करते हैं
- पूजा गणेश से शुरू होती है, फिर शिव के साथ पार्वती, स्कंद और नंदी की पूजा होती है।
- ज़मीन पर चौकोर मंडल बनाकर उसमें कमल खींचते हैं, उस पर दर्भ यानी कुश बिछाकर कलश रखते हैं, और उसी कलश में शिव को बुलाते हैं।
- लिंग का पंचामृत से अभिषेक होता है, फिर गंगाजल से, और उस पर भस्म या चंदन का त्रिपुंड, यानी तीन आड़ी लकीरें, बनाते हैं।
- बेल के पत्ते, धतूरा और सफ़ेद फूल चढ़ते हैं; मान्यता है कि इस घड़ी चढ़ाया एक बेल पत्र भी सौ बड़ी पूजाओं के बराबर है।
- महामृत्युंजय मंत्र के एक सौ आठ जाप होते हैं, या ॐ नमः शिवाय की माला।
- इस शाम शिवालय में दीये ज़्यादा जलते हैं; कहते हैं प्रदोष में एक बत्ती जलाना भी बड़ा पुण्य है।
- पूजा के आख़िर में कलश का जल लेते हैं, माथे पर भस्म लगाते हैं, और किसी ब्राह्मण को घड़ा, कपड़ा और भगवान की मूर्ति दान करते हैं।
रसोई
प्रदोष व्रत का खाना
- फल और दूध फलाहार वाले व्रत का सबसे सीधा खाना।
- साबूदाना खिचड़ी या खीर, सेंधा नमक के साथ।
- मखाना भूनकर, या दूध में पकाकर।
- कुट्टू का आटा अन्न की जगह, पूरी या पकौड़ी के लिए।
- सूखे मेवे दिन भर के व्रत में थोड़ा थोड़ा।
सवाल जवाब
प्रदोष व्रत 2027: पूछे जाने वाले सवाल
प्रदोष व्रत 2027 में कब कब है?
प्रदोष व्रत 2027 में 25 बार आता है, हर महीने दो बार, दोनों पक्षों की त्रयोदशी को। पहला 5 जनवरी, मंगलवार को है, और आख़िरी 25 दिसंबर, शनिवार को। हर तारीख़ की तिथि, प्रदोष काल और उस दिन की अपनी बात नीचे है। समय नई दिल्ली के हैं।
प्रदोष व्रत महीने में कितनी बार आता है?
दो बार। हर महीने के दोनों पक्षों की त्रयोदशी को, एक बार अमावस्या के बाद और एक बार पूर्णिमा के बाद।
प्रदोष काल क्या होता है?
सूरज डूबने के आसपास की घड़ी, जब दिन और रात मिलते हैं। कोई इसे सूरज डूबने से पौन घंटा पहले से पौन घंटा बाद तक मानता है, और पंचांग वह समय लेते हैं जब सूर्यास्त के बाद त्रयोदशी और प्रदोष साथ चल रहे हों।
प्रदोष व्रत में क्या खा सकते हैं?
फल, दूध, सूखे मेवे, मखाना, साबूदाना और कुट्टू, सेंधा नमक के साथ। अन्न, दालें, प्याज़ और लहसुन नहीं; और जो निर्जल व्रत रखते हैं वे पानी भी नहीं लेते।
प्रदोष व्रत का पारण कब करें?
उसी शाम, प्रदोष काल की पूजा, भोग और आरती के बाद, शिव का प्रसाद लेकर। अगली सुबह तक रुकना ज़रूरी नहीं।
किस वार के प्रदोष का क्या फल है?
रवि का लंबी उम्र और सेहत, सोम का मन की मुराद, मंगल का रोग और कर्ज़ से छुटकारा, बुध का हर इच्छा पूरी होना, गुरु का दुश्मन पर जीत, शुक्र का सौभाग्य, और शनि का संतान। यह फल पुरानी सूचियों में ऐसे ही गिनाए गए हैं।
अलग अलग पंचांग में प्रदोष की तारीख़ अलग क्यों होती है?
क्योंकि प्रदोष का दिन सूरज डूबने के समय से तय होता है, और यह समय हर शहर में अलग है। जहाँ सूर्यास्त के बाद त्रयोदशी हो, व्रत वहीं का; इसलिए कभी यह द्वादशी वाले दिन भी पड़ जाता है।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Pradosham Dates (Drik Panchang)दोनों त्रयोदशी, सूर्यास्त से दिन तय होना, द्वादशी पर पड़ना, शहर के हिसाब से फ़र्क़, सोम, भौम और शनि प्रदोष के नाम
- Pradosha (Wikipedia)प्रदोष शब्द का अर्थ, स्कंद पुराण की कथा में सत्यरथ, रानी, मगर, उमा, शांडिल्य और पिछले जन्म की भूल, उज्जैन की कथा, नंदी पर सवारी
- Pradosha Vrata (The Divine Life Society)शुचिव्रत और धर्मगुप्त, आठवें प्रदोष पर अमृत कलश, गंधर्व कन्या, राज लौटना, पूजा का क्रम, कलश और मंडल, महामृत्युंजय, दीये, बेल पत्र, दान, जागरण
- The Circumambulation of the Crescent, Somasooktha Pradakshinam (Kshetra Puranas)हलाहल, नंदी, सींगों के बीच नाच, प्रदोष महिमा, नंदी का अभिषेक और कान में मन्नत, सोमसूत्र प्रदक्षिणा, शनिवार का महा प्रदोष
- प्रदोष व्रत (भारतकोश)प्रदोष काल की परिभाषा, सातों वार के फल, वार की कथा पढ़ने का नियम, रवि, सोम, मंगल, बुध और गुरु प्रदोष की कथाएँ, रवि प्रदोष में एक समय भोजन
- भौम प्रदोष व्रत कथा (Bhakti Bharat)बूढ़ी माँ, साधु बने हनुमान, बेटे की पीठ पर आग और बेटे का लौटना
- Shukra Pradosh Vrat katha (Navbharat Live)शुक्र अस्त में पत्नी को लाना, बैलगाड़ी, लुटेरे, साँप और शुक्र प्रदोष से बेटे का बचना
- प्रदोष व्रत: सातों प्रदोष (SmartPuja)सुबह का संकल्प, फलाहार, क्या खाएँ और क्या नहीं, अभिषेक और त्रिपुंड, शाम की पूजा के बाद प्रसाद से पारण, पौन घंटे वाला प्रदोष काल, शनि प्रदोष और शनि की पीड़ा
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।