उनतालीस लंकाएँ पंचांग 2027
मिलाद उन नबी 2027
Milad un Nabi 2027
रबीउल अव्वल की बारहवीं रात, और गलियों में हरे झंडे।
मिलाद उन नबी 2027 में 15 अगस्त, रविवार को होने की उम्मीद है। पक्की तारीख़ चाँद दिखने पर तय होती है, इसलिए एक दिन आगे पीछे हो सकती है।
सिलाई मशीन की खटखट देर रात तक चल रही है।
मेज़ पर हरे कपड़े के तह किए टुकड़े हैं। हर टुकड़ा एक झंडा बनेगा।
बाहर कोई सीढ़ी पर चढ़कर बल्बों की लड़ी बाँध रहा है, गली से मस्जिद की मीनार तक।
मस्जिद से एक आवाज़ उठती है। कोई नात पढ़ रहा है, यानी नबी की शान में कही गई कविता।
बच्चे कलाई पर हरा रिबन बाँधकर इधर उधर दौड़ रहे हैं।
सुबह जुलूस निकलेगा। ये झंडे उसमें आगे आगे चलेंगे।
हर नात, हर क़दम, एक ही बात दोहराएगा।
परंपरा कहती है, इसी महीने की इसी तारीख़ को पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) इस दुनिया में आए थे।
2027 में कब
मिलाद उन नबी 2027: तारीख़, तिथि और मुहूर्त
तारीख़15 अगस्त, रविवार
नक्षत्रउत्तराषाढ़ासूर्योदय के समय
सूर्योदयसुबह 5:50
सूर्यास्तशाम 7:01
चंद्रोदयशाम 5:55
भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची में मिलाद उन नबी 15 अगस्त को है, उसी दिन स्वतंत्रता दिवस भी है। चाँद के हिसाब से इसमें एक दिन का फ़र्क़ हो सकता है।
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पहचान
मिलाद उन नबी क्या है
मिलाद उन नबी, जिसे ईद ए मिलाद या मौलिद भी कहते हैं, पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के जन्म की याद का दिन है। परंपरा के मुताबिक़ यह इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने रबीउल अव्वल की बारहवीं तारीख़ है; बहुत से सुन्नी मुसलमान इसी दिन इसे याद करते हैं, जबकि शिया परंपरा में इसी महीने की सत्रहवीं तारीख़ मानी जाती है। परंपरा यह भी कहती है कि बारह रबीउल अव्वल पैग़म्बर के इस दुनिया से जाने का दिन भी है। महीना नया चाँद दिखने से शुरू होता है, इसलिए हिसाब की तारीख़ एक दिन आगे पीछे हो सकती है। सब मुसलमान इसे त्योहार की तरह नहीं मानते, इसकी बात नीचे है।
कथा
मिलाद उन नबी की कथा
शुरू के दौर में यह दिन किसी बड़े सार्वजनिक जश्न की तरह नहीं होता था। ग्यारहवीं सदी के आख़िर तक मिस्र में फ़ातिमी ख़लीफ़ाओं के दरबार में चार मौलिद होते थे: पैग़म्बर का, उनकी बेटी हज़रत फ़ातिमा का, हज़रत अली का और उस वक़्त के ख़लीफ़ा का। ये दरबार के अफ़सरों के सादे जुलूस थे, जो ख़लीफ़ा के आगे तीन ख़ुत्बों पर ख़त्म होते थे।
सुन्नी परंपरा 1207 में इराक़ के इरबिल शहर, मोसुल के पास, हुए जश्न को पहला बड़ा मौलिद मानती है। उसे सुल्तान सलाहुद्दीन के एक बहनोई ने करवाया था। यह क़रीब एक महीने चला, और आख़िर में मशालों का जुलूस निकला; मौलिद के दिन सबके सामने ख़ुत्बा हुआ और दावत हुई। फिर सूफ़ी सिलसिलों के साथ साथ यह दिन तेरहवीं सदी के आसपास पूरी मुस्लिम दुनिया में फैल गया।
आज भी इस दिन पैग़म्बर की ज़िंदगी पर कही गई कविताएँ पढ़ी जाती हैं; हिंदुस्तान में इन्हें नात कहते हैं। मानने वाले इसे पैग़म्बर से मुहब्बत जताने और उनकी सीख को याद करने का दिन कहते हैं।
पर सब मुसलमान इसे एक जैसा नहीं देखते। कुछ आलिम इसे बिदअत मानते हैं, यानी दीन में बाद में जोड़ी गई नई बात। सलफ़ी और वहाबी परंपरा इसका विरोध करती है, और देवबंदी आलिम भी इसके सार्वजनिक जश्न को ठीक नहीं मानते। इसलिए किसी मोहल्ले में यह दिन जुलूस और रोशनी के साथ आता है, और किसी घर में बिना किसी ख़ास रस्म के।
कहाँ कैसे
मिलाद उन नबी: कहाँ और कैसे
श्रीनगर, हज़रतबल
हज़रतबल दरगाह में एक बाल रखा है जिसे पैग़म्बर का माना जाता है। एक रात पहले से हज़ारों लोग दुआ के लिए जुटते हैं, और सुबह की नमाज़ के बाद उसका दीदार कराया जाता है।
हैदराबाद
बड़े जुलूस निकलते हैं और दीन की बड़ी सभाएँ होती हैं।
मुंबई
बड़े जुलूस शहर के बीच की सड़कों से गुज़रते हैं, और मीनारा मस्जिद पूरी तरह सजाई जाती है।
बेंगलुरु
जुलूस निकलते हैं, महफ़िलें सजती हैं, नमाज़ होती है, और घरों में बिरयानी पकती है।
भदोही, उत्तर प्रदेश
मिलाद के दिन यहाँ की गलियों से जुलूस निकलता है।
रीत
मिलाद उन नबी के दिन क्या करते हैं
- मस्जिदों और घरों में रात भर दुआ और इबादत होती है।
- महफ़िलों में नात पढ़ी जाती है, और पैग़म्बर की ज़िंदगी और सीख के क़िस्से सुनाए जाते हैं।
- जुलूस में लोग हरे झंडे और बैनर लेकर चलते हैं, कलाई पर हरा रिबन बाँधते हैं; हरा रंग इस्लाम और जन्नत की निशानी माना जाता है।
- घर, मस्जिदें और गलियाँ झंडियों और रोशनी से सजती हैं।
- ख़ुत्बे के बाद फ़ातिहा पढ़ी जाती है, अगरबत्ती जलती है, लोगों पर गुलाबजल छिड़का जाता है और बताशे बँटते हैं।
- कई जगह पैग़म्बर के क़दम के निशान, यानी क़दम ए रसूल, पर संदल चढ़ाया जाता है।
- मस्जिदों और मोहल्लों में मिलकर खाना होता है।
रसोई
मिलाद उन नबी का खाना
- शीर ख़ुरमा घरों में बनने और रिश्तेदारों में बँटने वाला मीठा।
- सेवइयाँ घरों से दोस्तों और रिश्तेदारों तक जाती हैं।
- बताशे महफ़िल के बाद बाँटी जाने वाली मिठाई।
- बिरयानी मोहल्ले की दावतों का खाना।
सवाल जवाब
मिलाद उन नबी 2027: पूछे जाने वाले सवाल
मिलाद उन नबी 2027 कब है?
मिलाद उन नबी 2027 में 15 अगस्त, रविवार को होने की उम्मीद है। पक्की तारीख़ चाँद दिखने पर तय होती है, इसलिए एक दिन आगे पीछे हो सकती है।
मिलाद उन नबी किस तारीख़ को होता है?
इस्लामी कैलेंडर के तीसरे महीने रबीउल अव्वल की बारहवीं तारीख़ को, जैसा बहुत से सुन्नी मुसलमान मानते हैं। शिया परंपरा में इसी महीने की सत्रहवीं तारीख़ मानी जाती है।
ईद ए मिलाद पर हरे झंडे क्यों लगाते हैं?
हरा रंग इस्लाम और जन्नत की निशानी माना जाता है, इसलिए जुलूस में लोग हरे झंडे, बैनर और रिबन लेकर चलते हैं।
नात क्या होती है?
नात पैग़म्बर मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की शान, ज़िंदगी और सीख पर कही गई कविता है, जो मिलाद की महफ़िलों में पढ़ी जाती है।
क्या सभी मुसलमान मिलाद उन नबी मनाते हैं?
नहीं। कुछ आलिम इसे बिदअत, यानी दीन में बाद में जोड़ी गई बात मानते हैं, और सलफ़ी, वहाबी और देवबंदी परंपराएँ इसके सार्वजनिक जश्न से दूर रहती हैं। बहुत से दूसरे मुसलमान इसे मुहब्बत और याद का दिन मानते हैं।
मिलाद उन नबी की शुरुआत कब हुई?
ग्यारहवीं सदी के आख़िर में मिस्र के फ़ातिमी दरबार में मौलिद होने लगे थे। सुन्नी परंपरा 1207 में इरबिल के जश्न को पहला बड़ा मौलिद मानती है, और तेरहवीं सदी के आसपास यह आम लोगों में फैला।
स्रोत
यह पन्ना किन स्रोतों से मिलाकर लिखा गया
- Mawlid, Britannica Kids (students)बारह रबीउल अव्वल, जन्म और वफ़ात का दिन, फ़ातिमी मौलिद, इरबिल, विरोध
- Mawlid al-Nabi, Encyclopaedia Britannicaपैग़म्बर की ज़िंदगी पर कविताएँ, बिदअत का मत, वहाबी विरोध
- Mawlid, Encyclopaedia Britannicaसूफ़ियों के साथ फैलाव, भदोही के जुलूस की तस्वीर
- Milad un-Nabi in India, Time and Dateशिया और सुन्नी तारीख़ें, हरे झंडे, नात, हज़रतबल, क़दम ए रसूल पर संदल
- Eid Milad in India, Wegoहैदराबाद और मुंबई के जुलूस, मीनारा मस्जिद, हरे रिबन, शीर ख़ुरमा, सेवइयाँ
- Celebrating Milad un Nabi, National Heraldफ़ातिहा, बताशे, गुलाबजल, हरे झंडे, सलफ़ी और देवबंदी मत
- Biryani, prayers mark Eid Milad, Deccan Heraldबेंगलुरु के जुलूस, महफ़िलें, बिरयानी
तिथि, नक्षत्र और समय: स्विस एफ़ेमेरिस से, लाहिड़ी अयनांश, नई दिल्ली। त्योहारों की तारीख़ें भारत सरकार की 2027 की छुट्टियों की सूची और प्रचलित पंचांगों से मिलाई गई हैं।